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Showing posts from December, 2019

शोध के उद्देश्य Research Objectives

शोध के उद्देश्य Research Objectives किसी भी प्रकार का शोध किसी न किसी उद्देश्य का अनुगामी होता है। अतः यह बात स्पष्ट है कि अनुसन्धान उद्देश्यविहीन हो ही नहीं सकता। इस प्रकार अनुसन्धान के विषय में कहा जा सकता है कि, अनुसन्धान नवीन तथ्यों की खोज करता है।  पुराने तथ्यों की जाँच तथा मूल्यांकन करता है।  किसी विशेष स्थिति का सही निर्णय कर समस्याओं का समाधान करता है।  सामान्यतः अनुसन्धान के उद्देश्यों को चार भागों में बाँटा गया है- सैद्धान्तिक उद्देश्य  सत्यात्मक उद्देश्य  तथ्यात्मक उद्देश्य  व्यवहारिक उद्देश्य  1. सैद्धान्तिक उद्देश्य सैद्धान्तिक उद्देश्यों के अन्तर्गत वैज्ञानिक विधियों को शामिल किया जाता है। वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से नवीन सिद्धान्तों एवं नियमों का प्रतिपादन किया जाता है। सैद्धान्तिक उदेश्य पूर्ति के लिए किए गए कार्य व्याख्यात्मक प्रकृति के होते है। 2.   सत्यात्मक उद्देश्य सत्यात्मक उद्देश्य दार्शनिक प्रकृति के होते है, जिनमें दर्शन के आधार पर अन्तिम परिणाम की प्राप्ति की जाती है। 3.   तथ्...

शोध की प्रकृति Nature of Research

शोध की प्रकृति Nature of Research अनुसन्धान या शोध वह क्रमबद्ध वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग के द्वारा वर्तमान ज्ञान का परिमार्जन किया जाता है। शोध का क्षेत्र बहुत व्यापक है फिर भी शोध की प्रकृति को निम्नलिखित आधार बिन्दुओं के द्वारा समझा जा सकता है- अनुसन्धान अपनी प्रकृति में वस्तुनिष्ठ और तथ्यात्मक होता है।  शोध मूलतः वैज्ञानिक प्रकृति का होता है, जिसमें प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण कर निष्कर्ष प्राप्त किया जाता है।  इसकी प्रकृति बौद्धिकता से युक्त एवं तार्किक होती है, जो पुरानी त्रुटियों को शुद्ध कर नए-नए ज्ञान एवं सिद्धान्तों को स्थापित करती है।  अनुसन्धान पूर्वाग्रहों से मुक्त और व्यक्तिपरक होता है।  अनुसन्धान अपनी प्रकृति में नवीनता को प्रदर्शित करता है, क्योंकि इसके द्वारा प्राचीन तथ्य, सिद्धान्त, विधि आदि में परिवर्तन कर नए तथ्यों, सिद्धान्तों और विधियों की खोज होती है।  अनुसन्धान की प्रकृति विश्लेषणात्मक होती है, क्योंकि इसमें सांख्यिकी की विधियों एवं आँकड़ों का प्रयोग कर निष्कर्...

शोध की विशेषताएं Characteristics of Research

शोध की विशेषताएं Characteristics of Research अनुसन्धान वैज्ञानिक विधि की तरह कार्य करता है, जो पूर्वाग्रहों से मुक्त और व्यक्तिपरक होता है। इस आधार पर अनुसन्धान की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है- वस्तुनिष्ठता  निश्चयात्मकता  विश्वसनीयता  वैधता  कार्यकारण सम्बन्ध की महत्ता  चक्रीय प्रक्रिया  तार्किकता  अनुभवात्मक आधारित संकल्पना 

शोध का अर्थ एवं परिभाषाएं Meaning of Research

शोध का अर्थ एवं परिभाषाएं Meaning of Research शोध अथवा अनुसंधान का सामान्य अर्थ “खोज करना” है। यह खोज किसी उद्देश्य को आधार बनाकर क्रमबद्ध, व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीकों से की जाती है। शोध को इंग्लिश में Research कहते है, जिसका सामान्य अर्थ,-        “पुनः खोज करना” है। शोध किसी न किसी समस्या के वैज्ञानिक या तार्किक समाधान के रूप में सामने आता है, क्योंकि समाधान के पश्चात उस समस्या या खोज से जुड़े कुछ नवीन सिद्धांत या अवधारणाएं सामने आती है।

मूल्यांकन प्रणाली में नवाचार Innovation in Evaluation System

मूल्यांकन प्रणाली में नवाचार Innovation in Evaluation System  मूल्यांकन शिक्षण एवं सीखने दोनों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । इसमें नवाचार का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है । यह वर्तमान की जरूरतों व वर्तमान पद्धतियों में नई तकनीकों का समावेश कर मूल्यांकन की प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी तथा त्रुटिहीन तथा गुणवत्ता पूर्ण बनाता है । अतः कुछ महत्त्वपूर्ण नवाचार विधि इस प्रकार हैं प्रश्नावली को जटिल व प्रासंगिक मुद्दे आधारित बनाकर मूल्यांकन करना । इसमें उन मुद्दों को शामिल करना , जिससे शिक्षार्थी प्रभावित होते हैं । इससे शिक्षार्थी की बौद्धिकता तथा उद्देश्यों दोनों का मूल्यांकन सम्भव है । शिक्षार्थी या बच्चों को साक्षात्कार के माध्यम से मूल्यपरक मूल्यांकन कर , इस समूह में विद्यार्थियों को शामिल कर व प्रश्नों को पूछकर भी मूल्यांकन किया जा सकता है , जिससे बौद्धिकता के आत्मविश्वास को बढ़ावा मिलेगा और शिक्षण मूल्यांकन भी सकारात्मक होगा । विद्यार्थियों से किसी पत्र के बारे में जानकर और उनका उस पर पक्ष जानकर भी बौद्धिकता को मापा जा सकता है । ऐसे ही किसी अन्य घटना को उनके प्रोजेक्ट कार्य ...

कम्प्यूटर आधारित जाँच Computer Based Testing

कम्प्यूटर आधारित जाँच Computer Based Testing  कम्प्यूटर आधारित जाँच डिजिटल संसाधनों के माध्यम से होती है । इसमें इण्टरनेट आधारित कम्प्यूटर पर जाँच होती है । इसके साथ ही इण्टरनेट वातावरण में ही इसका मूल्यांकन भी होता है । कम्प्यूटर आधारित जाँच में विद्यार्थी को यूजर आईडी और पासवर्ड आवण्टित किया जाता है । यह पूर्व व्यवस्थित कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर में दर्ज भी होता है । जाँच के समय विद्यार्थी निर्धारित जाँच केन्द्र पर पहुँचकर जाँच देता है । इसमें विद्यार्थी यूजर आईडी और पासवर्ड की सहायता व निर्देशित मानक के अनुरूप निर्धारित समय हेतु परीक्षा प्रारम्भ करता है । जाँच प्रारम्भ होते ही समय की गणना प्रारम्भ हो जाती है । इसमें अगले प्रश्न तथा सेव करने हेतु ' सेव एण्ड नेक्स्ट बटन ' का प्रयोग करना होता है । इसमें भिन्न रंगों के बटनों का भी उपयोग होता है , जो यह बताते हैं कि आपने कितना प्रश्न किया , कितना बाकी है आदि । जाँच समाप्त होते ही सबमिट बटन का प्रयोग करना होता है , जिससे आपकी जाँच प्रति कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर में सेव हो जाती है । सबमिट बटन के प्रयोग के बाद कम्प्यूटर की स्क्रीन प...

विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली Choice Based Credit System

विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली  विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली पाठ्यक्रम की वह प्रणाली है , जिसमें छात्रों को पाठ्यक्रमों को चुनने का विकल्प होता है अर्थात् इसमें विज्ञान के विद्यार्थी को कला , वाणिज्य आदि अन्य विषयों को चुनने का विकल्प होता है । दिल्ली विश्वविद्यालय ने सत्र 2015 - 16 से इस पाठ्यक्रम को स्नातक के पाठ्यक्रमों में शामिल किया है ।इसका मूल विचार छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखना है , ताकि भारत व विदेशों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिकता बनी रहे । इसमें पाठ्यक्रम मूल , निर्वाचित या मृदु कौशल पाठ्यक्रम के रूप में सन्दर्भित होता है । यह प्रणाली सभी केन्द्रीय , राज्य और मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के लिए एकसमान होता है । इसके तीन मुख्य पाठ्यक्रम होते हैं , मूल ,  वैकल्पिक और  बुनियादी  एक प्रभावी और सन्तुलित परिणाम प्रदान करने हेतु तीनों मुख्य पाठ्यक्रमों का मूल्यांकन और उपयोग किया जाता है । यह प्रणाली निम्न प्रकार से कार्य करती है सेमेस्टर क्रेडिट प्रणाली क्रेडिट हस्तान्तरण  व्यापक निरन्तर मूल्यांकन  ग्रेडिंग  से...

मूल्यांकन प्रणाली Evaluation System

मूल्यांकन प्रणाली Evaluation System  मूल्यांकन का विकास शिक्षा में एक नवीन दृष्टिकोण का परिणाम है । आधुनिक शिक्षा प्रणाली में मूल्यांकन की विभिन्न प्रविधियों के उपयोग पर बल दिया जा रहा है । यह मूल्यांकन मात्र शिक्षार्थियों की उपलब्धि को ही नहीं , बल्कि पाठ्यक्रम के विभिन्न उद्देश्यों के व्यापक स्तर को भी मापने का प्रयास करता है । मूल्यांकन का अर्थ यह किसी अवलोकन , निष्पत्ति , परीक्षा या किसी प्रत्यक्ष रूप में मापित प्रदत्तों को मूल्य प्रदान करना है । अन्य शब्दों में , मूल्यांकन एक सकारात्मक सतत प्रक्रिया है , जो शैक्षिक उद्देश्यों की सीमा निर्धारित करके उनकी प्राप्ति के स्तर को ज्ञात करवाकर उचित या अनुचित का निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है । इसका शाब्दिक अर्थ है - ' निर्णय प्रदान करना । एडम्स के शब्दों में , “ किसी प्रक्रिया या वस्तु के महत्त्व का निर्धारण ही मूल्यांकन करना है । " कोठारी आयोग द्वारा दी गई परिभाषा के अनुसार , “ मूल्यांकन एक निरन्तर प्रक्रिया , सम्पूर्ण शिक्षा प्रणाली का एकीकृत भाग और शैक्षिक उद्देश्यों से पूरी तरह सम्बन्धित है । यह विद्यार्थियों क...

शिक्षण सहायक प्रणाली Teaching Support System

शिक्षण सहायक प्रणाली Teaching Support System  शिक्षण सहायक प्रणाली वह तन्त्र या व्यवस्था होती है , जिसमें शिक्षण कौशल , सहायक शिक्षण सामग्री आदि शामिल होते हैं , जो अधिगमकर्ता के क्षमता विकास में सहायक होता है । इसे विभिन्न वर्गों में बाँटकर देखा जा सकता है जैसे- परम्परागत शिक्षण सहायक प्रणाली Traditional Teaching Support System  आधुनिक शिक्षण सहायक प्रणाली Modern Teaching Support System  आईसीटी आधारित शिक्षण प्रणाली ICT Based Support System  परम्परागत शिक्षण सहायक प्रणाली Traditional Teaching Support System  परम्परागत सहायक प्रणाली में परम्परागत सहायक सामग्रियों का उपयोग होता है । इसमें वर्तमान की तुलना में निम्न स्तर की सहायक सामग्रियाँ पाई जाती हैं । इसमें शिक्षण सामग्री के रूप में दृश्य एवं श्रव्य आधारित सामग्रियाँ पाई जाती हैं । उदाहरणस्वरूप ब्लैक बोर्ड , मानचित्र , ग्लोब , पुस्तकें , पत्र , पत्रिकाएँ आदि । परम्परागत शिक्षण प्रणाली में शिक्षण कौशल तथा शिक्षण के विषय विस्तृत न होकर संकीर्ण व निम्न स्तर के पाए जाते हैं । परम्परागत शिक्षण प्रणाली म...

भारत सरकार द्वारा संचालित प्रमुख शिक्षण योजना Major Teaching Scheme run by Government of India

भारत सरकार द्वारा संचालित प्रमुख शिक्षण योजना भारत सरकार शिक्षण के क्षेत्र में अनेक ऑनलाइन पाठ्यक्रम पेश करती है, जिनमें से मुख्य निम्नलिखित है- स्वयं योजना Swayam Yojana स्वयंप्रभा योजना Swayamprabha Yojana  मेसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज MOOCs MOOCs ( Massive Open Online Courses ) स्वयं योजना Swayam Yojana स्वयं योजना भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई है । इस योजना के तहत देश के छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रदान किया जाता है । इसके तहत आईआईटी , आईआईएम और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों सभी छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम पेश करते है । छात्र इसके माध्यम से कोर्स का चुनाव कर पढ़ सकते हैं । स्वयंप्रभा योजना Swayamprabha Yojana यह भी सरकार की मुफ्त ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने की पहल है । इसके माध्यम से वेबसाइट पर जाकर किसी भी विषय के बारे में पढ़ सकते हैं । इसके माध्यम से स्कूल के छात्रों से लेकर कॉलेज के छात्र पढ़ सकते हैं। इस वेबसाइट की शुरुआत मानव संसाधन विकास मन्त्रालय और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् ने माइक्रोसॉफ्ट की मदद से शुरू किया है । मेसिव ओप...

ऑफ़लाइन एवं ऑनलाइन शिक्षण Offline v/s Online Teaching

ऑफ़लाइन एवं ऑनलाइन शिक्षण   ऑफ़लाइन शिक्षण विधि  ऑफ़लाइन शिक्षण, शिक्षण की वह विधि है, जिसमें शिक्षक एवं छात्र प्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते है। इस विधि में शिक्षक एवं अभिगमकर्ता के मध्य प्रत्यक्ष वाद-विवाद होता है, जिसमें अभिगमकर्ता प्रत्यक्ष रूप से अपने विचार, प्रश्न व सुझाव देकर संतुष्ट होते है। अभिगमकर्ता विभिन्न अध्ययन सामग्रीयों को प्रत्यक्ष रूप से स्पर्श कर उससे प्रभावित होता है। इस विधि में शिक्षार्थी को कक्षा में शामिल होकर ही शिक्षण करना पड़ता है। ऑनलाइन शिक्षण विधि  ऑनलाइन शिक्षण कम्प्यूटर आधारित नेटवर्क से सम्बद्ध होता है। इस विधि में अभिगमकर्ता घर रहकर भी शिक्षण प्राप्त कर सकता है। इस विधि में अभिगमकर्ता का शिक्षक से सीधा सम्पर्क न होकर वीडियो के माध्यम से सम्पर्क होता है। वर्तमान में ऑनलाइन शिक्षण विधि पर भारत सरकार द्वारा अनेक प्रकार से कार्य किया जा रहा है, जैसे – स्वयं योजना, स्वयं प्रभा योजना आदि।

प्रयोगशाला विधि Laboratory Method

प्रयोगशाला विधि  यह विधि खोज के सिद्धान्त पर आधारित है, जिसके द्वारा किसी परिमाण पर पहुँचने के लिए खोज द्वारा तथ्यों का उल्लेख होता है। इस विधि में छात्र प्रयोगशाला में प्रयोग द्वारा स्वयं ही निष्कर्ष निकालकर अवधारणा विकसित करते है। यह विधि आगमन विधि का ही वृहत एवं विकसित प्रयोगात्मक स्वरूप है। प्रयोगशाला विधि के गुण प्रयोगशाला विधि में छात्रों द्वारा सीखा गया ज्ञान रुचिपूर्ण एवं स्थाई होता है।  विद्यार्थी के ज्ञान में अधिकाधिक वृद्धि होती है।  प्रयोगशाला में अनुसन्धान के साथ-साथ उन्हें तथ्यों, संप्रत्ययों और वैज्ञानिक निष्कर्षों को समझने का अवसर प्राप्त होता है।  यह विधि छात्रों में विज्ञान के महत्व को समझने में सहायक है।  प्रयोगशाला विधि के दोष यह विधि उच्च वर्ग की कक्षाओं के लिए उपयुक्त है तथा यह केवल अध्ययन काल तक ही उपयोगी है।  इस विधि में धन का व्यय अधिक होता है, साथ ही इसमें समय भी अधिक लगता है।  यह विधि व्यक्ति केन्द्रित विधि है। 

अन्वेषण विधि

अन्वेषण विधि  अन्वेषण विधि को अनुमानी विधि भी कहा जाता है। इस विधि में शिक्षार्थी बिना सहायता प्राप्त किए अपनी समस्या का समाधान ढूंढते है। शिक्षण की यह विधि प्रतिभागियों को सक्रिय रखती है और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करती है। इस विधि के जनक ‘एच ई आर्मस्ट्रांग’ को माना जाता है। अन्वेषण विधि के गुण यह विधि विद्यार्थीयों में स्वयं सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है।  इस शिक्षण विधि की प्रकृति वैज्ञानिक है, अतः यह विधि शिक्षार्थियों में खोजी अभिवृत्ति के विकास में सहायक होती है।  यह विधि ‘करके सीखने’ के सिद्धान्त पर आधारित है, और इसमें अध्यापक व शिक्षार्थी के मध्य प्रगाढ़ता में अभिवृद्धि होती है।  अन्वेषण विधि के दोष अन्वेषण विधि के माध्यम से शिक्षण कार्य में अधिक समय लगता है, इससे सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को नियत समय पर पूर्ण करना कठिन हो जाता है।  शिक्षण की यह विधि छोटी कक्षाओं के लिए उपयुक्त नहीं है।  इस विधि में वास्तविक ज्ञान प्राप्ति पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है।