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भारत के प्रमुख शोध संस्थान

आन्ध्र प्रदेश एवं तेलंगाना
  • कोशिकीय एवं आण्विक जीव विज्ञान केन्द्र, हैदराबाद 
  • उपग्रह प्रक्षेपण केन्द्र, श्रीहरिकोटा 
  • राष्ट्रीय भू-भौतिक अनुसन्धान संस्थान, हैदराबाद 
  • क्षेत्रीय अनुसन्धान प्रयोगशाला, हैदराबाद
असोम
  • क्षेत्रीय अनुसन्धान प्रयोगशाला, जोरहाट 
  • टाकलाई एक्सपेरीमेण्टल स्टेशन, जोरहाट
दिल्ली
  • भारतीय कृषि अनुसन्धान क्षेत्र, केन्द्रीय ट्रैक्टर संस्थान 
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग 
  • केन्द्रीय सड़क अनुसन्धान संगठन 
  • राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं विकास अध्ययन संस्थान, भारतीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रलेखन केन्द्र, प्रकाशन एवं सूचना निदेशालय 
  • राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला 
  • राष्ट्रीय प्रतिरोधक विज्ञान संस्थान 
  • राष्ट्रीय अपराध शास्त्र एवं विधि विज्ञान संस्थान
गुजरात
  • केन्द्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसन्धान संस्थान, भावनगर 
  • विद्युत अनुसन्धान एवं विकास संस्थान,बड़ोदरा
गोवा
  • राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, डोना पाला
हिमाचल प्रदेश
  • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् कॉम्प्लेक्स, पालमपुर
झारखण्ड
  • केन्द्रीय इंधन अनुसन्धान संस्थान, जलगोडा 
  • राष्ट्रीय धातु विज्ञान प्रयोगशाला, जमशेदपुर 
  • केन्द्रीय खनन अनुसन्धान केन्द्र, धनबाद
जम्मू-कश्मीर
  • क्षेत्रीय अनुसन्धान प्रयोगशाला, जम्मू 
मध्य प्रदेश
  • क्षेत्रीय अनुसन्धान प्रयोगशाला, भोपाल
महाराष्ट्र
  • भारतीय मौसम वेधशाला, पुणे 
  • भाभा परमाणु अनुसन्धान केन्द्र, ट्राम्बे 
  • केन्द्रीय पर्यावरण इन्जीनियरिंग अनुसन्धान संस्थान, नागपुर 
  • भू-चुम्बकीय भारतीय संस्थान, मुम्बई 
  • भारतीय उष्ण मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे 
  • राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे 
  • हिन्दुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स लिमिटेड, कोलाबा 
  • आर्टीफिशियल लिम्ब सेण्टर, पुणे
ओडिशा
  • क्षेत्रीय अनुसन्धान प्रयोगशाला, भुवनेश्वर
पंजाब
  • केन्द्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन, चण्डीगढ़
पश्चिम बंगाल
  • राष्ट्रीय एटलस तथा विषयक मानचित्र संगठन, कोलकाता 
  • भारतीय रासायनिक जैविक संस्थान, कोलकाता 
  • केन्द्रीय काँच तथा मृत्तिका अनुसन्धान संस्थान, कोलकाता 
  • केन्द्रीय यान्त्रिक इन्जीनियरिंग अनुसन्धान संस्थान, दुर्गापुर
राजस्थान
  • केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक इन्जीनियरिंग अनुसन्धान संस्थान, पिलानी 
  • हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, उदयपुर इन्स्टूमेंशन लिमिटेड, कोटा 
  • हिन्दुस्तान मशीन टूल्स निगम, उदयपुर
तमिलनाडु
  • केन्द्रीय चमड़ा अनुसन्धान, चेन्नई 
  • संरचनात्मक इन्जीनियरिंग अनुसन्धान केन्द्र, चेन्नई 
  • केन्द्रीय विद्युत रासायनिक अनुसन्धान संस्थान, करईकुड़ी
उत्तर प्रदेश
  • केन्द्रीय चिकित्सीय एवं सुगन्ध वनस्पति संस्थान, लखनऊ 
  • राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ 
  • औद्योगिक विष विज्ञान अनुसन्धान केन्द्र, लखनऊ 
  • केन्द्रीय औषधि अनुसन्धान केन्द्र, लखनऊ
उत्तराखण्ड
  • भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून 
  • केन्द्रीय भवन निर्माण अनुसन्धान संस्थान, रुडकी 
  • वाड़िया संस्थान, देहरादून 
  • संरचनात्मक इन्जीनियरिंग अनुसन्धान संस्थान, रुड़की 
  • भारतीय सर्वेक्षण विभाग, देहरादून
अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह
  • डाउन रेंज केन्द्र, कार निकोबार
कर्नाटक
  • केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसन्धान संस्थान, मैसूर 
  • राष्ट्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला, बंगलुरु 
  • रमण अनुसन्धान केन्द्र, बंगलुरु 
  • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बंगलुरु
केरल
  • उपग्रह ट्रैकिंग एवं रेजिंग केन्द्र, कावालूर 
  • श्री चित्रा तिरुमल संस्थान, तिरुअनन्तपुरम 
  • क्षेत्रीय अनुसन्धान प्रयोगशाला, तिरुअनन्तपुरम

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शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन Audio tools in the teaching process

शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन के अन्तर्गत उन सामग्रीयों को रखा जाता है, जिनके द्वारा सुनकर ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जैसे- फोनोग्राफ रिकॉर्ड, रेडियो प्रसारण तथा मैग्नेटिक टेपरिकॉर्डर आदि। शिक्षण में श्रव्य साधन तीन प्रकार से सहायक होते है- रेडियो  टेप रिकॉर्डर  ग्रामोफोन   रेडियो  रेडियो शिक्षा प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है। भारत में वर्ष 1936 में सर्वप्रथम आकाशवाणी से समाचार बुलेटिन का प्रसारण हुआ था। वर्ष 1957 में विविध भारती की शुरुआत हुई थी।  टेप रिकॉर्डर  टेपरिकॉर्डर के माध्यम से विषय-वस्तु को विद्यार्थी के लिए आवश्यकतानुसार प्रस्तुत किया जा सकता है। यह निदानात्मक और उपचरात्मक दोनों ही शिक्षण विधियों में प्रयुक्त किया जा सकता है।   ग्रामोफोन  ग्रामोफोन रेडियो की तरह ही शिक्षण का प्राचीन माध्यम है। इसके द्वारा छात्रों को उच्चारण के शुद्धिकरण में सहायता मिलती है।

गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity

पृथ्वी का वस्तुओं पर आकर्षण बल, गुरुत्व बल कहलाता है। इस गुरुत्व बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते है। इसे g से प्रदर्शित करते है। वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में सभी वस्तुएं पृथ्वी सतह पर समान त्वरण से गिरती है। किसी ऊँचाई h < < R से पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु की गति, मुक्त गति कहलाती है। गुरुत्व के अधीन गति, एकविमीय गति का आदर्श उदाहरण है जिसमें वायु प्रतिरोध तथा ऊँचाई के साथ त्वरण में सूक्ष्म परिवर्तन को नगण्य मान लेते है। गुरुत्व के अधीन गति को हम तीन प्रकार से समझ सकते है- 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए। 2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए। 3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए। 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए- माना कोई वस्तु h ऊँचाई से प्रारम्भिक वेग शून्य से छोड़ी जाती है, तब इस स्थिति में, उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है कि मुक्त रूप से गिरते किसी कण द्वारा क्रमागत सेकन्डों में चली गई दूरियाँ क्रमशः 1:3:5: …. अर्थात विषम पूर्णकों के अनुपात में होगी।  प्र...