मूल्यांकन शिक्षण एवं सीखने दोनों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । इसमें नवाचार का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है । यह वर्तमान की जरूरतों व वर्तमान पद्धतियों में नई तकनीकों का समावेश कर मूल्यांकन की प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी तथा त्रुटिहीन तथा गुणवत्ता पूर्ण बनाता है । अतः कुछ महत्त्वपूर्ण नवाचार विधि इस प्रकार हैं
प्रश्नावली को जटिल व प्रासंगिक मुद्दे आधारित बनाकर मूल्यांकन करना । इसमें उन मुद्दों को शामिल करना , जिससे शिक्षार्थी प्रभावित होते हैं । इससे शिक्षार्थी की बौद्धिकता तथा उद्देश्यों दोनों का मूल्यांकन सम्भव है । शिक्षार्थी या बच्चों को साक्षात्कार के माध्यम से मूल्यपरक मूल्यांकन कर , इस समूह में विद्यार्थियों को शामिल कर व प्रश्नों को पूछकर भी मूल्यांकन किया जा सकता है , जिससे बौद्धिकता के आत्मविश्वास को बढ़ावा मिलेगा और शिक्षण मूल्यांकन भी सकारात्मक होगा । विद्यार्थियों से किसी पत्र के बारे में जानकर और उनका उस पर पक्ष जानकर भी बौद्धिकता को मापा जा सकता है । ऐसे ही किसी अन्य घटना को उनके प्रोजेक्ट कार्य में समाहित कर भी शिक्षण प्रक्रिया में मूल्यांकन को प्रभावी बनाया जा सकता है । शिक्षण कार्य को दृश्यपरक तन्त्रों की सहायता से एक प्रकार से रुचिकर बनाकर , नवीन तकनीकों को सहायक सामग्री बनाकर , शिक्षार्थी की रुचि को पैदाकर शिक्षण में योगदान को बढ़ाकर , तुलनात्मक परियोजनाओं , कार्यकुशलताओं एवं व्यक्तिगत प्रभाव डालकर भी शिक्षण प्रक्रिया में मूल्यांकन को प्रभावी बनाया जा सकता है । शिक्षण में शिक्षार्थी के लक्ष्य उन्मुखी प्रयोजनों के माध्यम से भी मूल्यांकन किया जा सकता है । इस प्रकार वर्तमान में नवीन तकनीकों ; जैसे - ऑडियो - वीडियो द्वारा संचालित तकनीकी , कम्प्यूटर आधारित तकनीकों , व्यक्तिगत प्रभावों आदि का उपयोग मूल्यांकन को प्रभावी बनाने में किया जा सकता है ।
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