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ऑफ़लाइन एवं ऑनलाइन शिक्षण Offline v/s Online Teaching

ऑफ़लाइन एवं ऑनलाइन शिक्षण  
ऑफ़लाइन शिक्षण विधि 
ऑफ़लाइन शिक्षण, शिक्षण की वह विधि है, जिसमें शिक्षक एवं छात्र प्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते है। इस विधि में शिक्षक एवं अभिगमकर्ता के मध्य प्रत्यक्ष वाद-विवाद होता है, जिसमें अभिगमकर्ता प्रत्यक्ष रूप से अपने विचार, प्रश्न व सुझाव देकर संतुष्ट होते है। अभिगमकर्ता विभिन्न अध्ययन सामग्रीयों को प्रत्यक्ष रूप से स्पर्श कर उससे प्रभावित होता है। इस विधि में शिक्षार्थी को कक्षा में शामिल होकर ही शिक्षण करना पड़ता है।
ऑनलाइन शिक्षण विधि 
ऑनलाइन शिक्षण कम्प्यूटर आधारित नेटवर्क से सम्बद्ध होता है। इस विधि में अभिगमकर्ता घर रहकर भी शिक्षण प्राप्त कर सकता है। इस विधि में अभिगमकर्ता का शिक्षक से सीधा सम्पर्क न होकर वीडियो के माध्यम से सम्पर्क होता है। वर्तमान में ऑनलाइन शिक्षण विधि पर भारत सरकार द्वारा अनेक प्रकार से कार्य किया जा रहा है, जैसे – स्वयं योजना, स्वयं प्रभा योजना आदि।

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शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन Audio tools in the teaching process

शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन के अन्तर्गत उन सामग्रीयों को रखा जाता है, जिनके द्वारा सुनकर ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जैसे- फोनोग्राफ रिकॉर्ड, रेडियो प्रसारण तथा मैग्नेटिक टेपरिकॉर्डर आदि। शिक्षण में श्रव्य साधन तीन प्रकार से सहायक होते है- रेडियो  टेप रिकॉर्डर  ग्रामोफोन   रेडियो  रेडियो शिक्षा प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है। भारत में वर्ष 1936 में सर्वप्रथम आकाशवाणी से समाचार बुलेटिन का प्रसारण हुआ था। वर्ष 1957 में विविध भारती की शुरुआत हुई थी।  टेप रिकॉर्डर  टेपरिकॉर्डर के माध्यम से विषय-वस्तु को विद्यार्थी के लिए आवश्यकतानुसार प्रस्तुत किया जा सकता है। यह निदानात्मक और उपचरात्मक दोनों ही शिक्षण विधियों में प्रयुक्त किया जा सकता है।   ग्रामोफोन  ग्रामोफोन रेडियो की तरह ही शिक्षण का प्राचीन माध्यम है। इसके द्वारा छात्रों को उच्चारण के शुद्धिकरण में सहायता मिलती है।

गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity

पृथ्वी का वस्तुओं पर आकर्षण बल, गुरुत्व बल कहलाता है। इस गुरुत्व बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते है। इसे g से प्रदर्शित करते है। वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में सभी वस्तुएं पृथ्वी सतह पर समान त्वरण से गिरती है। किसी ऊँचाई h < < R से पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु की गति, मुक्त गति कहलाती है। गुरुत्व के अधीन गति, एकविमीय गति का आदर्श उदाहरण है जिसमें वायु प्रतिरोध तथा ऊँचाई के साथ त्वरण में सूक्ष्म परिवर्तन को नगण्य मान लेते है। गुरुत्व के अधीन गति को हम तीन प्रकार से समझ सकते है- 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए। 2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए। 3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए। 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए- माना कोई वस्तु h ऊँचाई से प्रारम्भिक वेग शून्य से छोड़ी जाती है, तब इस स्थिति में, उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है कि मुक्त रूप से गिरते किसी कण द्वारा क्रमागत सेकन्डों में चली गई दूरियाँ क्रमशः 1:3:5: …. अर्थात विषम पूर्णकों के अनुपात में होगी।  प्र...