Skip to main content

Posts

Showing posts with the label कहानी

सद्भावना वाली घण्टी

रेट में छिपा कुआँ

रेट में छिपा कुआँ                  एक दूर-दराज़ देश में, एक व्यापारी रहता था जो सामान खरीदने और बेचने के लिये अलग-अलग नगरों की यात्रायें करता था. उसके पास पाँच सौ बैल-गाड़ियाँ थीं जिन पर वह अपना सामान और अपने बैलों और चालकों के लिए पानी और लकड़ियाँ लाद लेता था. एक मार्गदर्शक सबसे आगे-आगे चलता था. और व्यापारी का बेटा, जो दुनिया देखने को बहत उत्सुक था, मार्गदर्शक के साथ उसकी गाड़ी में यात्रा करता था. व्यापारी स्वयं सबसे अंतिम गाड़ी में आता था.            पूर्व से पश्चिम की ओर यात्रायें करते हए, व्यापारी को एक विशाल रेगिस्तान पार करना पड़ता था. वहाँ की रेत इतनी महीन थी कि वह लड़के के हाथ की मट्ठी से भी फिसल जाती थी और इतनी गहरी थी कि बैलों के खर हर कदम पर रेत के भीतर धंस जाते थे. रेत के उस सागर में सारे पथ-मार्ग मिट जाते थे और कोई रास्ता दिखाई न देता था. उस रेगिस्तान को पार करना बहत कठिन होता था.           हर दिन सूर्य उदय के बाद रेत गर्म होने लगती थी और देखते ही देखते चूल्हे समान तपने ...