॥ नवदर्शन परिचय ॥ आर्यावर्त की तर्कविद्या में छः दर्शन प्रसिद्ध हैं , जिनमें - वेदों को प्रमाण माना है , और वेदोक्त सिद्धान्तों पर तर्क से विचार किया है , अतएव इनको वेदों के उपांग कहते हैं । इनसे अतिरिक्त तीन दर्शन और हैं , जिनमें न वेदों को प्रमाण माना है , न वेदोक्त सिद्धान्तों पर विचार किया है , प्रत्युत आक्षेप किये हैं , और अपने-अपने स्वतन्त्र सिद्धान्तों को तर्क से स्थापन किया है । इस दृष्टि से दर्शनों के दो भेद हो जाते हैं , वैदिक और अवैदिक । वैदिक छः दर्शन यह हैं – वैशेषिक , न्याय , सांख्य , योग , मीमांसा और वेदान्त । अवैदिक तीन दर्शन यह हैं - चार्वाक , बौद्ध और आर्हत । इनमें से चार्वाक दर्शन , नास्तिकदर्शन क्योंकि उसमें परलोक को नहीं माना है , शेष सारे दर्शन आस्तिक दर्शन हैं , क्योंकि उनमें परलोक को माना है । पर वैदिक लोगों की दृष्टि से बौद्ध और आर्हत भी नास्तिकदर्शन ही हैं , क्योंकि वह वेदबाह्य हैं , और वेद के निन्दक हैं । भारतीय दर्शनों के अध्ययन में इन दर्शनों का क्रम यह रहेगा , पहले अवैदिक , फिर वैदिक , क्योंकि अवैदिकदर्शन वैदिक दर्शनों के पूर्वपक्षी हैं , और वैदिक...
अपने लक्ष्य को मेहनत से वरण करना ही प्रत्येक विद्यार्थी का एकमात्र ध्येय होना चाहिए - विकास विद्यालंकार