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गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity

पृथ्वी का वस्तुओं पर आकर्षण बल, गुरुत्व बल कहलाता है। इस गुरुत्व बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते है। इसे g से प्रदर्शित करते है।
वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में सभी वस्तुएं पृथ्वी सतह पर समान त्वरण से गिरती है। किसी ऊँचाई h < < R से पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु की गति, मुक्त गति कहलाती है।
गुरुत्व के अधीन गति, एकविमीय गति का आदर्श उदाहरण है जिसमें वायु प्रतिरोध तथा ऊँचाई के साथ त्वरण में सूक्ष्म परिवर्तन को नगण्य मान लेते है।
गुरुत्व के अधीन गति को हम तीन प्रकार से समझ सकते है-
1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए।
2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए।
3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए।
1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए-
माना कोई वस्तु h ऊँचाई से प्रारम्भिक वेग शून्य से छोड़ी जाती है,
तब इस स्थिति में,
उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है कि मुक्त रूप से गिरते किसी कण द्वारा क्रमागत सेकन्डों में चली गई दूरियाँ क्रमशः 1:3:5: …. अर्थात विषम पूर्णकों के अनुपात में होगी। 
प्रारम्भिक वेग शून्य से गिराई गई किसी वस्तु के लिए दूरी, वेग तथा त्वरण के ग्राफ निम्न प्राप्त होते है-
2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए
यदि कोई वस्तु किसी प्रारम्भिक वेग v से किसी ऊँचाई h से नीचे की ओर फेंकी जाती है तो गति की तीन समीकरणों गुरुत्व के अधीन नई समीकरण प्राप्त होगी जो निम्नलिखित है- 
3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए
यदि किसी वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर किसी प्रारम्भिक वेग से फेंका जाता है तो गुरुत्व अधीन गति की समीकरणों में +g के स्थान पर –g का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इस दशा में वस्तु पर त्वरण ऋणात्मक अर्थात वस्तु की गति के विपरीत नीचे की ओर कार्य करता है। अतः ऊर्ध्वाधर गति के लिए समीकरणें –
समय के साथ ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर गति के विस्थापन, वेग एवं त्वरण के ग्राफ- 
ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर गति के लिए महत्वपूर्ण बिन्दु  
1- गुरुत्व के अन्तर्गत वस्तु की गति वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती अतः वस्तु हल्की है या भारी इसका कोई प्रभाव वस्तु पर नहीं पड़ता। इसी कारण नगण्य बाह्य प्रतिरोध के दो भिन्न-भिन्न द्रव्यमान की वस्तु किसी ऊँचाई से गिरने पर वे एक साथ पृथ्वी पर गिरेगी। 
2- गुरुत्व के अधीन गति में ऊपर जाने में लगा समय सामन दूरी तक नीचे गिरने में लगे समय के बराबर होता है।
3- गुरुत्व के अधीन गति में वस्तु जिस वेग से ऊपर की ओर फेंकी जाती है वापिस लौटते समय प्रेक्षण बिन्दु पर वह पुनः वो ही वेग प्राप्त कर लेती है। 
4- यदि वायु आदि का प्रतिरोध माना जाए तो ऊपर जाने में लगा समय नीचे आने में लगे समय से सदैव कम होता है। 
इस स्थिति में-

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