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शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-दृश्य साधन Audio Visual Aids in the teaching process



शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-दृश्य साधन
शिक्षण प्रक्रिया में दृश्य-साधन के अन्तर्गत उन सामग्रीयों को रखा जाता है, जिनके द्वारा सुनकर तथा देखकर दोनों प्रकार से ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जैसे- टेलीविजन, चलचित्र, स्लाइड, कम्प्यूटर आदि।
श्रव्य-दृश्य साधन सात प्रकार के है-
1- टेलीविजन
2- कम्प्यूटर
3- मल्टीमीडिया
4- श्यामपट्ट
5- प्रदर्शन बोर्ड
6- चलचित्र अथवा सिनेमा
7- संवाद सामग्री
कम्प्यूटर
आधुनिक समय में कम्प्यूटर का श्रव्य-दृश्य शिक्षण सामग्री के रूप में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। इसके माध्यम से शिक्षण सहित मनोरंजन व अन्य पहलुओं को नवीन रूप दिया गया है। कम्प्यूटर को विद्युत मस्तिष्क भी कहा जाता है।
मल्टीमीडिया 
मल्टीमीडिया एकसाथ की साधनों का संयोजन है। इसमें मीडिया, ऑडियो, वीडियो, फिल्म आदि सभी साधन सम्मिलित किए जाते है।
श्यामपट्ट 
श्यामपट्ट का शिक्षण में अपना एक विशेष महत्व होता है। इसके माध्यम से शब्दों के प्रतीकों द्वारा शिक्षक विद्यार्थियों में बोधगम्यता का विकास करता है। परम्परागत प्रणालियों में श्यामपट्ट सर्वाधिक उपयोगी सहायक सामग्री है। श्यामपट्ट के द्वारा शिक्षक विद्यार्थियों में पाठ की बोधगम्यता, उसकी धारण योग्यता, लिखावट में सुधार आदि का विकास करता है।
शिक्षण प्रक्रिया में श्यामपट्ट का निम्नलिखित उपयोग किया जाता है-
  • पाठ्य विवरण के लिए 
  • सारांश एवं गृहकार्य के लिए 
  • मूल्यांकन कार्य के लिए 
  • विद्यार्थियों के व्यक्तिगत कार्य के लिए  
  • कठिन अंशों को सरल बनाने के लिए 
प्रदर्शन बोर्ड 
प्रदर्शन बोर्ड भी श्रव्य-दृश्य सामग्री का एक प्रमुख अंग है। इसमें श्यामपट्ट सहित, सफेद बोर्ड, चुम्बकीय बोर्ड, बुलेटिन बोर्ड, पेज बोर्ड आदि शामिल किए जाते है।
चलचित्र अथवा सिनेमा 
वर्तमान समय में चलचित्र अथवा सिनेमा को शिक्षण का सर्वसुलभ एवं सस्ता माध्यम माना जाता है। इसके द्वारा की जटिल समस्याओं एवं अनुसंधानात्मक विषयों को छात्रों के समक्ष सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।
संवाद सामग्री 
संवाद सामग्री आधुनिक समय के नवीन तकनीक की देन है। यह श्रव्य-दृश्य सामग्री के रूप में शिक्षार्थियों से परस्पर संवाद करती है, जिनमें इण्टरएक्टिव वीडियो, इण्टरनेट, वीडियो कॉलिंग आदि प्रचलित माध्यम है।

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शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन Audio tools in the teaching process

शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन के अन्तर्गत उन सामग्रीयों को रखा जाता है, जिनके द्वारा सुनकर ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जैसे- फोनोग्राफ रिकॉर्ड, रेडियो प्रसारण तथा मैग्नेटिक टेपरिकॉर्डर आदि। शिक्षण में श्रव्य साधन तीन प्रकार से सहायक होते है- रेडियो  टेप रिकॉर्डर  ग्रामोफोन   रेडियो  रेडियो शिक्षा प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है। भारत में वर्ष 1936 में सर्वप्रथम आकाशवाणी से समाचार बुलेटिन का प्रसारण हुआ था। वर्ष 1957 में विविध भारती की शुरुआत हुई थी।  टेप रिकॉर्डर  टेपरिकॉर्डर के माध्यम से विषय-वस्तु को विद्यार्थी के लिए आवश्यकतानुसार प्रस्तुत किया जा सकता है। यह निदानात्मक और उपचरात्मक दोनों ही शिक्षण विधियों में प्रयुक्त किया जा सकता है।   ग्रामोफोन  ग्रामोफोन रेडियो की तरह ही शिक्षण का प्राचीन माध्यम है। इसके द्वारा छात्रों को उच्चारण के शुद्धिकरण में सहायता मिलती है।

गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity

पृथ्वी का वस्तुओं पर आकर्षण बल, गुरुत्व बल कहलाता है। इस गुरुत्व बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते है। इसे g से प्रदर्शित करते है। वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में सभी वस्तुएं पृथ्वी सतह पर समान त्वरण से गिरती है। किसी ऊँचाई h < < R से पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु की गति, मुक्त गति कहलाती है। गुरुत्व के अधीन गति, एकविमीय गति का आदर्श उदाहरण है जिसमें वायु प्रतिरोध तथा ऊँचाई के साथ त्वरण में सूक्ष्म परिवर्तन को नगण्य मान लेते है। गुरुत्व के अधीन गति को हम तीन प्रकार से समझ सकते है- 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए। 2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए। 3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए। 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए- माना कोई वस्तु h ऊँचाई से प्रारम्भिक वेग शून्य से छोड़ी जाती है, तब इस स्थिति में, उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है कि मुक्त रूप से गिरते किसी कण द्वारा क्रमागत सेकन्डों में चली गई दूरियाँ क्रमशः 1:3:5: …. अर्थात विषम पूर्णकों के अनुपात में होगी।  प्र...