अपने लक्ष्य को मेहनत से वरण करना ही प्रत्येक विद्यार्थी का एकमात्र ध्येय होना चाहिए - विकास विद्यालंकार
Sunday, September 26, 2021
Monday, May 18, 2020
Sunday, May 17, 2020
क्षैतिज प्रक्षेप्य गति Horizontal Projectile Motion
क्षैतिज प्रक्षेप्य गति में, वेग का क्षैतिज घटक, गुरुत्वीय त्वरण तथा यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती है, तथा वस्तु क्षैतिज दिशा में समान समय अन्तराल में समान दूरी तय करती है।
Saturday, May 16, 2020
तिर्यक प्रक्षेप्य गति Obliquely Projectile Motion
जब कोई पिण्ड पृथ्वी तल से इस प्रकार क्षैतिज से ऊपर की ओर किसी कोण पर इस
प्रकार फेंक जाता है कि पिण्ड का मार्ग परवलयाकार हो तो पिण्ड की यह गति तिर्यक
प्रक्षेप्य गति कहलाती है। जैसे – तोप के गोले की गति।
तिर्यक प्रक्षेप्य गति में, वेग का क्षैतिज घटक, गुरुत्वीय त्वरण तथा यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती है, जबकि चाल, वेग का ऊर्ध्वाधर घटक, संवेग, गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का मान
परिवर्तित होता रहता है। ऊर्ध्वाधर वेग तथा गतिज ऊर्जा दोनों का मान प्रक्षेपण
बिन्दु पर अधिकतम तथा उच्चतम बिन्दु पर शून्य होता है।
तिर्यक प्रक्षेप्य
गति से सम्बन्धित बिन्दु:-
Friday, May 15, 2020
प्रक्षेप्य गति Projectile Motion
प्रक्षेप्य गति की शर्ते
1- वायु के कारण प्रतिरोध नगण्य हो।
2- पृथ्वी की वक्रता का प्रभाव नगण्य हो।
3- पृथ्वी की घूर्णन गति का प्रभाव नगण्य हो।
4- प्रक्षेप्य पथ के सभी बिंदुओं के लिए गुरुत्वीय त्वरण का परिमाण एवं दिशा नियत हो।
प्रक्षेप्य गति की विशेषताएं
1- प्रक्षेप्य गति द्विविमीय गति है अतः इसकी दो भागों में विवेचना की जा सकती है। क्षैतिज गति तथा ऊर्ध्वाधर गति। ये दोनों गतियाँ एक दूसरे से स्वतंत्र होती हैं। यह गतियों की भौतिकीय अनिर्भरता का सिद्धान्त कहलाता है।
2- कण के वेग को दो परस्पर लम्बवत घटकों में वियोजित किया जा सकता है। क्षैतिज घटक तथा ऊर्ध्वाधर घटक।
3- सम्पूर्ण उड्डयन के दौरान क्षैतिज घटक नियत रहता है तथा ऊर्ध्वाधर घटक को गुरुत्वीय बल लगातार प्रभावित करता रहता है।
4- क्षैतिज गति नियत ( अत्वरित ) जबकि ऊर्ध्वाधर गति एकसमान रुप से त्वरित अथवा अवमन्दित गति होती है।
द्विविमीय गति Two dimensional Motion
परिवर्ती त्वरण के साथ गति Motion with Variable Acceleration
इसक प्रकार की गति के तीन फलन होते है-
1- समय का फलन
2- दूरी का फलन
3- वेग का फलन
1- समय का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान समय के साथ दिया जाता है तो इस दशा में गति की प्रथम समीकरण से समय का फलन ज्ञात करते है। इसे a = f(t) से प्रदर्शित करते है। अतः गति की प्रथम समीकरण से-
3- दूरी का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान दूरी के साथ दिया जाता है तो इस दशा में गति की तृतीय समीकरण से दूरी का फलन प्राप्त करते है। इसे a = f(x) से प्रदर्शित करते है। अतः गति की तृतीय समीकरण से-
4- वेग का फलन
जब परिवर्ती त्वरण का मान वेग के साथ दिया जाता है तो इस दशा में समय के साथ वेग परिवर्तन का फलन प्राप्त करते है। इसे a = f(v) से प्रदर्शित करते है। अतः
Thursday, May 14, 2020
गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity
वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में सभी वस्तुएं पृथ्वी सतह पर समान त्वरण से गिरती है। किसी ऊँचाई h < < R से पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु की गति, मुक्त गति कहलाती है।
गुरुत्व के अधीन गति, एकविमीय गति का आदर्श उदाहरण है जिसमें वायु प्रतिरोध तथा ऊँचाई के साथ त्वरण में सूक्ष्म परिवर्तन को नगण्य मान लेते है।
गुरुत्व के अधीन गति को हम तीन प्रकार से समझ सकते है-
1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए।
2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए।
3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए।
1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए-
माना कोई वस्तु h ऊँचाई से प्रारम्भिक वेग शून्य से छोड़ी जाती है,
Tuesday, May 12, 2020
गति के समीकरण Equation of Kinematics
जहाँ-
u = समय t = 0 पर कण का प्रारम्भिक वेग
v = समय t पर कण का अन्तिम वेग
a = कण का त्वरण
s = समय t में कण द्वारा तय विस्थापन/दूरी
गति में सम्बन्ध स्थापित करने के लिए 2 स्थितियाँ होती है-
1- जब त्वरण शून्य हो
2- जब त्वरण कार्यकारी हो
जब त्वरण शून्य हो
जब किसी वस्तु पर त्वरण का परिमाण शून्य हो तो वस्तु नियत चाल से चलती है। यह एकदिशीय गति होती है। इस गति में विस्थापन का परिमाण सदैव तय की गई दूरी के बराबर होता है। इस दशा में
v = u तथा s = ut
जब त्वरण कार्यकारी हो
जब किसी वस्तु पर त्वरण कार्यकारी हो तो वस्तु जब नियत त्वरण से चलती है, तो गति की तीन समीकरण प्राप्त होती है-
Sunday, May 10, 2020
स्थिति-समय ग्राफ Position-Time Graph
Saturday, May 9, 2020
त्वरण Acceleration
यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वेग परिवर्तन की दिशा होती है तथा इसका मात्रक मीटर/वर्ग सेकण्ड होता है। इसे a से प्रदर्शित करते है।
वेग की दिशा में परिवर्तन तीन प्रकार से होता है-
1- जब केवल वेग की दिशा परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण वेग के लम्बवत होता है। जैसे – एकसमान वृत्तीय गति।
2- जब केवल वेग का परिमाण परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण वेग के समान्तर अथवा प्रतिसमान्तर होता है। जैसे – गुरुत्व के अधीन गति।
3- जब वेग के परिमाण तथा दिशा दोनों परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण के दो घटक होते है, एक वेग के लम्बवत तथा दूसरा वेग के समान्तर या प्रतिसमान्तर होगा। जैसे – प्रक्षेप्य गति।
वेग में परिवर्तन के आधार पर त्वरण चार प्रकार का होता है-
1- एकसमान त्वरण
2- परिवर्ती त्वरण
3- औसत त्वरण
4- तात्क्षणिक त्वरण
1- एकसमान त्वरणयदि कण की गति के दौरान त्वरण का परिमाण व दिशा नियत रहे तो कण का त्वरण एकसमान कहलाता है। जैसे – पृथ्वी तल पर गिरते पिंड की गति में लगने वाला गुरुत्वीय त्वरण।
2- परिवर्ती त्वरणजब गति के दौरान कण के त्वरण का परिमाण अथवा दिशा अथवा दोनों परिवर्तित होते है, तो कण का त्वरण परिवर्ती अथवा आसमान त्वरण कहलाता है। जैसे-
1- सड़क पर दौड़ती गाड़ी की गति, जिसमे गाड़ी पर त्वरण का परिमाण कम और अधिक होता रहता है।
2- वृत्तीय पथ पर घूमते पिंड की गति जिसमे लगातार दिशा परिवर्तित होती रहती है।
3- टेढ़े-मेढ़े मार्ग पर दौड़ती गाड़ी की गति जिसमे गाड़ी की गति परिमाण व दिशा दोनों बदलते रहते है।
3- औसत त्वरणकिसी गतिमान पिंड की किन्हीं दो अवस्थाओ के बीच में पिंड के वेग परिवर्तन और समय अन्तराल का अनुपात उन अवस्थाओं के बीच पिंड का औसत त्वरण कहलाता है। इसकी दिशा वेग सदिश में परिवर्तन की दिशा होती है।
4- तात्क्षणिक त्वरण
Friday, May 8, 2020
चाल तथा वेग में तुलना
2- चाल तथा वेग उस समय अन्तराल पर निर्भर करता है, जिसमें यह परिभाषित होता है। दिए गए समय अन्तराल के लिए औसत वेग का सिर्फ एक ही मान होता जबकि औसत चाल के कई मान हो सकते है जो तय किए गए पथ पर निर्भर करते है।
3- यदि वस्तु गति के पश्चात अपनी प्रारम्भिक स्थिति में लौट आती है तो वस्तु का औसत वेग शून्य होगा परन्तु चाल कभी शून्य नहीं हो सकती।
4- गतिमान वस्तु के लिए औसत चाल कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती जबकि औसत वेग ऋणात्मक हो सकता है।
5- किसी गतिमान कण के लिए यह सम्भव हो सकता है कि उसकी तात्क्षणिक चाल नियत हो परन्तु तात्क्षणिक वेग परिवर्ती हो। जैसे – वृत्तीय मार्ग पर नियत चाल से गतिमान कण की गति।
6- तात्क्षणिक वेग का मान सदैव तात्क्षणिक चाल के बराबर होता है।
7- यदि कोई कण नियत वेग से गतिमान है, तब इनके औसत वेग तथा तात्क्षणिक वेग सदैव सामन होंगें।
8- यदि विस्थापन समय का फलन है, तो विस्थापन का समय के साथ अवकलन, वेग के तुल्य होता है। अर्थात
वेग Velocity
1- एकसमान वेग
2- असमान वेग
3- औसत वेग
4- तात्क्षणिक वेग
1- एकसमान वेगजब कोई कण समान समय अन्तरालों में समान विस्थापन तय करती है अर्थात इसका परिमाण एवं दिशा दोनों ही समान हो तो इसका वेग एकसमान कहलाता है।
उदाहरण
1- एकसमान चाल से वृत्तीय पथ पर घूमते कण की गति
2- पृथ्वी के चारों ओर घूमते उपग्रह की गति
2- असमान वेगजब कोई कण समान समय अन्तरालों में असमान विस्थापन तय करती है अर्थात इसकी दिशा एवं परिमाण भिन्न भिन्न हो तो इसका वेग असमान या परिवर्ती कहलाता है।
उदाहरण
1- सड़क पर चलती किसी बस की गति
2- नदी में बहते जल की गति
3- औसत वेगकिसी दिए गए समय अन्तराल में तय कुल विस्थापन तथा कुल समय के अनुपात को औसत वेग कहते है। अतः
औसत वेग = तय कुल विस्थापन/लिया गया कुल समय
4- तात्क्षणिक वेग
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पृथ्वी का वस्तुओं पर आकर्षण बल, गुरुत्व बल कहलाता है। इस गुरुत्व बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते है।...


















































