शोध के चरण या सोपान Steps of Research
अनुसन्धान एक क्रमिक प्रक्रिया है , जिसमें प्रत्येक प्रकार के अनसन्धान को कुछ विशिष्ट पदों के अन्तर्गत क्रमानुसार पूर्ण किया जाता है । यह एक वैज्ञानिक विधि है , जिसमें अनुसन्धानकर्ता किसी समस्या के समाधान के लिए तार्किक रूप से प्रयोग करता है ।
सामान्यत : अनुसन्धान या शोध के आठ चरण निर्धारित किए गए हैं-
1- समस्या का चयन ( Identify the Problem )
2- परिकल्पनाओं का निर्माण ( Making of Hypothesis )
3- शोध प्रारूप या शोध अभिकल्प का विकास ( Development of Research Design )
4- न्यायदर्श या प्रतिदर्श चयन ( Selecting Samples )
5- अनुसन्धान प्रस्ताव लेखन ( Writing a Research Proposal )
6- प्रदत्तों का एकत्रीकरण ( Collection of Data )
7- प्रदत्तों का संस्करण और विश्लेषण ( Processing and Analysis Data )
8- अनुसन्धान रिपोर्ट लेखन ( Writing a Research Report )
समस्या का चयन Identify the Problem
अनुसन्धान के पहले चरण में सर्वप्रथम समस्या घटना , व्यवहार या प्रश्न का चयन किया जाता है और जितनी जागरूकता , सतर्कता , जिज्ञासा के साथ समस्या का चयन किया जाता है , शोध समस्या का चयन उतने ही अच्छे ढंग से होता है ।
परिकल्पनाओं का निर्माण Making of Hypothesis
अनुसन्धान के दूसरे चरण में सभी समस्याओं की पहचान के बाद उससे सम्बन्धित परिकल्पनाओं का निर्माण किया जाता है । यह शोध के विकास का उद्देश्यपूर्ण आधार है ।
शोध प्रारूप या शोध अभिकल्प का विकास Development of Research Design
शोध अभिकल्प एक प्रश्न का उत्तर जानने , परिस्थिति का वर्णन करने या परिकल्पना के निरीक्षण से सम्बन्धित होता है , जो योजनानुसार कार्य करके सम्पूर्ण अनुसन्धान पर नियन्त्रण करता है ।
न्यायदर्श या प्रतिचयन Selecting Samples
मिडेड पार्टेन के अनुसार , “ समग्र में से निश्चित संख्या में व्यक्ति , घटना अथवा निरीक्षणों को पृथक् करने की प्रक्रिया एवं पद्धति के अध्ययन के लिए सम्पूर्ण समूह में से एक अंश का चयन करना ही न्यायदर्श / प्रतिदर्श कहलाता है । " वस्तुत : जनसंख्या की समस्त इकाइयों में से अध्ययन के लिए कुछ निश्चित इकाइयों की एक निश्चित विधि के चयन को न्यायदर्श / प्रतिदर्श / प्रतिचयन कहा जाता है ।
अनुसन्धान प्रस्ताव लेखन Writing a Research Proposal
किसी भी अनुसन्धान परियोजना को मानने या स्वीकार करने से पहले उसका प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए , यह अवधारणा कई संस्थान अनिवार्य कर देते हैं । इसके द्वारा शोध परियोजना का मूल्यांकन करने का आधार भी प्राप्त हो जाता है । यह तीन से सात पृष्ठों का एक दस्तावेज ( Document ) होता है जो शोधकर्ता द्वारा लिखा जाता है । यह दस्तावेज सम्पूर्ण अनुसन्धान प्रक्रिया की रूपरेखा एवं विस्तृत विवरण होता है
प्रदत्तों का एकत्रीकरण Collecting Data
शोधकर्ता जाँच की प्रकृति , उसका क्षेत्र , उद्देश्य , वित्तीय लागत , समय की उपलब्धता इत्यादि को देखकर प्रदत्त एकत्रित करने की विधि का चयन करता है । प्राथमिक प्रदत्त सर्वेक्षण या प्रयोग के द्वारा एकत्र किए जाते हैं । यदि शोधकर्ता किसी प्रयोग को आयोजित करता है , तो वह उसके लिए परिमाणात्मक मापन या प्रदत्त का चयन करता है एवं उन प्रदत्तों का परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए विश्लेषण किया जाता है ।
प्रदत्तों का प्रसंस्करण एवं विश्लेषण Processing and Analysing Data
प्रदत्त एकत्रित करने के बाद अनुसन्धान प्रक्रिया के अगले चरण में प्रदत्तों । का विश्लेषण किया जाता है । प्रदत्तों के विश्लेषण के लिए उन्हें कुछ प्रबन्धनीय समूहों या तालिका में संघटित किया जाना चाहिए और ऐसा प्रदत्तों का प्रासंगिक एवं उद्देश्यपूर्ण श्रेणियों में वर्गीकरण करके ही किया जा सकता है
शोध / अनुसन्धान रिपोर्ट लेखन Writing a Research Report
अनुसन्धान का समापन होने के पश्चात् शोध रिपोर्ट बनाई जाती है ।
सामान्यत : अनुसन्धान या शोध के आठ चरण निर्धारित किए गए हैं-
1- समस्या का चयन ( Identify the Problem )
2- परिकल्पनाओं का निर्माण ( Making of Hypothesis )
3- शोध प्रारूप या शोध अभिकल्प का विकास ( Development of Research Design )
4- न्यायदर्श या प्रतिदर्श चयन ( Selecting Samples )
5- अनुसन्धान प्रस्ताव लेखन ( Writing a Research Proposal )
6- प्रदत्तों का एकत्रीकरण ( Collection of Data )
7- प्रदत्तों का संस्करण और विश्लेषण ( Processing and Analysis Data )
8- अनुसन्धान रिपोर्ट लेखन ( Writing a Research Report )
समस्या का चयन Identify the Problem
अनुसन्धान के पहले चरण में सर्वप्रथम समस्या घटना , व्यवहार या प्रश्न का चयन किया जाता है और जितनी जागरूकता , सतर्कता , जिज्ञासा के साथ समस्या का चयन किया जाता है , शोध समस्या का चयन उतने ही अच्छे ढंग से होता है ।
परिकल्पनाओं का निर्माण Making of Hypothesis
अनुसन्धान के दूसरे चरण में सभी समस्याओं की पहचान के बाद उससे सम्बन्धित परिकल्पनाओं का निर्माण किया जाता है । यह शोध के विकास का उद्देश्यपूर्ण आधार है ।
शोध प्रारूप या शोध अभिकल्प का विकास Development of Research Design
शोध अभिकल्प एक प्रश्न का उत्तर जानने , परिस्थिति का वर्णन करने या परिकल्पना के निरीक्षण से सम्बन्धित होता है , जो योजनानुसार कार्य करके सम्पूर्ण अनुसन्धान पर नियन्त्रण करता है ।
न्यायदर्श या प्रतिचयन Selecting Samples
मिडेड पार्टेन के अनुसार , “ समग्र में से निश्चित संख्या में व्यक्ति , घटना अथवा निरीक्षणों को पृथक् करने की प्रक्रिया एवं पद्धति के अध्ययन के लिए सम्पूर्ण समूह में से एक अंश का चयन करना ही न्यायदर्श / प्रतिदर्श कहलाता है । " वस्तुत : जनसंख्या की समस्त इकाइयों में से अध्ययन के लिए कुछ निश्चित इकाइयों की एक निश्चित विधि के चयन को न्यायदर्श / प्रतिदर्श / प्रतिचयन कहा जाता है ।
अनुसन्धान प्रस्ताव लेखन Writing a Research Proposal
किसी भी अनुसन्धान परियोजना को मानने या स्वीकार करने से पहले उसका प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए , यह अवधारणा कई संस्थान अनिवार्य कर देते हैं । इसके द्वारा शोध परियोजना का मूल्यांकन करने का आधार भी प्राप्त हो जाता है । यह तीन से सात पृष्ठों का एक दस्तावेज ( Document ) होता है जो शोधकर्ता द्वारा लिखा जाता है । यह दस्तावेज सम्पूर्ण अनुसन्धान प्रक्रिया की रूपरेखा एवं विस्तृत विवरण होता है
प्रदत्तों का एकत्रीकरण Collecting Data
शोधकर्ता जाँच की प्रकृति , उसका क्षेत्र , उद्देश्य , वित्तीय लागत , समय की उपलब्धता इत्यादि को देखकर प्रदत्त एकत्रित करने की विधि का चयन करता है । प्राथमिक प्रदत्त सर्वेक्षण या प्रयोग के द्वारा एकत्र किए जाते हैं । यदि शोधकर्ता किसी प्रयोग को आयोजित करता है , तो वह उसके लिए परिमाणात्मक मापन या प्रदत्त का चयन करता है एवं उन प्रदत्तों का परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए विश्लेषण किया जाता है ।
प्रदत्तों का प्रसंस्करण एवं विश्लेषण Processing and Analysing Data
प्रदत्त एकत्रित करने के बाद अनुसन्धान प्रक्रिया के अगले चरण में प्रदत्तों । का विश्लेषण किया जाता है । प्रदत्तों के विश्लेषण के लिए उन्हें कुछ प्रबन्धनीय समूहों या तालिका में संघटित किया जाना चाहिए और ऐसा प्रदत्तों का प्रासंगिक एवं उद्देश्यपूर्ण श्रेणियों में वर्गीकरण करके ही किया जा सकता है
शोध / अनुसन्धान रिपोर्ट लेखन Writing a Research Report
अनुसन्धान का समापन होने के पश्चात् शोध रिपोर्ट बनाई जाती है ।
No comments:
Post a Comment