Skip to main content

शोध के उपागम Research Approach

शोध के उपागम
समाजशास्त्र के शोधकर्ताओं के मध्य शोध के दो प्रमुख उपागम है -
  1. प्रत्यक्षवाद और 
  2. उत्तर प्रत्यक्षवाद 
प्रत्यक्षवाद प्रत्यक्षवाद ( Positivism ) 
प्रत्यक्षवाद प्रत्यक्षवाद की वैज्ञानिक व्याख्या सर्वप्रथम फ्रांसीसी विचारक ऑगस्ट कॉम्टे ने की थी , इसलिए कॉम्टे को ' प्रत्यक्षवाद का जनक ' कहा जाता है । कॉम्टे ने प्रत्यक्षवाद की व्याख्या अपनी रचनाओं Course of Positive Philosophy' ( 1842 ) तथा The System of Positive Polity'( 18510 में की है । कॉम्टे का प्रत्यक्षवाद विज्ञान पर आधारित है। कॉस्टे के अनुसार, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड अपरिवर्तनीय प्राकृतिक नियमों द्वारा व्यवस्थित व निर्देशित होता है । अत : इसे केवल विज्ञान की विधियों द्वारा समझा जा सकता है , न कि धार्मिक या तात्विक आधारों पर । इस आधार पर कहा जा सकता है कि निरीक्षण , परीक्षण , प्रयोग और वर्गीकरण पर आधारित वैज्ञानिक विधियों द्वारा सब कुछ समझना और उससे ज्ञान प्राप्त करना ही प्रत्यक्षवाद है ।
कॉम्टे के अनुसार प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण के चरण निम्नलिखित है-
  • सर्वप्रथम अध्ययन - विषय को चुनते हैं 
  • अवलोकन या निरीक्षण द्वारा उस विषय से सम्बन्धित प्रत्यक्ष होने वाले तथ्यों को एकत्रित करते हैं 
  • इसके पश्चात् इन तथ्यों का विश्लेषण करके सामान्य विशेषताओं के आधार पर इनका वर्गीकरण किया जाता है।  
  • तत्पश्चात् विषय से सम्बन्धित कोई निष्कर्ष निकालते हैं।  
प्रत्यक्षवाद की प्रमुख विशेषताएँ / मान्यताएँ 
  • प्रत्यक्षवाद अथवा वैज्ञानिक पद्धति की प्रमुख विशेषताएँ / मान्यताएँ निम्नलिखित हैं-  
  • प्रत्यक्षवाद का लक्ष्य केवल उन घटनाओं का वर्णन करना है, जिसे हम प्रत्यक्ष रूप से देख ( अनुभव ) या निरीक्षण कर सकते हैं । इसके अन्तर्गत किसी भी स्तर पर काल्पनिक चिन्तन का सहारा नहीं लिया जाता है ।
  • प्रत्यक्षवाद एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है , जिसका लक्ष्य सत्य को उजागर करना है । इसमें मात्रात्मक विधि पर बल दिया जाता है । 
  • प्राकृतिक घटनाओं की तरह सामाजिक घटनाएँ भी कुछ नियमों के आधार पर घटित होती हैं । अत : इन नियमों को वैज्ञानिक पद्धति द्वारा खोजा जा सकता है । 
  • प्रत्यक्षवाद वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ - साथ वैज्ञानिक कार्यप्रणाली से भी सम्बन्धित होता है । 
  • प्रत्यक्षवाद अपने को धार्मिक व दार्शनिक विचारों से दूर रखता है । 
  • प्रत्यक्षवाद एक उपयोगितावादी विज्ञान है और उस रूप में विश्वास करता है कि प्रत्यक्षवाद के माध्यम से प्राप्त ज्ञान को सामाजिक पुनर्निर्माण के साधन के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है । 
उत्तर - प्रत्यक्षवाद ( Post - Positivism ) 
उत्तर - प्रत्यक्षवाद यह तर्क देता है कि तार्किक तर्क के साथ आनुभविक टिप्पणियों को जोड़कर एक घटना के बारे में उचित अनुमान लगाया जा सकता है । उत्तर - प्रत्यक्षवाद मानता है कि वैज्ञानिकों के सोचने और काम करने के तरीके और दैनिक जीवन में हमारे सोचने के तरीके अलग - अलग नहीं हैं । वैज्ञानिक तर्क और सामान्य ज्ञान तर्क अनिवार्य रूप से एक ही प्रक्रिया है तथा दोनों के बीच कोई अन्तर नहीं है , केवल अंश में ही अन्तर है ।
उत्तर - प्रत्यक्षवाद के अनुसार सभी अवलोकन अस्थिर हैं और इसमें त्रुटि है और यह सभी सिद्धान्त पुन : प्रयोज्य ( Usable ) हैं । उत्तर - प्रत्यक्षवाद का मानना है कि विज्ञान का लक्ष्य वास्तविकता के बारे में सही तरीके से लक्ष्य प्राप्त करना है , फिर हम लक्ष्य को प्राप्त कर सकें या नहीं कर सकें ।
उत्तर - प्रत्यक्षवाद महत्त्वपूर्ण तीन विकासों पर बल देता है , जो निम्नलिखित हैं
1 . मात्रात्मक और गुणात्मक रणनीति का प्रयोग
2 . प्रश्न शोध पर आधारित रणनीति की इच्छा
3 . इसके पैटर्न का तरीका मात्रात्मक बनाम गुणात्मक होता है ।

Comments

Popular posts from this blog

भारत के प्रमुख स्थानों के भौगोलिक उपनाम

भारत के प्रमुख स्थानों के भौगोलिक उपनाम ईश्वर का निवास स्थान    प्रयाग पांच नदियों की भूमि      पंजाब सात टापुओं का नगर     मुंबई बुनकरों का शहर पानीपत अंतरिक्ष का शहर बेंगलुरू डायमंड हार्बर     कोलकाता इलेक्‍ट्रॉनिक नगर बेंगलुरू त्योहारों का नगर मदुरै स्वर्ण मंदिर का शहर      अमृतसर महलों का शहर   कोलकाता नवाबों का शहर   लखनऊ इस्पात नगरी     जमशेदपुर पर्वतों की रानी    मसूरी रैलियों का नगर   नई दिल्ली भारत का प्रवेश द्वार      मुंबई पूर्व का वेनिस    कोच्चि भारत का पिट्सबर्ग       जमशेदपुर...

शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन Audio tools in the teaching process

शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन के अन्तर्गत उन सामग्रीयों को रखा जाता है, जिनके द्वारा सुनकर ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जैसे- फोनोग्राफ रिकॉर्ड, रेडियो प्रसारण तथा मैग्नेटिक टेपरिकॉर्डर आदि। शिक्षण में श्रव्य साधन तीन प्रकार से सहायक होते है- रेडियो  टेप रिकॉर्डर  ग्रामोफोन   रेडियो  रेडियो शिक्षा प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है। भारत में वर्ष 1936 में सर्वप्रथम आकाशवाणी से समाचार बुलेटिन का प्रसारण हुआ था। वर्ष 1957 में विविध भारती की शुरुआत हुई थी।  टेप रिकॉर्डर  टेपरिकॉर्डर के माध्यम से विषय-वस्तु को विद्यार्थी के लिए आवश्यकतानुसार प्रस्तुत किया जा सकता है। यह निदानात्मक और उपचरात्मक दोनों ही शिक्षण विधियों में प्रयुक्त किया जा सकता है।   ग्रामोफोन  ग्रामोफोन रेडियो की तरह ही शिक्षण का प्राचीन माध्यम है। इसके द्वारा छात्रों को उच्चारण के शुद्धिकरण में सहायता मिलती है।

गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity

पृथ्वी का वस्तुओं पर आकर्षण बल, गुरुत्व बल कहलाता है। इस गुरुत्व बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते है। इसे g से प्रदर्शित करते है। वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में सभी वस्तुएं पृथ्वी सतह पर समान त्वरण से गिरती है। किसी ऊँचाई h < < R से पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु की गति, मुक्त गति कहलाती है। गुरुत्व के अधीन गति, एकविमीय गति का आदर्श उदाहरण है जिसमें वायु प्रतिरोध तथा ऊँचाई के साथ त्वरण में सूक्ष्म परिवर्तन को नगण्य मान लेते है। गुरुत्व के अधीन गति को हम तीन प्रकार से समझ सकते है- 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए। 2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए। 3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए। 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए- माना कोई वस्तु h ऊँचाई से प्रारम्भिक वेग शून्य से छोड़ी जाती है, तब इस स्थिति में, उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है कि मुक्त रूप से गिरते किसी कण द्वारा क्रमागत सेकन्डों में चली गई दूरियाँ क्रमशः 1:3:5: …. अर्थात विषम पूर्णकों के अनुपात में होगी।  प्र...