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हरबर्ट शिक्षण मॉडल Herbert Teaching Model


हरबर्ट शिक्षण मॉडल Herbert Teaching Model

      हरबर्ट शिक्षण मॉडल  को स्मृति स्तर या स्मरण शक्ति स्तर की शिक्षण व्यवस्था भी कहते है। स्मृति स्तर के शिक्षण की क्रियाएँ ऐसे अधिगम की परिस्थितियों को उत्पन्न करती हैं, जिसमें विषयवस्तु के तथ्यों को छात्र केवल कण्ठस्थ कर सके। इस स्तर पर, प्रत्यास्मरण की क्रिया पर जोर दिया जाता है। इस स्तर पर, सार्थक तथा सम्बन्धित पाठ्य-वस्तु आसानी से याद हो जाती है, जबकि निरर्थक वस्तुओं को याद करने में कठिनाई होती है। तथ्यों को कण्ठस्थ करने की क्षमता का बुद्धि से सीधा सम्बन्ध नहीं होता है। एक मन्द बुद्धि बालक भी तथ्यों को कण्ठस्थ करके अधिक समय तक याद रख सकता है तथा इसके विपरीत भी हो सकता है।

     स्मृति स्तर के शिक्षण की निष्पत्ति का बुद्धि से सह-सम्बन्ध नहीं होता है, परन्तु इस स्तर के शिक्षण से बौद्धिक व्यवहार के विकास में सहायता मिलती है। समस्या के समाधान में स्मृति स्तर भी सहायक होता है। कण्ठस्थ किए गए तथ्यों का छात्रों के विकास में ही योगदान होता है। कविता, पाठ, शब्दार्थ और उनका अभ्यास, संस्कृत में रूप, पहाड़े, गिनतियाँ, भाषा में वर्तनी, व्याकरण तथा ऐतिहासिक घटनाओं का शिक्षण, स्मृति स्तर पर ही अधिक प्रभावपूर्ण होता है।

     स्मृति स्तर का पूर्णरूप से बहिष्कार सम्भव नहीं है। इस स्तर का अपना मूल्य है, अपना क्षेत्र है। इस स्तर का ज्ञान पाए बिना बोध एवं चिन्तन स्तर ठीक कार्य नहीं कर सकते। यह स्तर, अन्य विचारवान स्तरों के लिए आधारशिला प्रदान करता है, क्योंकि स्मृति स्तर पर तथ्य काफी रटे हुए होते हैं अत: भूलने की क्रिया भी इसमें काफी सक्रिय रहती है। कक्षा में रटी हुई सामग्री छात्रों के दैनिक जीवन में उपयोगी सिद्ध नहीं होती अतः इस स्तर पर सोचने व तर्क करने के लिए कोई स्थान नहीं होता। इस मॉडल में छात्र निष्क्रिय रहते हैं और यान्त्रिक ढंग से कक्षा कार्य चलता रहता है। कक्षा का वातावरण काफी औपचारिक होता है तथा छात्र को शिक्षक से प्रेरणा नहीं मिल पाती।

स्मृति स्तर के शिक्षण में, संकेत अधिगम, श्रृंखला अधिगम तथा अनुक्रिया पर महत्त्व दिया जाता है। प्रश्नोत्तर विधि का इसमें कोई महत्व नहीं होता। हरबर्ट ने स्मृति स्तर के शिक्षण के मॉडल के प्रारूप का वर्णन चार पक्षों में किया है।

  1. उद्देश्य
  2. संरचना
  3. सामाजिक प्रणाली
  4. मूल्यांकन प्रणाली

1. उद्देश्य

  • स्मृति स्तर के शिक्षण का उद्देश्य छात्रों में निम्नांकित क्षमताओं का विकास करना है ।
  • मानसिक पक्षों का प्रशिक्षण
  • तथ्यों का ज्ञान प्रदान करना
  • सीखे हुए तथ्यों का प्रत्यास्मरण रखना
  • सीखे हुए ज्ञान का प्रत्यास्मरण करना तथा पुन: प्रस्तुत करना

2. संरचना

      हरबर्ट ने शिक्षण प्रक्रिया में प्रस्तुतीकरण पर अधिक बल दिया है। हरबर्ट की पंचपदी प्रणाली स्मृति स्तर के शिक्षण को संरचना का प्रारूप प्रदान करती है।

हरबर्ट के पाँच सोपान इस प्रकार हैं।
  1. तैयारी करना 
  2. प्रस्तुतीकरण
  3. तुलना एवं समरूपता
  4. सामान्यीकरण
  5. उपयोग

3. सामाजिक प्रणाली

  • शिक्षण एक सामाजिक एवं व्यावसायिक प्रक्रिया है। इसमें सामाजिक व्यवस्था का विशेष महत्त्व है। 
  • छात्र और शिक्षक इसके सदस्य होते हैं।
  • स्मृति स्तर पर शिक्षक अधिक क्रियाशील रहता है। 
  • शिक्षक का व्यवहार अधिकारपूर्ण रहता है।
  • शिक्षक का मुख्य कार्य पाठ्य-वस्तु का प्रस्तुतीकरण करना, छात्रों की क्रियाओं को नियन्त्रित करना, उनको अभिप्रेरण प्रदान करना है।
  • छात्र का स्थान शिक्षण में गौण होता है, वह केवल श्रोता का कार्य करता है और शिक्षक को आदर्श मानकर उसका अनुसरण करता है।
  • स्मृति स्तर पर अभिप्रेरण का बाह्य रूप ही अधिक प्रयुक्त किया जाता है। शाब्दिक प्रेरणा, पुरस्कार आदि विशेष रूप से प्रयुक्त किए जाते हैं।

4. मूल्यांकन प्रणाली

  • स्मृति स्तर के शिक्षण का मूल्यांकन मौखिक तथा लिखित परीक्षाओं द्वारा किया जाता है। परीक्षा में रटने की (स्मरण करने) क्षमता पर ही अधिक बल दिया जाता है।
  • इसके लिए वस्तुनिष्ठ परीक्षण में प्रत्यास्मरण पद, अभिमान पद आदि का प्रयोग किया जाता है। निबन्धात्मक परीक्षा अधिक उपयोगी नहीं होती है।

स्मृति स्तर के शिक्षण के लिए सुझाव

स्मृति स्तर के शिक्षण को अधिक उपादेय एवं एवं प्रभावशाली बनाने के लिए निम्नांकित सुझाव दिये जा सकते है-

  • पुनरावृति एक लय में होनी चाहिए
  • पाठ्य-वस्तु को सार्थक बनाया जाए 
  • प्रत्यास्मरण तथा पुनः प्रस्तुतीकरण का अधिक अभ्यास किया जाना चाहिए
  • पाठ्य-वस्तु क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत की जाए
  • थकान के समय शिक्षण नहीं करना चाहिए
  • समग्र-पद्धति का प्रयोग करना चाहिए 
  • शिक्षण के सभी बिन्दुओं को समग्र रुप में प्रस्तुत करना चाहिए
  • अभ्यास के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए
  • स्मृति स्तर का शिक्षण केवल तथ्यों को रटने तथा ज्ञान उद्देश्यों की प्राप्ति की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं, अपितु बोध तथा चिन्तन स्तर के शिक्षण में भी सहायक होता है। 
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