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समस्या का चयन Identify the Problem

समस्या का चयन Identify the Problem
अनुसन्धान के पहले चरण में सर्वप्रथम समस्या का चयन किया जाता है । जितनी जागरूकता, सतर्कता एवं जिज्ञासा के साथ समस्या का चयन किया जाता है, शोध समस्या का चयन उतने ही अच्छे ढंग से होता है ।
अनुसन्धान की समस्या का चयन करते समय निम्नलिखित बातें ध्यान रखनी चाहिए
अनुसन्धानकर्ता की रुचि शोध परियोजना में अवश्य होनी चाहिए ।
अवधारणाओं के सूचक, विधि तथा संकेतक आदि सभी पूर्णरूप से स्पष्ट होने चाहिए ।
शोधकर्ता को विषय की प्रासंगिकता का ध्यान रखनी चाहिए ।
शोध उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए ।
अनुसन्धानकर्ता को शोध कार्य के विषय में सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिए ।
शोध के विषय को अन्तिम रूप देने के लिए अनुसन्धानकर्ता को उससे सम्बन्धित सभी प्रकार के डाटा की उपलब्धता सुनिश्चित कर लेनी चाहिए ।
अनुसन्धान समस्या के निरूपण से पूर्व उनके नैतिक मुद्दों और उनके समाधान को पहले ही सोच लेना चाहिए ।
समस्या के प्रकार
1- सैद्धान्तिक समस्या
2- व्यावहारिक समस्या
3- सर्वेक्षण सम्बन्धी समस्याएँ
4- सह-सम्बन्धात्मक समस्याएँ
5- प्रायोगिक समस्याएँ
समस्या की विशेषताएँ
1- समस्याएँ पूर्णतः स्पष्ट एवं मूर्त होनी चाहिए।
2- समस्याएँ ऐसी होनी चाहिए जिसका समाधान किया जा सके ।
3- समस्या को नवीन होना चाहिए।
4- समस्या को अनुसन्धानकर्ता के लिए रुचिकर होंआ चाहिए।
5- समस्या परिकल्पनाओं पर आधारित होनी चाहिए।
6- समस्या व्यावहारिक रूप से उपयोगी होनी चाहिए ।
7- समस्या समाधान में अत्यधिक धन , समय एवं परिश्रम का अपव्यय न हो इसका ध्यान रखना चाहिए।
8- समस्या समाज के लिए उपयोगी होनी चाहिए।

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शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन Audio tools in the teaching process

शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन के अन्तर्गत उन सामग्रीयों को रखा जाता है, जिनके द्वारा सुनकर ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जैसे- फोनोग्राफ रिकॉर्ड, रेडियो प्रसारण तथा मैग्नेटिक टेपरिकॉर्डर आदि। शिक्षण में श्रव्य साधन तीन प्रकार से सहायक होते है- रेडियो  टेप रिकॉर्डर  ग्रामोफोन   रेडियो  रेडियो शिक्षा प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है। भारत में वर्ष 1936 में सर्वप्रथम आकाशवाणी से समाचार बुलेटिन का प्रसारण हुआ था। वर्ष 1957 में विविध भारती की शुरुआत हुई थी।  टेप रिकॉर्डर  टेपरिकॉर्डर के माध्यम से विषय-वस्तु को विद्यार्थी के लिए आवश्यकतानुसार प्रस्तुत किया जा सकता है। यह निदानात्मक और उपचरात्मक दोनों ही शिक्षण विधियों में प्रयुक्त किया जा सकता है।   ग्रामोफोन  ग्रामोफोन रेडियो की तरह ही शिक्षण का प्राचीन माध्यम है। इसके द्वारा छात्रों को उच्चारण के शुद्धिकरण में सहायता मिलती है।

गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity

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