Thursday, March 26, 2020

भारतीय दर्शनों का परिचय { Introduction to Indian Philosophies }


॥ नवदर्शन परिचय ॥
आर्यावर्त की तर्कविद्या में छः दर्शन प्रसिद्ध हैं , जिनमें - वेदों को प्रमाण माना है , और वेदोक्त सिद्धान्तों पर तर्क से विचार किया है, अतएव इनको वेदों के उपांग कहते हैं । इनसे अतिरिक्त तीन दर्शन और हैं, जिनमें न वेदों को प्रमाण माना है, न वेदोक्त सिद्धान्तों पर विचार किया है, प्रत्युत आक्षेप किये हैं, और अपने-अपने स्वतन्त्र सिद्धान्तों को तर्क से स्थापन किया है । इस दृष्टि से दर्शनों के दो भेद हो जाते हैं, वैदिक और अवैदिक ।
वैदिक छः दर्शन यह हैं – वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदान्त । अवैदिक तीन दर्शन यह हैं - चार्वाक, बौद्ध और आर्हत । इनमें से चार्वाक दर्शन, नास्तिकदर्शन क्योंकि उसमें परलोक को नहीं माना है, शेष सारे दर्शन आस्तिक दर्शन हैं, क्योंकि उनमें परलोक को माना है । पर वैदिक लोगों की दृष्टि से बौद्ध और आर्हत भी नास्तिकदर्शन ही हैं, क्योंकि वह वेदबाह्य हैं, और वेद के निन्दक हैं ।
भारतीय दर्शनों के अध्ययन में इन दर्शनों का क्रम यह रहेगा, पहले अवैदिक, फिर वैदिक, क्योंकि अवैदिकदर्शन वैदिक दर्शनों के पूर्वपक्षी हैं, और वैदिकदर्शन सिद्धान्त के स्थापक हैं । अवैदिकों में भी पहले नास्तिक फिर आस्तिक, क्योंकि नास्तिक सबका पूर्वपक्षी है । और वैदिकदर्शनों में जो क्रम है, वह उनके विषय की अपेक्षा से है, न कि पूर्वपक्ष की अपेक्षा से, क्योंकि वह सभी सिद्धान्त के व्यवस्थापक हैं ।
आस्तिक और नास्तिक आधार पर भारतीय दर्शनों का वर्गीकरण
नास्तिक दर्शन
1-चार्वाक
2-जैन
3-बौद्ध
आस्तिक दर्शन
1-न्याय
2-वैशेषिक
3-सांख्य
4-योग
5-मीमांसा
6-वेदान्त
ईश्वरवादी और अनीश्वरवादी आधार पर भारतीय दर्शनों का वर्गीकरण
अनीश्वरवादी दर्शन
1-चार्वाक
2-जैन
3-बौद्ध
4-सांख्य
5-मीमांसा

ईश्वरवादी दर्शन
1-न्याय
2-वैशेषिक
3-योग
4-वेदान्त

----------------------------

No comments:

Post a Comment

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...