न्याय एवं वैशेषिक दर्शन
1- किस दर्शन का एक अन्य नाम अक्षपाद दर्शन भी है? - न्याय दर्शन का
2- न्याय दर्शन के प्रवर्तक थे - महर्षि गौतम
3- न्याय दर्शन का अन्तिम उद्देश्य क्या है? - मोक्ष की प्राप्ति
4- किस विद्वान् का यह कथन है कि प्रमाणों के द्वारा किसी विषय की परीक्षा करना ही न्याय है? - वात्स्यायन का
5- कौन-सा न्याय दर्शन का मूल ग्रन्थ है? - न्यायसूत्र
6- न्याय दर्शन से सम्बन्धित ग्रन्थ न्यायमंजरी के लेखक का नाम है? - जयन्त
7- न्याय दर्शन में कितने पदार्थों या तत्त्वों का अस्तित्व स्वीकार किया गया है? - सोलह पदार्थों का
8- न्याय दर्शन में ज्ञान को क्या कहा जाता है? - अनुभव
9- न्याय के अनुसार 'प्रमा' शब्द की सही परिभाषा है? - वस्तुओं के वास्तविक स्वरूप का अपरोक्ष बोध
10- न्याय के अनुसार प्रमा का लक्षण है - यथार्थ अनुभव
11- न्याय दर्शन के अनुसार कौन-कौन से प्रमाण है? - प्रत्यक्ष, शब्द, अनुमान एवं उपमान
12- अप्रमा कितने प्रकार की होती है? - तीन प्रकार की (संशय, भ्रम एवं तर्क)
13- सीप को चाँदी के रूप में देखना किसका उदाहरण है? - विपर्यय का
14- गौतम के अनुसार इन्द्रिय, अर्थ, सन्निकर्ष से जो ज्ञान प्राप्त होता है, कहलाता है - प्रत्यक्ष
15- भारतीय दर्शन में कुल कितनी इन्द्रियाँ मानी गई हैं? - छ:
16- न्याय दार्शनिकों के अनुसार, बाह्य प्रत्यक्ष प्रमाण का प्रथम चरण कहलाता है - निर्विकल्प प्रत्यक्ष
17- किस प्रत्यक्ष में वस्तु का स्पष्ट, निश्चित एवं निर्णायक ज्ञान होता है? - सविकल्प प्रत्यक्ष
18- नैयायिकों के अनुसार हेतु का प्रत्यक्ष करके अनिवार्य सम्बन्ध के आधार पर साध्य का ज्ञान प्राप्त करना, कहलाता है - अनुमान
19- जो अनुमान स्वयं के लिए किया जाता है, उसे कौन-सा अनुमान कहते हैं? - स्वार्थ अनुमान
20- जो अनुमान पाँच अवयवों-प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन का प्रयोग करते हुए अन्य को ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाता है, उसे कहते हैं - परार्थ अनुमान
21- जब कार्य का प्रत्यक्ष करके कारण के होने का अनुमान किया जाता है, तो उसे कौन-सा अनुमान कहते हैं? - शेषवत्
22- परार्थ अनुमान में कितने क्रमबद्ध अवयव होते हैं? - पाँच
23- न्याय दार्शनिकों के अनुसार, परार्थ अनुमान का कौन-सा अवयव तृतीय लिंग परामर्श कहा जाता है? - उपनय
24- न्याय दर्शन के अनुसार व्याप्ति है? - हेतु व साध्य के बीच
25- व्याप्ति की स्थापना के लिए न्याय द्वारा अधोलिखित प्रत्ययों में से किस एक का प्रयोग किया जाता है? - सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष
26- सादृश्यता के प्रत्यक्ष से नाम (संज्ञा) और नामी (संज्ञी) के सम्बन्ध का ज्ञान कराने वाले प्रमाण को कहा जाता है? - उपमान
27- न्याय दर्शन में चौथा प्रमाण कौन-सा है? - शब्द
28- नैयायिकों के अनुसार, पद और वाक्य का अर्थ जानने से जो ज्ञान प्राप्त होता है, ज्ञान के उस प्रमाण को कहते हैं - शब्द
29- पदों के सामंजस्य को कहते हैं - योग्यता
30- नैयायिकों के अनुसार ज्ञान के विषय के आधार पर पद है - दृष्टा एवं अदृष्टा
31- वक्ता के अभिप्राय को समझना कहलाता है - तात्पर्य ज्ञान
32- शब्द नित्य है, क्योंकि यह उत्पन्न किया जाता है। इस अनुमान में हेत्वाभास है - विरुद्ध
33- शब्द एक गुण है, क्योंकि वह दृश्य है, में हेत्वाभास है - असिद्ध
34- यदि हेतु साध्य का खण्डन करने वाला है, तो अनुमान में जो दोष आ जाता है, ऐसे दोष को कहा जाता है - विरुद्ध
35- जिस अनुमान के हेतु दोष को हम किसी अन्य अनुमान द्वारा दिखा सकते हैं, तो ऐसे दुष्ट अनुमान के दोष को कहते हैं - सत्प्रतिपक्ष
36- यदि किसी अनुमान के दोष को अन्य प्रमाण द्वारा दिखा सकें, तो ऐसे अनुमान के दोष को कहते हैं - बाधित
37- 'प्रत्येक संकल्प में ईश्वर की चेतना अन्तर्निहित है।' इस दृष्टिकोण को मानते हैं - नैयायिक
38- बौद्ध दर्शन में प्रमाण के कितने प्रकार स्वीकार किए गए हैं? - दो
39- बौद्ध दार्शनिकों के अनुसार दूसरा प्रमाण कौन-सा है? - अनुमान
40- न्याय दर्शन में भ्रम विषयक सिद्धान्त कहलाता है? - अन्यथा ख्यातिवाद
41- वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक कणाद का वास्तविक नाम था - उलूक
42- किस दर्शन को औलक्य दर्शन भी कहा जाता है? - वैशेषिक दर्शन को
43- वैशेषिक दर्शन के अनुसार पदार्थों की संख्या कितनी है? - सात
44- किसके अनुसार पदार्थ वह है जो सत् है, ज्ञेय है तथा अभिधेय है? - प्रशस्तपाद
45- वैशेषिकों के अनुसार द्रव्य के प्रकार हैं - 9
46- पंचमहाभूतों में से किसके परमाणु नहीं होते? - आकाश के
47- वैशेषिक दर्शन के अनुसार गुणों की संख्या है? - 24
48- वैशेषिक दर्शन में किस पदार्थ को मूर्त द्रव्यों का गतिशील व्यापार कहा गया है? - कर्म को
59- एक ही प्रकार के दो परमाणुओं का विभेदक कहलाता है - विशेष
50- "पृथ्वी के दो परमाणु जिनका गुण तो गन्ध हो किन्तु दोनों एक-दूसरे से पृथक् हैं।" किसका उदाहरण है? - विशेष का
51- किसका विचार है कि वैशेषिक के बहुत्त्ववाद से सांख्य का द्वैतवाद बेहतर है? - शंकर का
52- किसका यह मत है कि समवाय एक आन्तरिक नहीं, बल्कि बाह्य सम्बन्ध है, क्योंकि समवाय से जुड़ी वस्तुएँ एक-दूसरे से पृथक होती हैं? - रामानुज का
53- असत्कार्यवाद का सम्बन्ध है - वैशेषिक दर्शन से
54- अभाव एक पदार्थ है, परन्तु प्रमाण नहीं, यह मत है - न्याय वैशेषिक का
55- वैशेषिक दर्शन में अभाव के कितने प्रकार बताए गए हैं? - दो
56- वैशेषिक दर्शन के अनुसार कारण के कितने प्रकार बताए गए हैं? - तीन
57- घड़े एवं मिट्टी का सम्बन्ध किस कारण का उदाहरण है? - समवायी कारण का
58- किस कारण को अन्य दर्शन में उपादान कारण कहा जाता है? - समवायी कारण को
59- वैशेषिक दर्शन में मोक्ष के लिए किस शब्द का प्रयोग हुआ है? - निःश्रेयस
60- किस दर्शन में धर्म का लक्षण है-“यतो अभ्युदयनिः श्रेयससिद्धिः सधर्मः।" - वैशेषिक दर्शन में
61- पदार्थ के यथार्थ स्वरूप के ज्ञान को कहते हैं - तत्त्वज्ञान
62 न्याय-वैशेषिक में कितने प्रकार के परमाणुओं को स्वीकार किया गया? - चार प्रकार के
63- किसके परमाणु में स्पर्श का गुण प्रमुख रूप से पाया जाता है? - वायु के
64- न्याय-वैशेषिक के मतानुसार परमाणु स्वभावतः है - निष्क्रिय
65- न्याय दर्शन में किसको ज्ञान का आश्रय माना जाता है - आत्मा को
66 वैशेषिकों के अनुसार किस पर गुण तथा कर्म, ये दोनों पदार्थ निर्भर करते हैं - द्रव्य पर
67- नव्य न्याय का प्रारम्भ किससे से हुआ है - गणेश की चिन्तामणि से
68- न्याय के अनुसार गोत्व किसके द्वारा प्रत्यक्ष किया जा सकता है? - संयुक्त समवाय
69- कौन-सी पद्धति प्रमा की परिभाषा 'तद्वति तत्प्रकारकोऽनुभवों' के रूप में करता है? - न्याय
70- किस दर्शन का यह विचार है कि द्रव्य और इसके गुण के बीच समवाय सम्बन्ध है, किन्तु हम इसका प्रत्यक्ष नहीं कर सकते हैं? - वैशेषिक दर्शन का
71- वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में किस प्रकार का कारण किसी भी तरह से समवाय के सम्बन्ध के द्वारा अपने कार्य से सम्बन्धित नहीं है? - मात्र निमित्त
72- नैयायिकों के अनुसार पात्र और इसके रंग के बीच सम्बन्ध को किसके द्वारा अनुभव किया जा सकता है? - विशेषणता सन्निकर्ष
73- किस दर्शन के अनुसार वेद ईश्वर रचित है? - न्याय दर्शन के
74- किसके विचार से प्रत्यक्ष की परिभाषा - "इन्द्रियार्थसन्निकर्षोत्सनं ज्ञानं अव्यपदेभ्यम् अव्यभिचारी व्यवसायात्मकम्" है? - गौतम के अनुसार
75- न्याय ज्ञानमीमांसा में किस प्रकार के प्रत्यक्ष को अतीन्द्रिय कहा जाता है? - निर्विकल्पक प्रत्यक्ष को
76- न्याय के अनुसार वृत्ति किसके बीच का सम्बन्ध है? - पद एवं पदार्थ के बीच का
77- न्याय के अनुसार घट में पटाभाव किस प्रकार का सन्निकर्ष है? - विशेषणता
78- वैशेषिक दर्शन में ईश्वर जगत का किस प्रकार का कारण है? - निमित्तकारण
79- यह विचार कि ईश्वर एक प्रकार का आत्मा है, किसके द्वारा स्वीकृत है? - न्याय और वैशेषिक दर्शन द्वारा
80- जब शब्द की लक्षणा अपने शक्यार्थ का पूरी तरह त्याग कर देती है तो न्याय प्रमाणमीमांसा में उस लक्षण को कहते हैं - जहत् लक्षणा
81- वैशेषिक दर्शन के अनुसार आकाश क्या है - एक, बिभु और नित्य
82- न्याय दर्शन के अनुसार मोक्षावस्था में आत्मा किस से रहित है - दुःख, सुख और चैतन्य से
83- नैयायिकों के अनुसार, आत्मा क्या है? - ज्ञाता और ज्ञात
84- वैशेषिकों के अनुसार, पट के रंग के सन्दर्भ में तन्तु का रंग किस प्रकार का कारण है? - असमवायी कारण
85- न्याय के अनुसार किस सन्निकर्ष में हम एक पुष्प और उसके लाल रंग के बीच के सम्बन्ध का बोध करते हैं ? - विशेणता
86- वैशेषिकों द्वारा मुक्त आत्मा में ज्ञान के किस प्रकार के अभाव की बात मानी गई है? - ध्वंसाभाव
87- वैशेषिकों के अनुसार सामीप्य और दूरी के ज्ञान का क्या कारण है? - द्विक्
88- किस प्रमाण के न्याय सम्प्रदाय ने निर्विकल्पक प्रत्यक्ष की अवस्था को सिद्ध किया? - अनुमान
89- वैशेषिक के अनुसार गाय में अश्वत्व के अभाव को कैसे जाना जाता है - अन्योन्याभाव से
90- नैयायिकों के अनुसार 'पदशक्ति' क्या है - पद और प्रयुज्य पदार्थ के बीच का सम्बन्ध है
91- वैशेषिक के अनुसार अतीत और वर्तमान के अवबोध का कारण है? - काल
92- वैशेषिकों के अनुसार द्वयणुक का असमवायीकरण क्या है? - परमाणु संयोग
93- नैयायिकों द्वारा समवाय सम्बन्ध जिस सन्निकर्ष से प्राप्त होता है, उसे जाना जाता है - विशेषणता
94- न्याय भाषा-दर्शन में ईश्वरेच्छा क्या है - स्वयं शक्ति
95- ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए कौन सा दर्शन अदृष्ट की सहायता लेता है?- न्याय और वैशेषिक
96- 'याग न स्वर्गहेतु क्रियत्वात्' उक्त अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - बाधित
97- वैशेषिकों के अनुसार, आत्मा तब ज्ञान का आधार नहीं हो सकती है, जब यह हो जाती है?- मुक्त
98- 'शब्द नित्य शब्दत्वात्' उक्त अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - असाधारण सव्यभिचार
99- वैशेषिकों के अनुसार, घट का असमवायी कारण कौन है? - कपाल संयोग
100- मीठे में कड़वेपन का अभाव किस सम्बन्ध से रहता है? - स्वरूप सम्बन्ध
101- वैशेषिक मतानुसार, घट के सम्बन्ध में कुम्हार का दण्ड क्या है? - निमित्त कारण
102- नैयायिकों के द्वारा प्रत्यक्ष की निर्विकल्पक स्थिति की सिद्धि होती है - अनुमान के द्वारा
103- वैशेषिक के अनुसार, एक घट का असमवायीकारण है? - घट के अंशों का संयोजन
104- 'पर्वतः वह्निमान धूमात्' इस अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - व्याप्यत्वासिद्ध
105- वैशेषिक के अनुसार कौन एक त्रसरेणु के परिमाण का कारण है? - त्रसरेणुओं की संख्या
106- वैशेषिक के अनुसार आत्मा शरीर के साथ इन सम्बन्धों से रहता है - विशेषणता
107- वैशेषिक के अनुसार, ज्ञान का अभाव मानवीय आत्मा में किस सम्बन्ध में रहता है? - स्वरूप सम्बन्ध में
108- वैशेषिक दर्शन में विश्व का समवायीकारण है? – परमाणु
109- न्याय के अनुसार, किसमें भूतकाल का सचेतन सन्दर्भ और उसी वस्तु की वर्तमान दशा अपेक्षित होती है?- प्रत्यभिज्ञा
110- न्याय की किस अवधारणा के अनुसार, एक व्यक्ति भूतकाल, वर्तमान और भविष्य की वस्तुओं का अनुभव कर सकता है? - योगज से
111- 'अग्नि शीतल है, क्योंकि यह एक द्रव्य है' न्याय के अनुसार उपरोक्त तर्क में किस प्रकार का दोष है?- बाधित
112- अभाव के सन्दर्भ में, ‘जले गन्धो नास्ति' कथन में 'जल' से क्या अभिप्राय है? - अनुपयोगी
113- आकाश में 'आकाशत्व' किस भाव से निहित है? - विशेष-नित्यद्रव्य भाव से
114- न्याय के अनुसार ज्ञान के किस प्रकार का कारण आत्मा है? - समवायी कारण
115- 'पर्वत में अग्नि है, क्योंकि वहाँ नील धूम्र है न्याय के अनुसार इस अनुमान में दोष है – व्याप्यत्वासिद्ध
116- किस दर्शन सम्प्रदाय के अनुसार, अभाव का अनुभव विशेषणता सन्निकर्ष के द्वारा किया जाता है? - न्याय दर्शन
117- बरतन के मामले में कुम्भकार का जनक माना जाता है - अन्यथासिद्ध
118- द्वयणुक के उत्पादन में परमाणु संयोग की कारणता है - असमवायीकारणता
119- "संस्कारजन्य ज्ञानम्' का अभिप्राय है - स्मृति
120- भारतीय दर्शन की किस प्रणाली का विचार है कि संज्ञान का प्रामाण्य और अप्रामाण्य परत: है? - न्याय दर्शन
121- अन्योन्य अभाव की अवधारणा का प्रतिपादन किया गया है - न्याय द्वारा
122- न्याय के अनुसार, कार्य जाना जाता है - प्राग्भाव प्रतियोगी
123- चेतना आत्मा का एक आगन्तुक गुण है, यह किसने स्वीकार किया है - न्याय द्वारा
124- न्याय का कारणता सिद्धान्त कहा जाता है - असत्कार्यवाद
125- वैशेषिक मतानुसार 'पूर्व' और 'पश्चिम' की अवधारणा का कारण है – द्विक्
126- न्याय मत के अनुसार, किस सन्निकर्ष के द्वारा एक जाति के सभी सदस्यों को प्रत्यक्ष प्राप्त करते हैं? - सामान्य लक्षण
127- किस सम्प्रदाय का मानना है कि ईश्वर विद्यमान है, परन्तु उसने विश्व का सृजन नहीं किया है?- योग दर्शन का
128- न्यायदर्शन के अनुसार कौन- सा प्रमाण अभाव के ज्ञान का साधन है?- प्रत्यक्ष
129- 'जाति उतनी वास्तविक है जितना कि व्यक्ति' यह विचार किसका है? - न्याय सम्प्रदाय
130- वैशेषिक के अनुसार, जगत का समवायीकरण है - परमाणु
131- पद और पदार्थ के बीच सम्बन्ध के बारे में नैयायिकों का क्या मत है? - शक्ति एवं लक्षणा
139- निम्नलिखित में कौन-सा वाक्य असत्य है?
(a) न्याय दर्शन में पद को शक्त कहा गया है।
(b) नैयायिकों ने पदों के दो वर्गीकरण प्रस्तुत किए।
(c) नैयायिकों के अनुसार वैदिक पदों की रचना अलौकिक मानव/ ईश्वर ने की थी।
(d) नैयायिकों के अनुसार लौकिक पदों की रचना भी ईश्वर ने ही की थी।
उत्तर – d
140- निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) न्याय दर्शन में अनुमान को अयथार्थ ज्ञान की प्राप्ति के साधन के रूप में स्वीकार किया गया है।
(b) हेत्वाभास का सम्बन्ध अनुमान के दोष से है।
(c) हेत्वाभास का अर्थ होता है कि वस्तु देखने में तो हेतु के समान है परन्तु वास्तव में हेतु नहीं है।
(d) नैयायिकों के अनुसार दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में पाँच प्रकार के वास्तविक दोष उत्पन्न होते हैं।
उत्तर – a
141- निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) न्याय दर्शन अनीश्वरवादी है।
(b) न्याय दर्शन ईश्वरवादी दर्शन है।
(c) नैयायिकों के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
(d) नैयायिकों की मान्यता है कि ईश्वर की कृपा से ही मानव मोक्ष प्राप्त करने में सफल होता है।
उत्तर – a
142- निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद थे।
(b) वैशेषिक दर्शन में 'विशेष' नामक पदार्थ की विशुद्ध रूप से विवेचना है, इसलिए यह दर्शन वैशेषिक कहलाता है।
(c) वैशेषिक साहित्य पर कणाद का 'वैशेषिक सूत्र' प्रमुख ग्रन्थ है।
(d) वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद, गौतमबुद्ध के गुरु थे।
उत्तर – d
143- वैशेषिक दर्शन के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) कर्म द्रव्य का सक्रिय रूप तथा गुण द्रव्य का निष्क्रिय रूप है।
(b) कर्म या क्रिया चार प्रकार की होती है।
(c) कर्म का निवास सर्वव्यापी द्रव्यों (जैसे-आकाश) में नहीं होता क्योंकि वे स्थान परिवर्तन से शून्य हैं।
(d) वैशेषिक दर्शन में गुणों की संख्या 24 है।
उत्तर – b
144- वैशेषिक के अनुसार निम्नलिखित पदार्थों में से किस एक में सामान्य नहीं होता?
(a) द्रव्य
(b) गुण
(c) कर्म
(d) समवाय
उत्तर – d
145- सामान्य के अन्तर्गत द्रव्यत्व किसका उदाहरण है?
(a) पर
(b) अपर
(c) पर-अपर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – c
146- वैशेषिकों के अनुसार निम्नलिखित पदार्थों में से किसमें सामान्य नहीं होता?
(a) द्रव्य
(b) विशेष
(c) गुण
(d) कर्म
उत्तर – b
147- असत्कार्यवाद के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) असत्कार्यवाद वैशेषिक दर्शन का कारण कार्य नियम है।
(b) वैशेषिक के अनुसार कारण नियत पूर्ववर्ती होता है।
(c) इस सिद्धान्त को आरम्भवाद भी कहा जाता है, क्योंकि यह कार्य को एक नवीन उत्पत्ति मानता है।
(d) असत्कार्यवाद का सिद्धान्त भारतीय दर्शन में सिर्फ वैशेषिक दर्शन में मिलता है।
उत्तर – d
148- निम्नलिखित कथनों में असत्य कथन कौन-सा है?
(a) परमाणुकारणवाद न्याय-वैशेषिक दर्शन का एक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है।
(b) महर्षि गौतम के अनुसार जिसे और अधिक विभाजित न किया जा सके, वही परमाणु है।
(c) न्याय-वैशेषिक में पाँच प्रकार के परमाणु को स्वीकार किया गया है।
(d) प्रत्येक परमाणु का अपना एक विशेष महत्त्व होता है।
उत्तर – c
149- वैशेषिक परमाणुवाद के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सही है?
(a) यह परमाणुओं में संख्या भेद और गुण भेद दोनों मानता है।
(b) यह परमाणुओं में केवल संख्या भेद मानता है।
(c) यह परमाणुओं में केवल गुण भेद मानता है।
(d) यह परमाणुओं में न तो गुण भेद मानता है न ही संख्या भेद।
उत्तर – a
150- न्याय दार्शनिकों के अनुसार बाह्य प्रत्यक्ष के चरण का क्रम है
(a) प्रत्यभिज्ञा, निर्विकल्प प्रत्यक्ष, सविकल्प प्रत्यक्ष
(b) निर्विकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा, सविकल्प प्रत्यक्ष
(c) निर्विकल्प प्रत्यक्ष, सविकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा
(d) सविकल्प प्रत्यक्ष, निर्विकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा
उत्तर – c
151- न्याय दर्शन के पदार्थ अनुमान में पाँच क्रमबद्ध अवयव होते हैं
(a) दृष्टान्त, उपनय, निगमन, प्रतिज्ञा तथा हेतु
(b) उपनय, दृष्टान्त, निगमन, हेतु तथा प्रतिज्ञा
(c) प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, निगमन तथा उपनय
(d) प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन
उत्तर – d
152- निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
(a) पर्वत पर आग है--हेतु
(b) क्योंकि वहाँ धुआँ है--उपनय
(c) पर्वत पर धुआँ है-उपनय
(d) इसलिए पर्वत पर आग है-प्रतिज्ञा
उत्तर – c
153- निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म असंगत है?
(a) 'पर'-सत्ता
(b) 'अपर'--'घटत्व'
(c) 'पर-अपर'--'द्रव्यत्व'
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – d
154- निम्नलिखित में कौन-सा युग्म असंगत है?
(a) आकांक्षा-पदों की परस्पर अपेक्षा
(b) योग्यता-पदों का व्यवधान रहित पूर्वा पर क्रम से उच्चारण
(c) सन्निधि-पदों का व्यवधान रहित पूर्वा पर क्रम से उच्चारण
(d) तात्पर्य ज्ञान-वक्ता के अभिप्राय को समझना
उत्तर – b
155- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? सही कूट चुनिए
( a ) साधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपसिद्ध
( c ) विरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – b
156- न्याय-ज्ञानमीमांसा के अनुसार अधोलिखित में किस प्रकार का अनुमान है?
जो ज्ञेय है वह अभिधेय है
घट ज्ञेय है
यह अभिधेय है ।
( a ) पूर्ववत्
( b ) शेषवत्
( c ) कैवलान्वयी
( d ) केवल - व्यतिरेकी
उत्तर – c
157- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है?
यज्ञ स्वर्ग का कारण नहीं है,
क्योंकि यह क्रियान्वात् है।
( a ) सव्यभिचार
( b ) असिद्ध
( c ) निरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – d
158- न्याय के अनुसार, चाक्षुष इन्द्रिय की वस्तुएँ स्पर्शेन्द्रिय की वस्तुएँ भी होती हैं सिवाय
( a ) केवल रूप
( b ) केवल रूपत्व
( c ) रूप और रूपत्व दोनों
( d ) रूप और स्पर्श दोनों
उत्तर – c
159- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? निम्नलिखित में से सही कूट का चयन कीजिए
मृमण्य : पर्वत : वह्निमान
( a ) असाधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपसिद्ध हेत्वाभास
( c ) आश्रयसिद्ध हेत्वाभास
( d ) विरुद्ध
उत्तर – c
160- निम्नलिखित में से कौन वैशेषिक दर्शन के अनुकूल नहीं है?
( a ) प्रत्यक्ष प्रमाण है।
( b ) अनुमान प्रमाण है।
( c ) शब्द प्रमाण है।
( d ) शब्द स्वतन्त्र प्रमाण है।
उत्तर – d
161- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? निम्नलिखित में से सही कूट का चयन कीजिए
( a ) आश्रयासिद्ध
( b ) बाधित
( c ) विरुद्ध
( d ) सत्प्रतिपक्ष
उत्तर – b
162- निम्नलिखित अनुमान में कौन-सा हेत्वाभास है? सही कूट का चयन करें
शब्द अनित्य चाक्षुषत्वात्
( a ) स्वरूपासिद्ध हेत्वाभास
( b ) बाधित हेत्वाभास
( c ) विरुद्ध हेत्वाभास
( d ) सव्यभिचार हेत्वाभास
उत्तर – a
163- निम्नलिखित में से कौन व्याप्तिग्रह एक साधन नहीं है?
( a ) तर्क
( b ) सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष
( c ) आप्तवाक्य
( d ) उपाधिनिरास
उत्तर – c
164- निम्नलिखित अनुमान द्वारा किस प्रकार का हेत्वाभास किया जाता है? सही कूट का चयन करें ,
यह प्राणि अवश्य रूप से एक गाय होनी चाहिए क्योंकि इसमें घोड़त्व है।
( a ) सत्प्रतिपक्ष
( b ) सव्यभिचार
( c ) विरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – c
165- वैशेषिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन एक नित्यद्रव्य नहीं है?
( a ) परमाणु
( b ) द्वयणुक
( c ) मनस
( d ) द्विक्
उत्तर – b
166- निम्नलिखित में से कौन वैशेषिकों को स्वीकार्य नहीं है?
( a ) वेद की रचना किसी के द्वारा नहीं की गई है।
( b ) तत्त्वज्ञान निःश्रेयस के लिए पर्याप्त शर्त नहीं।
( c ) अभाव का प्रत्यक्ष हो सकता है।
( d ) ईश्वर एक प्रकार की आत्मा है।
उत्तर – a
167- न्याय में अपवर्ग सन्दर्भ में सही क्रम का चयन कीजिए
( a ) दु:ख, प्रवृत्ति, दोष, जन्म, मिथ्याज्ञान
( b ) मिथ्याज्ञान, दोष, प्रवृत्ति, जन्म, दु:ख
( c ) जन्म, दुःख, प्रवृत्ति, दोष, मिथ्याज्ञान
( d ) जन्म, दु:ख, मिथ्याज्ञान, प्रवृत्ति, दोष
उत्तर – b
168- नैयायिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन पंचावयवीन्याय का अवयव नहीं है?
( a ) उदाहरण
( b ) उपनय
( c ) उपमान
( d ) निगमन
उत्तर – c
169- नैयायिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन वाक्यार्थ ज्ञान की शर्त नहीं है?
( a ) व्याकरण
( b ) तात्पर्य
( c ) आकांक्षा
( d ) आसत्ति
उत्तर – a
170- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? सही कूट का चयन कीजिए
'पर्वत : वह्निमान नीलधूमात '
कूट
( a ) साधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपासिद्ध
( c ) व्याप्यत्वासिद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – c
171- वैशेषिकों के अनुसार सत्ता सामान्य निम्नलिखित में से किसमें है?
( a ) द्रव्य, गुण और कर्म में
( b ) द्रव्य, गुण, कर्म और सामान्य में
( c ) गुण और कर्म में
( d ) द्रव्य और गुण में
उत्तर – a
172- निम्नलिखित में से कौन-सा मूर्तद्रव्य नहीं है?
( a ) मरुत
( b ) मनस
( c ) आत्मन
( d ) क्षिति
उत्तर – d
173- केवल नित्य मूर्तद्रव्य को वर्णित करने वाले कूट का चयन कीजिए
( a ) क्षिति, मनस, आकाश
( b ) द्विक्, काल, आत्मा
( c ) क्षिति के परमाणु तेज और मरुत
( d ) काल, आत्मा और मनस
उत्तर – c
174- आकाश, काल और द्विक् इन सभी तीन द्रव्यों की कुछ सामान्य विशेषताएँ होती हैं। निम्न में से उस एक विशेषता का चयन कीजिए, जो उन सभी विशेषताओं का सही-सही उल्लेख करता है?
( a ) एक, भौतिक (भूत) और नित्य
( b ) एक, नित्य और मिश्रित
( c ) एक, सर्वव्यापी और नित्य
( d ) अनेक, सर्वव्यापी और नित्य
उत्तर – d
175- निम्न में से कौन नित्य द्रव्य नहीं है?
( a ) आत्मा
( b ) आकाश
( e ) विशेष
( d ) काल
उत्तर – c
176- न्याय के लिए कौन-सा कथन स्वीकार्य नहीं है?
( a ) इन्द्रियार्थसन्निकर्ष जन्यम् ज्ञानम् प्रत्यक्षम्
( b ) द्रव्याश्रिता ज्ञेया निर्गुणा निष्क्रिया गुणा :
( c ) संदिग्धसाध्यवान पक्षः
( d ) अर्थक्रियासामर्थ्य सत् का मानदण्ड है
उत्तर – a
177- किस प्रकार का हेत्वाभास निम्नलिखित अनुमान द्वारा किया जाता है? सही कूट का चयन कीजिए
'मणिमयः पर्वतः वह्निमान धूमात्
( a ) अनुपसंहारी सव्यभिचार
( b ) आश्रयासिद्ध
( c ) स्वरूपासिद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – d
178- नैयायिकों के अनुसार, सभी प्रकार की धूम्र घटनाओं को हम जान सकते हैं, मात्र
( a ) योगज प्रत्यासत्ति से
( b ) सामान्यलक्षण प्रत्यासत्ति से
( c ) ज्ञानलक्षण प्रत्यासत्ति से
( d ) समवाय सन्निकर्ष से
उत्तर – c
179- वैशेषिक के अनुसार, सृष्टि परमाणुओं के संयोग से प्रारम्भ होती है
( a ) परमाणु के स्वभाव के द्वारा
( b ) ईश्वरीय इच्छा के द्वारा
( c ) उत्पादक व्यवस्था के द्वारा
( d ) आकस्मिक
उत्तर – b
180- निम्नांकित में हेत्वाभास की पहचान करें
सभी धूम्रवान वस्तुएँ वह्निवान हैं।
पर्वत धूम्रवान हैं।
इसलिए, पर्वत वह्निवान है।
कूट
( a ) विरुद्ध
( b ) प्रकरणसम
( c ) असिद्ध
( d ) सव्यभिचार
उत्तर – d
181- कौन-से भूतद्रव्य नित्य हैं?
( a ) केवल आकाश
( b ) केवल मारुत
( c ) क्षिति, अप, तेज, मारुत के परमाणु
( d ) आकाश और क्षिति, अप, तेज और मारुत के परमाणु
उत्तर – d
182- वैशेषिक के अनुसार नित्य द्रव्य है
( a ) त्रयणुक
( b ) आत्मा
( c ) द्वयणुक
( d ) कर्म
उत्तर – b
183- निम्नलिखित में से कौन-सा सम्बन्ध नहीं है?
( a ) स्वरूप
( b ) अपृथसिद्धि
( c ) गुण
( d ) समवाय
उत्तर – a
184- नैयायिकों के अनुसार द्विक, आत्मा और मनस हैं
( a ) भौतिक
( b ) मूर्त
( c ) ' a ' और ' दोनों
( d ) न तो ' a ' और न ही
उत्तर – d
185- न्याय-वैशेषिक के अनुसार, सामान्य अवस्थित है
( a ) गुण, सामान्य और विशेष में
( b ) द्रव्य, गुण और कर्म में
( c ) द्रव्य, कर्म और अभाव में
( d ) केवल द्रव्य में
उत्तर – b
186- न्याय के अनुसार निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का दोष है? सही विकल्प का चयन कीजिए अनुमान शाश्वत अणुओं से निर्मित होने के कारण जगत शाश्वत है।
( a ) विरुद्ध
( b ) कालातीत
( c ) सत्प्रतिपक्ष
( d ) सव्यभिचार
उत्तर – a
187- वैशेषिक मत के सन्दर्भ में उस विकल्प का चयन करें जिसके अनुसार द्रव्य न तो अमूर्त है न मूर्त
( a ) आकाश, काल, द्विक्
( b ) काल, दिक्, आत्मा
( c ) दिक्, आत्मा, मनस
( d ) आकाश, आत्मा, काल
उत्तर – b
188- वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में निम्नलिखित में से कौन नित्य द्रव्य नहीं है?
( a ) परमाणु
( b ) द्वयणुक
( c ) काल
( d ) मनस
उत्तर – b
189- निम्नलिखित उदाहरण में हेत्वाभास है, जिसे इस रूप में जाना जाता है "शब्द नित्य हैं, क्योंकि उसमें शब्दत्व है।"
( a ) साधारण अनेकान्तिक के रूप में
( b ) असाधारण अनेकान्तिक के रूप में
( c ) अनुपसंहारी अनेकान्तिक के रूप में
( d ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर – b
190- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दर्शन का मुख्य उद्देश्य जीवन के दुःखों का किस तरह से नाश हो, इसका उपाय निकालना है।
2. न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि गौतम का पूरा नाम मेधातिथि गौतम है।
3. न्याय दर्शन में सात पदार्थों के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
191- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. प्राचीन समय का न्याय-प्राचीन न्याय तथा आधुनिक काल का न्याय नव्य न्याय कहलाता है।
2. नव्य न्याय का प्रारम्भ गणेश की तत्त्व चिन्तामणि से हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
192- निम्नलिखित कथनों पर न्याय दर्शन के अन्तर्गत विचार कीजिए
1. यथार्थ अनुभव को अप्रमा कहा जाता है।
2. किसी वस्तु के अन्यथा अनुभव को प्रमा करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
193- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दर्शन ज्ञान को अनुभव कहता है।
2. न्याय दर्शन में प्रमा के तीन भेद होते हैं।
3. न्याय दर्शन में अप्रमा के चार भेद होते हैं।
कूट
(a) केवल 1
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
194- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सीप को चाँदी के रूप में देखना विपर्यय का एक उदाहरण है।
2. विपर्यय में ज्ञान का वस्तु से संवाद होता है।
3. विपर्यय अप्रमा का एक प्रकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – c
195- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार ज्ञान का एक ही प्रकार है- यथार्थ ज्ञान।
2. न्याय दर्शन में यथार्थ ज्ञान को प्राप्त करने के लिए चार स्वतन्त्र प्रमाण स्वीकार किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
196- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. भारतीय दर्शन में कुल 6 इन्द्रियाँ मानी गई हैं।
2. मन को आन्तरिक इन्द्रिय कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
197- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार बाह्य प्रत्यक्ष तीन चरणों में सम्पन्न होता है।
2. निर्विकल्प प्रत्यक्ष बाह्य प्रत्यक्ष की दूसरी अवस्था है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
198- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जब इन्द्रिय अर्थ सन्निकर्ष साधारण ढंग से होता है, तो इसे लौकिक प्रत्यक्ष कहते हैं।
2. जब इन्द्रिय अर्थ सन्निकर्ष असाधारण ढंग से होता है, तो इसे अलौकिक प्रत्यक्ष कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
199- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अनुमान के तीन अवयव होते हैं- हेतु, साध्य तथा पक्ष
2. हेतु का प्रत्यक्ष करके अनिवार्य सम्बन्ध के आधार पर पक्ष में साध्य का ज्ञान प्राप्त होना ही अनुमान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
200- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जो अनुमान स्वयं के लिए किया जाता है, उसे परार्थ अनुमान कहते हैं।
2. जो अनुमान पाँच अवयवों-प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन का प्रयोग करते हुए अन्य को ज्ञान प्राप्त कराने के लिए किया जाता है, उसे स्वार्थ अनुमान कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
201- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार पदार्थ अनुमान का चौथा चरण उपनय ही तृतीय लिंग परामर्श कहलाता है तथा इसी के आधार पर साध्य का ज्ञान प्राप्त होता है।
2. पंचअवयव अनुमान का परार्थ अनुमान के अन्तर्गत आते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
202- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. व्याप्ति से तात्पर्य है- हेतु एवं साध्य का व्यापक सम्बन्ध।
2. व्याप्ति के तीन प्रकार होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
203- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जब समान विस्तार वाले दो पदों में व्याप्ति सम्बन्ध होता है अर्थात् व्यात्य से व्यापक का अनुमान सम्भव हो तथा व्यापक से व्यात्य का भी अनुमान सम्भव हो तभी दोनों पदों में व्याप्ति सम व्याप्ति कहलाती है।
2. न्यूनाधिक विस्तार वाले दो पदों में जब व्याप्ति का सम्बन्ध होता है तो उसे विषम व्याप्ति या असम व्याप्ति कहते हैं।
कूट
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
204- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. सादृश्यता के प्रत्यक्ष से नाम (संज्ञा) और नामी (संज्ञी) के सम्बन्ध का ज्ञान कराने वाले प्रमाण को शब्द कहते हैं।
2. पद और वाक्य का अर्थ जानने से जो ज्ञान प्राप्त होता है, ज्ञान के उस प्रमाण को उपमान कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
205- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कभी-कभी जब दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में जो दोष पैदा हो जाते हैं, तो अनुमान के दोष को हेत्वाभास कहते हैं।
2. नैयायिकों के अनुसार दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में तीन प्रकार के वास्तविक दोष उत्पन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं? -
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2 6
उत्तर – a
206- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. न्याय दर्शन का आत्मा का ही एक विशेष रूप मानता है।
2. नैयायिक के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
3. न्याय दर्शन के अनुसार ईश्वर की कृपा से ही मोक्ष सम्भव है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
कूट
(a) 1 और 2
(c) 1 और 3
(b) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
207- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बौद्ध दर्शन के अनुसार प्रत्येक प्रमाण का क्षेत्राधिकार अलग है।
2. बौद्ध दर्शन में दो प्रमाण हैं-प्रत्यक्ष तथा अनुमान।
3. न्याय दर्शन में प्रमाण की संख्या चार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
208- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय के भ्रम के व्याख्यान का नाम विपरीत ख्याति है।
2. कुमारिल और नैयायिक दोनों ही भ्रम को अन्यथाज्ञान या मिथ्याज्ञान मानते हैं।
3. कुमारिल यथार्थता को ज्ञान का स्वरूप मानते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – b
209- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कुमारिल और नैयायिक दोनों ही भ्रम को अन्यथाज्ञान या मिथ्याज्ञान मानते हैं।
2. न्याय के भ्रम के व्याख्यान का नाम ही अन्यथाख्याति है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
210- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक साहित्य पर कणाद का वैशेषिक सूत्र प्रमुख ग्रन्थ है।
2. वैशेषिक दर्शन में परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति हेतु तत्त्व ज्ञान को आवश्यक नहीं माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
211- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन में पदार्थ के सात प्रकार बनाए गए हैं।
2. वैशेषिक सूत्र के भाष्यकार प्रशस्तपाद के अनुसार, पदार्थ वह है जो सत् है, ज्ञेय है तथा अभिधेय है। " ..
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
212- वैशेषिक दर्शन के सन्दर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. द्रव्य, गुण तथा क्रिया का आधार तथा समस्त सावयव वस्तुओं का उपादान कारण है।
2. वैशेषिक के अनुसार कुल द्रव्य 9 हैं, जिसमें पंचमहाभूतों के अन्तर्गत सिर्फ आकाश के परमाणु नहीं होते हैं।
3. वैशेषिक के अनुसार परमाणु के नष्ट होने पर परमाणु भी नष्ट हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही है/ हैं?
(a) 1 और 3
(b) 1 और 2
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – b
213- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, सुख, दुःख तथा ज्ञान आत्मा के 6 गुण हैं।
2. वैशेषिक दर्शन में कुल 24 गुणों का उल्लेख किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
214- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कर्म का निवास सर्वव्यापी द्रव्यों (जैसे-आकाश) में नहीं होता, क्योंकि वे स्थान परिवर्तन से शून्य है।
2. कर्म द्रव्य का निष्क्रिय रूप तथा गुण द्रव्य का सक्रिय रूप है।
3. द्रव्य की दो विशेषताएँ होती हैं- सक्रियता तथा निष्क्रियता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1, 2 और 3
(b) 2 और 3
(c) केवल 2
(d) 1 और 3
उत्तर – d
215- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सामान्य वह पदार्थ है, जिसके कारण एक ही प्रकार के विभिन्न व्यक्तियों या वस्तुओं को एक जाति के अन्दर रखा जाता है।
2. सामान्य की तीन श्रेणियाँ हैं-पर, अपर, पर-अपर।
3. सत्ता पर सामान्य का उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
216- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. एक ही प्रकार के दो परमाणुओं का विभेदक समवाय कहलाता है।
2. वैशेषिकों के अनुसार दो पदार्थों के बीच समवाय सम्बन्ध पाया जाता है। यदि उन्हें पृथक् किया जाए तो उनमें से एक का विनाश अपरिहार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
217- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन के अनुसार किसी स्थान विशेष, काल विशेष में किसी वस्तु का उपस्थित नहीं होना 'अभाव' है।
2. शंकर के अनुसार, वैशेषिक के बहुतत्त्ववाद से सांख्य का द्वैतवाद बेहतर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
218- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. विशेष वह पदार्थ है जो एक ही प्रकार के दो नित्य द्रव्यों का विभेदक है।
2. वैशेषिकों ने समवाय को एक भाव पदार्थ के रूप में स्वीकार किया है।
3. वैशेषिकों के अनुसार जिन दो पदार्थों के बीच समवाय सम्बन्ध पाया जाता है, यदि उन्हें पृथक् किया जाए तो उनमें से एक का विनाश अपरिहार्य है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
कूट
(a) 1, 2 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1 और 2
उत्तर – a
219- असत्कार्यवाद के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही है?
1. असत्कार्यवाद योग दर्शन का कारण कार्य नियम है।
2. वैशेषिक दर्शन के अनुसार कारण नियत पूर्ववर्ती होता है।
3. असत्कार्यवाद को 'आरम्भवाद' भी कहा जाता है।
कूट
(a) 1, 2 और 3
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर – c
220- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. असत्कार्यवाद वैशेषिक दर्शन का कारण-कार्य नियम है।
2. कारण किसी वस्तु का पूर्ववर्ती एवं कार्य उत्तरवर्ती होता है, परन्तु सभी पूर्ववर्ती को कारण नहीं कहा जा सकता है।
3. वर्षा के पूर्व आकाश में बादल का रहना नियत पूर्ववर्ती का उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
221- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन में कारण के तीन प्रकार माने गए हैं- समवायी, असमवायी तथा निमित्त।
2. घड़े एवं मिट्टी का सम्बन्ध समवायी कारण का उदाहरण है।
3. जिसके बिना कार्य उत्पन्न ही न हो सके, उसे असमवायी कारण कहते हैं।
उपरोक्त कथनों में से सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
222- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. महर्षि गौतम के अनुसार जिसे और अधिक विभाजित किया जा सके, वही परमाणु है।
2. वैशेषिक के अनुसार संख्यात्मक दृष्टि से परमाणु अनन्त हैं तथा सभी परमाणु स्वभावतः निष्क्रिय हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
223- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय-वैशेषिक में चार प्रकार के परमाणु को स्वीकार किया गया है- पृथ्वी, अग्नि, जल तथा वायु के परमाणु।
2. वायु के परमाणु में स्पर्श का गुण पाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
224- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन के अनुसार परमाणुओं के संयोग से जगत की उत्पत्ति हुई है, परन्तु साथ में यह भी कहा गया कि यह सृष्टि ईश्वर की इच्छा से स्वयं ईश्वर द्वारा रचित है।
2. वैशेषिक का परमाणुकारणवाद, ईश्वरवाद तथा अनीश्वरवाद का समन्वय करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
225- न्याय दर्शन में प्रमा के भेद हैं -
1. प्रत्यक्ष
2. अनुमिति
3. उपमिति
3. शब्द
कूट
(a) 1, 2 केवल 3
(b) 2,3 तथा 4
(c) 1, 3 और 4
(d) 1,2,3 तथा 4
उत्तर – d
226- वैशेषिक दर्शन के अनुसार कर्म के प्रकार हैं
1. उत्प्रेक्षण
2. अवक्षेपण
3. संकुचन
3. प्रसारण
5. गमन
कूट
(a) 1, 2, 3 और 4
(b) 2, 3, 4 और 5
(c) 1, 2, 3, 4 और 5
(d) 2,3 और 4
उत्तर – c
227- न्याय-वैशेषिक दर्शन में परमाणु है
1. पृथ्वी
2. अग्नि
3. जल
3. वायु
5. आकाश
कूट
(a) 2, 3, 4 और 5
(b) 1, 2, 3 और 4
(c)2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर – b
228- नैयायिकों के अनुसार किन इन्द्रियों के द्वारा हम बाह्य द्रव्यों का अनुभव करते हैं?
1 . चाक्षुष
2 . स्पर्श
3 . श्रवण
4 . स्वाद
कूट
( a ) केवल 1
( b ) 1 और 2
( c ) 2 और 3
( d ) 3 और 4
उत्तर – b
229- न्यायमत के अनुसार, अणु निष्क्रिय और गतिहीन हैं। यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है
1 . आत्मा में रहने वाले धर्म एवं अधर्म के अनुरूप अदृष्ट द्वारा अणुओं में गति प्रदान की जाती है।
2 . अणुओं का संयोग ज्यामितीय प्रगति में होता है न कि अंकगणितीय तरीके में
3 . भौतिक व्यवस्था के पीछे एक नैतिक व्यवस्था होती है।
कूट
( a ) 1 वैध अनुमान है
( b ) 2 अवैध अनुमान है
( c ) 1 और 3 वैध अनुमान हैं
( d ) 1, 2 और 3 वैध अनुमान हैं
उत्तर – d
*निर्देश - नीचे दिए कथन एवं कारणों को ध्यानपूर्वक पढ़कर कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए
कूट
(a) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
(b) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
(c) A सही है, किन्तु R गलत है
(d) A गलत हैं, किन्तु R सही है
230- कथन (A) न्याय दर्शन का अन्तिम उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है।
कारण (R) न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि गौतम थे।
उत्तर – b
231- कथन (A) पहाड़ पर आग है, क्योंकि वहाँ धुआँ दिख रहा है।
कारण (R) अनुमान का आधार पूर्व में किए गए अनुभव हैं।
उत्तर – a
232- कथन (A) न्याय दर्शन ईश्वरवादी है।
कारण (R) नैयायिकों के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
उत्तर – a
233- कथन (A) न्याय-वैशेषिक दर्शन में अभाव एक स्वतन्त्र पदार्थ है।
कारण (R) अभाव इन्द्रिय गोचर है।
उत्तर – a
234- कथन (A) न्याय के अनुसार सामान्यों की संख्या सात है।
कारण (R) न्याय सात पदार्थों को स्वीकार करता है।
उत्तर – d
235- कथन (A) विशेष नित्य हैं।
कारण (R) वे असंख्य हैं।
उत्तर – b
236- कथन (A) अनुमान वैध मान का स्रोत नहीं है।
कारण (R) व्याप्ति की स्थापना असम्भव है।
उत्तर – a
237- कथन (A) वैशेषिकों के अनुसार, कर्म द्रव्यों का कारण नहीं होता।
कारण (R) द्रव्योत्पत्ति के पूर्व ही कर्म का अन्त हो जाता है।
उत्तर – b
238- नीचे अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिए गए हैं उन पर विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही विकल्प का चयन कीजिए
अभिकथन (A) परमाणु की सत्ता अवश्य स्वीकार की जानी चाहिए।
कारण (R) द्वयणुक सावयव है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – a
239- नीचे कथन (A) और कारण (R) दिया गया है उन पर न्याय दर्शन के परिप्रेक्ष्य में विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूट में से सही का चयन कीजिए
कथन (A) लक्षणा एक वृत्ति नहीं हो सकती है।
कारण (R) शक्ति एक वृत्ति है और शक्ति लक्षण नहीं है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही हैं , किन्तु R गलत हैं
( d ) A गलत हैं , किन्तु R सही है
उत्तर – d
240- नीचे कथन (A) और कारण (R) दिया गया हैं। इन पर न्याय वैशेषिक दर्शन के परिप्रेक्ष्य में विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूटों में से सही का चयन कीजिए
कथन (A) मुक्त आत्मा जड़ ही है।
कारण (R) मुक्त आत्मा अपनी चेतना को भी खो देती है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – d
241- कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए तथा दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन कीजिए
कथन (A) आकाशत्व की एक जाति होनी चाहिए।
कारण (R) यह आकाश की अनिवार्य विशेषता है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है ।
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – b
242- अभिकथन (A) न्याय का निष्कर्ष आधारवाक्य की तुलना में ज्यादा सामान्य नहीं हो सकता है।
कारण (R) न्याय वाक्य का निष्कर्ष तभी सत्य होता है, जब आधारवाक्य सत्य हो।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सत्य हैं , किन्तु R असत्य हैं
( d ) A असत्य है , किन्तु R सत्य है
उत्तर – b
1- किस दर्शन का एक अन्य नाम अक्षपाद दर्शन भी है? - न्याय दर्शन का
2- न्याय दर्शन के प्रवर्तक थे - महर्षि गौतम
3- न्याय दर्शन का अन्तिम उद्देश्य क्या है? - मोक्ष की प्राप्ति
4- किस विद्वान् का यह कथन है कि प्रमाणों के द्वारा किसी विषय की परीक्षा करना ही न्याय है? - वात्स्यायन का
5- कौन-सा न्याय दर्शन का मूल ग्रन्थ है? - न्यायसूत्र
6- न्याय दर्शन से सम्बन्धित ग्रन्थ न्यायमंजरी के लेखक का नाम है? - जयन्त
7- न्याय दर्शन में कितने पदार्थों या तत्त्वों का अस्तित्व स्वीकार किया गया है? - सोलह पदार्थों का
8- न्याय दर्शन में ज्ञान को क्या कहा जाता है? - अनुभव
9- न्याय के अनुसार 'प्रमा' शब्द की सही परिभाषा है? - वस्तुओं के वास्तविक स्वरूप का अपरोक्ष बोध
10- न्याय के अनुसार प्रमा का लक्षण है - यथार्थ अनुभव
11- न्याय दर्शन के अनुसार कौन-कौन से प्रमाण है? - प्रत्यक्ष, शब्द, अनुमान एवं उपमान
12- अप्रमा कितने प्रकार की होती है? - तीन प्रकार की (संशय, भ्रम एवं तर्क)
13- सीप को चाँदी के रूप में देखना किसका उदाहरण है? - विपर्यय का
14- गौतम के अनुसार इन्द्रिय, अर्थ, सन्निकर्ष से जो ज्ञान प्राप्त होता है, कहलाता है - प्रत्यक्ष
15- भारतीय दर्शन में कुल कितनी इन्द्रियाँ मानी गई हैं? - छ:
16- न्याय दार्शनिकों के अनुसार, बाह्य प्रत्यक्ष प्रमाण का प्रथम चरण कहलाता है - निर्विकल्प प्रत्यक्ष
17- किस प्रत्यक्ष में वस्तु का स्पष्ट, निश्चित एवं निर्णायक ज्ञान होता है? - सविकल्प प्रत्यक्ष
18- नैयायिकों के अनुसार हेतु का प्रत्यक्ष करके अनिवार्य सम्बन्ध के आधार पर साध्य का ज्ञान प्राप्त करना, कहलाता है - अनुमान
19- जो अनुमान स्वयं के लिए किया जाता है, उसे कौन-सा अनुमान कहते हैं? - स्वार्थ अनुमान
20- जो अनुमान पाँच अवयवों-प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन का प्रयोग करते हुए अन्य को ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाता है, उसे कहते हैं - परार्थ अनुमान
21- जब कार्य का प्रत्यक्ष करके कारण के होने का अनुमान किया जाता है, तो उसे कौन-सा अनुमान कहते हैं? - शेषवत्
22- परार्थ अनुमान में कितने क्रमबद्ध अवयव होते हैं? - पाँच
23- न्याय दार्शनिकों के अनुसार, परार्थ अनुमान का कौन-सा अवयव तृतीय लिंग परामर्श कहा जाता है? - उपनय
24- न्याय दर्शन के अनुसार व्याप्ति है? - हेतु व साध्य के बीच
25- व्याप्ति की स्थापना के लिए न्याय द्वारा अधोलिखित प्रत्ययों में से किस एक का प्रयोग किया जाता है? - सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष
26- सादृश्यता के प्रत्यक्ष से नाम (संज्ञा) और नामी (संज्ञी) के सम्बन्ध का ज्ञान कराने वाले प्रमाण को कहा जाता है? - उपमान
27- न्याय दर्शन में चौथा प्रमाण कौन-सा है? - शब्द
28- नैयायिकों के अनुसार, पद और वाक्य का अर्थ जानने से जो ज्ञान प्राप्त होता है, ज्ञान के उस प्रमाण को कहते हैं - शब्द
29- पदों के सामंजस्य को कहते हैं - योग्यता
30- नैयायिकों के अनुसार ज्ञान के विषय के आधार पर पद है - दृष्टा एवं अदृष्टा
31- वक्ता के अभिप्राय को समझना कहलाता है - तात्पर्य ज्ञान
32- शब्द नित्य है, क्योंकि यह उत्पन्न किया जाता है। इस अनुमान में हेत्वाभास है - विरुद्ध
33- शब्द एक गुण है, क्योंकि वह दृश्य है, में हेत्वाभास है - असिद्ध
34- यदि हेतु साध्य का खण्डन करने वाला है, तो अनुमान में जो दोष आ जाता है, ऐसे दोष को कहा जाता है - विरुद्ध
35- जिस अनुमान के हेतु दोष को हम किसी अन्य अनुमान द्वारा दिखा सकते हैं, तो ऐसे दुष्ट अनुमान के दोष को कहते हैं - सत्प्रतिपक्ष
36- यदि किसी अनुमान के दोष को अन्य प्रमाण द्वारा दिखा सकें, तो ऐसे अनुमान के दोष को कहते हैं - बाधित
37- 'प्रत्येक संकल्प में ईश्वर की चेतना अन्तर्निहित है।' इस दृष्टिकोण को मानते हैं - नैयायिक
38- बौद्ध दर्शन में प्रमाण के कितने प्रकार स्वीकार किए गए हैं? - दो
39- बौद्ध दार्शनिकों के अनुसार दूसरा प्रमाण कौन-सा है? - अनुमान
40- न्याय दर्शन में भ्रम विषयक सिद्धान्त कहलाता है? - अन्यथा ख्यातिवाद
41- वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक कणाद का वास्तविक नाम था - उलूक
42- किस दर्शन को औलक्य दर्शन भी कहा जाता है? - वैशेषिक दर्शन को
43- वैशेषिक दर्शन के अनुसार पदार्थों की संख्या कितनी है? - सात
44- किसके अनुसार पदार्थ वह है जो सत् है, ज्ञेय है तथा अभिधेय है? - प्रशस्तपाद
45- वैशेषिकों के अनुसार द्रव्य के प्रकार हैं - 9
46- पंचमहाभूतों में से किसके परमाणु नहीं होते? - आकाश के
47- वैशेषिक दर्शन के अनुसार गुणों की संख्या है? - 24
48- वैशेषिक दर्शन में किस पदार्थ को मूर्त द्रव्यों का गतिशील व्यापार कहा गया है? - कर्म को
59- एक ही प्रकार के दो परमाणुओं का विभेदक कहलाता है - विशेष
50- "पृथ्वी के दो परमाणु जिनका गुण तो गन्ध हो किन्तु दोनों एक-दूसरे से पृथक् हैं।" किसका उदाहरण है? - विशेष का
51- किसका विचार है कि वैशेषिक के बहुत्त्ववाद से सांख्य का द्वैतवाद बेहतर है? - शंकर का
52- किसका यह मत है कि समवाय एक आन्तरिक नहीं, बल्कि बाह्य सम्बन्ध है, क्योंकि समवाय से जुड़ी वस्तुएँ एक-दूसरे से पृथक होती हैं? - रामानुज का
53- असत्कार्यवाद का सम्बन्ध है - वैशेषिक दर्शन से
54- अभाव एक पदार्थ है, परन्तु प्रमाण नहीं, यह मत है - न्याय वैशेषिक का
55- वैशेषिक दर्शन में अभाव के कितने प्रकार बताए गए हैं? - दो
56- वैशेषिक दर्शन के अनुसार कारण के कितने प्रकार बताए गए हैं? - तीन
57- घड़े एवं मिट्टी का सम्बन्ध किस कारण का उदाहरण है? - समवायी कारण का
58- किस कारण को अन्य दर्शन में उपादान कारण कहा जाता है? - समवायी कारण को
59- वैशेषिक दर्शन में मोक्ष के लिए किस शब्द का प्रयोग हुआ है? - निःश्रेयस
60- किस दर्शन में धर्म का लक्षण है-“यतो अभ्युदयनिः श्रेयससिद्धिः सधर्मः।" - वैशेषिक दर्शन में
61- पदार्थ के यथार्थ स्वरूप के ज्ञान को कहते हैं - तत्त्वज्ञान
62 न्याय-वैशेषिक में कितने प्रकार के परमाणुओं को स्वीकार किया गया? - चार प्रकार के
63- किसके परमाणु में स्पर्श का गुण प्रमुख रूप से पाया जाता है? - वायु के
64- न्याय-वैशेषिक के मतानुसार परमाणु स्वभावतः है - निष्क्रिय
65- न्याय दर्शन में किसको ज्ञान का आश्रय माना जाता है - आत्मा को
66 वैशेषिकों के अनुसार किस पर गुण तथा कर्म, ये दोनों पदार्थ निर्भर करते हैं - द्रव्य पर
67- नव्य न्याय का प्रारम्भ किससे से हुआ है - गणेश की चिन्तामणि से
68- न्याय के अनुसार गोत्व किसके द्वारा प्रत्यक्ष किया जा सकता है? - संयुक्त समवाय
69- कौन-सी पद्धति प्रमा की परिभाषा 'तद्वति तत्प्रकारकोऽनुभवों' के रूप में करता है? - न्याय
70- किस दर्शन का यह विचार है कि द्रव्य और इसके गुण के बीच समवाय सम्बन्ध है, किन्तु हम इसका प्रत्यक्ष नहीं कर सकते हैं? - वैशेषिक दर्शन का
71- वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में किस प्रकार का कारण किसी भी तरह से समवाय के सम्बन्ध के द्वारा अपने कार्य से सम्बन्धित नहीं है? - मात्र निमित्त
72- नैयायिकों के अनुसार पात्र और इसके रंग के बीच सम्बन्ध को किसके द्वारा अनुभव किया जा सकता है? - विशेषणता सन्निकर्ष
73- किस दर्शन के अनुसार वेद ईश्वर रचित है? - न्याय दर्शन के
74- किसके विचार से प्रत्यक्ष की परिभाषा - "इन्द्रियार्थसन्निकर्षोत्सनं ज्ञानं अव्यपदेभ्यम् अव्यभिचारी व्यवसायात्मकम्" है? - गौतम के अनुसार
75- न्याय ज्ञानमीमांसा में किस प्रकार के प्रत्यक्ष को अतीन्द्रिय कहा जाता है? - निर्विकल्पक प्रत्यक्ष को
76- न्याय के अनुसार वृत्ति किसके बीच का सम्बन्ध है? - पद एवं पदार्थ के बीच का
77- न्याय के अनुसार घट में पटाभाव किस प्रकार का सन्निकर्ष है? - विशेषणता
78- वैशेषिक दर्शन में ईश्वर जगत का किस प्रकार का कारण है? - निमित्तकारण
79- यह विचार कि ईश्वर एक प्रकार का आत्मा है, किसके द्वारा स्वीकृत है? - न्याय और वैशेषिक दर्शन द्वारा
80- जब शब्द की लक्षणा अपने शक्यार्थ का पूरी तरह त्याग कर देती है तो न्याय प्रमाणमीमांसा में उस लक्षण को कहते हैं - जहत् लक्षणा
81- वैशेषिक दर्शन के अनुसार आकाश क्या है - एक, बिभु और नित्य
82- न्याय दर्शन के अनुसार मोक्षावस्था में आत्मा किस से रहित है - दुःख, सुख और चैतन्य से
83- नैयायिकों के अनुसार, आत्मा क्या है? - ज्ञाता और ज्ञात
84- वैशेषिकों के अनुसार, पट के रंग के सन्दर्भ में तन्तु का रंग किस प्रकार का कारण है? - असमवायी कारण
85- न्याय के अनुसार किस सन्निकर्ष में हम एक पुष्प और उसके लाल रंग के बीच के सम्बन्ध का बोध करते हैं ? - विशेणता
86- वैशेषिकों द्वारा मुक्त आत्मा में ज्ञान के किस प्रकार के अभाव की बात मानी गई है? - ध्वंसाभाव
87- वैशेषिकों के अनुसार सामीप्य और दूरी के ज्ञान का क्या कारण है? - द्विक्
88- किस प्रमाण के न्याय सम्प्रदाय ने निर्विकल्पक प्रत्यक्ष की अवस्था को सिद्ध किया? - अनुमान
89- वैशेषिक के अनुसार गाय में अश्वत्व के अभाव को कैसे जाना जाता है - अन्योन्याभाव से
90- नैयायिकों के अनुसार 'पदशक्ति' क्या है - पद और प्रयुज्य पदार्थ के बीच का सम्बन्ध है
91- वैशेषिक के अनुसार अतीत और वर्तमान के अवबोध का कारण है? - काल
92- वैशेषिकों के अनुसार द्वयणुक का असमवायीकरण क्या है? - परमाणु संयोग
93- नैयायिकों द्वारा समवाय सम्बन्ध जिस सन्निकर्ष से प्राप्त होता है, उसे जाना जाता है - विशेषणता
94- न्याय भाषा-दर्शन में ईश्वरेच्छा क्या है - स्वयं शक्ति
95- ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए कौन सा दर्शन अदृष्ट की सहायता लेता है?- न्याय और वैशेषिक
96- 'याग न स्वर्गहेतु क्रियत्वात्' उक्त अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - बाधित
97- वैशेषिकों के अनुसार, आत्मा तब ज्ञान का आधार नहीं हो सकती है, जब यह हो जाती है?- मुक्त
98- 'शब्द नित्य शब्दत्वात्' उक्त अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - असाधारण सव्यभिचार
99- वैशेषिकों के अनुसार, घट का असमवायी कारण कौन है? - कपाल संयोग
100- मीठे में कड़वेपन का अभाव किस सम्बन्ध से रहता है? - स्वरूप सम्बन्ध
101- वैशेषिक मतानुसार, घट के सम्बन्ध में कुम्हार का दण्ड क्या है? - निमित्त कारण
102- नैयायिकों के द्वारा प्रत्यक्ष की निर्विकल्पक स्थिति की सिद्धि होती है - अनुमान के द्वारा
103- वैशेषिक के अनुसार, एक घट का असमवायीकारण है? - घट के अंशों का संयोजन
104- 'पर्वतः वह्निमान धूमात्' इस अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? - व्याप्यत्वासिद्ध
105- वैशेषिक के अनुसार कौन एक त्रसरेणु के परिमाण का कारण है? - त्रसरेणुओं की संख्या
106- वैशेषिक के अनुसार आत्मा शरीर के साथ इन सम्बन्धों से रहता है - विशेषणता
107- वैशेषिक के अनुसार, ज्ञान का अभाव मानवीय आत्मा में किस सम्बन्ध में रहता है? - स्वरूप सम्बन्ध में
108- वैशेषिक दर्शन में विश्व का समवायीकारण है? – परमाणु
109- न्याय के अनुसार, किसमें भूतकाल का सचेतन सन्दर्भ और उसी वस्तु की वर्तमान दशा अपेक्षित होती है?- प्रत्यभिज्ञा
110- न्याय की किस अवधारणा के अनुसार, एक व्यक्ति भूतकाल, वर्तमान और भविष्य की वस्तुओं का अनुभव कर सकता है? - योगज से
111- 'अग्नि शीतल है, क्योंकि यह एक द्रव्य है' न्याय के अनुसार उपरोक्त तर्क में किस प्रकार का दोष है?- बाधित
112- अभाव के सन्दर्भ में, ‘जले गन्धो नास्ति' कथन में 'जल' से क्या अभिप्राय है? - अनुपयोगी
113- आकाश में 'आकाशत्व' किस भाव से निहित है? - विशेष-नित्यद्रव्य भाव से
114- न्याय के अनुसार ज्ञान के किस प्रकार का कारण आत्मा है? - समवायी कारण
115- 'पर्वत में अग्नि है, क्योंकि वहाँ नील धूम्र है न्याय के अनुसार इस अनुमान में दोष है – व्याप्यत्वासिद्ध
116- किस दर्शन सम्प्रदाय के अनुसार, अभाव का अनुभव विशेषणता सन्निकर्ष के द्वारा किया जाता है? - न्याय दर्शन
117- बरतन के मामले में कुम्भकार का जनक माना जाता है - अन्यथासिद्ध
118- द्वयणुक के उत्पादन में परमाणु संयोग की कारणता है - असमवायीकारणता
119- "संस्कारजन्य ज्ञानम्' का अभिप्राय है - स्मृति
120- भारतीय दर्शन की किस प्रणाली का विचार है कि संज्ञान का प्रामाण्य और अप्रामाण्य परत: है? - न्याय दर्शन
121- अन्योन्य अभाव की अवधारणा का प्रतिपादन किया गया है - न्याय द्वारा
122- न्याय के अनुसार, कार्य जाना जाता है - प्राग्भाव प्रतियोगी
123- चेतना आत्मा का एक आगन्तुक गुण है, यह किसने स्वीकार किया है - न्याय द्वारा
124- न्याय का कारणता सिद्धान्त कहा जाता है - असत्कार्यवाद
125- वैशेषिक मतानुसार 'पूर्व' और 'पश्चिम' की अवधारणा का कारण है – द्विक्
126- न्याय मत के अनुसार, किस सन्निकर्ष के द्वारा एक जाति के सभी सदस्यों को प्रत्यक्ष प्राप्त करते हैं? - सामान्य लक्षण
127- किस सम्प्रदाय का मानना है कि ईश्वर विद्यमान है, परन्तु उसने विश्व का सृजन नहीं किया है?- योग दर्शन का
128- न्यायदर्शन के अनुसार कौन- सा प्रमाण अभाव के ज्ञान का साधन है?- प्रत्यक्ष
129- 'जाति उतनी वास्तविक है जितना कि व्यक्ति' यह विचार किसका है? - न्याय सम्प्रदाय
130- वैशेषिक के अनुसार, जगत का समवायीकरण है - परमाणु
131- पद और पदार्थ के बीच सम्बन्ध के बारे में नैयायिकों का क्या मत है? - शक्ति एवं लक्षणा
132-
सुमेलित
सूची 1
|
सूची 2
|
न्याय कुसुमांजलि
|
गंगेश
|
तत्वचिन्तामणि
|
उदयन
|
योगसूत्र
|
पतंजलि
|
मीमांसा सूत्र
|
जैमिनी
|
133-
सुमेलित
सूची 1
|
सूची 2
|
पर्वत पर आग है
|
प्रतिज्ञा
|
क्योंकि वहाँ धुआँ है
|
हेतु
|
पर्वत पर धुआँ है
|
उपनय
|
इसलिए पर्वत पर आग है
|
निगमन
|
134-
सुमेलित
सूची 1 (दर्शन)
|
सूची 2 (प्रमाण की संख्या)
|
चार्वाक
|
एक
|
बौद्ध
|
दो
|
न्याय
|
चार
|
135-
सुमेलित
सूची 1
|
सूची 2
|
न्याय भाष्य
|
वात्स्यायन
|
न्याय वार्तिक
|
उद्योतकर
|
न्याय मंजरी
|
जयन्त
|
तत्व चिन्तामणि
|
गंगेश
|
136-
सुमेलित
सूची 1
|
सूची 2
|
हेतु सभी भावात्मक उदाहरणों, जिसमें साध्य है,
में अवश्य विद्यमान होगा
|
सपक्षसत्व
|
हेतु पक्ष के साथ असंगत नहीं होगा
|
अबाधित
|
हेतु पक्ष में विद्यमान होगा
|
पक्षधर्मता
|
हेतु सभी अभावात्मक उदाहरणों, जिनमें साध्य
नहीं, में विद्यमान नहीं होगा
|
विपक्षसत्व
|
137-
सुमेलित
सूची 1
|
सूची 2
|
पक्षधर्मता
|
पर्वत पर धूम्र है
|
विपक्षसत्व
|
जलाशय में अग्नि है
|
बाधित
|
अग्नि शीतल है
|
विरुद्ध
|
शब्द शाश्वत है, क्योंकि वह उत्पन्न होता है
|
138-
सुमेलित
सूची 1
|
सूची 2
|
पर-सामान्य
|
सत्ता
|
अपर-सामान्य
|
घटत्व
|
परापर-सामान्य
|
द्रव्यत्व
|
उपाधि
|
इंद्रियत्व
|
(a) न्याय दर्शन में पद को शक्त कहा गया है।
(b) नैयायिकों ने पदों के दो वर्गीकरण प्रस्तुत किए।
(c) नैयायिकों के अनुसार वैदिक पदों की रचना अलौकिक मानव/ ईश्वर ने की थी।
(d) नैयायिकों के अनुसार लौकिक पदों की रचना भी ईश्वर ने ही की थी।
उत्तर – d
140- निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) न्याय दर्शन में अनुमान को अयथार्थ ज्ञान की प्राप्ति के साधन के रूप में स्वीकार किया गया है।
(b) हेत्वाभास का सम्बन्ध अनुमान के दोष से है।
(c) हेत्वाभास का अर्थ होता है कि वस्तु देखने में तो हेतु के समान है परन्तु वास्तव में हेतु नहीं है।
(d) नैयायिकों के अनुसार दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में पाँच प्रकार के वास्तविक दोष उत्पन्न होते हैं।
उत्तर – a
141- निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) न्याय दर्शन अनीश्वरवादी है।
(b) न्याय दर्शन ईश्वरवादी दर्शन है।
(c) नैयायिकों के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
(d) नैयायिकों की मान्यता है कि ईश्वर की कृपा से ही मानव मोक्ष प्राप्त करने में सफल होता है।
उत्तर – a
142- निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद थे।
(b) वैशेषिक दर्शन में 'विशेष' नामक पदार्थ की विशुद्ध रूप से विवेचना है, इसलिए यह दर्शन वैशेषिक कहलाता है।
(c) वैशेषिक साहित्य पर कणाद का 'वैशेषिक सूत्र' प्रमुख ग्रन्थ है।
(d) वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद, गौतमबुद्ध के गुरु थे।
उत्तर – d
143- वैशेषिक दर्शन के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) कर्म द्रव्य का सक्रिय रूप तथा गुण द्रव्य का निष्क्रिय रूप है।
(b) कर्म या क्रिया चार प्रकार की होती है।
(c) कर्म का निवास सर्वव्यापी द्रव्यों (जैसे-आकाश) में नहीं होता क्योंकि वे स्थान परिवर्तन से शून्य हैं।
(d) वैशेषिक दर्शन में गुणों की संख्या 24 है।
उत्तर – b
144- वैशेषिक के अनुसार निम्नलिखित पदार्थों में से किस एक में सामान्य नहीं होता?
(a) द्रव्य
(b) गुण
(c) कर्म
(d) समवाय
उत्तर – d
145- सामान्य के अन्तर्गत द्रव्यत्व किसका उदाहरण है?
(a) पर
(b) अपर
(c) पर-अपर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – c
146- वैशेषिकों के अनुसार निम्नलिखित पदार्थों में से किसमें सामान्य नहीं होता?
(a) द्रव्य
(b) विशेष
(c) गुण
(d) कर्म
उत्तर – b
147- असत्कार्यवाद के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) असत्कार्यवाद वैशेषिक दर्शन का कारण कार्य नियम है।
(b) वैशेषिक के अनुसार कारण नियत पूर्ववर्ती होता है।
(c) इस सिद्धान्त को आरम्भवाद भी कहा जाता है, क्योंकि यह कार्य को एक नवीन उत्पत्ति मानता है।
(d) असत्कार्यवाद का सिद्धान्त भारतीय दर्शन में सिर्फ वैशेषिक दर्शन में मिलता है।
उत्तर – d
148- निम्नलिखित कथनों में असत्य कथन कौन-सा है?
(a) परमाणुकारणवाद न्याय-वैशेषिक दर्शन का एक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है।
(b) महर्षि गौतम के अनुसार जिसे और अधिक विभाजित न किया जा सके, वही परमाणु है।
(c) न्याय-वैशेषिक में पाँच प्रकार के परमाणु को स्वीकार किया गया है।
(d) प्रत्येक परमाणु का अपना एक विशेष महत्त्व होता है।
उत्तर – c
149- वैशेषिक परमाणुवाद के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सही है?
(a) यह परमाणुओं में संख्या भेद और गुण भेद दोनों मानता है।
(b) यह परमाणुओं में केवल संख्या भेद मानता है।
(c) यह परमाणुओं में केवल गुण भेद मानता है।
(d) यह परमाणुओं में न तो गुण भेद मानता है न ही संख्या भेद।
उत्तर – a
150- न्याय दार्शनिकों के अनुसार बाह्य प्रत्यक्ष के चरण का क्रम है
(a) प्रत्यभिज्ञा, निर्विकल्प प्रत्यक्ष, सविकल्प प्रत्यक्ष
(b) निर्विकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा, सविकल्प प्रत्यक्ष
(c) निर्विकल्प प्रत्यक्ष, सविकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा
(d) सविकल्प प्रत्यक्ष, निर्विकल्प प्रत्यक्ष, प्रत्यभिज्ञा
उत्तर – c
151- न्याय दर्शन के पदार्थ अनुमान में पाँच क्रमबद्ध अवयव होते हैं
(a) दृष्टान्त, उपनय, निगमन, प्रतिज्ञा तथा हेतु
(b) उपनय, दृष्टान्त, निगमन, हेतु तथा प्रतिज्ञा
(c) प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, निगमन तथा उपनय
(d) प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन
उत्तर – d
152- निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
(a) पर्वत पर आग है--हेतु
(b) क्योंकि वहाँ धुआँ है--उपनय
(c) पर्वत पर धुआँ है-उपनय
(d) इसलिए पर्वत पर आग है-प्रतिज्ञा
उत्तर – c
153- निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म असंगत है?
(a) 'पर'-सत्ता
(b) 'अपर'--'घटत्व'
(c) 'पर-अपर'--'द्रव्यत्व'
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – d
154- निम्नलिखित में कौन-सा युग्म असंगत है?
(a) आकांक्षा-पदों की परस्पर अपेक्षा
(b) योग्यता-पदों का व्यवधान रहित पूर्वा पर क्रम से उच्चारण
(c) सन्निधि-पदों का व्यवधान रहित पूर्वा पर क्रम से उच्चारण
(d) तात्पर्य ज्ञान-वक्ता के अभिप्राय को समझना
उत्तर – b
155- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? सही कूट चुनिए
( a ) साधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपसिद्ध
( c ) विरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – b
156- न्याय-ज्ञानमीमांसा के अनुसार अधोलिखित में किस प्रकार का अनुमान है?
जो ज्ञेय है वह अभिधेय है
घट ज्ञेय है
यह अभिधेय है ।
( a ) पूर्ववत्
( b ) शेषवत्
( c ) कैवलान्वयी
( d ) केवल - व्यतिरेकी
उत्तर – c
157- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है?
यज्ञ स्वर्ग का कारण नहीं है,
क्योंकि यह क्रियान्वात् है।
( a ) सव्यभिचार
( b ) असिद्ध
( c ) निरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – d
158- न्याय के अनुसार, चाक्षुष इन्द्रिय की वस्तुएँ स्पर्शेन्द्रिय की वस्तुएँ भी होती हैं सिवाय
( a ) केवल रूप
( b ) केवल रूपत्व
( c ) रूप और रूपत्व दोनों
( d ) रूप और स्पर्श दोनों
उत्तर – c
159- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? निम्नलिखित में से सही कूट का चयन कीजिए
मृमण्य : पर्वत : वह्निमान
( a ) असाधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपसिद्ध हेत्वाभास
( c ) आश्रयसिद्ध हेत्वाभास
( d ) विरुद्ध
उत्तर – c
160- निम्नलिखित में से कौन वैशेषिक दर्शन के अनुकूल नहीं है?
( a ) प्रत्यक्ष प्रमाण है।
( b ) अनुमान प्रमाण है।
( c ) शब्द प्रमाण है।
( d ) शब्द स्वतन्त्र प्रमाण है।
उत्तर – d
161- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? निम्नलिखित में से सही कूट का चयन कीजिए
( a ) आश्रयासिद्ध
( b ) बाधित
( c ) विरुद्ध
( d ) सत्प्रतिपक्ष
उत्तर – b
162- निम्नलिखित अनुमान में कौन-सा हेत्वाभास है? सही कूट का चयन करें
शब्द अनित्य चाक्षुषत्वात्
( a ) स्वरूपासिद्ध हेत्वाभास
( b ) बाधित हेत्वाभास
( c ) विरुद्ध हेत्वाभास
( d ) सव्यभिचार हेत्वाभास
उत्तर – a
163- निम्नलिखित में से कौन व्याप्तिग्रह एक साधन नहीं है?
( a ) तर्क
( b ) सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष
( c ) आप्तवाक्य
( d ) उपाधिनिरास
उत्तर – c
164- निम्नलिखित अनुमान द्वारा किस प्रकार का हेत्वाभास किया जाता है? सही कूट का चयन करें ,
यह प्राणि अवश्य रूप से एक गाय होनी चाहिए क्योंकि इसमें घोड़त्व है।
( a ) सत्प्रतिपक्ष
( b ) सव्यभिचार
( c ) विरुद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – c
165- वैशेषिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन एक नित्यद्रव्य नहीं है?
( a ) परमाणु
( b ) द्वयणुक
( c ) मनस
( d ) द्विक्
उत्तर – b
166- निम्नलिखित में से कौन वैशेषिकों को स्वीकार्य नहीं है?
( a ) वेद की रचना किसी के द्वारा नहीं की गई है।
( b ) तत्त्वज्ञान निःश्रेयस के लिए पर्याप्त शर्त नहीं।
( c ) अभाव का प्रत्यक्ष हो सकता है।
( d ) ईश्वर एक प्रकार की आत्मा है।
उत्तर – a
167- न्याय में अपवर्ग सन्दर्भ में सही क्रम का चयन कीजिए
( a ) दु:ख, प्रवृत्ति, दोष, जन्म, मिथ्याज्ञान
( b ) मिथ्याज्ञान, दोष, प्रवृत्ति, जन्म, दु:ख
( c ) जन्म, दुःख, प्रवृत्ति, दोष, मिथ्याज्ञान
( d ) जन्म, दु:ख, मिथ्याज्ञान, प्रवृत्ति, दोष
उत्तर – b
168- नैयायिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन पंचावयवीन्याय का अवयव नहीं है?
( a ) उदाहरण
( b ) उपनय
( c ) उपमान
( d ) निगमन
उत्तर – c
169- नैयायिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन वाक्यार्थ ज्ञान की शर्त नहीं है?
( a ) व्याकरण
( b ) तात्पर्य
( c ) आकांक्षा
( d ) आसत्ति
उत्तर – a
170- निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है? सही कूट का चयन कीजिए
'पर्वत : वह्निमान नीलधूमात '
कूट
( a ) साधारण सव्यभिचार
( b ) स्वरूपासिद्ध
( c ) व्याप्यत्वासिद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – c
171- वैशेषिकों के अनुसार सत्ता सामान्य निम्नलिखित में से किसमें है?
( a ) द्रव्य, गुण और कर्म में
( b ) द्रव्य, गुण, कर्म और सामान्य में
( c ) गुण और कर्म में
( d ) द्रव्य और गुण में
उत्तर – a
172- निम्नलिखित में से कौन-सा मूर्तद्रव्य नहीं है?
( a ) मरुत
( b ) मनस
( c ) आत्मन
( d ) क्षिति
उत्तर – d
173- केवल नित्य मूर्तद्रव्य को वर्णित करने वाले कूट का चयन कीजिए
( a ) क्षिति, मनस, आकाश
( b ) द्विक्, काल, आत्मा
( c ) क्षिति के परमाणु तेज और मरुत
( d ) काल, आत्मा और मनस
उत्तर – c
174- आकाश, काल और द्विक् इन सभी तीन द्रव्यों की कुछ सामान्य विशेषताएँ होती हैं। निम्न में से उस एक विशेषता का चयन कीजिए, जो उन सभी विशेषताओं का सही-सही उल्लेख करता है?
( a ) एक, भौतिक (भूत) और नित्य
( b ) एक, नित्य और मिश्रित
( c ) एक, सर्वव्यापी और नित्य
( d ) अनेक, सर्वव्यापी और नित्य
उत्तर – d
175- निम्न में से कौन नित्य द्रव्य नहीं है?
( a ) आत्मा
( b ) आकाश
( e ) विशेष
( d ) काल
उत्तर – c
176- न्याय के लिए कौन-सा कथन स्वीकार्य नहीं है?
( a ) इन्द्रियार्थसन्निकर्ष जन्यम् ज्ञानम् प्रत्यक्षम्
( b ) द्रव्याश्रिता ज्ञेया निर्गुणा निष्क्रिया गुणा :
( c ) संदिग्धसाध्यवान पक्षः
( d ) अर्थक्रियासामर्थ्य सत् का मानदण्ड है
उत्तर – a
177- किस प्रकार का हेत्वाभास निम्नलिखित अनुमान द्वारा किया जाता है? सही कूट का चयन कीजिए
'मणिमयः पर्वतः वह्निमान धूमात्
( a ) अनुपसंहारी सव्यभिचार
( b ) आश्रयासिद्ध
( c ) स्वरूपासिद्ध
( d ) बाधित
उत्तर – d
178- नैयायिकों के अनुसार, सभी प्रकार की धूम्र घटनाओं को हम जान सकते हैं, मात्र
( a ) योगज प्रत्यासत्ति से
( b ) सामान्यलक्षण प्रत्यासत्ति से
( c ) ज्ञानलक्षण प्रत्यासत्ति से
( d ) समवाय सन्निकर्ष से
उत्तर – c
179- वैशेषिक के अनुसार, सृष्टि परमाणुओं के संयोग से प्रारम्भ होती है
( a ) परमाणु के स्वभाव के द्वारा
( b ) ईश्वरीय इच्छा के द्वारा
( c ) उत्पादक व्यवस्था के द्वारा
( d ) आकस्मिक
उत्तर – b
180- निम्नांकित में हेत्वाभास की पहचान करें
सभी धूम्रवान वस्तुएँ वह्निवान हैं।
पर्वत धूम्रवान हैं।
इसलिए, पर्वत वह्निवान है।
कूट
( a ) विरुद्ध
( b ) प्रकरणसम
( c ) असिद्ध
( d ) सव्यभिचार
उत्तर – d
181- कौन-से भूतद्रव्य नित्य हैं?
( a ) केवल आकाश
( b ) केवल मारुत
( c ) क्षिति, अप, तेज, मारुत के परमाणु
( d ) आकाश और क्षिति, अप, तेज और मारुत के परमाणु
उत्तर – d
182- वैशेषिक के अनुसार नित्य द्रव्य है
( a ) त्रयणुक
( b ) आत्मा
( c ) द्वयणुक
( d ) कर्म
उत्तर – b
183- निम्नलिखित में से कौन-सा सम्बन्ध नहीं है?
( a ) स्वरूप
( b ) अपृथसिद्धि
( c ) गुण
( d ) समवाय
उत्तर – a
184- नैयायिकों के अनुसार द्विक, आत्मा और मनस हैं
( a ) भौतिक
( b ) मूर्त
( c ) ' a ' और ' दोनों
( d ) न तो ' a ' और न ही
उत्तर – d
185- न्याय-वैशेषिक के अनुसार, सामान्य अवस्थित है
( a ) गुण, सामान्य और विशेष में
( b ) द्रव्य, गुण और कर्म में
( c ) द्रव्य, कर्म और अभाव में
( d ) केवल द्रव्य में
उत्तर – b
186- न्याय के अनुसार निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का दोष है? सही विकल्प का चयन कीजिए अनुमान शाश्वत अणुओं से निर्मित होने के कारण जगत शाश्वत है।
( a ) विरुद्ध
( b ) कालातीत
( c ) सत्प्रतिपक्ष
( d ) सव्यभिचार
उत्तर – a
187- वैशेषिक मत के सन्दर्भ में उस विकल्प का चयन करें जिसके अनुसार द्रव्य न तो अमूर्त है न मूर्त
( a ) आकाश, काल, द्विक्
( b ) काल, दिक्, आत्मा
( c ) दिक्, आत्मा, मनस
( d ) आकाश, आत्मा, काल
उत्तर – b
188- वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में निम्नलिखित में से कौन नित्य द्रव्य नहीं है?
( a ) परमाणु
( b ) द्वयणुक
( c ) काल
( d ) मनस
उत्तर – b
189- निम्नलिखित उदाहरण में हेत्वाभास है, जिसे इस रूप में जाना जाता है "शब्द नित्य हैं, क्योंकि उसमें शब्दत्व है।"
( a ) साधारण अनेकान्तिक के रूप में
( b ) असाधारण अनेकान्तिक के रूप में
( c ) अनुपसंहारी अनेकान्तिक के रूप में
( d ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर – b
190- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दर्शन का मुख्य उद्देश्य जीवन के दुःखों का किस तरह से नाश हो, इसका उपाय निकालना है।
2. न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि गौतम का पूरा नाम मेधातिथि गौतम है।
3. न्याय दर्शन में सात पदार्थों के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
191- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. प्राचीन समय का न्याय-प्राचीन न्याय तथा आधुनिक काल का न्याय नव्य न्याय कहलाता है।
2. नव्य न्याय का प्रारम्भ गणेश की तत्त्व चिन्तामणि से हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
192- निम्नलिखित कथनों पर न्याय दर्शन के अन्तर्गत विचार कीजिए
1. यथार्थ अनुभव को अप्रमा कहा जाता है।
2. किसी वस्तु के अन्यथा अनुभव को प्रमा करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
193- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दर्शन ज्ञान को अनुभव कहता है।
2. न्याय दर्शन में प्रमा के तीन भेद होते हैं।
3. न्याय दर्शन में अप्रमा के चार भेद होते हैं।
कूट
(a) केवल 1
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
194- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सीप को चाँदी के रूप में देखना विपर्यय का एक उदाहरण है।
2. विपर्यय में ज्ञान का वस्तु से संवाद होता है।
3. विपर्यय अप्रमा का एक प्रकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – c
195- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार ज्ञान का एक ही प्रकार है- यथार्थ ज्ञान।
2. न्याय दर्शन में यथार्थ ज्ञान को प्राप्त करने के लिए चार स्वतन्त्र प्रमाण स्वीकार किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
196- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. भारतीय दर्शन में कुल 6 इन्द्रियाँ मानी गई हैं।
2. मन को आन्तरिक इन्द्रिय कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
197- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार बाह्य प्रत्यक्ष तीन चरणों में सम्पन्न होता है।
2. निर्विकल्प प्रत्यक्ष बाह्य प्रत्यक्ष की दूसरी अवस्था है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
198- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जब इन्द्रिय अर्थ सन्निकर्ष साधारण ढंग से होता है, तो इसे लौकिक प्रत्यक्ष कहते हैं।
2. जब इन्द्रिय अर्थ सन्निकर्ष असाधारण ढंग से होता है, तो इसे अलौकिक प्रत्यक्ष कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
199- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अनुमान के तीन अवयव होते हैं- हेतु, साध्य तथा पक्ष
2. हेतु का प्रत्यक्ष करके अनिवार्य सम्बन्ध के आधार पर पक्ष में साध्य का ज्ञान प्राप्त होना ही अनुमान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
200- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जो अनुमान स्वयं के लिए किया जाता है, उसे परार्थ अनुमान कहते हैं।
2. जो अनुमान पाँच अवयवों-प्रतिज्ञा, हेतु, दृष्टान्त, उपनय तथा निगमन का प्रयोग करते हुए अन्य को ज्ञान प्राप्त कराने के लिए किया जाता है, उसे स्वार्थ अनुमान कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
201- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय दार्शनिकों के अनुसार पदार्थ अनुमान का चौथा चरण उपनय ही तृतीय लिंग परामर्श कहलाता है तथा इसी के आधार पर साध्य का ज्ञान प्राप्त होता है।
2. पंचअवयव अनुमान का परार्थ अनुमान के अन्तर्गत आते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
202- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. व्याप्ति से तात्पर्य है- हेतु एवं साध्य का व्यापक सम्बन्ध।
2. व्याप्ति के तीन प्रकार होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
203- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जब समान विस्तार वाले दो पदों में व्याप्ति सम्बन्ध होता है अर्थात् व्यात्य से व्यापक का अनुमान सम्भव हो तथा व्यापक से व्यात्य का भी अनुमान सम्भव हो तभी दोनों पदों में व्याप्ति सम व्याप्ति कहलाती है।
2. न्यूनाधिक विस्तार वाले दो पदों में जब व्याप्ति का सम्बन्ध होता है तो उसे विषम व्याप्ति या असम व्याप्ति कहते हैं।
कूट
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
204- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. सादृश्यता के प्रत्यक्ष से नाम (संज्ञा) और नामी (संज्ञी) के सम्बन्ध का ज्ञान कराने वाले प्रमाण को शब्द कहते हैं।
2. पद और वाक्य का अर्थ जानने से जो ज्ञान प्राप्त होता है, ज्ञान के उस प्रमाण को उपमान कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
205- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कभी-कभी जब दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में जो दोष पैदा हो जाते हैं, तो अनुमान के दोष को हेत्वाभास कहते हैं।
2. नैयायिकों के अनुसार दुष्ट हेतु के कारण अनुमान में तीन प्रकार के वास्तविक दोष उत्पन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं? -
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2 6
उत्तर – a
206- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. न्याय दर्शन का आत्मा का ही एक विशेष रूप मानता है।
2. नैयायिक के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
3. न्याय दर्शन के अनुसार ईश्वर की कृपा से ही मोक्ष सम्भव है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
कूट
(a) 1 और 2
(c) 1 और 3
(b) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
207- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बौद्ध दर्शन के अनुसार प्रत्येक प्रमाण का क्षेत्राधिकार अलग है।
2. बौद्ध दर्शन में दो प्रमाण हैं-प्रत्यक्ष तथा अनुमान।
3. न्याय दर्शन में प्रमाण की संख्या चार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
208- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय के भ्रम के व्याख्यान का नाम विपरीत ख्याति है।
2. कुमारिल और नैयायिक दोनों ही भ्रम को अन्यथाज्ञान या मिथ्याज्ञान मानते हैं।
3. कुमारिल यथार्थता को ज्ञान का स्वरूप मानते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – b
209- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कुमारिल और नैयायिक दोनों ही भ्रम को अन्यथाज्ञान या मिथ्याज्ञान मानते हैं।
2. न्याय के भ्रम के व्याख्यान का नाम ही अन्यथाख्याति है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
210- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक साहित्य पर कणाद का वैशेषिक सूत्र प्रमुख ग्रन्थ है।
2. वैशेषिक दर्शन में परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति हेतु तत्त्व ज्ञान को आवश्यक नहीं माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
211- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन में पदार्थ के सात प्रकार बनाए गए हैं।
2. वैशेषिक सूत्र के भाष्यकार प्रशस्तपाद के अनुसार, पदार्थ वह है जो सत् है, ज्ञेय है तथा अभिधेय है। " ..
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
212- वैशेषिक दर्शन के सन्दर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. द्रव्य, गुण तथा क्रिया का आधार तथा समस्त सावयव वस्तुओं का उपादान कारण है।
2. वैशेषिक के अनुसार कुल द्रव्य 9 हैं, जिसमें पंचमहाभूतों के अन्तर्गत सिर्फ आकाश के परमाणु नहीं होते हैं।
3. वैशेषिक के अनुसार परमाणु के नष्ट होने पर परमाणु भी नष्ट हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही है/ हैं?
(a) 1 और 3
(b) 1 और 2
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – b
213- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, सुख, दुःख तथा ज्ञान आत्मा के 6 गुण हैं।
2. वैशेषिक दर्शन में कुल 24 गुणों का उल्लेख किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
214- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कर्म का निवास सर्वव्यापी द्रव्यों (जैसे-आकाश) में नहीं होता, क्योंकि वे स्थान परिवर्तन से शून्य है।
2. कर्म द्रव्य का निष्क्रिय रूप तथा गुण द्रव्य का सक्रिय रूप है।
3. द्रव्य की दो विशेषताएँ होती हैं- सक्रियता तथा निष्क्रियता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1, 2 और 3
(b) 2 और 3
(c) केवल 2
(d) 1 और 3
उत्तर – d
215- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सामान्य वह पदार्थ है, जिसके कारण एक ही प्रकार के विभिन्न व्यक्तियों या वस्तुओं को एक जाति के अन्दर रखा जाता है।
2. सामान्य की तीन श्रेणियाँ हैं-पर, अपर, पर-अपर।
3. सत्ता पर सामान्य का उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
216- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. एक ही प्रकार के दो परमाणुओं का विभेदक समवाय कहलाता है।
2. वैशेषिकों के अनुसार दो पदार्थों के बीच समवाय सम्बन्ध पाया जाता है। यदि उन्हें पृथक् किया जाए तो उनमें से एक का विनाश अपरिहार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
217- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन के अनुसार किसी स्थान विशेष, काल विशेष में किसी वस्तु का उपस्थित नहीं होना 'अभाव' है।
2. शंकर के अनुसार, वैशेषिक के बहुतत्त्ववाद से सांख्य का द्वैतवाद बेहतर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
218- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. विशेष वह पदार्थ है जो एक ही प्रकार के दो नित्य द्रव्यों का विभेदक है।
2. वैशेषिकों ने समवाय को एक भाव पदार्थ के रूप में स्वीकार किया है।
3. वैशेषिकों के अनुसार जिन दो पदार्थों के बीच समवाय सम्बन्ध पाया जाता है, यदि उन्हें पृथक् किया जाए तो उनमें से एक का विनाश अपरिहार्य है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
कूट
(a) 1, 2 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1 और 2
उत्तर – a
219- असत्कार्यवाद के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही है?
1. असत्कार्यवाद योग दर्शन का कारण कार्य नियम है।
2. वैशेषिक दर्शन के अनुसार कारण नियत पूर्ववर्ती होता है।
3. असत्कार्यवाद को 'आरम्भवाद' भी कहा जाता है।
कूट
(a) 1, 2 और 3
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर – c
220- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. असत्कार्यवाद वैशेषिक दर्शन का कारण-कार्य नियम है।
2. कारण किसी वस्तु का पूर्ववर्ती एवं कार्य उत्तरवर्ती होता है, परन्तु सभी पूर्ववर्ती को कारण नहीं कहा जा सकता है।
3. वर्षा के पूर्व आकाश में बादल का रहना नियत पूर्ववर्ती का उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही है/ हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
221- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन में कारण के तीन प्रकार माने गए हैं- समवायी, असमवायी तथा निमित्त।
2. घड़े एवं मिट्टी का सम्बन्ध समवायी कारण का उदाहरण है।
3. जिसके बिना कार्य उत्पन्न ही न हो सके, उसे असमवायी कारण कहते हैं।
उपरोक्त कथनों में से सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – a
222- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. महर्षि गौतम के अनुसार जिसे और अधिक विभाजित किया जा सके, वही परमाणु है।
2. वैशेषिक के अनुसार संख्यात्मक दृष्टि से परमाणु अनन्त हैं तथा सभी परमाणु स्वभावतः निष्क्रिय हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
223- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्याय-वैशेषिक में चार प्रकार के परमाणु को स्वीकार किया गया है- पृथ्वी, अग्नि, जल तथा वायु के परमाणु।
2. वायु के परमाणु में स्पर्श का गुण पाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
224- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैशेषिक दर्शन के अनुसार परमाणुओं के संयोग से जगत की उत्पत्ति हुई है, परन्तु साथ में यह भी कहा गया कि यह सृष्टि ईश्वर की इच्छा से स्वयं ईश्वर द्वारा रचित है।
2. वैशेषिक का परमाणुकारणवाद, ईश्वरवाद तथा अनीश्वरवाद का समन्वय करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
225- न्याय दर्शन में प्रमा के भेद हैं -
1. प्रत्यक्ष
2. अनुमिति
3. उपमिति
3. शब्द
कूट
(a) 1, 2 केवल 3
(b) 2,3 तथा 4
(c) 1, 3 और 4
(d) 1,2,3 तथा 4
उत्तर – d
226- वैशेषिक दर्शन के अनुसार कर्म के प्रकार हैं
1. उत्प्रेक्षण
2. अवक्षेपण
3. संकुचन
3. प्रसारण
5. गमन
कूट
(a) 1, 2, 3 और 4
(b) 2, 3, 4 और 5
(c) 1, 2, 3, 4 और 5
(d) 2,3 और 4
उत्तर – c
227- न्याय-वैशेषिक दर्शन में परमाणु है
1. पृथ्वी
2. अग्नि
3. जल
3. वायु
5. आकाश
कूट
(a) 2, 3, 4 और 5
(b) 1, 2, 3 और 4
(c)2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर – b
228- नैयायिकों के अनुसार किन इन्द्रियों के द्वारा हम बाह्य द्रव्यों का अनुभव करते हैं?
1 . चाक्षुष
2 . स्पर्श
3 . श्रवण
4 . स्वाद
कूट
( a ) केवल 1
( b ) 1 और 2
( c ) 2 और 3
( d ) 3 और 4
उत्तर – b
229- न्यायमत के अनुसार, अणु निष्क्रिय और गतिहीन हैं। यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है
1 . आत्मा में रहने वाले धर्म एवं अधर्म के अनुरूप अदृष्ट द्वारा अणुओं में गति प्रदान की जाती है।
2 . अणुओं का संयोग ज्यामितीय प्रगति में होता है न कि अंकगणितीय तरीके में
3 . भौतिक व्यवस्था के पीछे एक नैतिक व्यवस्था होती है।
कूट
( a ) 1 वैध अनुमान है
( b ) 2 अवैध अनुमान है
( c ) 1 और 3 वैध अनुमान हैं
( d ) 1, 2 और 3 वैध अनुमान हैं
उत्तर – d
*निर्देश - नीचे दिए कथन एवं कारणों को ध्यानपूर्वक पढ़कर कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए
कूट
(a) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
(b) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
(c) A सही है, किन्तु R गलत है
(d) A गलत हैं, किन्तु R सही है
230- कथन (A) न्याय दर्शन का अन्तिम उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है।
कारण (R) न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि गौतम थे।
उत्तर – b
231- कथन (A) पहाड़ पर आग है, क्योंकि वहाँ धुआँ दिख रहा है।
कारण (R) अनुमान का आधार पूर्व में किए गए अनुभव हैं।
उत्तर – a
232- कथन (A) न्याय दर्शन ईश्वरवादी है।
कारण (R) नैयायिकों के अनुसार ईश्वर इस जगत का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है।
उत्तर – a
233- कथन (A) न्याय-वैशेषिक दर्शन में अभाव एक स्वतन्त्र पदार्थ है।
कारण (R) अभाव इन्द्रिय गोचर है।
उत्तर – a
234- कथन (A) न्याय के अनुसार सामान्यों की संख्या सात है।
कारण (R) न्याय सात पदार्थों को स्वीकार करता है।
उत्तर – d
235- कथन (A) विशेष नित्य हैं।
कारण (R) वे असंख्य हैं।
उत्तर – b
236- कथन (A) अनुमान वैध मान का स्रोत नहीं है।
कारण (R) व्याप्ति की स्थापना असम्भव है।
उत्तर – a
237- कथन (A) वैशेषिकों के अनुसार, कर्म द्रव्यों का कारण नहीं होता।
कारण (R) द्रव्योत्पत्ति के पूर्व ही कर्म का अन्त हो जाता है।
उत्तर – b
238- नीचे अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिए गए हैं उन पर विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही विकल्प का चयन कीजिए
अभिकथन (A) परमाणु की सत्ता अवश्य स्वीकार की जानी चाहिए।
कारण (R) द्वयणुक सावयव है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – a
239- नीचे कथन (A) और कारण (R) दिया गया है उन पर न्याय दर्शन के परिप्रेक्ष्य में विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूट में से सही का चयन कीजिए
कथन (A) लक्षणा एक वृत्ति नहीं हो सकती है।
कारण (R) शक्ति एक वृत्ति है और शक्ति लक्षण नहीं है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही हैं , किन्तु R गलत हैं
( d ) A गलत हैं , किन्तु R सही है
उत्तर – d
240- नीचे कथन (A) और कारण (R) दिया गया हैं। इन पर न्याय वैशेषिक दर्शन के परिप्रेक्ष्य में विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूटों में से सही का चयन कीजिए
कथन (A) मुक्त आत्मा जड़ ही है।
कारण (R) मुक्त आत्मा अपनी चेतना को भी खो देती है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – d
241- कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए तथा दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन कीजिए
कथन (A) आकाशत्व की एक जाति होनी चाहिए।
कारण (R) यह आकाश की अनिवार्य विशेषता है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है ।
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – b
242- अभिकथन (A) न्याय का निष्कर्ष आधारवाक्य की तुलना में ज्यादा सामान्य नहीं हो सकता है।
कारण (R) न्याय वाक्य का निष्कर्ष तभी सत्य होता है, जब आधारवाक्य सत्य हो।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सत्य हैं , किन्तु R असत्य हैं
( d ) A असत्य है , किन्तु R सत्य है
उत्तर – b
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