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Wednesday, May 13, 2020

न्याय एवं वैशेषिक दर्शन

न्याय एवं वैशेषिक दर्शन
1- किस दर्शन का एक अन्य नाम अक्षपाद दर्शन भी है? - न्याय दर्शन का
2- न्याय दर्शन के प्रवर्तक थे - महर्षि गौतम
3- न्याय दर्शन का अन्तिम उद्देश्य क्या है? - मोक्ष की प्राप्ति
4- किस विद्वान् का यह कथन है कि प्रमाणों के द्वारा किसी विषय की परीक्षा करना ही न्याय है? - वात्स्यायन का
5- कौन-सा न्याय दर्शन का मूल ग्रन्थ है? - न्यायसूत्र
6- न्याय दर्शन से सम्बन्धित ग्रन्थ न्यायमंजरी के लेखक का नाम है? - जयन्त
7- न्याय दर्शन में कितने पदार्थों या तत्त्वों का अस्तित्व स्वीकार किया गया है? - सोलह पदार्थों का
8- न्याय दर्शन में ज्ञान को क्या कहा जाता है? - अनुभव
9- न्याय के अनुसार 'प्रमा' शब्द की सही परिभाषा है? - वस्तुओं के वास्तविक स्वरूप का अपरोक्ष बोध
10- न्याय के अनुसार प्रमा का लक्षण है - यथार्थ अनुभव
11- न्याय दर्शन के अनुसार कौन-कौन से प्रमाण है? - प्रत्यक्ष, शब्द, अनुमान एवं उपमान
12- अप्रमा कितने प्रकार की होती है? - तीन प्रकार की (संशय, भ्रम एवं तर्क)
13- सीप को चाँदी के रूप में देखना किसका उदाहरण है? - विपर्यय का
14- गौतम के अनुसार इन्द्रिय, अर्थ, सन्निकर्ष से जो ज्ञान प्राप्त होता है, कहलाता है - प्रत्यक्ष
15- भारतीय दर्शन में कुल कितनी इन्द्रियाँ मानी गई हैं? - छ:
16- न्याय दार्शनिकों के अनुसार, बाह्य प्रत्यक्ष प्रमाण का प्रथम चरण कहलाता है - निर्विकल्प प्रत्यक्ष
17- किस प्रत्यक्ष में वस्तु का स्पष्ट, निश्चित एवं निर्णायक ज्ञान होता है? - सविकल्प प्रत्यक्ष
18- नैयायिकों के अनुसार हेतु का प्रत्यक्ष करके अनिवार्य सम्बन्ध के आधार पर साध्य का ज्ञान प्राप्त करना, कहलाता है - अनुमान
19- जो अनुमान स्वयं के लिए किया जाता है, उसे कौन-सा अनुमान कहते हैं? - स्वार्थ अनुमान
20- जो अनुमान पाँच अवयवों-प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन का प्रयोग करते हुए अन्य को ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाता है, उसे कहते हैं - परार्थ अनुमान
21- जब कार्य का प्रत्यक्ष करके कारण के होने का अनुमान किया जाता है, तो उसे कौन-सा अनुमान कहते हैं? - शेषवत्
22- परार्थ अनुमान में कितने क्रमबद्ध अवयव होते हैं? - पाँच
23- न्याय दार्शनिकों के अनुसार, परार्थ अनुमान का कौन-सा अवयव तृतीय लिंग परामर्श कहा जाता है? - उपनय
24- न्याय दर्शन के अनुसार व्याप्ति है? - हेतु व साध्य के बीच
25- व्याप्ति की स्थापना के लिए न्याय द्वारा अधोलिखित प्रत्ययों में से किस एक का प्रयोग किया जाता है? - सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष
26- सादृश्यता के प्रत्यक्ष से नाम (संज्ञा) और नामी (संज्ञी) के सम्बन्ध का ज्ञान कराने वाले प्रमाण को कहा जाता है? - उपमान
27- न्याय दर्शन में चौथा प्रमाण कौन-सा है? - शब्द
28- नैयायिकों के अनुसार, पद और वाक्य का अर्थ जानने से जो ज्ञान प्राप्त होता है, ज्ञान के उस प्रमाण को कहते हैं - शब्द
29- पदों के सामंजस्य को कहते हैं - योग्यता
30- नैयायिकों के अनुसार ज्ञान के विषय के आधार पर पद है - दृष्टा एवं अदृष्टा
31- वक्ता के अभिप्राय को समझना कहलाता है - तात्पर्य ज्ञान
32- शब्द नित्य है, क्योंकि यह उत्पन्न किया जाता है। इस अनुमान में हेत्वाभास है - विरुद्ध
33- शब्द एक गुण है, क्योंकि वह दृश्य है, में हेत्वाभास है - असिद्ध
34- यदि हेतु साध्य का खण्डन करने वाला है, तो अनुमान में जो दोष आ जाता है, ऐसे दोष को कहा जाता है - विरुद्ध
35- जिस अनुमान के हेतु दोष को हम किसी अन्य अनुमान द्वारा दिखा सकते हैं, तो ऐसे दुष्ट अनुमान के दोष को कहते हैं - सत्प्रतिपक्ष
36- यदि किसी अनुमान के दोष को अन्य प्रमाण द्वारा दिखा सकें, तो ऐसे अनुमान के दोष को कहते हैं - बाधित
37- 'प्रत्येक संकल्प में ईश्वर की चेतना अन्तर्निहित है।' इस दृष्टिकोण को मानते हैं - नैयायिक
38- बौद्ध दर्शन में प्रमाण के कितने प्रकार स्वीकार किए गए हैं? - दो
39- बौद्ध दार्शनिकों के अनुसार दूसरा प्रमाण कौन-सा है? - अनुमान
40- न्याय दर्शन में भ्रम विषयक सिद्धान्त कहलाता है? - अन्यथा ख्यातिवाद
41- वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक कणाद का वास्तविक नाम था - उलूक
42- किस दर्शन को औलक्य दर्शन भी कहा जाता है? - वैशेषिक दर्शन को
43- वैशेषिक दर्शन के अनुसार पदार्थों की संख्या कितनी है? - सात
44- किसके अनुसार पदार्थ वह है जो सत् है, ज्ञेय है तथा अभिधेय है? - प्रशस्तपाद
45- वैशेषिकों के अनुसार द्रव्य के प्रकार हैं - 9
46- पंचमहाभूतों में से किसके परमाणु नहीं होते? - आकाश के
47- वैशेषिक दर्शन के अनुसार गुणों की संख्या है? - 24
48- वैशेषिक दर्शन में किस पदार्थ को मूर्त द्रव्यों का गतिशील व्यापार कहा गया है? - कर्म को
59- एक ही प्रकार के दो परमाणुओं का विभेदक कहलाता है - विशेष
50- "पृथ्वी के दो परमाणु जिनका गुण तो गन्ध हो किन्तु दोनों एक-दूसरे से पृथक् हैं।" किसका उदाहरण है? - विशेष का
51- किसका विचार है कि वैशेषिक के बहुत्त्ववाद से सांख्य का द्वैतवाद बेहतर है? - शंकर का
52- किसका यह मत है कि समवाय एक आन्तरिक नहीं, बल्कि बाह्य सम्बन्ध है, क्योंकि समवाय से जुड़ी वस्तुएँ एक-दूसरे से पृथक होती हैं? - रामानुज का
53- असत्कार्यवाद का सम्बन्ध है - वैशेषिक दर्शन से
54- अभाव एक पदार्थ है, परन्तु प्रमाण नहीं, यह मत है - न्याय वैशेषिक का
55- वैशेषिक दर्शन में अभाव के कितने प्रकार बताए गए हैं? - दो
56- वैशेषिक दर्शन के अनुसार कारण के कितने प्रकार बताए गए हैं? - तीन
57- घड़े एवं मिट्टी का सम्बन्ध किस कारण का उदाहरण है? - समवायी कारण का
58- किस कारण को अन्य दर्शन में उपादान कारण कहा जाता है? - समवायी कारण को
59- वैशेषिक दर्शन में मोक्ष के लिए किस शब्द का प्रयोग हुआ है? - निःश्रेयस
60- किस दर्शन में धर्म का लक्षण है-“यतो अभ्युदयनिः श्रेयससिद्धिः सधर्मः।" - वैशेषिक दर्शन में
61- पदार्थ के यथार्थ स्वरूप के ज्ञान को कहते हैं -  तत्त्वज्ञान
62 न्याय-वैशेषिक में कितने प्रकार के परमाणुओं को स्वीकार किया गया? - चार प्रकार के
63- किसके परमाणु में स्पर्श का गुण प्रमुख रूप से पाया जाता है? - वायु के
64- न्याय-वैशेषिक के मतानुसार परमाणु स्वभावतः है - निष्क्रिय
65- न्याय दर्शन में किसको ज्ञान का आश्रय माना जाता है - आत्मा को
66 वैशेषिकों के अनुसार किस पर गुण तथा कर्म, ये दोनों पदार्थ निर्भर करते हैं - द्रव्य पर
67- नव्य न्याय का प्रारम्भ किससे से हुआ है - गणेश की चिन्तामणि से
68- न्याय के अनुसार गोत्व किसके द्वारा प्रत्यक्ष किया जा सकता है? - संयुक्त समवाय
69- कौन-सी पद्धति प्रमा की परिभाषा 'तद्वति तत्प्रकारकोऽनुभवों' के रूप में करता है? - न्याय
70- किस दर्शन का यह विचार है कि द्रव्य और इसके गुण के बीच समवाय सम्बन्ध है, किन्तु हम इसका प्रत्यक्ष नहीं कर सकते हैं? - वैशेषिक दर्शन का
71- वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में किस प्रकार का कारण किसी भी तरह से समवाय के सम्बन्ध के द्वारा अपने कार्य से सम्बन्धित नहीं है? - मात्र निमित्त
72- नैयायिकों के अनुसार पात्र और इसके रंग के बीच सम्बन्ध को किसके द्वारा अनुभव किया जा सकता है? - विशेषणता सन्निकर्ष
73- किस दर्शन के अनुसार वेद ईश्वर रचित है? - न्याय दर्शन के
74- किसके विचार से प्रत्यक्ष की परिभाषा - "इन्द्रियार्थसन्निकर्षोत्सनं ज्ञानं अव्यपदेभ्यम् अव्यभिचारी व्यवसायात्मकम्" है? - गौतम के अनुसार
75- न्याय ज्ञानमीमांसा में किस प्रकार के प्रत्यक्ष को अतीन्द्रिय कहा जाता है? - निर्विकल्पक प्रत्यक्ष को
76- न्याय के अनुसार वृत्ति किसके बीच का सम्बन्ध है? - पद एवं पदार्थ के बीच का
77- न्याय के अनुसार घट में पटाभाव किस प्रकार का सन्निकर्ष है? - विशेषणता
78- वैशेषिक दर्शन में ईश्वर जगत का किस प्रकार का कारण है? - निमित्तकारण
79- यह विचार कि ईश्वर एक प्रकार का आत्मा है, किसके द्वारा स्वीकृत है? - न्याय और वैशेषिक दर्शन द्वारा
80- जब शब्द की लक्षणा अपने शक्यार्थ का पूरी तरह त्याग कर देती है तो न्याय प्रमाणमीमांसा में उस लक्षण को कहते हैं - जहत् लक्षणा
81- वैशेषिक दर्शन के अनुसार आकाश क्या है -  एक, बिभु और नित्य
82- न्याय दर्शन के अनुसार मोक्षावस्था में आत्मा किस से रहित है - दुःख, सुख और चैतन्य से
83- नैयायिकों के अनुसार, आत्मा क्या है? - ज्ञाता और ज्ञात
84- वैशेषिकों के अनुसार, पट के रंग के सन्दर्भ में तन्तु का रंग किस प्रकार का कारण है? - असमवायी कारण
85- न्याय के अनुसार किस सन्निकर्ष में हम एक पुष्प और उसके लाल रंग के बीच के सम्बन्ध का बोध करते हैं ? - विशेणता
86- वैशेषिकों द्वारा मुक्त आत्मा में ज्ञान के किस प्रकार के अभाव की बात मानी गई है? - ध्वंसाभाव
87- वैशेषिकों के अनुसार सामीप्य और दूरी के ज्ञान का क्या कारण है? - द्विक्
88- किस प्रमाण के न्याय सम्प्रदाय ने निर्विकल्पक प्रत्यक्ष की अवस्था को सिद्ध किया? - अनुमान
89- वैशेषिक के अनुसार गाय में अश्वत्व के अभाव को कैसे जाना जाता है - अन्योन्याभाव से
90- नैयायिकों के अनुसार 'पदशक्ति' क्या है - पद और प्रयुज्य पदार्थ के बीच का सम्बन्ध है
91- वैशेषिक के अनुसार अतीत और वर्तमान के अवबोध का कारण है? - काल
92- वैशेषिकों के अनुसार द्वयणुक का असमवायीकरण क्या है? - परमाणु संयोग
93- नैयायिकों द्वारा समवाय सम्बन्ध जिस सन्निकर्ष से प्राप्त होता है, उसे जाना जाता है -  विशेषणता
94- न्याय भाषा-दर्शन में ईश्वरेच्छा क्या है - स्वयं शक्ति
95- ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए कौन सा दर्शन अदृष्ट की सहायता लेता है?- न्याय और वैशेषिक
96- 'याग न स्वर्गहेतु क्रियत्वात्' उक्त अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - बाधित
97- वैशेषिकों के अनुसार, आत्मा तब ज्ञान का आधार नहीं हो सकती है, जब यह हो जाती है?- मुक्त
98- 'शब्द नित्य शब्दत्वात्' उक्त अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - असाधारण सव्यभिचार
99- वैशेषिकों के अनुसार, घट का असमवायी कारण कौन है? - कपाल संयोग
100- मीठे में कड़वेपन का अभाव किस सम्बन्ध से रहता है? - स्वरूप सम्बन्ध
101- वैशेषिक मतानुसार, घट के सम्बन्ध में कुम्हार का दण्ड क्या है? - निमित्त कारण
102- नैयायिकों के द्वारा प्रत्यक्ष की निर्विकल्पक स्थिति की सिद्धि होती है - अनुमान के द्वारा
103- वैशेषिक के अनुसार, एक घट का असमवायीकारण है? - घट के अंशों का संयोजन
104- 'पर्वतः वह्निमान धूमात्' इस अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - व्याप्यत्वासिद्ध
105- वैशेषिक के अनुसार कौन एक त्रसरेणु के परिमाण का कारण है? - त्रसरेणुओं की संख्या
106- वैशेषिक के अनुसार आत्मा शरीर के साथ इन सम्बन्धों से रहता है - विशेषणता
107- वैशेषिक के अनुसार, ज्ञान का अभाव मानवीय आत्मा में किस सम्बन्ध में रहता है? - स्वरूप सम्बन्ध में
108- वैशेषिक दर्शन में विश्व का समवायीकारण है? – परमाणु
109- न्याय के अनुसार, किसमें भूतकाल का सचेतन सन्दर्भ और उसी वस्तु की वर्तमान दशा अपेक्षित होती है?- प्रत्यभिज्ञा
110- न्याय की किस अवधारणा के अनुसार, एक व्यक्ति भूतकाल, वर्तमान और भविष्य की वस्तुओं का अनुभव कर सकता है? - योगज से
111- 'अग्नि शीतल है, क्योंकि यह एक द्रव्य है' न्याय के अनुसार उपरोक्त तर्क में किस प्रकार का दोष है?- बाधित
112- अभाव के सन्दर्भ में, ‘जले गन्धो नास्ति' कथन में 'जल' से क्या अभिप्राय है? - अनुपयोगी
113- आकाश में 'आकाशत्व' किस भाव से निहित है? - विशेष-नित्यद्रव्य भाव से
114- न्याय के अनुसार ज्ञान के किस प्रकार का कारण आत्मा है? - समवायी कारण
115- 'पर्वत में अग्नि है, क्योंकि वहाँ नील धूम्र है न्याय के अनुसार इस अनुमान में दोष है – व्याप्यत्वासिद्ध
116- किस दर्शन सम्प्रदाय के अनुसार, अभाव का अनुभव विशेषणता सन्निकर्ष के द्वारा किया जाता है? - न्याय दर्शन
117- बरतन के मामले में कुम्भकार का जनक माना जाता है - अन्यथासिद्ध
118- द्वयणुक के उत्पादन में परमाणु संयोग की कारणता है - असमवायीकारणता
119- "संस्कारजन्य ज्ञानम्' का अभिप्राय है - स्मृति
120- भारतीय दर्शन की किस प्रणाली का विचार है कि संज्ञान का प्रामाण्य और अप्रामाण्य परत: है? - न्याय दर्शन
121- अन्योन्य अभाव की अवधारणा का प्रतिपादन किया गया है - न्याय द्वारा
122- न्याय के अनुसार, कार्य जाना जाता है - प्राग्भाव प्रतियोगी
123- चेतना आत्मा का एक आगन्तुक गुण है, यह किसने स्वीकार किया है - न्याय द्वारा
124- न्याय का कारणता सिद्धान्त कहा जाता है - असत्कार्यवाद
125- वैशेषिक मतानुसार 'पूर्व' और 'पश्चिम' की अवधारणा का कारण है – द्विक्
126- न्याय मत के अनुसार, किस सन्निकर्ष के द्वारा एक जाति के सभी सदस्यों को प्रत्यक्ष प्राप्त करते हैं? - सामान्य लक्षण
127- किस सम्प्रदाय का मानना है कि ईश्वर विद्यमान है, परन्तु उसने विश्व का सृजन नहीं किया है?- योग दर्शन का
128- न्यायदर्शन के अनुसार कौन- सा प्रमाण अभाव के ज्ञान का साधन है?- प्रत्यक्ष
129- 'जाति उतनी वास्तविक है जितना कि व्यक्ति' यह विचार किसका है? - न्याय सम्प्रदाय
130- वैशेषिक के अनुसार, जगत का समवायीकरण है - परमाणु
131- पद और पदार्थ के बीच सम्बन्ध के बारे में नैयायिकों का क्या मत है? - शक्ति एवं लक्षणा
132- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
न्याय कुसुमांजलि
गंगेश
तत्वचिन्तामणि
उदयन
योगसूत्र
पतंजलि
मीमांसा सूत्र
जैमिनी

133- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
पर्वत पर आग है
प्रतिज्ञा
क्योंकि वहाँ धुआँ है
हेतु
पर्वत पर धुआँ है
उपनय
इसलिए पर्वत पर आग है
निगमन

134- सुमेलित
सूची 1 (दर्शन)
सूची 2 (प्रमाण की संख्या)
चार्वाक
एक
बौद्ध
दो
न्याय
चार

135- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
न्याय भाष्य
वात्स्यायन
न्याय वार्तिक
उद्योतकर
न्याय मंजरी
जयन्त
तत्व चिन्तामणि
गंगेश

136- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
हेतु सभी भावात्मक उदाहरणों, जिसमें साध्य है, में अवश्य विद्यमान होगा
सपक्षसत्व
हेतु पक्ष के साथ असंगत नहीं होगा
अबाधित
हेतु पक्ष में विद्यमान होगा
पक्षधर्मता
हेतु सभी अभावात्मक उदाहरणों, जिनमें साध्य नहीं, में विद्यमान नहीं होगा
विपक्षसत्व

137- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
पक्षधर्मता
पर्वत पर धूम्र है
विपक्षसत्व
जलाशय में अग्नि है
बाधित
अग्नि शीतल है
विरुद्ध
शब्द शाश्वत है, क्योंकि वह उत्पन्न होता है

138- सुमेलित

सूची 1
सूची 2
पर-सामान्य
सत्ता
अपर-सामान्य
घटत्व
परापर-सामान्य 
द्रव्यत्व
उपाधि
इंद्रियत्व
139- निम्नलिखित में कौन-सा वाक्य असत्य है?
(a) न्याय दर्शन में पद को शक्त कहा गया है।
(b) नैयायिकों ने पदों के दो वर्गीकरण प्रस्तुत किए।
(c) नैयायिकों के अनुसार वैदिक पदों की रचना अलौकिक मानव/ ईश्वर ने की थी।
(d) नैयायिकों के अनुसार लौकिक पदों की रचना भी ईश्वर ने ही की थी।
उत्तर – d
140- निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) न्याय दर्शन में अनुमान को अयथार्थ ज्ञान की प्राप्ति के साधन के रूप में स्वीकार किया गया है।
(b) हेत्वाभास का सम्बन्ध अनुमान के दोष से है।
(c) हेत्वाभास का अर्थ होता है कि वस्तु देखने में तो हेतु के समान है परन्तु वास्तव में हेतु नहीं है।
(d) नैयायिकों के अनुसार दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में पाँच प्रकार के वास्तविक दोष उत्पन्न होते हैं।
उत्तर – a
141- निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) न्याय दर्शन अनीश्वरवादी है।
(b) न्याय दर्शन ईश्वरवादी दर्शन है।
(c) नैयायिकों के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
(d) नैयायिकों की मान्यता है कि ईश्वर की कृपा से ही मानव मोक्ष प्राप्त करने में सफल होता है।
उत्तर – a
142- निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद थे।
(b) वैशेषिक दर्शन में 'विशेष' नामक पदार्थ की विशुद्ध रूप से विवेचना है, इसलिए यह दर्शन वैशेषिक कहलाता है।
(c) वैशेषिक साहित्य पर कणाद का 'वैशेषिक सूत्र' प्रमुख ग्रन्थ है।
(d) वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद, गौतमबुद्ध के गुरु थे।
उत्तर – d
143- वैशेषिक दर्शन के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) कर्म द्रव्य का सक्रिय रूप तथा गुण द्रव्य का निष्क्रिय रूप है।
(b) कर्म या क्रिया चार प्रकार की होती है।
(c) कर्म का निवास सर्वव्यापी द्रव्यों (जैसे-आकाश) में नहीं होता क्योंकि वे स्थान परिवर्तन से शून्य हैं।
(d) वैशेषिक दर्शन में गुणों की संख्या 24 है।
उत्तर – b
144- वैशेषिक के अनुसार निम्नलिखित पदार्थों में से किस एक में सामान्य नहीं होता?
(a) द्रव्य
(b) गुण
(c) कर्म
(d) समवाय
उत्तर – d
145- सामान्य के अन्तर्गत द्रव्यत्व किसका उदाहरण है?
(a) पर
(b) अपर
(c) पर-अपर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – c
146- वैशेषिकों के अनुसार निम्नलिखित पदार्थों में से किसमें सामान्य नहीं होता?
(a) द्रव्य
(b) विशेष
(c) गुण
(d) कर्म
उत्तर – b
147- असत्कार्यवाद के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) असत्कार्यवाद वैशेषिक दर्शन का कारण कार्य नियम है।
(b) वैशेषिक के अनुसार कारण नियत पूर्ववर्ती होता है।
(c) इस सिद्धान्त को आरम्भवाद भी कहा जाता है, क्योंकि यह कार्य को एक नवीन उत्पत्ति मानता है।
(d) असत्कार्यवाद का सिद्धान्त भारतीय दर्शन में सिर्फ वैशेषिक दर्शन में मिलता है।
उत्तर – d
148- निम्नलिखित कथनों में असत्य कथन कौन-सा है?
(a) परमाणुकारणवाद न्याय-वैशेषिक दर्शन का एक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है।
(b) महर्षि गौतम के अनुसार जिसे और अधिक विभाजित न किया जा सके, वही परमाणु है।
(c) न्याय-वैशेषिक में पाँच प्रकार के परमाणु को स्वीकार किया गया है।
(d) प्रत्येक परमाणु का अपना एक विशेष महत्त्व होता है।
उत्तर – c
149- वैशेषिक परमाणुवाद के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सही है?
(a) यह परमाणुओं में संख्या भेद और गुण भेद दोनों मानता है।
(b) यह परमाणुओं में केवल संख्या भेद मानता है।
(c) यह परमाणुओं में केवल गुण भेद मानता है।
(d) यह परमाणुओं में न तो गुण भेद मानता है न ही संख्या भेद।
उत्तर – a
150- न्याय दार्शनिकों के अनुसार बाह्य प्रत्यक्ष के चरण का क्रम है
(a) प्रत्यभिज्ञा, निर्विकल्प प्रत्यक्ष, सविकल्प प्रत्यक्ष
(b) निर्विकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा, सविकल्प प्रत्यक्ष
(c) निर्विकल्प प्रत्यक्ष, सविकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा
(d) सविकल्प प्रत्यक्ष, निर्विकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा
उत्तर – c
151- न्याय दर्शन के पदार्थ अनुमान में पाँच क्रमबद्ध अवयव होते हैं
(a) दृष्टान्त, उपनय, निगमन, प्रतिज्ञा तथा हेतु
(b) उपनय, दृष्टान्त, निगमन, हेतु तथा प्रतिज्ञा
(c) प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, निगमन तथा उपनय
(d) प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन
उत्तर – d
152- निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
(a) पर्वत पर आग है--हेतु
(b) क्योंकि वहाँ धुआँ है--उपनय
(c) पर्वत पर धुआँ है-उपनय
(d) इसलिए पर्वत पर आग है-प्रतिज्ञा
उत्तर – c
153- निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म असंगत है?
(a) 'पर'-सत्ता
(b) 'अपर'--'घटत्व'
(c) 'पर-अपर'--'द्रव्यत्व'
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – d
154- निम्नलिखित में कौन-सा युग्म असंगत है?
(a) आकांक्षा-पदों की परस्पर अपेक्षा
(b) योग्यता-पदों का व्यवधान रहित पूर्वा पर क्रम से उच्चारण
(c) सन्निधि-पदों का व्यवधान रहित पूर्वा पर क्रम से उच्चारण
(d) तात्पर्य ज्ञान-वक्ता के अभिप्राय को समझना
उत्तर – b
155- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? सही कूट चुनिए
( a ) साधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपसिद्ध
( c ) विरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – b
156- न्याय-ज्ञानमीमांसा के अनुसार अधोलिखित में किस प्रकार का अनुमान है?
जो ज्ञेय है वह अभिधेय है
घट ज्ञेय है
यह अभिधेय है ।
( a ) पूर्ववत्
( b ) शेषवत्
( c ) कैवलान्वयी
( d ) केवल - व्यतिरेकी
उत्तर – c
157- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है?
यज्ञ स्वर्ग का कारण नहीं है,
क्योंकि यह क्रियान्वात् है।
( a ) सव्यभिचार
( b ) असिद्ध
( c ) निरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – d
158- न्याय के अनुसार, चाक्षुष इन्द्रिय की वस्तुएँ स्पर्शेन्द्रिय की वस्तुएँ भी होती हैं सिवाय
( a ) केवल रूप
( b ) केवल रूपत्व
( c ) रूप और रूपत्व दोनों
( d ) रूप और स्पर्श दोनों
उत्तर – c
159- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? निम्नलिखित में से सही कूट का चयन कीजिए
मृमण्य : पर्वत : वह्निमान
( a ) असाधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपसिद्ध हेत्वाभास
( c ) आश्रयसिद्ध हेत्वाभास
( d ) विरुद्ध
उत्तर – c
160- निम्नलिखित में से कौन वैशेषिक दर्शन के अनुकूल नहीं है?
( a ) प्रत्यक्ष प्रमाण है।
( b ) अनुमान प्रमाण है।
( c ) शब्द प्रमाण है।
( d ) शब्द स्वतन्त्र प्रमाण है।
उत्तर – d
161- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? निम्नलिखित में से सही कूट का चयन कीजिए
( a ) आश्रयासिद्ध
( b ) बाधित
( c ) विरुद्ध
( d ) सत्प्रतिपक्ष
उत्तर – b
162- निम्नलिखित अनुमान में कौन-सा हेत्वाभास है? सही कूट का चयन करें
शब्द अनित्य चाक्षुषत्वात्
( a ) स्वरूपासिद्ध हेत्वाभास
( b ) बाधित हेत्वाभास
( c ) विरुद्ध हेत्वाभास
( d ) सव्यभिचार हेत्वाभास
उत्तर – a
163- निम्नलिखित में से कौन व्याप्तिग्रह एक साधन नहीं है?
( a ) तर्क
( b ) सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष
( c ) आप्तवाक्य
( d ) उपाधिनिरास
उत्तर – c
164- निम्नलिखित अनुमान द्वारा किस प्रकार का हेत्वाभास किया जाता है? सही कूट का चयन करें ,
यह प्राणि अवश्य रूप से एक गाय होनी चाहिए क्योंकि इसमें घोड़त्व है।
( a ) सत्प्रतिपक्ष
( b ) सव्यभिचार
( c ) विरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – c
165- वैशेषिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन एक नित्यद्रव्य नहीं है?
( a ) परमाणु
( b ) द्वयणुक
( c ) मनस
( d ) द्विक्
उत्तर – b
166- निम्नलिखित में से कौन वैशेषिकों को स्वीकार्य नहीं है?
( a ) वेद की रचना किसी के द्वारा नहीं की गई है।
( b ) तत्त्वज्ञान निःश्रेयस के लिए पर्याप्त शर्त नहीं।
( c ) अभाव का प्रत्यक्ष हो सकता है।
( d ) ईश्वर एक प्रकार की आत्मा है।
उत्तर – a
167- न्याय में अपवर्ग सन्दर्भ में सही क्रम का चयन कीजिए
( a ) दु:ख, प्रवृत्ति, दोष, जन्म, मिथ्याज्ञान
( b ) मिथ्याज्ञान, दोष, प्रवृत्ति, जन्म, दु:ख
( c ) जन्म, दुःख, प्रवृत्ति, दोष, मिथ्याज्ञान
( d ) जन्म, दु:ख, मिथ्याज्ञान, प्रवृत्ति, दोष
उत्तर – b
168- नैयायिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन पंचावयवीन्याय का अवयव नहीं है?
( a ) उदाहरण
( b ) उपनय
( c ) उपमान
( d ) निगमन
उत्तर – c
169- नैयायिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन वाक्यार्थ ज्ञान की शर्त नहीं है?
( a ) व्याकरण
( b ) तात्पर्य
( c ) आकांक्षा
( d ) आसत्ति
उत्तर – a
170- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? सही कूट का चयन कीजिए
'पर्वत : वह्निमान नीलधूमात '
कूट
( a ) साधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपासिद्ध
( c ) व्याप्यत्वासिद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – c
171- वैशेषिकों के अनुसार सत्ता सामान्य निम्नलिखित में से किसमें है?
( a ) द्रव्य, गुण और कर्म में
( b ) द्रव्य, गुण, कर्म और सामान्य में
( c ) गुण और कर्म में
( d ) द्रव्य और गुण में
उत्तर – a
172- निम्नलिखित में से कौन-सा मूर्तद्रव्य नहीं है?
( a ) मरुत
( b ) मनस
( c ) आत्मन
( d ) क्षिति
उत्तर – d
173- केवल नित्य मूर्तद्रव्य को वर्णित करने वाले कूट का चयन कीजिए
( a ) क्षिति, मनस, आकाश
( b ) द्विक्, काल, आत्मा
( c ) क्षिति के परमाणु तेज और मरुत
( d ) काल, आत्मा और मनस
उत्तर – c
174- आकाश, काल और द्विक् इन सभी तीन द्रव्यों की कुछ सामान्य विशेषताएँ होती हैं। निम्न में से उस एक विशेषता का चयन कीजिए, जो उन सभी विशेषताओं का सही-सही उल्लेख करता है?
( a ) एक, भौतिक (भूत) और नित्य
( b ) एक, नित्य और मिश्रित
( c ) एक, सर्वव्यापी और नित्य
( d ) अनेक, सर्वव्यापी और नित्य
उत्तर – d
175- निम्न में से कौन नित्य द्रव्य नहीं है?
( a ) आत्मा
( b ) आकाश
( e ) विशेष
( d ) काल
उत्तर – c
176- न्याय के लिए कौन-सा कथन स्वीकार्य नहीं है?
( a ) इन्द्रियार्थसन्निकर्ष जन्यम् ज्ञानम् प्रत्यक्षम्
( b ) द्रव्याश्रिता ज्ञेया निर्गुणा निष्क्रिया गुणा :
( c ) संदिग्धसाध्यवान पक्षः
( d ) अर्थक्रियासामर्थ्य सत् का मानदण्ड है
उत्तर – a
177- किस प्रकार का हेत्वाभास निम्नलिखित अनुमान द्वारा किया जाता है? सही कूट का चयन कीजिए
'मणिमयः पर्वतः वह्निमान धूमात्
( a ) अनुपसंहारी सव्यभिचार
( b ) आश्रयासिद्ध
( c ) स्वरूपासिद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – d
178- नैयायिकों के अनुसार, सभी प्रकार की धूम्र घटनाओं को हम जान सकते हैं, मात्र
( a ) योगज प्रत्यासत्ति से
( b ) सामान्यलक्षण प्रत्यासत्ति से
( c ) ज्ञानलक्षण प्रत्यासत्ति से
( d ) समवाय सन्निकर्ष से
उत्तर – c
179- वैशेषिक के अनुसार, सृष्टि परमाणुओं के संयोग से प्रारम्भ होती है
( a ) परमाणु के स्वभाव के द्वारा
( b ) ईश्वरीय इच्छा के द्वारा
( c ) उत्पादक व्यवस्था के द्वारा
( d ) आकस्मिक
उत्तर – b
180- निम्नांकित में हेत्वाभास की पहचान करें
सभी धूम्रवान वस्तुएँ वह्निवान हैं।
पर्वत धूम्रवान हैं।
इसलिए, पर्वत वह्निवान है।
कूट
( a ) विरुद्ध
( b ) प्रकरणसम
( c ) असिद्ध
( d ) सव्यभिचार
उत्तर – d
181- कौन-से भूतद्रव्य नित्य हैं?
( a ) केवल आकाश
( b ) केवल मारुत
( c ) क्षिति, अप, तेज, मारुत के परमाणु
( d ) आकाश और क्षिति, अप, तेज और मारुत के परमाणु
उत्तर – d
182- वैशेषिक के अनुसार नित्य द्रव्य है
( a ) त्रयणुक
( b ) आत्मा
( c ) द्वयणुक
( d ) कर्म
उत्तर – b
183- निम्नलिखित में से कौन-सा सम्बन्ध नहीं है?
( a ) स्वरूप
( b ) अपृथसिद्धि
( c ) गुण
( d ) समवाय
उत्तर – a
184- नैयायिकों के अनुसार द्विक, आत्मा और मनस हैं
( a ) भौतिक
( b ) मूर्त
( c ) ' a ' और ' दोनों
( d ) न तो ' a ' और न ही
उत्तर – d
185- न्याय-वैशेषिक के अनुसार, सामान्य अवस्थित है
( a ) गुण, सामान्य और विशेष में
( b ) द्रव्य, गुण और कर्म में
( c ) द्रव्य, कर्म और अभाव में
( d ) केवल द्रव्य में
उत्तर – b
186- न्याय के अनुसार निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का दोष है? सही विकल्प का चयन कीजिए अनुमान शाश्वत अणुओं से निर्मित होने के कारण जगत शाश्वत है।
( a ) विरुद्ध
( b ) कालातीत
( c ) सत्प्रतिपक्ष
( d ) सव्यभिचार
उत्तर – a
187- वैशेषिक मत के सन्दर्भ में उस विकल्प का चयन करें जिसके अनुसार द्रव्य न तो अमूर्त है न मूर्त
( a ) आकाश, काल, द्विक्
( b ) काल, दिक्, आत्मा
( c ) दिक्, आत्मा, मनस
( d ) आकाश, आत्मा, काल
उत्तर – b
188- वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में निम्नलिखित में से कौन नित्य द्रव्य नहीं है?
( a ) परमाणु
( b ) द्वयणुक
( c ) काल
( d ) मनस
उत्तर – b
189- निम्नलिखित उदाहरण में हेत्वाभास है, जिसे इस रूप में जाना जाता है "शब्द नित्य हैं, क्योंकि उसमें शब्दत्व है।"
( a ) साधारण अनेकान्तिक के रूप में
( b ) असाधारण अनेकान्तिक के रूप में
( c ) अनुपसंहारी अनेकान्तिक के रूप में
( d ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर – b
190- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दर्शन का मुख्य उद्देश्य जीवन के दुःखों का किस तरह से नाश हो, इसका उपाय निकालना है।
2. न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि गौतम का पूरा नाम मेधातिथि गौतम है।
3. न्याय दर्शन में सात पदार्थों के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
191- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. प्राचीन समय का न्याय-प्राचीन न्याय तथा आधुनिक काल का न्याय नव्य न्याय कहलाता है।
2. नव्य न्याय का प्रारम्भ गणेश की तत्त्व चिन्तामणि से हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
192- निम्नलिखित कथनों पर न्याय दर्शन के अन्तर्गत विचार कीजिए
1. यथार्थ अनुभव को अप्रमा कहा जाता है।
2. किसी वस्तु के अन्यथा अनुभव को प्रमा करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
193- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दर्शन ज्ञान को अनुभव कहता है।
2. न्याय दर्शन में प्रमा के तीन भेद होते हैं।
3. न्याय दर्शन में अप्रमा के चार भेद होते हैं।
कूट
(a) केवल 1
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
194- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सीप को चाँदी के रूप में देखना विपर्यय का एक उदाहरण है।
2. विपर्यय में ज्ञान का वस्तु से संवाद होता है।
3. विपर्यय अप्रमा का एक प्रकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – c
195- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार ज्ञान का एक ही प्रकार है- यथार्थ ज्ञान।
2. न्याय दर्शन में यथार्थ ज्ञान को प्राप्त करने के लिए चार स्वतन्त्र प्रमाण स्वीकार किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
196- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. भारतीय दर्शन में कुल 6 इन्द्रियाँ मानी गई हैं।
2. मन को आन्तरिक इन्द्रिय कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
197- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार बाह्य प्रत्यक्ष तीन चरणों में सम्पन्न होता है।
2. निर्विकल्प प्रत्यक्ष बाह्य प्रत्यक्ष की दूसरी अवस्था है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
198- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जब इन्द्रिय अर्थ सन्निकर्ष साधारण ढंग से होता है, तो इसे लौकिक प्रत्यक्ष कहते हैं।
2. जब इन्द्रिय अर्थ सन्निकर्ष असाधारण ढंग से होता है, तो इसे अलौकिक प्रत्यक्ष कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
199- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अनुमान के तीन अवयव होते हैं- हेतु, साध्य तथा पक्ष
2. हेतु का प्रत्यक्ष करके अनिवार्य सम्बन्ध के आधार पर पक्ष में साध्य का ज्ञान प्राप्त होना ही अनुमान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
200- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जो अनुमान स्वयं के लिए किया जाता है, उसे परार्थ अनुमान कहते हैं।
2. जो अनुमान पाँच अवयवों-प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन का प्रयोग करते हुए अन्य को ज्ञान प्राप्त कराने के लिए किया जाता है, उसे स्वार्थ अनुमान कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
201- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार पदार्थ अनुमान का चौथा चरण उपनय ही तृतीय लिंग परामर्श कहलाता है तथा इसी के आधार पर साध्य का ज्ञान प्राप्त होता है।
2. पंचअवयव अनुमान का परार्थ अनुमान के अन्तर्गत आते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
202- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. व्याप्ति से तात्पर्य है- हेतु एवं साध्य का व्यापक सम्बन्ध।
2. व्याप्ति के तीन प्रकार होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
203- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जब समान विस्तार वाले दो पदों में व्याप्ति सम्बन्ध होता है अर्थात् व्यात्य से व्यापक का अनुमान सम्भव हो तथा व्यापक से व्यात्य का भी अनुमान सम्भव हो तभी दोनों पदों में व्याप्ति सम व्याप्ति कहलाती है।
2. न्यूनाधिक विस्तार वाले दो पदों में जब व्याप्ति का सम्बन्ध होता है तो उसे विषम व्याप्ति या असम व्याप्ति कहते हैं।
कूट
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
204- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. सादृश्यता के प्रत्यक्ष से नाम (संज्ञा) और नामी (संज्ञी) के सम्बन्ध का ज्ञान कराने वाले प्रमाण को शब्द कहते हैं।
2. पद और वाक्य का अर्थ जानने से जो ज्ञान प्राप्त होता है, ज्ञान के उस प्रमाण को उपमान कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
205- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कभी-कभी जब दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में जो दोष पैदा हो जाते हैं, तो अनुमान के दोष को हेत्वाभास कहते हैं।
2. नैयायिकों के अनुसार दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में तीन प्रकार के वास्तविक दोष उत्पन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं? -
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2 6
उत्तर – a
206- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. न्याय दर्शन का आत्मा का ही एक विशेष रूप मानता है।
2. नैयायिक के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
3. न्याय दर्शन के अनुसार ईश्वर की कृपा से ही मोक्ष सम्भव है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
कूट
(a) 1 और 2
(c) 1 और 3
(b) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
207- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बौद्ध दर्शन के अनुसार प्रत्येक प्रमाण का क्षेत्राधिकार अलग है।
2. बौद्ध दर्शन में दो प्रमाण हैं-प्रत्यक्ष तथा अनुमान।
3. न्याय दर्शन में प्रमाण की संख्या चार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
208- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय के भ्रम के व्याख्यान का नाम विपरीत ख्याति है।
2. कुमारिल और नैयायिक दोनों ही भ्रम को अन्यथाज्ञान या मिथ्याज्ञान मानते हैं।
3. कुमारिल यथार्थता को ज्ञान का स्वरूप मानते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – b
209- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कुमारिल और नैयायिक दोनों ही भ्रम को अन्यथाज्ञान या मिथ्याज्ञान मानते हैं।
2. न्याय के भ्रम के व्याख्यान का नाम ही अन्यथाख्याति है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
210- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक साहित्य पर कणाद का वैशेषिक सूत्र प्रमुख ग्रन्थ है।
2. वैशेषिक दर्शन में परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति हेतु तत्त्व ज्ञान को आवश्यक नहीं माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
211- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन में पदार्थ के सात प्रकार बनाए गए हैं।
2. वैशेषिक सूत्र के भाष्यकार प्रशस्तपाद के अनुसार, पदार्थ वह है जो सत् है, ज्ञेय है तथा अभिधेय है। " ..
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
212- वैशेषिक दर्शन के सन्दर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. द्रव्य, गुण तथा क्रिया का आधार तथा समस्त सावयव वस्तुओं का उपादान कारण है।
2. वैशेषिक के अनुसार कुल द्रव्य 9 हैं, जिसमें पंचमहाभूतों के अन्तर्गत सिर्फ आकाश के परमाणु नहीं होते हैं।
3. वैशेषिक के अनुसार परमाणु के नष्ट होने पर परमाणु भी नष्ट हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही है/ हैं?
(a) 1 और 3
(b) 1 और 2
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – b
213- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, सुख, दुःख तथा ज्ञान आत्मा के 6 गुण हैं।
2. वैशेषिक दर्शन में कुल 24 गुणों का उल्लेख किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
214- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कर्म का निवास सर्वव्यापी द्रव्यों (जैसे-आकाश) में नहीं होता, क्योंकि वे स्थान परिवर्तन से शून्य है।
2. कर्म द्रव्य का निष्क्रिय रूप तथा गुण द्रव्य का सक्रिय रूप है।
3. द्रव्य की दो विशेषताएँ होती हैं- सक्रियता तथा निष्क्रियता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1, 2 और 3
(b) 2 और 3
(c) केवल 2
(d) 1 और 3
उत्तर – d
215- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सामान्य वह पदार्थ है, जिसके कारण एक ही प्रकार के विभिन्न व्यक्तियों या वस्तुओं को एक जाति के अन्दर रखा जाता है।
2. सामान्य की तीन श्रेणियाँ हैं-पर, अपर, पर-अपर।
3. सत्ता पर सामान्य का उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
216- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. एक ही प्रकार के दो परमाणुओं का विभेदक समवाय कहलाता है।
2. वैशेषिकों के अनुसार दो पदार्थों के बीच समवाय सम्बन्ध पाया जाता है। यदि उन्हें पृथक् किया जाए तो उनमें से एक का विनाश अपरिहार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
217- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन के अनुसार किसी स्थान विशेष, काल विशेष में किसी वस्तु का उपस्थित नहीं होना 'अभाव' है।
2. शंकर के अनुसार, वैशेषिक के बहुतत्त्ववाद से सांख्य का द्वैतवाद बेहतर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
218- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. विशेष वह पदार्थ है जो एक ही प्रकार के दो नित्य द्रव्यों का विभेदक है।
2. वैशेषिकों ने समवाय को एक भाव पदार्थ के रूप में स्वीकार किया है।
3. वैशेषिकों के अनुसार जिन दो पदार्थों के बीच समवाय सम्बन्ध पाया जाता है, यदि उन्हें पृथक् किया जाए तो उनमें से एक का विनाश अपरिहार्य है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
कूट
(a) 1, 2 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1 और 2
उत्तर – a
219- असत्कार्यवाद के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही है?
1. असत्कार्यवाद योग दर्शन का कारण कार्य नियम है।
2. वैशेषिक दर्शन के अनुसार कारण नियत पूर्ववर्ती होता है।
3. असत्कार्यवाद को 'आरम्भवाद' भी कहा जाता है।
कूट
(a) 1, 2 और 3
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर – c
220- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. असत्कार्यवाद वैशेषिक दर्शन का कारण-कार्य नियम है।
2. कारण किसी वस्तु का पूर्ववर्ती एवं कार्य उत्तरवर्ती होता है, परन्तु सभी पूर्ववर्ती को कारण नहीं कहा जा सकता है।
3. वर्षा के पूर्व आकाश में बादल का रहना नियत पूर्ववर्ती का उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
221- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन में कारण के तीन प्रकार माने गए हैं- समवायी, असमवायी तथा निमित्त।
2. घड़े एवं मिट्टी का सम्बन्ध समवायी कारण का उदाहरण है।
3. जिसके बिना कार्य उत्पन्न ही न हो सके, उसे असमवायी कारण कहते हैं।
उपरोक्त कथनों में से सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
222- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. महर्षि गौतम के अनुसार जिसे और अधिक विभाजित किया जा सके, वही परमाणु है।
2. वैशेषिक के अनुसार संख्यात्मक दृष्टि से परमाणु अनन्त हैं तथा सभी परमाणु स्वभावतः निष्क्रिय हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
223- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय-वैशेषिक में चार प्रकार के परमाणु को स्वीकार किया गया है- पृथ्वी, अग्नि, जल तथा वायु के परमाणु।
2. वायु के परमाणु में स्पर्श का गुण पाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
224- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन के अनुसार परमाणुओं के संयोग से जगत की उत्पत्ति हुई है, परन्तु साथ में यह भी कहा गया कि यह सृष्टि ईश्वर की इच्छा से स्वयं ईश्वर द्वारा रचित है।
2. वैशेषिक का परमाणुकारणवाद, ईश्वरवाद तथा अनीश्वरवाद का समन्वय करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
225- न्याय दर्शन में प्रमा के भेद हैं -
1. प्रत्यक्ष
2. अनुमिति
3. उपमिति
3. शब्द
कूट
(a) 1, 2 केवल 3
(b) 2,3 तथा 4
(c) 1, 3 और 4
(d) 1,2,3 तथा 4
उत्तर – d
226- वैशेषिक दर्शन के अनुसार कर्म के प्रकार हैं
1. उत्प्रेक्षण
2. अवक्षेपण
3. संकुचन
3. प्रसारण
5. गमन
कूट
(a) 1, 2, 3 और 4
(b) 2, 3, 4 और 5
(c) 1, 2, 3, 4 और 5
(d) 2,3 और 4
उत्तर – c
227- न्याय-वैशेषिक दर्शन में परमाणु है
1. पृथ्वी
2. अग्नि
3. जल
3. वायु
5. आकाश
कूट
(a) 2, 3, 4 और 5
(b) 1, 2, 3 और 4
(c)2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर – b
228- नैयायिकों के अनुसार किन इन्द्रियों के द्वारा हम बाह्य द्रव्यों का अनुभव करते हैं?
1 . चाक्षुष
2 . स्पर्श
3 . श्रवण
4 . स्वाद
कूट
( a ) केवल 1
( b ) 1 और 2
( c ) 2 और 3
( d ) 3 और 4
उत्तर – b
229- न्यायमत के अनुसार, अणु निष्क्रिय और गतिहीन हैं। यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है
1 . आत्मा में रहने वाले धर्म एवं अधर्म के अनुरूप अदृष्ट द्वारा अणुओं में गति प्रदान की जाती है।
2 . अणुओं का संयोग ज्यामितीय प्रगति में होता है न कि अंकगणितीय तरीके में
3 . भौतिक व्यवस्था के पीछे एक नैतिक व्यवस्था होती है।
कूट
( a ) 1 वैध अनुमान है
( b ) 2 अवैध अनुमान है
( c ) 1 और 3 वैध अनुमान हैं
( d ) 1, 2 और 3 वैध अनुमान हैं
उत्तर – d
*निर्देश - नीचे दिए कथन एवं कारणों को ध्यानपूर्वक पढ़कर कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए
कूट
(a) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
(b) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
(c) A सही है, किन्तु R गलत है
(d) A गलत हैं, किन्तु R सही है
230- कथन (A) न्याय दर्शन का अन्तिम उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है।
कारण (R) न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि गौतम थे।
उत्तर – b
231- कथन (A) पहाड़ पर आग है, क्योंकि वहाँ धुआँ दिख रहा है।
कारण (R) अनुमान का आधार पूर्व में किए गए अनुभव हैं।
उत्तर – a
232- कथन (A) न्याय दर्शन ईश्वरवादी है।
कारण (R) नैयायिकों के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
उत्तर – a
233- कथन (A) न्याय-वैशेषिक दर्शन में अभाव एक स्वतन्त्र पदार्थ है।
कारण (R) अभाव इन्द्रिय गोचर है।
उत्तर – a
234- कथन (A) न्याय के अनुसार सामान्यों की संख्या सात है।
कारण (R) न्याय सात पदार्थों को स्वीकार करता है।
उत्तर – d
235- कथन (A) विशेष नित्य हैं।
कारण (R) वे असंख्य हैं।
उत्तर – b
236- कथन (A) अनुमान वैध मान का स्रोत नहीं है।
कारण (R) व्याप्ति की स्थापना असम्भव है।
उत्तर – a
237- कथन (A) वैशेषिकों के अनुसार, कर्म द्रव्यों का कारण नहीं होता।
कारण (R) द्रव्योत्पत्ति के पूर्व ही कर्म का अन्त हो जाता है।
उत्तर – b
238- नीचे अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिए गए हैं उन पर विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही विकल्प का चयन कीजिए
अभिकथन (A) परमाणु की सत्ता अवश्य स्वीकार की जानी चाहिए।
कारण (R) द्वयणुक सावयव है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – a
239- नीचे कथन (A) और कारण (R) दिया गया है उन पर न्याय दर्शन के परिप्रेक्ष्य में विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूट में से सही का चयन कीजिए
कथन (A) लक्षणा एक वृत्ति नहीं हो सकती है।
कारण (R) शक्ति एक वृत्ति है और शक्ति लक्षण नहीं है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही हैं , किन्तु R गलत हैं
( d ) A गलत हैं , किन्तु R सही है
उत्तर – d
240- नीचे कथन (A) और कारण (R) दिया गया हैं। इन पर न्याय वैशेषिक दर्शन के परिप्रेक्ष्य में विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूटों में से सही का चयन कीजिए
कथन (A) मुक्त आत्मा जड़ ही है।
कारण (R) मुक्त आत्मा अपनी चेतना को भी खो देती है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – d
241- कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए तथा दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन कीजिए
कथन (A) आकाशत्व की एक जाति होनी चाहिए।
कारण (R) यह आकाश की अनिवार्य विशेषता है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है ।
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – b
242- अभिकथन (A) न्याय का निष्कर्ष आधारवाक्य की तुलना में ज्यादा सामान्य नहीं हो सकता है।
कारण (R) न्याय वाक्य का निष्कर्ष तभी सत्य होता है, जब आधारवाक्य सत्य हो।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सत्य हैं , किन्तु R असत्य हैं
( d ) A असत्य है , किन्तु R सत्य है
उत्तर – b

Tuesday, May 12, 2020

वेदान्त दर्शन

वेदान्त दर्शन
1- वेदान्त दर्शन का एक अन्य नाम है - उत्तरमीमांसा
2- वह शास्त्र कौन-सा है जिसके लिए उपनिषद् ही प्रमाण है - वेदान्त
3- वेदान्त दर्शन के प्रथम ग्रन्थ ब्रह्मसूत्र के लेखक हैं - बादरायण
4- वेदान्त दर्शन के प्रमुख ग्रन्थ ब्रह्मसूत्र को कितने अध्याय में विभक्त किया गया है - चार अध्यायों में
5- वेदान्त दर्शन का आधार क्या है -  उपनिषद , ब्रह्मसूत्र एवं भगवद्गीता
6- कालड़ी ( कलादि ) जहाँ शंकराचार्य का जन्म हुआ था , किस राज्य में है - केरल में
7- कितने वर्ष की अवस्था में शंकराचार्य को चारों वेद का ज्ञान प्राप्त हुआ था - आठ वर्ष की अवस्था में
8- वेदान्त दर्शन के अन्तर्गत अद्वैतवाद के संस्थापक थे - शंकराचार्य
9- शंकराचार्य द्वारा स्थापित शारदा मठ स्थापित है - द्वारका
10- वेदान्त दर्शन से सम्बन्धित ग्रन्थ वेदान्तसार के लेखक हैं  - दयानन्द
11- किस दार्शनिक ने कहा था कि जीव और ब्रह्म अलग - अलग नहीं हैं , वे वस्तुतः अद्वैत हैं - शंकराचार्य ने
12- वेदान्त की प्रस्थानत्रयी के अन्तर्गत निम्नलिखित में से कौन शामिल है - उपनिषद् , गीता एवं, ब्रह्मसूत्र
13- अद्वैत वेदान्त में अविद्या के दो पक्षों को क्या कहा जाता है - विक्षेप और आवरण
14- अद्वैत वेदान्त के अनुसार सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण प्रमाण जो ब्रह्म का ज्ञान देता है , वह है - शब्द प्रमाण
15- शंकर के अनुसार मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है - ज्ञान से
16- "यह आत्मा ब्रह्म है" से आशय है - आत्मा तथा ब्रह्म में तादात्म्य है
17- किसने कहा था कि प्रातिभासिक सत्ता तभी हमारे लिए भ्रामक होती है , जब हम व्यावहारिक जगत में जाते हैं - शंकराचार्य ने
18- ऐसी सत्ता जिसमें हमें केवल आभास ही होता है , कहलाती है - प्रातिभासिक सत्ता
19- “ जगत व्यावहारिक दृष्टि से सत् है , लेकिन पारमार्थिक दृष्टि से असत् है " यह मत है - शंकर का
20- शंकराचार्य के अनुसार , किसके कारण ब्रह्म की प्रतीति जगत के रूप में होती है , जिस कारण शंकर इस जगत को अध्यास कहते हैं - अविद्या
21- जो सत् है , वह असत् भी नहीं है , अद्वैत वेदान्ती उसे कहते हैं - मिथ्या
22- अध्यास का विचार किसके दर्शन में दिया गया है - शंकराचार्य के दर्शन में
23- अद्वैत वेदान्त में अविद्या की दो शक्तियाँ कहलाती हैं - आवरण और विक्षेप
24- अद्वैत वेदान्त में ब्रह्म , माया और जीव में सम्बन्ध किस प्रकार का है - माया के बिना जीव और ब्रह्म रह सकते हैं, क्योंकि जीव तो ब्रह्म ही है
25- मायावाद का प्रतिपादन किसने किया - शंकर ने
26- आचार्य शंकर के अनुसार माया का निश्चय होता है - ज्ञान से
27- शंकर के अनुसार अविद्या के प्रकार हैं - 2
28- किस शक्ति के कारण शंकर ने माया को निषेधात्मक कहा है - विक्षेप के कारण
29- वृहदारण्यक भाष्य से सम्बद्ध है - शंकर का
30- विवर्तवाद सिद्धान्त का प्रतिपादन किया है - शंकर ने
31- अद्वैत वेदान्त का भ्रम सिद्धान्त क्या कहलाता है - अनिर्वचनीय ख्यातिवाद
32- अनिर्वचनीय ख्यातिवाद वस्तुतः किसको सिद्ध करने का प्रयास है - मायावाद को
33- विशिष्टाद्वैत मत के प्रतिपादक हैं - रामानुज
34- 'श्री भाष्य' किसका प्रामाणिक ग्रन्थ है - विशिष्टाद्वैत का 
35- श्री सम्प्रदाय का सम्बन्ध किससे है - रामानुज से 
36- रामानुज ने अनुसार ब्रह्म में कितने तत्त्व हैं - 3
37- विशिष्टाद्वैत प्रतिपादित करता है कि चरम तत्त्व है - विशुद्ध चैतन्य
38- रामानुज के अनुसार ब्रह्म में भेद पाया जाता है - स्वगत भेद
39- 'आश्रयानुपत्ति' रामानुज के द्वारा उठाई गई एक आपत्ति किस सिद्धान्त के विरुद्ध है - माया सिद्धान्त के
40- 'प्रमाणानुपत्ति' का सम्बन्ध है - रामानुज से
41- रामानुज के अनुसार अपृथक् सिद्धि सम्बन्ध है - केवल जीव और ब्रह्म से 
42- रामानुज के अनुसार आत्मा एवं शरीर में किस प्रकार का सम्बन्ध है - आन्तरिक अपृथक् सम्बन्ध
43- रामानुज ईश्वर अचित् अंश के कितने भेद बताता है - 3
44- रामानुज के अनुसार ब्रह्म के कितने रूप हैं - 2
45- किसने जीव को नित्यमुक्त , मुक्त और बद्ध की तीन श्रेणियों में बाँटा है - रामानुज ने
46- रामानुज के अनुसार ईश्वर है - सविशेष 
47- रामानुज के अनुसार व्यक्तिगत आत्मा है - ज्ञाता , कर्ता एवं भोक्ता
48- रामानुज के अनुसार मोक्ष का चरम साधन है - भक्ति एवं प्रपत्ति
49- रामानुज के अनुसार ईश्वर की कृपा पाने का सर्वश्रेष्ठ साधन - पूर्ण समर्पण है
50- रामानुज के अनुसार भक्ति का उदय किसके द्वारा होता है - ज्ञान एवं कर्म के द्वारा
51- रामानुज के अनुसार प्रपत्ति के कितने अंग हैं - 6
52- वह मत जिसके अनुसार सम्पूर्ण भौतिक जगत एवं व्यक्तिगत आत्माएँ ब्रह्म का वास्तविक परिणाम हैं , उसे कहते हैं - ब्रह्म परिणामवाद
53- किसने 'साधनसप्तक' को भक्ति के उदय के लिए आवश्यक माना है - रामानुज ने
54- रामानुज के अनुसार भक्तों की मुक्ति एवं सहायता के लिए ईश्वर अपने को कितने रूपों में प्रकाशित करता है - 5
55- रामानुज का भ्रम सिद्धान्त कहलाता है - सत्ख्याति
56- वेदान्त परम्परा के द्वैतवाद के प्रवर्तक हैं - मध्वाचार्य
57- किसे आनन्द तीर्थ व वायु का अवतार कहते हैं - मध्वाचार्य को
58- द्वैतवाद के प्रवर्तक मध्वाचार्य का जन्म हुआ था - उडुप्पी में
59- किसके अनुसार वैदिक देवता विष्णु ही ब्रह्म है - मध्वाचार्य के द्वारा
60- मध्वाचार्य के दर्शन में कितने प्रकार के भेद माने गए हैं - 5
61- किसे सुदर्शन चक्र का अवतार माना जाता है - निम्बार्क को
62- वेदान्त परम्परा के द्वैताद्वैतवाद दर्शन के प्रवर्तक थे - निम्बार्क
63- निम्बार्क के अनुसार निर्जीव के कितने प्रकार हैं - 3
64- श्रीमदभागवत पर सुबोधिनी टीका किसने लिखी है - वल्लभ ने
65- अविकृत - परिणामवाद की अवधारणा किसने प्रस्तुत की - वल्लभ ने
66- किसके द्वारा अनुप्रमाण और केवल प्रमाण के बीच स्पष्ट भेद किया गया था - मध्व द्वारा
67- " चाँदी जो सीपी में दिखाई पड़ती है , अवास्तविक नहीं हो सकती , क्योंकि यह दिखाई पड़ती है ; चाँदी वास्तविक भी नहीं हो सकती है , क्योंकि जब हम सीपी को ठीक से देखते हैं , तो यह वहाँ नहीं मिलती है " । यह विचार है - शंकर का
68- अद्वैत वेदान्त के अनुसार अन्तः करणवृत्ति का अर्थ है - मन की ज्ञानात्मक विधि
69- रामानुज के अनुसार अपृथक् सिद्धि किस के बीच का सम्बन्ध है - एक ओर ब्रह्म और जीव के बीच और दूसरी ओर ब्रह्म और जगत के बीच
70- शंकर की दृष्टि में ब्रह्म ज्ञान में एकमात्र प्रमाण है - शब्द
71- यह मन है , जिसके द्वारा देखा और सुना जाता है । निश्चय ही प्रत्येक वस्तु प्राप्त की जाती है या बुद्धि के प्रकाश से उसकी खोज होती है , जैसे अन्धकार में एक वस्तु दीप के प्रकाश में प्रकाशित होती है , यह विचार निम्नलिखित में से किसका है - शंकर का
72- कौन भारतीय दार्शनिक 'धर्मभूत' , 'ज्ञान' और 'धर्मीभूतज्ञान' में अन्तर बताता है - रामानुज
73- भेदाभेद का सिद्धान्त किसका है - निम्बार्क का
74- कौन दार्शनिक अविकृत परिणामवाद का समर्थन करता है - वल्लभ
75- वेदान्त में मोक्ष से अभिप्राय है - सभी आनुभविक सीमाओं से स्वतन्त्र
76- अद्वैत के अनुसार मिथ्या शब्द का अर्थ है - जगत पारमार्थिक रूप से सत नहीं है
77-"एक सीपी में दिखाई देने वाली चाँदी असत् नहीं हो सकती , क्योंकि यह दिखती है । यह चाँदी सत् भी नहीं हो सकती , क्योंकि जब हम सीपी को विधिवत देखते हैं तो यह वहाँ उपस्थित नहीं होती । " यह अवधारणा है - अद्वैती की
78- "ब्रह्म सभी वास्तविकताओं में स्वतन्त्र है । कुछ भी उसके समान अथवा उससे श्रेष्ठ नहीं है - इस विचार का समर्थन किया है - मध्व ने
79- शंकर के अनुसार जगत की स्थिति है - सदासदविलक्षण
80- रामानुज के अनुसार ईश्वर है - जगत् का अभिन्ननिमित्तोपादान कारण
81- 'मोक्ष के चार क्रम' के मत का प्रतिपादन किसने किया - मध्व ने
82- “जीवन मुक्ति यद्यपि वांछनीय है , लेकिन तार्किक रूप से युक्तिसंगत नहीं है " यह मत किनका था - रामानुज और मध्व का
83- शंकर के अनुसार मोक्ष का अन्तिम साधन है - ज्ञान और केवल ज्ञान
84- किसी शब्द का अर्थ 'जातिविशिष्ट व्यक्ति' है , यह विचार किसके द्वारा दिया गया है - जगदीश द्वारा
85- किसके अनुसार मुक्त आत्मा भक्त है -मध्व के अनुसार
86- शंकर के अनुसार , किसकी प्राप्ति होने पर जगत की व्यावहारिक सत्ता समाप्त हो जाती है - केवल ब्रह्म की परमार्थिक सत्ता
87- रामानुज के अनुसार , निर्गुण का अर्थ है - अकल्याण गुण रहित
88- मायावाद के विरुद्ध तप्तानुपपत्ति ( सात शास्त्रीय आपत्ति ) को किसने प्रख्यापित किया - रामानुज ने
89- शंकर के दर्शन को क्या कहा जाता है - अद्वैतवाद
90- विशिष्टाद्वैत दर्शन किस मुक्ति का अनुमोदन करता है - विदेह मुक्ति का
91- वल्लभ के अनुसार ब्रह्म है - सगुण मात्र
92- मध्व के अनुसार , ब्रह्म और जीव का सम्बन्ध है - भेद
93- रामानुज के अनुसार वैयक्तिक आत्मा है - ज्ञाता , कर्ता और भोक्ता
94- रामानुज के अनुसार , उस सम्बन्ध का निर्धारण करें जिसके द्वारा ब्रह्म चित और अचित से सम्बद्ध होता है - अपृथक् सिद्धि
95- रामानुज के अनुसार ' अपृथक् सिद्धि का सम्बन्ध है - ब्रह्म का जीव एवं जगत के साथ
96- किसके मतानुसार भक्ति के बिना मोक्ष प्राप्तव्य नहीं है - रामानुज के अनुसार
97- रामानुज की सतख्याति को किस नाम से जाना जाता है - यथार्थ ख्याति
98- किसे 'प्रच्छन्न बौद्ध' कहा जाता है - शंकर को
99- मध्व वेदान्त में स्वातन्त्रय का अर्थ है - जीव अपनी सत्ता ( अस्तित्व ) , ज्ञान और प्रवृत्ति ( क्रिया ) के सम्बन्ध में ईश्वर पर निर्भर है
100 - वह मुख्य बात कौन - सी है जिस पर पूर्व - मीमांसा और उत्तर मीमांसा एकमत हैं - वेद सभी ज्ञान की आधारशिला है
101- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
विशिष्टाद्वैत
रामानुज
अद्वैत वेदान्त
शंकर
द्वैत
मध्वाचार्य
शुद्धाद्वैत
वल्लभ

102- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
शृंगेरी मठ
शृंगेरी
जोशी मठ
बद्रीकाश्रम
शारदा मठ
द्वारिका
गोवर्द्धन मठ
पूरी

103- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
पंचपादिका
पद्यपाद
भामती
वाचस्पति
वेदान्तसार
दयानन्द
चित्तसुखी  
चित्तसुख

104- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
वेदान्त परभाषा
धर्मराज
पंचदशी
इष्टसिद्धि
विवरण प्रमेय संग्रह
विद्यारण्य
तत्वदीपन
अखण्डानन्द
105- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
अध्यास
शंकर
अपृथक् सिद्धि
रामानुज
भेद एवं साक्षी
मध्वाचार्य

106- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
वस्तु की अवस्तु के रूप में प्रतीति
अध्यास
सत्, असत् से परे
मिथ्या
वर्णन न हो सके
अनिर्वचनीय
एक समान रहने वाला
परमार्थ

107- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
उपरति
धर्म का पालन करना
तितिक्षा
सर्दी-गर्मी सहना
समाधान
चित्त की एकाग्रता
मुमुक्षुत्व
मोक्ष की प्राप्ति की भावना

108- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
पारमार्थिक सत्य
ब्रह्म
व्यावहारिक सत्
जगत की वस्तुएं
प्रातिभासिक सत्
रज्जु सर्प
असत्
बंध्यापुत्र

109- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
शंकर
दृग्दृश्यविवेक
रामानुज
वेदार्थसंग्रह
मध्व
अनुभाष्य
वल्लभ
भाष्य प्रकाश

110- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
पूर्व-मीमांसा
जाति शक्तिवाद
अद्वैत वेदान्त
सदसद विलक्षण
द्वैत वेदान्त
पराधीन विशेषाप्ति
विशिष्टाद्वैत वेदान्त
अपृथक सिद्धि

111- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
शंकर
अध्यास
रामानुज
नित्यविभूति
मध्व
विशेष
वल्लभ
पुष्टिमार्ग

112- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
जीवन मुक्ति
शंकर
विदेह मुक्ति
मध्व
निःश्रेयस
न्याय वैशेषिक
स्वर्ग
पूर्व-मीमांसा

113- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
सांख्य दर्शन
सत्कार्यवाद
द्वैत वेदान्त
सदसत्कार्यवाद
अद्वैत वेदान्त
विवर्तवाद
न्याय दर्शन
असत्कार्यवाद

114- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
शुद्धाद्वैत
वल्लभाचार्य
द्वैताद्वैत
निम्बार्क
अद्वैत
शंकराचार्य
द्वैत
मध्वाचार्य
115- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
सत्
मध्व
असत्
माध्यमिक बौद्ध
सदसत्
भर्तृप्रपंच
सद्सद्विलक्षण
शंकर

116- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
जीव और ब्रह्म का तादात्म्य
शंकर
जीव और ब्रह्म का सादृश्य
मध्व
ब्रह्म के विशेषण के रूप में
रामानुज
ब्रह्म के साथ भेदाभेद सम्बन्ध के रूप में जीव
निम्बार्क

117- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
ब्रह्मसूत्र
बादरायण
मीमांसा सूत्र
जैमिनी
वैशेषिक सूत्र
कणाद
योगसूत्र
पतंजलि

118- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
सांख्य
पुरुष-प्रकृति-विवेक ज्ञान
योग
असम्प्रजात समाधि
पूर्व-मीमांसा
स्वर्ग प्राप्ति
वेदान्त
प्रस्थानत्रय

119- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
प्रागाभाव
वैशेषिका
प्रमाणाभाव
मीमांसा
प्रज्ञा
वेदान्त
प्रसाणसम्प्लव
न्याय
120- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
रामानुज
श्रीभाष्य
मध्व
महाभारत तात्पर्य निर्णय
वाचस्पति मिश्र
तत्व वैशार्दी
ईश्वरकृष्ण
सांख्यकारिका

121- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
शंकर
दृगदृश्य विवेक
वल्लभ
प्रस्थानरत्नाकर
मध्व
विष्णुतत्वविनिर्णय
निम्बार्क
वेदान्त पारिजात कुसुम

122- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
शंकर
ब्रह्मसूत्र
जयराशि भट्ट
तत्वोंपप्लवसिंह
जयन्त भट्ट
न्याय मंजरी
वाचस्पति मिश्र
तत्वकौमुदी

123- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
सत्कार्यवाद
सांख्य
असत्कार्यवाद
न्याय
विवर्तवाद
अद्वैत वेदान्त
ब्रह्म परिणामवाद
विशिष्टाद्वैत

124- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
अद्वैत वेदान्त
शंकर
विशिष्टाद्वैतवाद
रामानुज
द्वैतवाद
मध्व
द्वैताद्वैतवाद
निम्बार्क
125- सुमेलित

सूची 1
सूची 2
शंकर
जीवन मुक्ति
रामानुज
प्रपत्ति
मध्व
आनन्द तारतम्य
नागार्जुन
शून्यता
126- निम्नलिखित में से कौन - सा एक शंकर की ब्रह्म सम्बन्धी अवधारणा का विवरण देता है ?
( a ) ब्रह्म माया की उपाधि है
( b ) संसार का सृष्टा होना ही ब्रह्म का सार है
( c ) ब्रह्म सत्य ज्ञान और अनन्त है
( d ) संसार के और जीवों से सृष्टा के रूप में ब्रह्म परिमित नहीं है
उत्तर - c
127- निम्नलिखित में से कौन शंकर को स्वीकार्य नहीं है ?
( a ) जीव और जीव में अभेद
( b ) जीव और ब्रह्म में अभेद
( c ) जगत ब्रह्म से अनन्य
( d ) जगत ब्रह्म से अन्य
उत्तर - a
128- शंकराचार्य ब्रह्म में स्वीकार करते हैं
( a ) सजातीय भेद
( b ) विजातीय भेद
( c ) स्वगत भेद
( d ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - d
129- शंकर के अनुसार निम्नलिखित में से कौन - सी जगत तथा ब्रह्म के सम्बन्ध की सर्वाधिक उपयुक्त व्याख्या है ?
( a ) भेद
( b ) अभेद
( c ) अनन्य
( d ) भेदाभेद
उत्तर - c
130- शंकर के अनुसार ब्रह्म तीन प्रकार के भेदों से रहित है । निम्नलिखित में से कौन - सा भेद उन तीन प्रकार के भेदों में सम्मिलित नहीं है ?
( a ) सजातीय भेद
( b ) विजातीय भेद
( c ) देश व काल में भेद
( d ) स्वगत भेद
उत्तर - c
131- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन असत्य है ?
( a ) अद्वैतवाद में ब्रह्म को एकमात्र सत्ता माना गया है
( b ) अद्वैतवाद के अनुसार आत्मा भी ब्रह्म है
( c ) अद्वैतवाद के अनुसार सांसारिक वस्तुएँ नश्वर हैं , इसलिए ब्रह्म ही केवल परमसत है
( d ) अद्वैतवाद का सिद्धान्त रामानुजाचार्य ने दिया था
उत्तर - d
132- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन असत्य है ?
( a ) शंकर सगुण ब्रह्म को भी व्यावहारिक रूप में सत् कहते हैं
( b ) शंकर जीव को व्यावहारिक सत्ता नहीं मानते हैं
( c ) पारमार्थिक सत्ता तात्विक सत्ता है जो कभी भी बाधित नहीं होती
( d ) आकाश - कुसुम प्रतिभासिक सत्ता के उदाहरण हैं
उत्तर - b
133- मेज , कुर्सी , घर इत्यादि किस सत्ता के उदाहरण हैं ?
( a ) प्रतिभासिक
( b ) व्यावहारिक
( c ) पारमार्थिक
( d ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - b
134- निम्नलिखित में से कौन - सी अध्यास की विशेषताएँ हैं ?
( a ) अध्यास अनादि
( b ) अध्यास नैसर्गिक
( c ) मिथ्या रूप
( d ) ये सभी
उत्तर - d
135- अद्वैत वेदान्त में माया का सिद्धान्त यह बताता है कि जगत
( a ) सत् है
( b ) असत् है
( c ) ' a ' और ' b ' दोनों
( d ) न सत् है न असत् वरन् अनिर्वचनीय है ।
उत्तर - d
136- शंकर के अनुसार निम्नलिखित में कौन - सा एक कथन सत्य नहीं है ?
( a ) माया अनादि है
( b ) माया अध्यास है ।
( c ) माया अनिर्वचनीय है
( d ) माया अनन्त है
उत्तर - d
137- अद्वैत वेदान्त के अनुसार माया है
( a ) वास्तविक
( b ) अवास्तविक
( c ) ' a ' और ' b ' दोनों
( d ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - d
138- माया है
( a ) भावात्मक
( b ) निषेधात्मक
( c ) ' a ' और ' b ' दोनों
( d ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - c
139- शंकराचार्य माया की अनिर्वचनीयता का प्रतिपादन करते हैं ।
( a ) सामान्य मत की दृष्टि से
( b ) पारमार्थिक दृष्टि से
( c ) ' a ' और ' b ' दोनों
( d ) तार्किक दृष्टि से
उत्तर - d
140- निम्नलिखित में कौन - सा कथन असत्य है ?
( a ) शंकर के अनुसार माया अपनी आवरण शक्ति के द्वारा ब्रह्म के स्वरूप को ढक देती है ।
( b ) शंकर माया को निर्वचनीय कहता है
( c ) शंकर के अनुसार ब्रह्म ज्ञान का निवर्तक ज्ञान है
( d ) रामानुज ने शंकर के मायावाद सिद्धान्त पर आपत्ति प्रकट की है
उत्तर - b
141- शंकर वेदान्त के अनुसार निम्नलिखित में से किसको लिंग शरीर से भिन्न कारण शरीर कहते हैं ?
( a ) अविद्या
( b ) विद्या
( c ) कर्म
( d ) धर्म
उत्तर - a
142- जीव के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन - सा कथन असत्य है ?
( a ) शंकर वेदान्त में जीव आत्मा या ब्रह्म का व्यावहारिक रूप है
( b ) जीव अभौतिक और भौतिक तत्त्वों का योग है
( c ) जीव का भौतिक तत्त्व चैतन्य है
( d ) जीव का भौतिक तत्त्व चैतन्य नहीं है ।
उत्तर - d
143- ब्रह्म मतैक्य को समझने के लिए शंकर के अनुयायी ने कौन - सा सिद्धान्त दिया 
( a ) प्रतिबिम्बवाद
( b ) अवच्छेदवाद
( c ) आभासवाद
( d ) ये सभी
उत्तर - d
144- अनिर्वचनीय ख्याति के अनुसार रज्जु - सर्प भ्रम के क्षण में
( a ) केवल रज्जु अनिर्वचनीय है
( b ) केवल सर्प अनिर्वचनीय है
( c ) समूचा ज्ञान अनिर्वचनीय है
( d ) रज्जु वचनीय है और सर्प अनिर्वचनीय है
उत्तर - c
145- शंकर के अनुसार निम्नलिखित कथनों में से कौन - सा कथन सत्य है ?
( a ) भ्रम का अधिष्ठान ही सत् है , अध्यस्त वस्तु असत् है
( b ) भ्रम का अधिष्ठान और अध्यस्त वस्तु दोनों ही सत् हैं
( c ) न तो भ्रम का अधिष्ठान सत् है और न ही अध्यस्त वस्तु सत् है
( d ) अध्यस्त वस्तु सत् है , भ्रम का अधिष्ठान असत् है ।
उत्तर - a
146- भ्रम की स्थिति में रज्जु के स्थान पर सर्प की प्रतीति होती है । अनिर्वचनीय ख्याति के अनुसार
( a ) रज्जु तथा सर्प दोनों सत् हैं
( b ) रज्जु सत् है सर्प असत् है
( c ) रज्जु व सर्प दोनों असत् हैं
( d ) रज्जु सत् है और सर्प न तो सत् और न ही असत् है
उत्तर - d
147- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन असत्य है ।
( a ) रामानुज के अनुसार ब्रह्म सगुण है ।
( b ) रामानुज के अनुसार ब्रह्म निर्गुण है ।
( c ) रामानुज के अनुसार श्रुतियों में निर्गुण शब्द का अर्थ केवल यह है कि ब्रह्म हेय गुणों से रहित है ।
( d ) रामानुज के अनुसार ब्रह्म में तीन तत्व हैं - चित , अचित् तथा ईश्वर
उत्तर - b
148- निम्नलिखित में से किसके दर्शन में निमित्त एवं उपादान कारक पृथक् हैं ?
( a ) शंकर
( b ) रामानुज
( c ) मध्वाचार्य
( d ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - b
149- निर्गुण ब्रह्म की अवधारणा का खण्डन करते हैं
( a ) शंकर
( b ) मध्व
( c ) रामानुज
( d ) निम्बार्क
उत्तर - c
150- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन असत्य है ?
( a ) रामानुज शंकर के मायावाद का खण्डन करते है ।
( b ) रामानुज माया को ब्रह्म की वास्तविक शक्ति मानते है , जिसके द्वारा वे सृष्टि की रचना करते हैं
( c ) रामानुज सात आक्षेप या सप्तानुपत्ति के आधार पर मायावाद का खण्डन करते हैं ।
( d ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर - d
151- माया के बारे में रामानुज का कौन - सा मत सही है ?
( a ) यह भ्रामक सृष्टि की शक्ति है , जो ईश्वर में है ।
( b ) यह वास्तविक सृष्टि की शक्ति है , जो ईश्वर में है
( c ) यह वास्तविकता की प्रतीति है , जो ईश्वर है
( d ) यह विश्व के समरूप है , जो कि मिथ्या है ।
उत्तर - b
152- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन असत्य है ?
( a ) रामानुज के अनुसार ब्रह्म एवं जीव में अपृथक् सिद्धि सम्बन्ध है ।
( b ) रामानुज के अनुसार जीव एवं जगत ईश्वर बिना नहीं रह सकते ।
( c ) रामानुज के अनुसार ईश्वर , जीव एवं जगत के बिना नहीं रह सकते
( d ) रामानुज के अनुसार जीव एवं जगत ईश्वर के बिना रह सकते हैं
उत्तर - d
153- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन सत्य है ?
( a ) शंकर ब्रह्म एवं जीव में भेद मानते हैं ।
( b ) रामानुज के अनुसार जीव स्वरूपतः ब्रह्म से भिन्न नहीं है ।
( c ) रामानुज के अनुसार ब्रह्म एवं जीव में अपृथक्सिद्धि सम्बन्ध है
( d ) रामानुज द्वारा प्रतिपादित अपृथक्सिद्धि सम्बन्ध की धारणा दोषरहित है
उत्तर - c
154- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन असत्य है ?
( a ) रामानुज की सृष्टि का आधार सत्कार्यवाद का सिद्धान्त है
( b ) रामानुज त्रय ईश्वर , चित्त एवं अचित में विश्वास करते हैं
( c ) रामानुज के अनुसार ब्रह्म ही जगत का उपादान एवं निर्मित कारण है
( d ) रामानुज ने ईश्वर के अचित अंश के दो ही भेद बताए हैं - शुद्ध सत्व , मिश्र तत्त्व ।
उत्तर - d
155- निम्नलिखित में कौन - सा कथन सत्य है ?
( a ) ईश्वर केवल अचित से विशिष्ट रहता है
( b ) ईश्वर केवल चित से विशिष्ट रहता है
( c ) ' a ' और ' b ' दोनों
( d ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर - c
156- रामानुज के अनुसार ईश्वर - जीव के बीच निम्नलिखित में से कौन - सा सम्बन्ध नहीं होता ?
( a ) अपृथक् सिद्धि सम्बन्ध
( b ) पूर्ण तथा अंश सम्बन्ध
( c ) अंश - अंशी सम्बन्ध
( d ) तादात्म्य सम्बन्ध
उत्तर - d
157- रामानुज के जीव सम्बन्धी मत के विषय में से कौन सही है ?
( a ) जीव स्वरूपत : ब्रह्म से भिन्न नहीं है
( b ) जीव गुण की दृष्टि से ब्रह्म से भिन्न है ।
( c ) जीव स्वरूपतः ब्रह्म से भिन्न है , किन्तु रूप में नहीं
( d ) जीव स्वरूप व गुण दोनों रूपों में ब्रह्म से भिन्न है
उत्तर - b
158- रामानुज के अनुसार निम्नलिखित सम्बन्धों में से ब्रह्म एवं चित - अचित के बीच कौन - सा सम्बन्ध सम्भव नहीं है ?
( a ) अंश एवं अंशी का सम्बन्ध
( b ) शरीर एवं आत्मा का सम्बन्ध
( c ) विशेषण एवं विशेष्य का सम्बन्ध
( d ) तादात्म्य का सम्बन्ध
उत्तर - d
159- रामानुज के अनुसार , ईश्वर और जीव क्या है ?
( a ) दोनों भेदपरक और विच्छेद हैं
( b ) न तो भेदपरक और न ही विच्छेद
( c ) विच्छेद्य परन्तु भेदपरक नहीं
( d ) भेदपरक परन्तु विच्छेद नहीं
उत्तर - d
160- आत्मा से सम्बन्धित निम्न कथनों में से कौन - सा रामानुज के अनुसार सत्य है ?
( a ) आत्मा नित्य एवं अनाणविक है
( b ) आत्मा नित्य एवं आणविक है
( c ) आत्मा अनित्य एवं आणविक है ।
( d ) आत्मा अनित्य और अनाणविक है
उत्तर - b
161- निम्नलिखित में से कौन - सा एक रामानुज के अनुसार आत्मा की सही स्थिति निरूपित करता है ?
( a ) ईश्वर और आत्मा में अनौपाधिक अभेद है
( b ) ईश्वर और आत्मा दो भिन्न सत्ताएँ हैं
( c ) आत्मा और शरीर अभिन्न हैं
( d ) आत्मा और ईश्वर का सम्बन्ध अवयव और अवयवी का है ।
उत्तर - d
162- निम्नलिखित कथनों में से कौन - सा कथन रामानुज के अनुसार सत्य है ?
( a ) ईश्वर सजातीय , विजातीय एवं स्वगत सभी भेदों से रहित है
( b ) ईश्वर सजातीय एवं विजातीय दोनों भेदों से रहित है
( c ) ईश्वर केवल स्वगत भेदों से रहित है ।
( d ) ईश्वर केवल सजातीय भेदों से रहित है
उत्तर - b
163- रामानुज ने माना है कि
( a ) जगत तथा आत्मा भी उतनी ही सत् है , जितना कि स्वयं ईश्वर
( b ) आत्मा उतनी ही सत् है जितना कि ईश्वर , परन्तु जगत असत् है
( c ) केवल ईश्वर ही सत् है , जगत एवं आत्मा असत् हैं
( d ) आत्मा यद्यपि सत् है , परन्तु ईश्वर द्वारा रचित एवं नष्ट की जाती है
उत्तर - a
164- रामानुज मानते हैं कि
( a ) ईश्वर ही एकमात्र द्रव्य है
( b ) आत्मा ही एकमात्र द्रव्य है ।
( c ) जगत ही एकमात्र द्रव्य है ।
( d ) ईश्वर , आत्मा तथा जगत तीनों ही द्रव्य हैं
उत्तर - d
165- निम्नलिखित में से कौन - सा सिद्धान्त रामानुज के द्वारा दिया गया है ?
( a ) नित्य - परमाणु कारणवाद
( b ) ब्रह्म परिणामवाद
( c ) प्रकृति परिणामवाद
( d ) ब्रह्म विवर्तवाद
उत्तर - b
166 ...................." का अर्थ " वह शास्त्र जिसके लिए उपनिषद ही प्रमाण है । "
( a ) वेदान्त
( b ) चार्वाक
( c ) सांख्य
( d ) योग
उत्तर - a
167- शंकराचार्य द्वारा स्थापित . . . . . . . . . मठ पुरी में स्थित है ।
( a ) शृंगेरी
( b ) जोशी
( c ) गोवर्द्धन
( d ) शारदा
उत्तर - c
168- शंकर के अनुसार . . . . . . . . . . " का ज्ञान प्रत्यक्ष , अनुमान आदि प्रमाणों की सहायता से प्राप्त नहीं किया जा सकता ।
( a ) जगत
( b ) माया
( c ) जीव
( d ) ब्रह्म
उत्तर - d
169- विवर्तवाद का सिद्धान्त शंकर ने . . . . . . . . . के परिणामवाद के का प्रतिकूलस्वरूप दिया ।
( a ) चार्वाक दर्शन
( b ) सांख्य दर्शन का
( c ) जैन दर्शन
( d ) बौद्ध दर्शन
उत्तर - b
170- रामानुज . . . . . . . . . . . आक्षेपों के आधार पर शंकर के मायावाद का खण्डन करते हैं ।
( a ) 3
( b ) 5
( c ) 7
( d ) 9
उत्तर - c
171- दार्शनिक सिद्धान्त का सही विकासक्रम है ।
( a ) विशिष्टाद्वैत , द्वैतवाद , अद्वैतवाद , द्वैताद्वैतवाद , शुद्धाद्वैतवाद
( b ) अद्वैतवाद , विशिष्टाद्वैत , द्वैतवाद , द्वैताद्वैतवाद , शुद्धाद्वैतवाद
( c ) द्वैताद्वैतवाद , शुद्धाद्वैतवाद , अद्वैतवाद , विशिष्टाद्वैत , द्वैतवाद
( d ) द्वैताद्वैतवाद , शुद्धाद्वैतवाद , विशिष्टाद्वैत , द्वैतवाद , अद्वैतवाद
उत्तर - b
172- निम्नलिखित में से कौन - सा युग्म सही सुमेलित है ?
( a ) शंकराचार्य विशिष्टाद्वैत
( b ) रामानुजाचार्य शुद्धाद्वैत
( c ) मध्वाचार्य - द्वैतवाद
( d ) बल्लभाचार्य - अद्वैतवाद
उत्तर - c
173- निम्नलिखित में से कौन - सा युग्म सही समेलित है ?
( a ) प्रातिभासिक सत्ता - कल्पनालोक
( b ) व्यावहारिक सत्ता जाग्रतावस्था
( c ) ए भार्थिक सत्ता - अबाधित
( d ) उपरोक्त सभी
उत्तर - d
174- निम्नलिखित में से कौन - सा युग्म सही सुमेलित है ?
( a ) अविकृत परिणामवाद बल्लभाचार्य
( b ) द्वैतवाद निम्बार्क
( c ) सतख्यातिवाद शंकराचार्य
( d ) अनिर्वचनीय ख्यातिवाद - रामानुज
उत्तर - a
175- निम्नलिखित में से कौन - सा युग्म ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करता
( a ) चार्वाक और मध्व
( b ) ईश्वरकृष्ण और चार्वाक
( c ) चार्वाक और शंकर
( d ) मध्व और उदयन
उत्तर - d
176- निम्नलिखित में से कौन द्वैत वेदान्त के साथ संगत नहीं है ?
( a ) भेद और विशेष का विचार द्वैत वेदान्त के लिए मौलिक और केन्द्रीय है
( b ) जगत आभास है
( c ) ब्रह्म अनन्तकल्याण गुण परिपूर्ण है
( d ) जीव और ब्रह्म का तात्त्विक भेद है ।
उत्तर - b
177- निम्नलिखित में से कौन ' शंकर ' के लिए स्वीकार्य है ?
( a ) ब्रह्म और जीव में परस्पर भिन्नता और तादात्म्य है
( b ) ब्रह्म निर्गुण है
( c ) वैष्णव धर्म के सनक सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं ।
( d ) भक्ति से उद्भूत ईश्वर प्रसाद द्वारा ज्ञान से मोक्ष प्राप्तव्य है ।
उत्तर - b
178- विशिष्टाद्वैत वेदान्त की दृष्टि में असंगत को चिह्नित करें
( a ) मोक्ष का साधन ज्ञान - कर्म - समुच्चय है ।
( b ) जीवात्मा ब्रह्म के साथ एकाकार है ।
( c ) सतख्याति प्रत्यक्षपरक गलती की सन्तोषजनक तरीके से व्याख्या करता है ।
( d ) सप्तविध अनुपपत्तियों का ध्येय माया का खण्डन करना है ।
उत्तर - b
179- निम्नलिखित वाक्यों में से कौन एक रामानुज को स्वीकार्य है ?
( a ) रामानुज जीवन मुक्ति के प्रमुख साधन के रूप कर्म - योग का समर्थन करते हैं
( b ) रामानुज विदेह मुक्ति के प्रमुख साधन के रूप में ज्ञान - योग का समर्थन करते हैं
( c ) रामानुज विदेह मुक्ति के प्रमुख साधन के रूप में कर्म - योग का समर्थन करते हैं
( d ) रामानुज विदेह मुक्ति के प्रमुख साधन के रूप में भक्ति - योग का समर्थन करते हैं
उत्तर - d
180- मध्वा के दर्शन में निम्नलिखित तर्कवाक्यों में से किसे छोड़ कर शेष सही हैं ?
( a ) ब्रह्म प्रत्येक जीव को अन्दर से शासित करता है
( b ) प्रत्येक जीव ब्रह्म पर निर्भर है ।
( c ) जीव मुक्त नहीं है
( d ) प्रत्येक जीव सावयवी रूप से ब्रह्म से सम्बन्धित है ।
उत्तर - d
181- मध्व वेदान्त में मोक्ष के सही क्रम का चयन कीजिए
( a ) सायुज्य , सारूप्य , सामीप्य , सालोक्य
( b ) सालोक्य , सामीप्य , सारूप्य , सायुज्य
( c ) सारूप्य , सामीप्य , सालोक्य , सायुज्य
( d ) सालोक्य , सायुज्य , सारूप्य , सामीप्य
उत्तर - b
182- अनुप्रमाण और केवल प्रमाण के बीच भेद करने वाला भारतीय दार्शनिक निम्नलिखित में से कौन है ?
( a ) पतंजलि
( b ) शंकर
( c ) मध्व
( d ) ईश्वरकृष्ण
उत्तर - c
183- शंकर के अनुसार साधन चतुष्टय के स्तरों में से एक है ।
( a ) प्रकृति - पुरुष ज्ञान
( b ) मुमुक्षुत्व
( c ) नित्यविभूति ज्ञान
( d ) अनुमान ज्ञान
उत्तर - b
184- सभी वेदान्तियों के लिए सामान्य यह शिक्षा है कि ब्रह्म
( a ) निर्गुण है
( b ) सगुण है
( c ) सगुण - निर्गुण है
( d ) अनन्त है
उत्तर - d
185- अद्वैत के अनुसार जिस कलम से मैं लिख रहा हूँ , वह है ।
( a ) सत्
( b ) असत्
( c ) सत और असत् दोनों
( d ) न ही सत् न असत्
उत्तर - d
186- निम्नलिखित में से कौन - सा युग्म इस विचार का समर्थन करता है कि " ज्ञान की सत्यता का सत्यापन किसी दूसरे ज्ञान से नहीं होता " ?
( a ) वेदान्त और मीमांसा
( b ) मीमांसा और सांख्य
( c ) मीमांसा और न्याय
( d ) वेदान्त और न्याय
उत्तर - a
187- निम्न में से एक छोड़कर शेष सभी वाक्य गलत हैं
( a ) शंकर द्वारा कर्मयोग को मुक्ति के प्राथमिक साधन के रूप में प्रतिपादित किया गया है ।
( b ) शंकर द्वारा कर्मयोग को विदेह मुक्ति के प्राथमिक साधन के रूप में प्रतिपादित किया गया है
( c ) शंकर द्वारा ज्ञानयोग को जीवन मुक्ति के प्राथमिक साधन के रूप में प्रतिपादित किया गया है
( d ) शंकर द्वारा ज्ञानयोग को विदेह मुक्ति के प्राथमिक साधन के रूप में प्रतिपादित किया गया है
उत्तर - c
188- मन अन्तःकरण की संकल्पात्मिका वृत्ति है, यह निम्नलिखित में से किसकी दृष्टि है ?
( a ) न्याय
( b ) मीमांसा
( c ) अद्वैत वेदान्त
( d ) बौद्ध
उत्तर - c
189- रामानुज वेदान्त में अधोलिखित कथनों में एक के सिवाय सभी सत्य हैं
( a ) जीव का ब्रह्म से अवयव - अवयवी सम्बन्ध है
( b ) जीव का ब्रह्म के साथ ऐक्य है
( c ) जीव ब्रह्म का विशेषण है
( d ) जीव ब्रह्म पर पूर्णतः आश्रित है
उत्तर - b
190- मध्व के अनुसार निम्नांकित में से कौन - सा सही नहीं है ?
( a ) जगत वास्तविक है
( b ) ब्रह्म सर्वोच्च है
( c ) मोक्ष जीव द्वारा अन्तर्निहित आनन्द की प्राप्ति है
( d ) ब्रह्म निर्गुण है
उत्तर - d
191- रामानुज के अनुसार निम्नांकित में से कौन सही है ?
( a ) सारतः जीव और ब्रह्म समान हैं .
( b ) प्रत्यक्ष सदैव निर्विकल्प होता है
( c ) प्रपत्ति मोक्ष का राजमार्ग है
( d ) ब्रह्म अविद्या का आश्रय है ।
उत्तर - c
192- कौन - सा कथन सत्य है ?
( a ) मध्व उत्कट बहुतत्त्ववाद के समर्थक हैं
( b ) मध्य प्रबल वस्तुवादी हैं
( c ) मध्व एक महान् ईश्वरवादी हैं
( d ) मध्व ब्रह्म - जीव - अभेदवाद के समर्थक हैं
उत्तर - d
193- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन सही है ?
( a ) अपृथक् सिद्धि है , ब्रह्म का जीव के साथ सम्बन्ध
( b ) अपृथक् सिद्धि है , ब्रह्म का जीव और जगत् के साथ सम्बन्ध
( c ) अपृथक् सिद्धि है , ब्रह्म का केवल जगत् के साथ सम्बन्ध
( d ) अपृथक् सिद्धि कोई सम्बन्ध है ही नहीं
उत्तर - b
194- अद्वैत वेदान्त के अनुसार , जब हम रज्जु में सर्प को देखते हैं , तो
( a ) सर्प अयथार्थ होता है
( b ) सर्प यथार्थ होता है
( c ) सर्प न तो यथार्थ है , न अयथार्थ
( d ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर - c
195- निम्नलिखित में से कौन - सा सिद्धान्त अद्वैत वेदान्त के साथ स्वीकृत नहीं है ?
( a ) प्रतिबिम्बवाद
( b ) अवच्छेदवाद
( c ) आभासवाद
( d ) अंशवाद
उत्तर - d
196- अद्वैत वेदान्त के पहले सुव्यवस्थित व्याख्याता हैं
( a ) शंकर
( b ) रामानुज
( c ) गौड़पाद
( d ) पद्मपाद
उत्तर - c
197- जीवन - मुक्त की अवधारणा निम्नलिखित का आदर्श है
( a ) मीमांसा
( b ) द्वैत - वेदान्त
( c ) विशिष्टा द्वैत
( d ) अद्वैत वेदान्त
उत्तर - d
198- निम्नलिखित विचारकों में से किसने ' भक्ति ' को गीता का सर्वप्रमुख सिद्धान्त बताया है ?
( a ) शंकर
( b ) रामानुज
( c ) लोकमान्य तिलक
( d ) गाँधी
उत्तर - b
199- रामानुज के अनुसार निम्नलिखित में से कौन - सा एक आत्मा की सही स्थिति निरूपित करता है ?
( a ) आत्मा और ईश्वर में अनौपाधिक अभेद है
( b ) ईश्वर और आत्मा दो भिन्न सत्ताएँ हैं
( c ) आत्मा और शरीर अभिन्न हैं
( d ) आत्मा और ईश्वर का सम्बन्ध अवयव एवं अवयवी का है
उत्तर - d
200- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . वेद का अन्त होने के कारण ही उपनिषदों को वेदान्त कहा गया
2 . वेदान्त दर्शन का विकास उपनिषदों के आधार पर नहीं हुआ है
3 . भगवदगीता के लिपिबद्धकर्ता व्यास माने जाते हैं ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - c
201- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए ।
1 . अद्वैतवाद दर्शन के प्रवर्तक शंकराचार्य हैं
2 . शंकर ने जोशी मठ की स्थापना दक्षिण भारत में की ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से कथन सही है / हैं ?
( a ) केवल 1 0
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - a
202- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . शंकर के अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र पारमार्थिक दृष्टि से सत् है ।
2 . शंकर के अनुसार ब्रह्म व आत्मा में पूर्ण अभेद है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से सही हैं / हैं ?
( a ) केवल 15
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - c
203- शंकराचार्य निम्नलिखित में से किस - किस को मानते हैं ?
1 . आत्मा और ब्रह्म अभिन्न हैं ।
2 . आत्मा की रचना ब्रह्म ने की है ।
3 . आत्मा और ब्रह्म भिन्न हैं ।
4 . जीव माया का कार्य है ।
कूट
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 2 और 3
( d ) 1 और 4
उत्तर - d
204- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . शंकर के दर्शन को अद्वैतवाद कहा जाता है ।
2 . शंकर के अनुसार जीव ब्रह्म से अलग है ।
3 . शंकर के अनुसार ब्रह्म एकमात्र सत्य नहीं है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा कथन सही है ?
( a ) 1 और 2
( b ) केवल 1
( c ) केवल 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - b
205- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए ।
1 . प्रातिभासिक सत्ता का सम्बन्ध केवल कल्पनालोक से होता है ।
2 . पारमार्थिक सत्ता तात्विक सत्ता है जो कभी भी बाधित हो सकती है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से सही है / हैं ?
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - a
206- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . शंकर का दर्शन वेद पर आधारित है ।
2 . उपनिषद में जगत को मिथ्या तथा ब्रह्म को सत्य कहा गया है ।
3 . शंकर ने इस जगत को अध्यास कहा है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - b
207- शंकर के मतानुसार निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए ।
1 . जो दृश्य है वह मिथ्या है ।
2 . ज्ञान स्वयं प्रकाश है ।
3 . जगत स्वप्नवत् है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 , 2 और 3
( b ) 1 और 2
( c ) 1 और 3
( d ) 2 और 3
उत्तर - a
208- शंकर के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . वे वेदान्त में भेदाभेद मत के लिए उत्तरदायी हैं ।
2 . उन्होंने प्रस्थानत्रयी पर भाष्य लिखा है ।
3 . वे ब्रह्म परिणामवाद का समर्थन करते हैं ।
4 . वे सत्य की परीक्षा के रूप में अव्याघात के नियम को स्वीकार करते है
उपरोक्त कथनों में कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 4
( c ) 1 और 4
( d ) 2 और 3
उत्तर - b
209- शंकर के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . माया ईश्वर की शक्ति है ।
2 . सृष्टि केवल परम सत्ता ब्रह्म पर अनेकता के अध्यारोपण के सिवाय कुछ नहीं है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - सा / से कथन सही है / हैं ?
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - c
210- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . शंकर ने तात्कालिक अविद्या को मूल अविद्या कहा है ।
2 . शंकर ने अनादि विद्या को तूल अविद्या कहा है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से सही है / हैं ? |
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - d
211- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . शंकर के अनुसार माया और अविद्या समानार्थक शब्द हैं ।
2 . रामानुजाचार्य ने शंकर के मायावाद का समर्थन किया है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से सही है / हैं ?
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2 क
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - a
212- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन में सत्ता केवल एक ही है ।
2 . शंकराचार्य केवल माया को ही परम सत कहते हैं ।
3 . प्रातिभासिक सत्ता का सम्बन्ध कल्पनालोक से है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - c
213- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . शंकर का ब्रह्म सगुण है ।
2 . रामानुज का ब्रह्म निर्गुण है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से कथन सत्य है / हैं ?
( a ) 1 तथा 2
( b ) केवल 1
( c ) केवल 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - d
214- निम्नलिखित कथनों पर माया के सन्दर्भ में विचार कीजिए
1 . शंकर के अनुसार माया का अर्थ है - जो नहीं है ।
2 . माया की दो शक्तियाँ हैं - आवरण तथा निक्षेप ।
3 . शंकर के दर्शन में माया और अविद्या समानार्थक हैं ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - d
215- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . शंकर वेदान्त में जीव आत्मा या ब्रह्म का व्यावहारिक रूप है ।
2 . सुरेश्वर के अनुसार शंकराचार्य आभासवाद को स्वीकार करते हैं ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से सही है / हैं ?
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - c
216- निम्न कथनों पर विचार कीजिए ।
1 . विवर्तवाद का प्रतिपादन रामानुजाचार्य ने किया था ।
2 . विवर्तवाद के अनुसार कार्य , कारण का विवर्त है ।
3 . शंकर के अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से सही है / हैं ?
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 2 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - c
217- अनिर्वचनीय ख्याति द्वारा जो हम पर तार्किक माँग है , उसकी पहचान कीजिए
1 . वस्तुओं के यथार्थ एवं अयथार्थ श्रेणी में सम्पूर्ण वर्गीकरण को मानना ।
2 . अयथार्थ को यथार्थ के रूप में स्वीकार करना ।
3 . इस बात पर सहमत होना कि ऐसी वस्तुएँ हैं , जोकि न तो यथार्थ हैं और न ही अयथार्थ ।
4 . कुछ वास्तविक वस्तुओं को कुछ अन्य वास्तविक वस्तुओं के रूप में मानने की त्रुटि करना ।
उपरोक्त कथनों में कौन - सा / से कथन सही है / हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 4
( c ) केवल 4
( d ) केवल 3
उत्तर - d
218- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . रामानुज का ब्रह्मसूत्र पर लिखा गया भाष्य श्रीभाष्य कहलाता है ।
2 . रामानुज के अनुसार ब्रह्म में तीन तत्त्व हैं - चित , अचित तथा ईश्वर ।
3 . रामानुज ने ब्रह्म को निर्गुण माना है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - a
219- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . रामानुज ने शंकर के मायावाद का खण्डन किया है ।
2 . रामानुज ने माया को ब्रह्म की वास्तविक शक्ति माना है , जिसके द्वारा सृष्टि की रचना होती है ।
3 . रामानुज ने सप्तानुपपत्ति के आधार पर शंकर के मायावाद का आंशिक समर्थन किया है ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - a
220- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . अपृथक् सिद्धि मत का सम्बन्ध रामानुज से है ।
2 . इसके अनुसार जीव एवं जगत ईश्वर से अपृथक् रूप से जुड़े हुए हैं ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से सही है / हैं ?
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - c
221- निम्न कथनों पर विचार कीजिए ।
1 . रामानुज के अनुसार ब्रह्म ही जगत् का उपादान और निमित्त कारण है ।
2 . परिणामवाद का विचार निम्बार्क ने दिया था ।
उपरोक्त कथनों में से कौन - सा / से सही है / हैं ?
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - a
222- रामानुज के अनुसार निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . जीव नित्य मुक्त और बद्ध है ।
2 . जीव ब्रह्म से अभिन्न है ।
3 . जीव ब्रह्म का अंश है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 , 2 और 3
( b ) 1 और 2
( c ) 2 और 3
( d ) 1 और 3
उत्तर - d
223- रामानुज के अनुसार आत्मा है
1 . नित्य तथा असीमित ।
2 . नित्य तथा परमाणु रूप ।
3 . वह अचेतन भौतिक द्रव्यों में प्रवेश कर सकता है ।
4 . वह सर्वव्यापी है , क्योंकि कुछ भी उससे भिन्न नहीं है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - से कथन रामानुज के मत को सही रूप से व्यक्त करते हैं ?
( a ) 1 , 2 और 3
( b ) 2 , 3 और 4
( c ) 1 और 4
( d ) 2 और 3
उत्तर - d
224- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . ब्रह्म अन्तर्यामी है या ब्रह्माण्ड को आन्तरिक रूप से नियन्त्रित करता है ।
2 . आत्मा शाश्वत है , लेकिन अनन्त रूप से लघु है ।
3 . मोक्ष का अर्थ है - आत्मा का ब्रह्म के साथ तादात्म्य हो जाना ।
4 . सृष्टि की रचना ब्रह्म की यथार्थ क्रिया नहीं है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - सा / से कथन सही है / हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 3 और 4
( c ) केवल 3
( d ) केवल 4
उत्तर - d
225- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1 . आत्मा स्वयं का एवं अपने विषय का ज्ञान प्राप्त कर सकती है ।
2 . आत्मा विषय को प्रकाशित कर सकती है , परन्तु स्वयं को नहीं ।
3 . आत्मा शुद्ध चेतना से भिन्न है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 3
( b ) 1 और 4
( c ) 2 और 3
( d ) 2 और 4
उत्तर - a
226- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए ।
1 . रामानुज के अनुसार कारण अवस्था में ब्रह्म में तीन तत्त्व रहते हैं - चित , अचित और ईश्वर ।
2 . ब्रह्म परिणामवाद के प्रवर्तक रामानुज थे ।
3 . रामानुज के ब्रह्म में स्वगत भेद विद्यमान है ।
कूट
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - d
227- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . सतख्यातिवाद का प्रतिपादन कुमारिल ने किया था ।
2 . रामानुज के अनुसार त्रिवृत्तिकरण के कारण भ्रम पैदा होता है ।
3 . रामानुज के अनुसार भ्रम सत् है , क्योंकि ब्रह्म सत् है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - b
228- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . मध्वाचार्य का दर्शन शंकराचार्य के दर्शन से साम्यता रखता है ।
2 . मध्वाचार्य ब्रह्म , जीव और जगत तीनों को सत्य मानते हैं ।
3 . मध्वा दर्शन / द्वैतवाद में पाँच प्रकार के भेद माने गए हैं ।
उपरोक्त कथनों में कौन - सा / से कथन सही है / हैं ?
( a ) 1 और 3
( b ) केवल 1
( c ) 2 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - c
229- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . मध्वाचार्य ने मुक्ति के लिए भक्ति के साथ ज्ञान को भी महत्त्वपूर्ण - बताया है ।
2 . मध्वा का दर्शन अद्वैतवाद कहलाता है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - सा / से कथन सही है / हैं ?
( a ) केवल 1
( b ) केवल 2
( c ) 1 और 2
( d ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - a
230- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . निम्बार्क सम्प्रदाय को वैष्णव मत का सनक सम्प्रदाय भी कहा जाता है ।
2 . निम्बार्क रामानुज के ही समान तीन तत्त्व को मानता है - चित , अचित और ईश्वर ।
3 . द्वैताद्वैतवाद दर्शन के प्रवर्तक निम्बार्क थे ।
उपरोक्त कथनों में कौन - से कथन सही हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - d
231- निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1 . पुष्टिमार्ग के संस्थापक वल्लभाचार्य थे ।
2 . अविकृत - परिणामवाद की अवधारणा शंकर ने दी थी ।
3 . विवर्तवाद का सम्बन्ध वल्लभाचार्य से है ।
उपरोक्त कथनों में कौन - सा / से कथन सही है / हैं ?
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) केवल 1
( d ) केवल 3
उत्तर - c
232- वेदान्त दर्शन की प्रस्थानत्रयी है
1 . उपनिषद
2 . ब्रह्मसूत्र
3 . योगसूत्र
4 . रामायण
5 . भगवद्गीता
कूट
( a ) 1 , 2 और 3
( b ) 2 , 3 और 4
( c ) 3 , 4 और 5
( d ) 1 , 2 और 50
उत्तर - d
233- निम्नलिखित में से कौन रामानुज के ग्रन्थ हैं ?
1 . गीता भाष्य
2 . श्री भाष्य
3 . वेदान्त संग्रह
4 . वेदान्त कौस्तुभ
कूट
( a ) 1 , 2 और 3
( b ) 2 , 3 और 4
( c ) 1 , 3 और 4
( d ) 1 , 2 , 3 और 4
उत्तर - a
234- रामानुज के अनुसार ब्रह्म में तत्त्व हैं
1 . चित्त
2 . अचित्त
कूट
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) केवल 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - d
235- रामानुज के अनुसार बद्धजीव के वर्ग हैं ।
1 . आकाशीय
2 . मानव
3 . पशु
4 . स्थावर
कूट
( a ) 1 , 2 और 3
( b ) 2 , 3 और 4
( c ) 1 , 2 , 3 और 4
( d ) 1 , 3 और 4
उत्तर - c
236- शंकराचार्य के ब्रह्म विचार के सन्दर्भ में कौन - सा कथन सही है ?
1 . ब्रह्म ही एकमात्र पारमार्थिक सत् है ।
2 . आत्मा ब्रह्म से अलग है ।
3 . जगत मिथ्या है तथा जीव ब्रह्म से अलग नहीं है ।
कूट
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - c
237- अनिर्वचनीय ख्यातिवाद के सन्दर्भ में कौन - सा कथन सही है ?
1 . इस सिद्धान्त के प्रवर्तक रामानुज हैं ।
2 . इस सिद्धान्त के अनुसार भ्रम का विषय न सत् है न असत् ।
3 . इसमें भ्रम का कारण अविद्या माना जाता है ।
कूट
( a ) 1 और 2
( b ) 2 और 3
( c ) 1 और 3
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - b
238- रामानुजाचार्य के ब्रह्म विचार के सन्दर्भ में कौन - सा कथन सही है ?
1 . रामानुज के अनुसार ब्रह्म निर्गुण है ।
2 . ब्रह्म स्वयं प्रकाश है , पर प्रकाश्य नहीं है ।
3 . ब्रह्म सबका उपादान कारण और निमित्त कारण है ।
कूट
( a ) 2 और 3
( b ) केवल 3
( c ) केवल 1
( d ) 1 , 2 और 3
उत्तर - a
239- निम्नलिखित में से कौन - सा कथन सही है ?
1 . द्वैतवाद के प्रवर्तक मध्वाचार्य थे ।
2 . मध्वाचार्य का दर्शन रामानुज के दर्शन से साम्यता रखता है ।
3 . निम्बार्क का दर्शन भेदाभेद भी कहलाता है ।
4 . ' पुष्टि ' का अर्थ - भगवान का अनुग्रह ।
कूट
( a ) 1 , 2 और 3
( b ) 2 , 3 और 4
( c ) 1 , 3 और 4
( d ) 1 , 2 , 3 और 4
उत्तर - d
240- उपमान के सन्दर्भ में सही अभिकथन का परीक्षण करें तथा सही कूट का चयन कीजिए
1 . वेदान्ती तर्क देते हैं कि उपमा आधार - वाक्यों से निगमित की जा सकती है ।
2 . सांख्य सम्प्रदाय के चिन्तकों के अनुसार , उपमान का आविर्भाव प्रत्यक्ष में सम्भव है ।
3 . न्याय मतानुसार उपमान एक शब्द और उसके द्वारा इंगित वस्तु के बीच के सम्बन्ध का ज्ञान है ।
कूट
( a ) 1 और 2 सही हैं
( b ) 2 और 3 सही हैं
( c ) केवल 3
( d ) ये सभी
उत्तर - d
निर्देश ( प्र . सं . 146 - 176 ) नीचे दिए गए कथन एवं कारणों को ध्यानपूर्वक पढ़कर कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं , तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है ।
241- कथन ( A ) अद्वैत वेदान्त के अनुसार ज्ञान स्वयं प्रमाणित है , इसके बावजूद कि यह स्वयं को प्रकाशित करने वाला नहीं है ।
कारण ( R ) वेदान्तियों के अनुसार संज्ञान के बाह्य प्रमाणीकरण से अनावस्था दोष उत्पन्न होता है ।
उत्तर - c
242- कथन ( A ) शंकर बार - बार यह स्वीकार करते हैं कि परमतत्त्व ज्ञान के द्वारा और केवल ज्ञान के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है ।
कारण ( R ) ज्ञान केवल अज्ञान का निवारण करता है और तब वास्तविकता स्वयमेव सामने प्रकाशित हो जाती है।
उत्तर - a
243- कथन ( A ) एक अद्वैतवादी के लिए ' तत्त्वमसि ' एक तादात्म्य कथन प्रस्तुत करता है ।
कारण ( R ) यह कथन लक्षणावृत्ति के द्वारा व्याख्यायित करना पड़ता है ।
उत्तर - a
244- कथन ( A ) जगत् ब्रह्म का विवर्त है ।
कारण ( R ) जगत् व्यावहारिकी सत्ता में है ।
उत्तर - b
245- कथन ( A ) शंकर के अनुसार तथाकथित प्रमाण अविद्या को दूर करते हैं , परन्तु उससे यथार्थ ज्ञान नहीं मिलता ।
कारण ( R ) प्रमाण विषय और विषयी के भेद पर आधारित है ।
उत्तर - a
246- कथन ( A ) शरीर और आत्मा दोनों ही सत्य हैं ।
कारण ( R ) शरीर एवं आत्मा दोनों की उत्पत्ति अचित् तत्त्व से होती है ।
उत्तर - c
247- कथन ( A ) अद्वैत वेदान्त के अनुसार ब्रह्म को जानना ब्रह्म हो जाना ही है ।
कारण ( R ) आत्मा और माया में अभेद्य सम्बन्ध है ।
उत्तर - a
248- कथन ( A ) अद्वैत वेदान्त के अनुसार माया अनिर्वचनीय है ।
कारण ( R ) माया को किसी भी वैध साधन से जाना नहीं जा सकता ।
उत्तर - a
249- कथन ( A ) अख्यातिवाद की मान्यता है कि मिथ्या प्रतीति का कारण दो भिन्न विषय - वस्तुओं के संज्ञान में विभेद का अभाव है ।
कारण ( R ) मिथ्या प्रतीति का कारण विषय - वस्तुओं और उनके प्रतिरूपों में अलग संश्लेषण करना है ।
उत्तर - c
250- कथन ( A ) शंकर के अनुसार ब्रह्म निरवयव और अदृश्य है ।
कारण ( R ) ब्रह्म में विकास होता है ।
उत्तर - c
251- कथन ( A ) शंकर के अनुसार माया ब्रह्म की अपृथक् शक्ति है ।
कारण ( R ) माया अनादि है ।
उत्तर - b
252- कथन ( A ) ब्रह्म ही एकमात्र सत् है ।
कारण ( R ) जगत् ब्रह्म का विवर्तमान है ।
उत्तर - b
253- कथन ( A ) शंकर के अनुसार जीव तथा ब्रह्म का ऐक्य है ।
कारण ( R ) ' तत्त्वमसि ' का लक्ष्यार्थ यही बतलाता है ।
उत्तर - a
254- कथन ( A ) शंकर ने अनिर्वचनीय ख्याति के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया है ।
कारण ( R ) शंकर की मान्यता थी कि प्रत्यक्षीकरण के भ्रम कल्पना की उपज है ।
उत्तर - a
255- कथन ( A ) शंकर के अनुसार व्यक्ति की आत्मा और ब्रह्म में अभेद है ।
कारण ( R ) ' तत्त्वमसि ' वाक्य के शब्दार्थ की अपेक्षा लक्ष्यार्थ को ही माना जाना चाहिए ।
उत्तर - a
256- कथन ( A ) शंकर ने न्याय के ख्यातिवाद सिद्धान्त की आलोचना की ।
कारण ( R ) शंकर के मतानुसार कार्य को व्यक्त होने से पूर्व कारण में निहित होना चाहिए ।
उत्तर - c
257- कथन ( A ) शंकर के अनुसार अद्वैत ब्रह्म परम सत्ता है ।
कारण ( R ) अनुपलब्धि इस जगत की वास्तविकता को नकारती है ।
उत्तर - c
258- कथन ( A ) जगत व्यावहारिक दृष्टि से सत् नहीं है ।
कारण ( R ) इसका अभाव अनुभव में उपलब्ध नहीं है ।
उत्तर - d
259- कथन ( A ) जगत सदसद विलक्षण है ।
कारण ( R ) जगत ब्रह्म की सृष्टि है ।
उत्तर - c
260- कथन ( A ) जीव अपनी बुद्धि के तात्विक स्वरूप द्वारा विषयों को प्रकाशित कर सकता है ।
कारण ( R ) जीव में अविद्या उसकी सीमक उपाधि के रूप में होती है ।
उत्तर - b
261- कथन ( A ) शंकर के अनुसार पारमार्थिक सत् निर्गुण ब्रह्म है ।
कारण ( R ) ईश्वर नहीं है ।
उत्तर - c
262- कथन ( A ) शंकर का वेदान्त साधन चतुष्ट्य को स्वीकार करता है ।
कारण ( R ) शंकर का वेदान्त साधन सप्तक को स्वीकार करता है ।
उत्तर - a
263- कथन ( A ) रामानुज पंचीकरण सिद्धान्त स्वीकार करते हैं ।
कारण ( R ) रामानुज वेदान्ती हैं ।
उत्तर - b
264- कथन ( A ) जीव ब्रह्म का वास्तविक अंश है ।
कारण ( R ) जीव ब्रह्म की रचना है ।
उत्तर - c
265- कथन ( A ) रामानुज एक प्रकार की वास्तविक ज्ञानमीमांसा को अपनाते हैं ।
कारण ( R ) उनका कहना है कि ज्ञान का विषय सत् है और माया का भी ।
उत्तर - c
266- कथन ( A ) रामानुज के अनुसार सप्तभंगी न्याय एक मिथ्या सिद्धान्त है ।
कारण ( R ) एक ही और उसी वस्तु में एक ही समय पर विरोधी गुणधर्मों की साथ - साथ उपस्थिति असम्भव है ।
उत्तर - a
267- कथन ( A ) रामानुज ईश्वर के अस्तित्व के लिए किसी प्रमाण को स्वीकार नहीं करते ।
कारण ( R ) रामानुज कहते हैं कि ईश्वर का अस्तित्व वेदों के आधार पर स्वीकार करना होगा ।
उत्तर - a
268- कथन ( A ) ब्रह्म विशिष्ट अद्वैत है ।
कारण ( R ) चित एवं अचित ब्रह्म के पृथक् सिद्ध विशेषण हैं ।
उत्तर - a
269- कथन ( A ) रामानुज ने सतख्यातिवाद के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया ।
कारण ( R ) रामानुज पंचीकरण सिद्धान्त को मानते हैं ।
उत्तर - b
270- कथन ( A ) जीवन मुक्ति सम्भव नहीं है ।
कारण ( R ) जीव का ईश्वर के साथ अभेद सम्बन्ध नहीं है ।
उत्तर - b
271- कथन ( A ) रामानुज के अनुसार जीव ईश्वर का प्रकार है ।
कारण ( R ) जीवन ईश्वर का पारप्रतिपादन है ।
उत्तर - a
272- नीचे अभिकथन ( A ) और कारण ( R ) दिए गए हैं । उन पर विचार करें तथा सही कूट का चयन करें
अभिकथन ( A ) मध्व की राय में ब्रह्म , जो महावस्तु है , अनन्त - कल्याण - गुण - परिपूर्ण है ।
कारण ( R ) यहाँ तक कि एक साधारण वस्तु भी गुणों से रहित नहीं हो सकती ।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं , लेकिन R , A की सही व्याख्या नहीं प्रस्तुत करता है ।
( b ) A सही है और R गलत है , लेकिन R , A की सही व्याख्या नहीं प्रस्तुत करता है ।
( c ) A सही है और R गलत है , लेकिन R , A की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है ।
( d ) A और R दोनों सही हैं और R , A की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है ।
उत्तर - d
273- नीचे कथन ( A ) और कारण ( R ) दिए गए हैं । उन पर विचार कीजिए । और शंकर के दर्शन के सन्दर्भ में नीचे दिए गए सही कूट का चयन कीजिए
कथन ( A ) शंकर का दर्शन जगत को पूर्णतया स्वीकार करता है ।
कारण ( R ) तथ्य यह है कि एक वास्तविक बाह्य जगत है ।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है ।
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है ।
( c ) A गलत है , किन्तु R सही है
( d ) A सही है , किन्तु R गलत है
उत्तर - c
274- नीचे दिए गए कथन ( A ) और कारण ( R ) पर विचार कीजिए और सही कूट का चयन कीजिए
कथन ( A ) अद्वैतवादी केवल ' अन्वयी अनुमान को स्वीकार करते हैं , परन्तु केवलान्वयी अनुमान को स्वीकार नहीं करते हैं ।
कारण ( R ) इससे निकाला जाने वाला निष्कर्ष गैर - अस्तित्व के विपरीत नहीं होना चाहिए ।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A गलत है , किन्तु R सही है ।
( d ) A और R दोनों गलत हैं ।
उत्तर - a
275- कथन ( A ) और कारण ( R ) पर विचार कीजिए और नीचे दिए गए सही कूट का चयन कीजिए ।
कथन ( A ) अद्वैत के अनुसार वस्तु का प्रत्यक्ष प्रमात - चैतन्य को अनुभूत नहीं होता ।
कारण ( R ) जो प्रत्यक्ष - गत नहीं हुआ वह अज्ञान से आच्छादित होता है ।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A गलत है , किन्तु R सही है
( d ) A और R दोनों गलत हैं
उत्तर - c
276- नीचे दिए गए कथनों में एक को कथन ( A ) और दूसरे को कारण ( R ) की संज्ञा दी गई है । शंकर दर्शन के सन्दर्भ में नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए
कथन ( A ) ब्रह्म जगत का अभिन्ननिमित्तोपादान कारण है ।
कारण ( R ) ब्रह्म से भिन्न कुछ भी नहीं है ।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A गलत है , किन्तु R सही है
( d ) A और R दोनों गलत हैं
उत्तर - a
277- शंकर के सन्दर्भ में दिए गए कथन ( A ) और तर्क ( R ) पर विचार कीजिए और तत्पश्चात् दिए गए सही विकल्प का चयन कीजिए
कथन ( A ) ब्रह्म विश्व का अभिन्ननिमित्तोपादान कारण है ।
तर्क ( R ) ब्रह्म के अलावा कुछ भी नहीं है ।
कूट
( a ) A गलत है और R सही है तथा R , A की सही व्याख्या प्रदान करता है
( b ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या प्रदान करता है ।
( c ) A सही है और R गलत है , परन्तु R , A की सही व्याख्या प्रदान नहीं करता है
( d ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या प्रदान नहीं करता है
उत्तर - b
278- नीचे दो कथन दिए गए हैं , जिसमें एक अभिकथन ( A ) और दूसरा तर्क ( R ) के रूप में है । अद्वैतियों के सन्दर्भ में ( A ) और ( R ) पर विचार करते हुए , सही कूट का चयन कीजिए
अभिकथन ( A ) धुएँ के सभी मामले आग के मामले हैं ।
तर्क ( R ) धुएँ और अग्नि के बीच सर्वव्यापी सहवर्तिता से वास्तव में सर्वव्यापी तर्कवाक्य निकाले जाते हैं ।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है ।
उत्तर - a
279- नीचे दो कथन दिए गए हैं , जिसमें एक अभिकथन ( A ) और दूसरा तर्क ( R ) के रूप में है । वेदान्त के सन्दर्भ में ( A ) और ( R ) पर विचार करते हुए , सही कूट का चयन कीजिए
अभिकथन ( A ) " व्यापारवद् असाधारणम कारण कर्णम् । "
तर्क ( R ) सभी प्रकार के ज्ञान के लिए मन के एक सामान्य कारक होने के कारण इसे एक असाधारण कारण माना जाता है ।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर - c
280- नीचे दो कथन दिए गए हैं , जिनमें एक को अभिकथन ( A ) कहा गया है तथा दूसरा को तर्क ( R ) । नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें
अभिकथन ( A ) " अभ्यास वैराग्यभ्याम् तन्निरोधः " ।
तर्क ( R ) सतत् अभ्यास और अनासक्ति के द्वारा चित्त वृत्ति का निरोध ।
कूट
( a ) R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों गलत हैं ।
( c ) A और R परस्पर व्याघातक हैं
( d ) A सही है , परन्तु R गलत है
उत्तर - a

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...