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Tuesday, April 21, 2020

परिकल्पनाओं का निर्माण Making of Hypothesis

परिकल्पनाओं का निर्माण Making of Hypothesis 
अनुसन्धान के दूसरे चरण में परिकल्पनाओं का निर्माण किया जाता है । यह शोध के विकास का उद्देश्यपूर्ण आधार है । परिकल्पना अनुसन्धान समस्या से सम्बन्धित समस्त सम्भावित समाधानों पर विचार करता है ।
परिभाषा 
  • गुडे एवं हाट्ट के अनुसार , “ परिकल्पना भविष्योन्मुखी ( Future Oriented ) होती है तथा यह एक तार्किक कथन है जिसकी सत्यता का परीक्षण किया जा सकता है। " 
  • करलिंगर के अनुसार , “ परिकल्पना दो या दो से अधिक चरों के मध्य सम्बन्धों का कथन है । 
  • सामान्य शब्दों में परिकल्पना एक तार्किक कथन, वाक्य, पूर्ण विचार या पूर्वधारणा है जिसे शोधकर्ता विषयवस्तु की प्रकृति के आधार पर पूर्व निर्मित कर लेता है एवं जिसकी सत्यता की जाँच वह शोध के समय करता है । 
परिकल्पना की विशेषताएँ 
गुडे एवं हाट्ट ने अपनी पुस्तक ' मेथड्स इन सोशल रिसर्च ' में परिकल्पना की निम्नलिखित विशेषताओं का वर्णन किया है
  • स्पष्टता 
  • अनुभव योग्य सिद्धान्त 
  • विशिष्टता 
  • उपलब्ध प्रविधियों से सम्बन्ध 
  • सिद्धान्तों से सम्बन्ध स्थापित करना 
  • वैज्ञानिक एवं वस्तुनिष्ठता 

परिकल्पना की आवश्यक शर्तें  
अनुसन्धान में परिकल्पना की निम्न शर्तें शामिल हैं
  • इसे तथ्यात्मक होने के साथ-साथ प्राकृतिक नियमों के अनुरूप होना चाहिए । 
  • परिकल्पना को निगमनात्मक चिन्तन ( Deductive Contemplation ) पर आधारित होना चाहिए । 
  • परिकल्पना में शाब्दिक स्पष्टता तथा सरलता होनी चाहिए । 
  • यह सिद्धान्तों तथ्यों, नियमों एवं अवधारणाओं से मुक्त होनी चाहिए । 
  • परिकल्पना को मितव्ययी होना चाहिए तथा पुष्टि हेतु प्रविधियों की उपलब्धता भी होनी चाहिए ।
परिकल्पना की प्रकृति 
  • परिकल्पना में मौजूद सभी सन्दर्भ बिन्दु क्रियात्मक, प्रत्यात्मक तथा घोषणात्मक प्रकृति के होने चाहिए । 
  • परीक्षा के योग्य होनी चाहिए । 
  • परिकल्पना की प्रकृति ऐसी हो कि वह वैज्ञानिक अनुसन्धान को बढ़ावा देने में सहायक हो । 
  • सभी शोध प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर देने में सक्षम हो 
परिकल्पना का महत्त्व 
  • परिकल्पना तथ्यों की सार्थकता का निर्धारण करती है । 
  • परिकल्पना समस्या एवं समाधान के बीच कड़ी का काम कर समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है । 
  • परिकल्पना समस्या के क्षेत्र का निर्धारण करती है । 
  • परिकल्पना प्रदत्तों के संकलन का आधार प्रस्तुत कर नवीन अनुसन्धानों का मार्ग प्रशस्त करती है । 
  • यह अनुसन्धान की सम्पूर्ण कार्य रेखा को बताती है तथा समुचित एवं प्रभावी उपकरणों के चयन में सहायक होती है ।
परिकल्पना के प्रकार 
परिकल्पनाओं को मुख्यत : तीन प्रकारों में विभाजित किया गया है ।
1 , शोध परिकल्पना Research Hypothesis
II . शून्य परिकल्पना Null Hypothesis
III . सांख्यिकीय परिकल्पना Statistical Hypothesis
1 , शोध परिकल्पना Research Hypothesis 
यह परिकल्पना ' करके सीखने के सिद्धान्त पर आधारित है, इसलिए इसे ' कार्यात्मक परिकल्पना ' के रूप में भी जाना जाता है ।
इसके भी दो प्रकार हैं
दिशात्मक परिकल्पना (Directional Hypothesis)
अदिशात्मक परिकल्पना (Non - Directional Hypothesis)
II . शून्य परिकल्पना Null Hypothesis 
इस परिकल्पना को शून्य या अप्रमाणित या अशुद्ध परिकल्पना भी कहते हैं ।
यह नकारात्मक परिकल्पना के रूप में भी जानी जाती है, क्योकि यह मानकर चलता है कि दो चरों के बीच कोई सम्बन्ध नहीं है अर्थात् दो समूहों में किसी विशेष चर के आधार पर कोई अन्तर नहीं है ।
इस परिकल्पना का उपयोग केवल सांख्यिकी की सार्थकता के परीक्षण के लिए किया जाता है ।
III . सांख्यिकीय परिकल्पना Statistical Hypothesis 
जब शोध परिकल्पना या शून्य परिकल्पना को सांख्यिकीय पदों में प्रदर्शित किया जाता है , तो उस विधि को सांख्यिकीय परिकल्पना कहा जाता है ।
इसमें पदों को व्यक्त करने के लिए विशेष संकेतों का प्रयोग किया जाता है ; जैसे - H , H , , X , X , आदि ।

Saturday, April 18, 2020

समस्या का चयन Identify the Problem

समस्या का चयन Identify the Problem
अनुसन्धान के पहले चरण में सर्वप्रथम समस्या का चयन किया जाता है । जितनी जागरूकता, सतर्कता एवं जिज्ञासा के साथ समस्या का चयन किया जाता है, शोध समस्या का चयन उतने ही अच्छे ढंग से होता है ।
अनुसन्धान की समस्या का चयन करते समय निम्नलिखित बातें ध्यान रखनी चाहिए
अनुसन्धानकर्ता की रुचि शोध परियोजना में अवश्य होनी चाहिए ।
अवधारणाओं के सूचक, विधि तथा संकेतक आदि सभी पूर्णरूप से स्पष्ट होने चाहिए ।
शोधकर्ता को विषय की प्रासंगिकता का ध्यान रखनी चाहिए ।
शोध उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए ।
अनुसन्धानकर्ता को शोध कार्य के विषय में सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिए ।
शोध के विषय को अन्तिम रूप देने के लिए अनुसन्धानकर्ता को उससे सम्बन्धित सभी प्रकार के डाटा की उपलब्धता सुनिश्चित कर लेनी चाहिए ।
अनुसन्धान समस्या के निरूपण से पूर्व उनके नैतिक मुद्दों और उनके समाधान को पहले ही सोच लेना चाहिए ।
समस्या के प्रकार
1- सैद्धान्तिक समस्या
2- व्यावहारिक समस्या
3- सर्वेक्षण सम्बन्धी समस्याएँ
4- सह-सम्बन्धात्मक समस्याएँ
5- प्रायोगिक समस्याएँ
समस्या की विशेषताएँ
1- समस्याएँ पूर्णतः स्पष्ट एवं मूर्त होनी चाहिए।
2- समस्याएँ ऐसी होनी चाहिए जिसका समाधान किया जा सके ।
3- समस्या को नवीन होना चाहिए।
4- समस्या को अनुसन्धानकर्ता के लिए रुचिकर होंआ चाहिए।
5- समस्या परिकल्पनाओं पर आधारित होनी चाहिए।
6- समस्या व्यावहारिक रूप से उपयोगी होनी चाहिए ।
7- समस्या समाधान में अत्यधिक धन , समय एवं परिश्रम का अपव्यय न हो इसका ध्यान रखना चाहिए।
8- समस्या समाज के लिए उपयोगी होनी चाहिए।

Thursday, April 9, 2020

शोध के चरण या सोपान Steps of Research

शोध के चरण या सोपान Steps of Research
अनुसन्धान एक क्रमिक प्रक्रिया है , जिसमें प्रत्येक प्रकार के अनसन्धान को कुछ विशिष्ट पदों के अन्तर्गत क्रमानुसार पूर्ण किया जाता है । यह एक वैज्ञानिक विधि है , जिसमें अनुसन्धानकर्ता किसी समस्या के समाधान के लिए तार्किक रूप से प्रयोग करता है ।
सामान्यत : अनुसन्धान या शोध के आठ चरण निर्धारित किए गए हैं-
1- समस्या का चयन ( Identify the Problem )
2- परिकल्पनाओं का निर्माण ( Making of Hypothesis )
3- शोध प्रारूप या शोध अभिकल्प का विकास ( Development of Research Design )
4- न्यायदर्श या प्रतिदर्श चयन ( Selecting Samples )
5- अनुसन्धान प्रस्ताव लेखन ( Writing a Research Proposal )
6- प्रदत्तों का एकत्रीकरण ( Collection of Data )
7- प्रदत्तों का संस्करण और विश्लेषण ( Processing and Analysis Data )
8- अनुसन्धान रिपोर्ट लेखन ( Writing a Research Report )
समस्या का चयन Identify the Problem 
अनुसन्धान के पहले चरण में सर्वप्रथम समस्या घटना , व्यवहार या प्रश्न का चयन किया जाता है और जितनी जागरूकता , सतर्कता , जिज्ञासा के साथ समस्या का चयन किया जाता है , शोध समस्या का चयन उतने ही अच्छे ढंग से होता है ।
परिकल्पनाओं का निर्माण Making of Hypothesis
अनुसन्धान के दूसरे चरण में सभी समस्याओं की पहचान के बाद उससे सम्बन्धित परिकल्पनाओं का निर्माण किया जाता है । यह शोध के विकास का उद्देश्यपूर्ण आधार है ।
शोध प्रारूप या शोध अभिकल्प का विकास Development of Research Design
शोध अभिकल्प एक प्रश्न का उत्तर जानने , परिस्थिति का वर्णन करने या परिकल्पना के निरीक्षण से सम्बन्धित होता है , जो योजनानुसार कार्य करके सम्पूर्ण अनुसन्धान पर नियन्त्रण करता है ।
न्यायदर्श या प्रतिचयन Selecting Samples
मिडेड पार्टेन के अनुसार , “ समग्र में से निश्चित संख्या में व्यक्ति , घटना अथवा निरीक्षणों को पृथक् करने की प्रक्रिया एवं पद्धति के अध्ययन के लिए सम्पूर्ण समूह में से एक अंश का चयन करना ही न्यायदर्श / प्रतिदर्श कहलाता है । " वस्तुत : जनसंख्या की समस्त इकाइयों में से अध्ययन के लिए कुछ निश्चित इकाइयों की एक निश्चित विधि के चयन को न्यायदर्श / प्रतिदर्श / प्रतिचयन कहा जाता है ।
अनुसन्धान प्रस्ताव लेखन Writing a Research Proposal
किसी भी अनुसन्धान परियोजना को मानने या स्वीकार करने से पहले उसका प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए , यह अवधारणा कई संस्थान अनिवार्य कर देते हैं । इसके द्वारा शोध परियोजना का मूल्यांकन करने का आधार भी प्राप्त हो जाता है । यह तीन से सात पृष्ठों का एक दस्तावेज ( Document ) होता है जो शोधकर्ता द्वारा लिखा जाता है । यह दस्तावेज सम्पूर्ण अनुसन्धान प्रक्रिया की रूपरेखा एवं विस्तृत विवरण होता है
प्रदत्तों का एकत्रीकरण Collecting Data
शोधकर्ता जाँच की प्रकृति , उसका क्षेत्र , उद्देश्य , वित्तीय लागत , समय की उपलब्धता इत्यादि को देखकर प्रदत्त एकत्रित करने की विधि का चयन करता है । प्राथमिक प्रदत्त सर्वेक्षण या प्रयोग के द्वारा एकत्र किए जाते हैं । यदि शोधकर्ता किसी प्रयोग को आयोजित करता है , तो वह उसके लिए परिमाणात्मक मापन या प्रदत्त का चयन करता है एवं उन प्रदत्तों का परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए विश्लेषण किया जाता है ।
प्रदत्तों का प्रसंस्करण एवं विश्लेषण Processing and Analysing Data
प्रदत्त एकत्रित करने के बाद अनुसन्धान प्रक्रिया के अगले चरण में प्रदत्तों । का विश्लेषण किया जाता है । प्रदत्तों के विश्लेषण के लिए उन्हें कुछ प्रबन्धनीय समूहों या तालिका में संघटित किया जाना चाहिए और ऐसा प्रदत्तों का प्रासंगिक एवं उद्देश्यपूर्ण श्रेणियों में वर्गीकरण करके ही किया जा सकता है
शोध / अनुसन्धान रिपोर्ट लेखन Writing a Research Report
अनुसन्धान का समापन होने के पश्चात् शोध रिपोर्ट बनाई जाती है ।

Thursday, March 5, 2020

शोध के उपागम Research Approach

शोध के उपागम
समाजशास्त्र के शोधकर्ताओं के मध्य शोध के दो प्रमुख उपागम है -
  1. प्रत्यक्षवाद और 
  2. उत्तर प्रत्यक्षवाद 
प्रत्यक्षवाद प्रत्यक्षवाद ( Positivism ) 
प्रत्यक्षवाद प्रत्यक्षवाद की वैज्ञानिक व्याख्या सर्वप्रथम फ्रांसीसी विचारक ऑगस्ट कॉम्टे ने की थी , इसलिए कॉम्टे को ' प्रत्यक्षवाद का जनक ' कहा जाता है । कॉम्टे ने प्रत्यक्षवाद की व्याख्या अपनी रचनाओं Course of Positive Philosophy' ( 1842 ) तथा The System of Positive Polity'( 18510 में की है । कॉम्टे का प्रत्यक्षवाद विज्ञान पर आधारित है। कॉस्टे के अनुसार, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड अपरिवर्तनीय प्राकृतिक नियमों द्वारा व्यवस्थित व निर्देशित होता है । अत : इसे केवल विज्ञान की विधियों द्वारा समझा जा सकता है , न कि धार्मिक या तात्विक आधारों पर । इस आधार पर कहा जा सकता है कि निरीक्षण , परीक्षण , प्रयोग और वर्गीकरण पर आधारित वैज्ञानिक विधियों द्वारा सब कुछ समझना और उससे ज्ञान प्राप्त करना ही प्रत्यक्षवाद है ।
कॉम्टे के अनुसार प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण के चरण निम्नलिखित है-
  • सर्वप्रथम अध्ययन - विषय को चुनते हैं 
  • अवलोकन या निरीक्षण द्वारा उस विषय से सम्बन्धित प्रत्यक्ष होने वाले तथ्यों को एकत्रित करते हैं 
  • इसके पश्चात् इन तथ्यों का विश्लेषण करके सामान्य विशेषताओं के आधार पर इनका वर्गीकरण किया जाता है।  
  • तत्पश्चात् विषय से सम्बन्धित कोई निष्कर्ष निकालते हैं।  
प्रत्यक्षवाद की प्रमुख विशेषताएँ / मान्यताएँ 
  • प्रत्यक्षवाद अथवा वैज्ञानिक पद्धति की प्रमुख विशेषताएँ / मान्यताएँ निम्नलिखित हैं-  
  • प्रत्यक्षवाद का लक्ष्य केवल उन घटनाओं का वर्णन करना है, जिसे हम प्रत्यक्ष रूप से देख ( अनुभव ) या निरीक्षण कर सकते हैं । इसके अन्तर्गत किसी भी स्तर पर काल्पनिक चिन्तन का सहारा नहीं लिया जाता है ।
  • प्रत्यक्षवाद एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है , जिसका लक्ष्य सत्य को उजागर करना है । इसमें मात्रात्मक विधि पर बल दिया जाता है । 
  • प्राकृतिक घटनाओं की तरह सामाजिक घटनाएँ भी कुछ नियमों के आधार पर घटित होती हैं । अत : इन नियमों को वैज्ञानिक पद्धति द्वारा खोजा जा सकता है । 
  • प्रत्यक्षवाद वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ - साथ वैज्ञानिक कार्यप्रणाली से भी सम्बन्धित होता है । 
  • प्रत्यक्षवाद अपने को धार्मिक व दार्शनिक विचारों से दूर रखता है । 
  • प्रत्यक्षवाद एक उपयोगितावादी विज्ञान है और उस रूप में विश्वास करता है कि प्रत्यक्षवाद के माध्यम से प्राप्त ज्ञान को सामाजिक पुनर्निर्माण के साधन के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है । 
उत्तर - प्रत्यक्षवाद ( Post - Positivism ) 
उत्तर - प्रत्यक्षवाद यह तर्क देता है कि तार्किक तर्क के साथ आनुभविक टिप्पणियों को जोड़कर एक घटना के बारे में उचित अनुमान लगाया जा सकता है । उत्तर - प्रत्यक्षवाद मानता है कि वैज्ञानिकों के सोचने और काम करने के तरीके और दैनिक जीवन में हमारे सोचने के तरीके अलग - अलग नहीं हैं । वैज्ञानिक तर्क और सामान्य ज्ञान तर्क अनिवार्य रूप से एक ही प्रक्रिया है तथा दोनों के बीच कोई अन्तर नहीं है , केवल अंश में ही अन्तर है ।
उत्तर - प्रत्यक्षवाद के अनुसार सभी अवलोकन अस्थिर हैं और इसमें त्रुटि है और यह सभी सिद्धान्त पुन : प्रयोज्य ( Usable ) हैं । उत्तर - प्रत्यक्षवाद का मानना है कि विज्ञान का लक्ष्य वास्तविकता के बारे में सही तरीके से लक्ष्य प्राप्त करना है , फिर हम लक्ष्य को प्राप्त कर सकें या नहीं कर सकें ।
उत्तर - प्रत्यक्षवाद महत्त्वपूर्ण तीन विकासों पर बल देता है , जो निम्नलिखित हैं
1 . मात्रात्मक और गुणात्मक रणनीति का प्रयोग
2 . प्रश्न शोध पर आधारित रणनीति की इच्छा
3 . इसके पैटर्न का तरीका मात्रात्मक बनाम गुणात्मक होता है ।

Wednesday, March 4, 2020

अनुसन्धान का महत्व The importance of research


अनुसन्धान का महत्व
वर्तमान शैक्षणिक व्यवस्था में अनुसन्धान का महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, क्योंकि प्रत्येक शिक्षण संस्थान एवं पाठ्यक्रम में शोध को अनिवार्य रूप से शामिल कर दिया गया है।
इसी आधार पर शोध के निम्नलिखित महत्वों की पहचान की गई है-
  • अनुसन्धान ज्ञान को विस्तारित तथा परिमार्जित करता है। 
  • समाज में नए ज्ञान एवं विचारों का प्रसार करता है। 
  • अनुसन्धान किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होता है।
  • अनुसन्धान व्यक्ति के बौद्धिक चिन्तन एवं विकास को गति प्रदान करता है। 
  • अनुसन्धान किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह को समाप्त करने में सहायक सिद्ध होता है।  
  • अनुसन्धान किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु वैज्ञानिक तरीकों का प्रतिपादन करता है। 
  • अनुसन्धान का महत्व किसी भी समस्या का समाधान प्रस्तुत करने में प्रयुक्त होता है। 

Tuesday, January 28, 2020

शोध के प्रकार [ Types of Research ]

शोध के प्रकार
अनुसन्धान किसी भी समस्या के समाधान हेतु अपनाई गई क्रियाविधि होती है। अनुसन्धान की इस क्रियाविधि का निर्धारण पाँच प्रकार से किया जाता है-
  1. परिणाम के आधार पर 
  2. तर्क के आधार पर 
  3. जाँच के आधार पर 
  4. अवधारणा के आधार पर 
  5. उद्देश्यों के आधार पर 
1. परिणाम के आधार पर 
परिणाम के आधार पर अनुसन्धान दो प्रकार का होता है-
  • मौलिक या प्राथमिक अनुसन्धान 
  • व्यवहारिक अनुसन्धान 
मौलिक या प्राथमिक अनुसन्धान - इसके अन्तर्गत ज्ञान के वर्तमान संग्रह में वृद्धि की जाती है तथा इसके द्वारा सिद्धान्त एवं अवधारणाएं विकसित की जाती है। अकादमिक दृष्टि से यह अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
व्यवहारिक अनुसन्धान  - इस अनुसन्धान के द्वारा किसी समस्या विशेष का समाधान करने वाले तत्व शामिल होते है। यदि अनुसन्धानकर्ता तथ्यों के आधार पर किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे, तो वह व्यवहारिक अनुसन्धान कहलाता है।
2. तर्क के आधार पर 
तर्क के आधार पर अनुसन्धान को दो वर्गों में बाँटा गया है-
  • आगमन तर्क 
  • निगमन तर्क 
आगमन तर्क - यह एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें हम विभिन्न अनुभवों के सामान्यीकरण द्वारा वांछित ज्ञान को प्राप्त करते है
निगमन तर्क - यह ज्ञान प्राप्ति हेतु एक ऐसी तर्क प्रणाली है, जिसमें सामान्य से विशेष की और अनुसन्धान किया जाता है।
3. जाँच के आधार पर 
जाँच के आधार पर अनुसन्धान का वर्गीकरण दो प्रकार से किया जाता है-
  • संरचित दृष्टिकोण 
  • असंरचित दृष्टिकोण 
संरचित दृष्टिकोण  - यह दृष्टिकोण निगमन विधि के समान होता है।
असंरचित दृष्टिकोण - इस दृष्टिकोण का आगमन विधि तथा गुणात्मक अनुसन्धान से समानता होती है।
4. उद्देश्यों के आधार पर  
उद्देश्यों के आधार पर अनुसन्धान पाँच प्रकार का होता है-
  • वर्णनात्मक अनुसन्धान 
  • सहसम्बन्ध अनुसन्धान 
  • व्याख्यात्मक अनुसन्धान 
  • समन्वेशी अनुसन्धान 
  • प्रायोगिक अनुसन्धान 
वर्णनात्मक अनुसन्धान  - इस अनुसन्धान द्वारा किसी समस्या की ‘स्थिति का वर्णन’ किया जाता है, जिसके अन्तर्गत ‘क्या है’? या ‘क्या था’? जैसे प्रश्नों का उत्तर दिया जाता है। इस अनुसन्धान में अनुसन्धानकर्ता का चरों पर कोई नियन्त्रण नहीं होता। इसमें सर्वेक्षण और पर्याप्त व्याख्या के साथ-साथ तथ्यों की खोज को सम्मिलित किया जाता है। वर्णनात्मक अनुसन्धान के तीन प्रारूप होते है-
  1. घटनोत्तर अनुसन्धान 
  2. ऐतिहासिक अनुसन्धान 
  3. विश्लेषणात्मक अनुसन्धान 
सहसम्बन्ध अनुसन्धान - इस अनुसन्धान के अन्तर्गत किसी स्थिति के दो पक्षों के बीच सम्बन्धों का ज्ञान होता है। इसके द्वारा निश्चित परिस्थितियों में प्रमुख कारकों की पहचान की जाती है।
व्याख्यात्मक अनुसन्धान - इस प्रकार के अनुसन्धान के अन्तर्गत किसी घटना के दो पक्षों के बीच ‘क्यों’ और ‘कैसे’ आदि प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया जाता है।
समन्वेशी अनुसन्धान - इस प्रकार के अनुसन्धान को मुख्य अनुसन्धान का ‘लघुरूप’ भी कहा जाता है।
इसके द्वारा किसी घटना के दो या दो से अधिक पहलुओं के बीच सम्बन्ध स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है। इस अनुसन्धान का उद्देश्य तथ्यों को परिभाषित करना, समस्याओं को स्पष्ट करना, पृष्टभूमि की जानकारी प्राप्त करना आदि है।
प्रायोगिक अनुसन्धान - इस अनुसन्धान द्वारा कारण और प्रभाव सम्बन्धों  को उजागर किया जाता है।
5. अवधारणा के आधार पर   
अवधारणा के पर अनुसन्धान को दो वर्गों ने बाँटा गया है-
  • वैचारिक अनुसन्धान 
  • अनुभवसिद्ध अनुसन्धान 
वैचारिक अनुसन्धान - यह अनुसन्धान दार्शनिकों  एवं विचारकों द्वारा नई अवधारणाओं को विकसित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
अनुभवसिद्ध अनुसन्धान - यह अनुसन्धान अवलोकन तथा अनुभव आधारित होता है।


Thursday, December 19, 2019

शोध के उद्देश्य Research Objectives

शोध के उद्देश्य Research Objectives
किसी भी प्रकार का शोध किसी न किसी उद्देश्य का अनुगामी होता है। अतः यह बात स्पष्ट है कि अनुसन्धान उद्देश्यविहीन हो ही नहीं सकता। इस प्रकार अनुसन्धान के विषय में कहा जा सकता है कि,
  • अनुसन्धान नवीन तथ्यों की खोज करता है। 
  • पुराने तथ्यों की जाँच तथा मूल्यांकन करता है। 
  • किसी विशेष स्थिति का सही निर्णय कर समस्याओं का समाधान करता है। 
सामान्यतः अनुसन्धान के उद्देश्यों को चार भागों में बाँटा गया है-
  1. सैद्धान्तिक उद्देश्य 
  2. सत्यात्मक उद्देश्य 
  3. तथ्यात्मक उद्देश्य 
  4. व्यवहारिक उद्देश्य 
1. सैद्धान्तिक उद्देश्य
सैद्धान्तिक उद्देश्यों के अन्तर्गत वैज्ञानिक विधियों को शामिल किया जाता है।
वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से नवीन सिद्धान्तों एवं नियमों का प्रतिपादन किया जाता है।
सैद्धान्तिक उदेश्य पूर्ति के लिए किए गए कार्य व्याख्यात्मक प्रकृति के होते है।
2.   सत्यात्मक उद्देश्य
सत्यात्मक उद्देश्य दार्शनिक प्रकृति के होते है, जिनमें दर्शन के आधार पर अन्तिम परिणाम की प्राप्ति की जाती है।
3.   तथ्यात्मक उद्देश्य
तथ्यात्मक उद्देश्य वर्णात्मक प्रकृति के होते है, क्योंकि इनकी प्राप्ति विश्लेषण आधारित होती है।
इसमें ऐतिहासिक अनुसन्धानों का सहारा लिया जाता है।
4.   व्यवहारिक उद्देश्य
व्यवहारिक उद्देश्यों को विकसात्मक अनुसन्धान की श्रेणी में रखा जाता है तथा इसकी प्राप्ति हेतु विभिन्न क्षेत्रों में क्रियात्मक अनुसन्धान का सहारा लिया जाता है।
इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए केवल उपयोगिता को महत्व दिया जाता है।

Tuesday, December 17, 2019

शोध की प्रकृति Nature of Research

शोध की प्रकृति Nature of Research
अनुसन्धान या शोध वह क्रमबद्ध वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग के द्वारा वर्तमान ज्ञान का परिमार्जन किया जाता है। शोध का क्षेत्र बहुत व्यापक है फिर भी शोध की प्रकृति को निम्नलिखित आधार बिन्दुओं के द्वारा समझा जा सकता है-
  • अनुसन्धान अपनी प्रकृति में वस्तुनिष्ठ और तथ्यात्मक होता है। 
  • शोध मूलतः वैज्ञानिक प्रकृति का होता है, जिसमें प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण कर निष्कर्ष प्राप्त किया जाता है। 
  • इसकी प्रकृति बौद्धिकता से युक्त एवं तार्किक होती है, जो पुरानी त्रुटियों को शुद्ध कर नए-नए ज्ञान एवं सिद्धान्तों को स्थापित करती है। 
  • अनुसन्धान पूर्वाग्रहों से मुक्त और व्यक्तिपरक होता है। 
  • अनुसन्धान अपनी प्रकृति में नवीनता को प्रदर्शित करता है, क्योंकि इसके द्वारा प्राचीन तथ्य, सिद्धान्त, विधि आदि में परिवर्तन कर नए तथ्यों, सिद्धान्तों और विधियों की खोज होती है। 
  • अनुसन्धान की प्रकृति विश्लेषणात्मक होती है, क्योंकि इसमें सांख्यिकी की विधियों एवं आँकड़ों का प्रयोग कर निष्कर्ष निकाला जाता है। 

शोध की विशेषताएं Characteristics of Research

शोध की विशेषताएं Characteristics of Research
अनुसन्धान वैज्ञानिक विधि की तरह कार्य करता है, जो पूर्वाग्रहों से मुक्त और व्यक्तिपरक होता है।
इस आधार पर अनुसन्धान की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है-
  1. वस्तुनिष्ठता 
  2. निश्चयात्मकता 
  3. विश्वसनीयता 
  4. वैधता 
  5. कार्यकारण सम्बन्ध की महत्ता 
  6. चक्रीय प्रक्रिया 
  7. तार्किकता 
  8. अनुभवात्मक आधारित संकल्पना 

शोध का अर्थ एवं परिभाषाएं Meaning of Research

शोध का अर्थ एवं परिभाषाएं Meaning of Research
शोध अथवा अनुसंधान का सामान्य अर्थ “खोज करना” है।
यह खोज किसी उद्देश्य को आधार बनाकर क्रमबद्ध, व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीकों से की जाती है।
शोध को इंग्लिश में Research कहते है, जिसका सामान्य अर्थ,-        “पुनः खोज करना” है।
शोध किसी न किसी समस्या के वैज्ञानिक या तार्किक समाधान के रूप में सामने आता है, क्योंकि समाधान के पश्चात उस समस्या या खोज से जुड़े कुछ नवीन सिद्धांत या अवधारणाएं सामने आती है।

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...