Tuesday, January 28, 2020

शोध के प्रकार [ Types of Research ]

शोध के प्रकार
अनुसन्धान किसी भी समस्या के समाधान हेतु अपनाई गई क्रियाविधि होती है। अनुसन्धान की इस क्रियाविधि का निर्धारण पाँच प्रकार से किया जाता है-
  1. परिणाम के आधार पर 
  2. तर्क के आधार पर 
  3. जाँच के आधार पर 
  4. अवधारणा के आधार पर 
  5. उद्देश्यों के आधार पर 
1. परिणाम के आधार पर 
परिणाम के आधार पर अनुसन्धान दो प्रकार का होता है-
  • मौलिक या प्राथमिक अनुसन्धान 
  • व्यवहारिक अनुसन्धान 
मौलिक या प्राथमिक अनुसन्धान - इसके अन्तर्गत ज्ञान के वर्तमान संग्रह में वृद्धि की जाती है तथा इसके द्वारा सिद्धान्त एवं अवधारणाएं विकसित की जाती है। अकादमिक दृष्टि से यह अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
व्यवहारिक अनुसन्धान  - इस अनुसन्धान के द्वारा किसी समस्या विशेष का समाधान करने वाले तत्व शामिल होते है। यदि अनुसन्धानकर्ता तथ्यों के आधार पर किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे, तो वह व्यवहारिक अनुसन्धान कहलाता है।
2. तर्क के आधार पर 
तर्क के आधार पर अनुसन्धान को दो वर्गों में बाँटा गया है-
  • आगमन तर्क 
  • निगमन तर्क 
आगमन तर्क - यह एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें हम विभिन्न अनुभवों के सामान्यीकरण द्वारा वांछित ज्ञान को प्राप्त करते है
निगमन तर्क - यह ज्ञान प्राप्ति हेतु एक ऐसी तर्क प्रणाली है, जिसमें सामान्य से विशेष की और अनुसन्धान किया जाता है।
3. जाँच के आधार पर 
जाँच के आधार पर अनुसन्धान का वर्गीकरण दो प्रकार से किया जाता है-
  • संरचित दृष्टिकोण 
  • असंरचित दृष्टिकोण 
संरचित दृष्टिकोण  - यह दृष्टिकोण निगमन विधि के समान होता है।
असंरचित दृष्टिकोण - इस दृष्टिकोण का आगमन विधि तथा गुणात्मक अनुसन्धान से समानता होती है।
4. उद्देश्यों के आधार पर  
उद्देश्यों के आधार पर अनुसन्धान पाँच प्रकार का होता है-
  • वर्णनात्मक अनुसन्धान 
  • सहसम्बन्ध अनुसन्धान 
  • व्याख्यात्मक अनुसन्धान 
  • समन्वेशी अनुसन्धान 
  • प्रायोगिक अनुसन्धान 
वर्णनात्मक अनुसन्धान  - इस अनुसन्धान द्वारा किसी समस्या की ‘स्थिति का वर्णन’ किया जाता है, जिसके अन्तर्गत ‘क्या है’? या ‘क्या था’? जैसे प्रश्नों का उत्तर दिया जाता है। इस अनुसन्धान में अनुसन्धानकर्ता का चरों पर कोई नियन्त्रण नहीं होता। इसमें सर्वेक्षण और पर्याप्त व्याख्या के साथ-साथ तथ्यों की खोज को सम्मिलित किया जाता है। वर्णनात्मक अनुसन्धान के तीन प्रारूप होते है-
  1. घटनोत्तर अनुसन्धान 
  2. ऐतिहासिक अनुसन्धान 
  3. विश्लेषणात्मक अनुसन्धान 
सहसम्बन्ध अनुसन्धान - इस अनुसन्धान के अन्तर्गत किसी स्थिति के दो पक्षों के बीच सम्बन्धों का ज्ञान होता है। इसके द्वारा निश्चित परिस्थितियों में प्रमुख कारकों की पहचान की जाती है।
व्याख्यात्मक अनुसन्धान - इस प्रकार के अनुसन्धान के अन्तर्गत किसी घटना के दो पक्षों के बीच ‘क्यों’ और ‘कैसे’ आदि प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया जाता है।
समन्वेशी अनुसन्धान - इस प्रकार के अनुसन्धान को मुख्य अनुसन्धान का ‘लघुरूप’ भी कहा जाता है।
इसके द्वारा किसी घटना के दो या दो से अधिक पहलुओं के बीच सम्बन्ध स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है। इस अनुसन्धान का उद्देश्य तथ्यों को परिभाषित करना, समस्याओं को स्पष्ट करना, पृष्टभूमि की जानकारी प्राप्त करना आदि है।
प्रायोगिक अनुसन्धान - इस अनुसन्धान द्वारा कारण और प्रभाव सम्बन्धों  को उजागर किया जाता है।
5. अवधारणा के आधार पर   
अवधारणा के पर अनुसन्धान को दो वर्गों ने बाँटा गया है-
  • वैचारिक अनुसन्धान 
  • अनुभवसिद्ध अनुसन्धान 
वैचारिक अनुसन्धान - यह अनुसन्धान दार्शनिकों  एवं विचारकों द्वारा नई अवधारणाओं को विकसित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
अनुभवसिद्ध अनुसन्धान - यह अनुसन्धान अवलोकन तथा अनुभव आधारित होता है।


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