जब कोई वस्तु किसी ऐसे त्वरण के अधीन गतिमान है जो समय के साथ लगातार बदल रहा हो तो वस्तु की इस प्रकार की गति परिवर्ती त्वरण के अधीन गति कहते है।
इसक प्रकार की गति के तीन फलन होते है-
1- समय का फलन
2- दूरी का फलन
3- वेग का फलन
1- समय का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान समय के साथ दिया जाता है तो इस दशा में गति की प्रथम समीकरण से समय का फलन ज्ञात करते है। इसे a = f(t) से प्रदर्शित करते है। अतः गति की प्रथम समीकरण से-
3- दूरी का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान दूरी के साथ दिया जाता है तो इस दशा में गति की तृतीय समीकरण से दूरी का फलन प्राप्त करते है। इसे a = f(x) से प्रदर्शित करते है। अतः गति की तृतीय समीकरण से-
4- वेग का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान वेग के साथ दिया जाता है तो इस दशा में समय के साथ वेग परिवर्तन का फलन प्राप्त करते है। इसे a = f(v) से प्रदर्शित करते है। अतः
इसक प्रकार की गति के तीन फलन होते है-
1- समय का फलन
2- दूरी का फलन
3- वेग का फलन
1- समय का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान समय के साथ दिया जाता है तो इस दशा में गति की प्रथम समीकरण से समय का फलन ज्ञात करते है। इसे a = f(t) से प्रदर्शित करते है। अतः गति की प्रथम समीकरण से-
3- दूरी का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान दूरी के साथ दिया जाता है तो इस दशा में गति की तृतीय समीकरण से दूरी का फलन प्राप्त करते है। इसे a = f(x) से प्रदर्शित करते है। अतः गति की तृतीय समीकरण से-
4- वेग का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान वेग के साथ दिया जाता है तो इस दशा में समय के साथ वेग परिवर्तन का फलन प्राप्त करते है। इसे a = f(v) से प्रदर्शित करते है। अतः





















































