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Monday, May 18, 2020

प्रक्षेप्य पथ का समीकरण

माना एक प्रक्षेप्य को क्षैतिज से θ कोण पर u वेग से फेंका जाता है। वेग u को दो लम्बवत घटकों में वियोजित करने पर, वेग u का क्षैतिज घटक ucosθ तथा ऊर्ध्वाधर घटक usinθ होगा।

Sunday, May 17, 2020

प्रक्षेप्य गति के प्रकार

प्रक्षेप्य गति के प्रकार 
प्रक्षेप्य गति तीन प्रकार की होती है-
  1. 📁तिर्यक प्रक्षेप्य गति
  2. 📁क्षैतिज प्रक्षेप्य गति
  3. 📁नत समतल पर प्रक्षेप्य गति

क्षैतिज प्रक्षेप्य गति Horizontal Projectile Motion

जब कोई पिण्ड पृथ्वी तल से किसी ऊँचाई से किस क्षैतिज वेग से इस प्रकार फेंक जाता है कि पिण्ड का मार्ग परवलयाकार हो तो पिण्ड की यह गति क्षैतिज प्रक्षेप्य गति कहलाती है। जैसे – जेट विमान से गिराए गए गोले की गति।
क्षैतिज प्रक्षेप्य गति में, वेग का क्षैतिज घटक, गुरुत्वीय त्वरण तथा यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती है, तथा वस्तु क्षैतिज दिशा में समान समय अन्तराल में समान दूरी तय करती है।

Saturday, May 16, 2020

नत समतल पर प्रक्षेप्य गति Projectile Motion on an Inclined Plane

जब कोई पिण्ड किसी झुके तल पर किसी क्षैतिज वेग से इस प्रकार फेंक जाता है कि पिण्ड का मार्ग परवलयाकार हो तो पिण्ड की यह गति नत समतल पर प्रक्षेप्य गति कहलाती है। जैसे –किसी ढाल पर फेंके गए गोले की गति। जैसे उड़ते जहाज पर पृथ्वी तल से छोड़ी गई मिसाइल। 

तिर्यक प्रक्षेप्य गति Obliquely Projectile Motion

जब कोई पिण्ड पृथ्वी तल से इस प्रकार क्षैतिज से ऊपर की ओर किसी कोण पर इस प्रकार फेंक जाता है कि पिण्ड का मार्ग परवलयाकार हो तो पिण्ड की यह गति तिर्यक प्रक्षेप्य गति कहलाती है। जैसे – तोप के गोले की गति।
तिर्यक प्रक्षेप्य गति मेंवेग का क्षैतिज घटकगुरुत्वीय त्वरण तथा यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती हैजबकि चालवेग का ऊर्ध्वाधर घटकसंवेगगतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का मान परिवर्तित होता रहता है। ऊर्ध्वाधर वेग तथा गतिज ऊर्जा दोनों का मान प्रक्षेपण बिन्दु पर अधिकतम तथा उच्चतम बिन्दु पर शून्य होता है।

तिर्यक प्रक्षेप्य गति से सम्बन्धित बिन्दु:-

 

Friday, May 15, 2020

प्रक्षेप्य गति Projectile Motion

जब कोई पिण्ड पृथ्वी के क्षैतिज से ऊपर की ओर किसी कोण पर इस प्रकार फेंक जाता है कि पिण्ड का मार्ग परवलयाकार हो तो पिण्ड की यह गति प्रक्षेप्य गति कहलाती है। जैसे – तोप के गोले की गति।
प्रक्षेप्य गति की शर्ते 
1- वायु के कारण प्रतिरोध नगण्य हो।
2- पृथ्वी की वक्रता का प्रभाव नगण्य हो।
3- पृथ्वी की घूर्णन गति का प्रभाव नगण्य हो।
4- प्रक्षेप्य पथ के सभी बिंदुओं के लिए गुरुत्वीय त्वरण का परिमाण एवं दिशा नियत हो।
प्रक्षेप्य गति की विशेषताएं 
1- प्रक्षेप्य गति द्विविमीय गति है अतः इसकी दो भागों में विवेचना की जा सकती है। क्षैतिज गति तथा ऊर्ध्वाधर गति। ये दोनों गतियाँ एक दूसरे से स्वतंत्र होती हैं। यह गतियों की भौतिकीय अनिर्भरता का सिद्धान्त कहलाता है।
2- कण के वेग को दो परस्पर लम्बवत घटकों में वियोजित किया जा सकता है। क्षैतिज घटक तथा ऊर्ध्वाधर घटक।
3- सम्पूर्ण उड्डयन के दौरान क्षैतिज घटक नियत रहता है तथा ऊर्ध्वाधर घटक को गुरुत्वीय बल लगातार प्रभावित करता रहता है।
4- क्षैतिज गति नियत ( अत्वरित ) जबकि ऊर्ध्वाधर गति एकसमान रुप से त्वरित अथवा अवमन्दित गति होती है।

द्विविमीय गति Two dimensional Motion

जब कोई गतिमान वस्तु इस प्रकार गति करती है की समय के साथ उसकी स्थिति में परिवर्तन तीन निर्देशांकों में से किन्हीं दो अक्षों के सापेक्ष हो तो वस्तु की इस प्रकार की गति द्विविमीय गति कहलाती है। द्विविमीय गति दो प्रकार की होती है-
  1. 📁प्रक्षेप्य गति
  2. 📁वृत्तीय गति

परिवर्ती त्वरण के साथ गति Motion with Variable Acceleration

जब कोई वस्तु किसी ऐसे त्वरण के अधीन गतिमान है जो समय के साथ लगातार बदल रहा हो तो वस्तु की इस प्रकार की गति परिवर्ती त्वरण के अधीन गति कहते है।
इसक प्रकार की गति के तीन फलन होते है-
1- समय का फलन
2- दूरी का फलन
3- वेग का फलन 
1- समय का फलन 
जब परिवर्ती त्वरण का मान समय के साथ दिया जाता है तो इस दशा में गति की प्रथम समीकरण से समय का फलन ज्ञात करते है। इसे a = f(t) से प्रदर्शित करते है। अतः गति की प्रथम समीकरण से-
3- दूरी का फलन 
जब परिवर्ती त्वरण का मान दूरी के साथ दिया जाता है तो इस दशा में गति की तृतीय समीकरण से दूरी का फलन प्राप्त करते है। इसे a = f(x) से प्रदर्शित करते है। अतः गति की तृतीय समीकरण से-
4- वेग का फलन 
जब परिवर्ती त्वरण का मान वेग के साथ दिया जाता है तो इस दशा में समय के साथ वेग परिवर्तन का फलन प्राप्त करते है। इसे a = f(v) से प्रदर्शित करते है। अतः 

Thursday, May 14, 2020

गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity

पृथ्वी का वस्तुओं पर आकर्षण बल, गुरुत्व बल कहलाता है। इस गुरुत्व बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते है। इसे g से प्रदर्शित करते है।
वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में सभी वस्तुएं पृथ्वी सतह पर समान त्वरण से गिरती है। किसी ऊँचाई h < < R से पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु की गति, मुक्त गति कहलाती है।
गुरुत्व के अधीन गति, एकविमीय गति का आदर्श उदाहरण है जिसमें वायु प्रतिरोध तथा ऊँचाई के साथ त्वरण में सूक्ष्म परिवर्तन को नगण्य मान लेते है।
गुरुत्व के अधीन गति को हम तीन प्रकार से समझ सकते है-
1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए।
2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए।
3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए।
1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए-
माना कोई वस्तु h ऊँचाई से प्रारम्भिक वेग शून्य से छोड़ी जाती है,
तब इस स्थिति में,
उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है कि मुक्त रूप से गिरते किसी कण द्वारा क्रमागत सेकन्डों में चली गई दूरियाँ क्रमशः 1:3:5: …. अर्थात विषम पूर्णकों के अनुपात में होगी। 
प्रारम्भिक वेग शून्य से गिराई गई किसी वस्तु के लिए दूरी, वेग तथा त्वरण के ग्राफ निम्न प्राप्त होते है-
2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए
यदि कोई वस्तु किसी प्रारम्भिक वेग v से किसी ऊँचाई h से नीचे की ओर फेंकी जाती है तो गति की तीन समीकरणों गुरुत्व के अधीन नई समीकरण प्राप्त होगी जो निम्नलिखित है- 
3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए
यदि किसी वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर किसी प्रारम्भिक वेग से फेंका जाता है तो गुरुत्व अधीन गति की समीकरणों में +g के स्थान पर –g का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इस दशा में वस्तु पर त्वरण ऋणात्मक अर्थात वस्तु की गति के विपरीत नीचे की ओर कार्य करता है। अतः ऊर्ध्वाधर गति के लिए समीकरणें –
समय के साथ ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर गति के विस्थापन, वेग एवं त्वरण के ग्राफ- 
ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर गति के लिए महत्वपूर्ण बिन्दु  
1- गुरुत्व के अन्तर्गत वस्तु की गति वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती अतः वस्तु हल्की है या भारी इसका कोई प्रभाव वस्तु पर नहीं पड़ता। इसी कारण नगण्य बाह्य प्रतिरोध के दो भिन्न-भिन्न द्रव्यमान की वस्तु किसी ऊँचाई से गिरने पर वे एक साथ पृथ्वी पर गिरेगी। 
2- गुरुत्व के अधीन गति में ऊपर जाने में लगा समय सामन दूरी तक नीचे गिरने में लगे समय के बराबर होता है।
3- गुरुत्व के अधीन गति में वस्तु जिस वेग से ऊपर की ओर फेंकी जाती है वापिस लौटते समय प्रेक्षण बिन्दु पर वह पुनः वो ही वेग प्राप्त कर लेती है। 
4- यदि वायु आदि का प्रतिरोध माना जाए तो ऊपर जाने में लगा समय नीचे आने में लगे समय से सदैव कम होता है। 
इस स्थिति में-

Tuesday, May 12, 2020

गति के समीकरण Equation of Kinematics

किसी गतिमान वस्तु के लिए u, v, a, t तथा s में सम्बन्ध स्थापित करने वाले भौतिक सम्बन्ध गति के समीकरण कहलाते है।
जहाँ-
u = समय t = 0 पर कण का प्रारम्भिक वेग 
v = समय t पर कण का अन्तिम वेग
a = कण का त्वरण
s = समय t में कण द्वारा तय विस्थापन/दूरी
गति में सम्बन्ध स्थापित करने के लिए 2 स्थितियाँ होती है-
1- जब त्वरण शून्य हो
2- जब त्वरण कार्यकारी हो
जब त्वरण शून्य हो
जब किसी वस्तु पर त्वरण का परिमाण शून्य हो तो वस्तु नियत चाल से चलती है। यह एकदिशीय गति होती है। इस गति में विस्थापन का परिमाण सदैव तय की गई दूरी के बराबर होता है। इस दशा में
v = u तथा s = ut
जब त्वरण कार्यकारी हो
जब किसी वस्तु पर त्वरण कार्यकारी हो तो वस्तु जब नियत त्वरण से चलती है, तो गति की तीन समीकरण प्राप्त होती है-
यदि सभी को सदिश रूप में लिखे तो गति की तीन समीकरण इस प्रकार होगी -
यदि किसी गणना में कण का प्रारम्भिक वेग व अन्तिम वेग दिया गया हो तो उस स्थिति में कण द्वारा तय विस्थापन/दूरी  –
यदि किसी एकसमान त्वरण a से गतिमान कण द्वारा किसी अनुमानित समय nवें सेकण्ड में तय किया गया विस्थापन/दूरी -

Sunday, May 10, 2020

स्थिति-समय ग्राफ Position-Time Graph

गति के दौरान किसी कण के गति के घटक चर v, a, s समय के साथ बदलते रहते है, जिन्हे ग्राफ के द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। जब ग्राफ के द्वारा समय के साथ किसी गतिमान कण की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है तो इसे स्थिति-समय ग्राफ कहते है। स्थिति-समय ग्राफ में हम X-अक्ष पर समय t तथा Y-अक्ष पर कण की स्थिति y को दर्शाते है। जैसे की चित्र में दिखाया गया है-
माना किसी गतिमान कण के लिए स्थिति-समय ग्राफ AB है तब,
अतः स्पष्ट है कि स्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता कण के वेग को प्रदर्शित करती है। 
विभिन्न स्थिति-समय ग्राफ तथा उनकी व्याख्या 
जब θ = 0° अतः = 0
अर्थात समय अक्ष के समान्तर रेखा कण की विराम स्थिति को प्रदर्शित करती है। 
जब θ =90° अतः v = ∞
अर्थात समय अक्ष के लम्बवत रेखा यह प्रदर्शित करती है कि कण की स्थिति परिवर्तित हो रही है, परन्तु समय परिवर्तित नहीं हो रहा। इसका अर्थ है कि कण का वेग अनन्त है। व्यवहार में यह सम्भव नहीं है। 
जब θ = नियतांक अतः v = नियतांक ⟹ a = 0
अर्थात नियत ढाल की रेखा कण के एकसमान वेग को प्रदर्शित करती है। 
जब θ बढ़ रहा है अतः v बढ़ रहा है तथा a धनात्मक है 
अर्थात स्थिति अक्ष की ओर झुकने वाली रेखा कण के बढ़ते वेग को प्रदर्शित करती है। इसका अर्थ यह भी है कि कण त्वरित हो रहा है। 
जब θ घट रहा है अतः v घट रहा है तथा a ऋणात्मक है 
अर्थात समय अक्ष की ओर झुकने वाली रेखा कण के घटते वेग को प्रदर्शित करती है। इसका अर्थ यह भी है कि कण मंदित हो रहा है। 
जब θ नियत है परन्तु, > 90° अतः v नियत है लेकिन ऋणात्मक होगा।  
अर्थात ऋणात्मक ढाल की रेखा यह प्रदर्शित करती है कि कण निर्देश बिन्दु की और लौट रहा है। यह ऋणात्मक विस्थापन को प्रदर्शित करता है। 
विभिन्न ढालों के सरल रेखीय खण्ड यह प्रदर्शित करते है कि एक निश्चित समय अन्तराल के बाद कण का वेग परिवर्तित हो जाता है। 
यह ग्राफ यह प्रदर्शित करता है कि किसी एक क्षण पर कण की दो स्थितियाँ है जो कि सम्भव नहीं है। 
यह ग्राफ यह प्रदर्शित करता है कि कण प्रारम्भ में मूल अवस्था की ओर आता है तथा फिर यह मूल अवस्था से दूर जाता है 
दूरी तथा समय के बीच खिचा गया ग्राफ सदैव बढ़ता हुआ वक्र प्राप्त होता है यह कभी भी अपनी मूल अवस्था पर नहीं आ सकता क्योंकि समय के साथ दूरी कभी नहीं घटती। अतः इस प्रकार दूरी समय ग्राफ केवल बिन्दु A तक ही सत्य है। बिन्दु A के पश्चयात यह सत्य नहीं है। 

Saturday, May 9, 2020

त्वरण Acceleration

किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर उसका त्वरण कहलती है।
यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वेग परिवर्तन की दिशा होती है तथा इसका मात्रक मीटर/वर्ग सेकण्ड होता है। इसे a से प्रदर्शित करते है।
वेग की दिशा में परिवर्तन तीन प्रकार से होता है-
1- जब केवल वेग की दिशा परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण वेग के लम्बवत होता है। जैसे – एकसमान वृत्तीय गति।
2- जब केवल वेग का परिमाण परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण वेग के समान्तर अथवा प्रतिसमान्तर होता है। जैसे – गुरुत्व के अधीन गति।
3- जब वेग के परिमाण तथा दिशा दोनों परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण के दो घटक होते है, एक वेग के लम्बवत तथा दूसरा वेग के समान्तर या प्रतिसमान्तर होगा। जैसे – प्रक्षेप्य गति।
वेग में परिवर्तन के आधार पर त्वरण चार प्रकार का होता है-
1- एकसमान त्वरण
2- परिवर्ती त्वरण
3- औसत त्वरण
4- तात्क्षणिक त्वरण
1- एकसमान त्वरण 
यदि कण की गति के दौरान त्वरण का परिमाण व दिशा नियत रहे तो कण का त्वरण एकसमान कहलाता है। जैसे – पृथ्वी तल पर गिरते पिंड की गति में लगने वाला गुरुत्वीय त्वरण।
2- परिवर्ती त्वरण 
जब गति के दौरान कण के त्वरण का परिमाण अथवा दिशा अथवा दोनों परिवर्तित होते है, तो कण का त्वरण परिवर्ती अथवा आसमान त्वरण कहलाता है। जैसे-
1- सड़क पर दौड़ती गाड़ी की गति, जिसमे गाड़ी पर त्वरण का परिमाण कम और अधिक होता रहता है।
2- वृत्तीय पथ पर घूमते पिंड की गति जिसमे लगातार दिशा परिवर्तित होती रहती है।
3- टेढ़े-मेढ़े मार्ग पर दौड़ती गाड़ी की गति जिसमे गाड़ी की गति परिमाण व दिशा दोनों बदलते रहते है।
3- औसत त्वरण 
किसी गतिमान पिंड की किन्हीं दो अवस्थाओ के बीच में पिंड के वेग परिवर्तन और समय अन्तराल का अनुपात उन अवस्थाओं के बीच पिंड का औसत त्वरण कहलाता है। इसकी दिशा वेग सदिश में परिवर्तन की दिशा होती है।
4- तात्क्षणिक त्वरण 
किसी त्वरण से गतिमान कण का किसी सूक्ष्म समय अन्तराल का औसत त्वरण कण का तात्क्षणिक त्वरण कहलाता है। वास्तव में जब हम त्वरण की बात करते है तो यह तात्क्षणिक त्वरण ही होता है। गतिमान वस्तु के तात्क्षणिक वेग की दिशा तथा त्वरण की दिशा में कोई सम्बन्ध नहीं होता। 
त्वरण के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण 

Friday, May 8, 2020

चाल तथा वेग में तुलना

1- चाल एक अदिश राशि है जबकि औसत वेग सदिश राशि है। दोनों कें मात्रक तथा विमा समान है।
2- चाल तथा वेग उस समय अन्तराल पर निर्भर करता है, जिसमें यह परिभाषित होता है। दिए गए समय अन्तराल के लिए औसत वेग का सिर्फ एक ही मान होता जबकि औसत चाल के कई मान हो सकते है जो तय किए गए पथ पर निर्भर करते है।
3- यदि वस्तु गति के पश्चात अपनी प्रारम्भिक स्थिति में लौट आती है तो वस्तु का औसत वेग शून्य होगा परन्तु चाल कभी शून्य नहीं हो सकती।
4- गतिमान वस्तु के लिए औसत चाल कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती जबकि औसत वेग ऋणात्मक हो सकता है।
5- किसी गतिमान कण के लिए यह सम्भव हो सकता है कि उसकी तात्क्षणिक चाल नियत हो परन्तु तात्क्षणिक वेग परिवर्ती हो। जैसे – वृत्तीय मार्ग पर नियत चाल से गतिमान कण की गति।
6- तात्क्षणिक वेग का मान सदैव तात्क्षणिक चाल के बराबर होता है।
7- यदि कोई कण नियत वेग से गतिमान है, तब इनके औसत वेग तथा तात्क्षणिक वेग सदैव सामन होंगें।
8- यदि विस्थापन समय का फलन है, तो विस्थापन का समय के साथ अवकलन, वेग के तुल्य होता है। अर्थात
इस प्रकार t के मान के लिए हम तात्क्षणिक वेग ज्ञात कर सकते है। 
9- यदि कोई कण विराम अवस्था से प्रारम्भ होकर निश्चित समय के लिए नियत दर α से त्वरित होता है तथा उसके बाद नियत दर β से अवमंदित होते हुए प्रारम्भिक बिन्दु से t सेकण्ड बाद विराम अवस्था में आ जाता है, तब

वेग Velocity

किसी गतिमान वस्तु की एक निश्चित दिशा में स्थिति परिवर्तन की दर को वस्तु की चाल कहते है। यह एक सदिश राशि है, जिसे वेक्टर v से प्रदर्शित करते है। इसका मात्रक मीटर/सेकण्ड होता है। समय के साथ विस्थापन परिवर्तन के आधार पर वेग के चार प्रकार होते है-
1- एकसमान वेग
2- असमान वेग
3- औसत वेग
4- तात्क्षणिक वेग
1- एकसमान वेग 
जब कोई कण समान समय अन्तरालों में समान विस्थापन तय करती है अर्थात इसका परिमाण एवं दिशा दोनों ही समान हो तो इसका वेग एकसमान कहलाता है।
उदाहरण
1- एकसमान चाल से वृत्तीय पथ पर घूमते कण की गति
2- पृथ्वी के चारों ओर घूमते उपग्रह की गति
2- असमान वेग 
जब कोई कण समान समय अन्तरालों में असमान विस्थापन तय करती है अर्थात इसकी दिशा एवं परिमाण भिन्न भिन्न हो तो इसका वेग  असमान या परिवर्ती कहलाता है।
उदाहरण
1- सड़क पर चलती किसी बस की गति
2- नदी में बहते जल की गति
3- औसत वेग 
किसी दिए गए समय अन्तराल में तय कुल विस्थापन तथा कुल समय के अनुपात को औसत वेग कहते है। अतः
औसत वेग = तय कुल विस्थापन/लिया गया कुल समय
4- तात्क्षणिक वेग 
किसी विशेष क्षण पर वस्तु का वेग उस क्षण तात्क्षणिक वेग कहलाता है। अर्थात किसी निश्चित क्षण पर किसी सदिश में परिवर्तन की दर तात्क्षणिक वेग कहलाती है। 
तात्क्षणिक वेग बहुत सूक्ष्म समय अन्तराल के लिए औसत वेग ही होता है। अर्थात तात्क्षणिक वेग  

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...