Wednesday, April 29, 2020

निर्वात की विद्युतशीलता का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी पदार्थ की विद्युतशीलता पदार्थ का वह गुण है जो उस पदार्थ में विद्युत क्षेत्र उत्पन्न किये जाने पर उस पदार्थ द्वारा प्रदर्शित 'विरोध' की माप बताता है। इसे ε0 से प्रदर्शित करते है।
इसका प्रयोग सर्वप्रथम कूलॉम ने अपने नियम में किया था, जिसके अनुसार, निर्वात में दो आवेशों के बीच लगने वाला आवेशित बल
विमीय-सूत्र ज्ञात करना 

विद्युत विभव का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी ईकाई धनावेश को अनन्त से किसी बिन्दु तक लाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे उस बिन्दु का विद्युत विभव कहते हैं। अतः V = W/q जूल/कूलॉम
दूसरे शब्दों में, किसी बिन्दु पर स्थित ईकाई बिन्दुवत धनावेश में संग्रहित वैद्युत स्थितिज ऊर्जा, उस बिन्दु के विद्युत विभव के बराबर होती है।
विद्युत विभव को V के द्वारा दर्शाया जाता है। इसकी अन्तर्राष्ट्रीय इकाई वोल्ट है।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना 

Tuesday, April 28, 2020

विद्युत धारिता का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी चालक की वैद्युत धारिता, उस चालक की वैद्युत आवेश का संग्रहण करने की क्षमता की माप होती है।
जब किसी चालक को आवेश दिया जाता है तो उसका वैद्युत विभव आवेश के अनुपात में बढता जाता है। यदि किसी चालक को q आवेश देने पर उसके विभव में V वृद्धि हो, तो, q α V या q = CV
जहाँ C एक नियतांक है जिसका मान चालक के आकार, समीपवर्ती माध्यम तथा पास में अन्य चालकोँ की उपस्थिति पर निर्भर करता है। इस नियतांक को 'वैद्युत धारिता' कहते हैँ। अतः ऊपर के समीकरण से
C = q / V, इसका मात्रक कूलॉम/वॉल्ट होता है जिसे फैरड़ कहते है।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना 

विद्युत धारा का विमीय सूत्र

परिभाषा
आवेश के प्रवाह को विद्युत धारा कहते हैं।
ठोस चालकों में आवेश का प्रवाह इलेक्ट्रॉनों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानान्तरण के कारण होता है, जबकि द्रवों जैसे- अम्लों, क्षारों व लवणों के जलीय विलयनों तथा गैसों में यह प्रवाह आयनों की गति के कारण होता है।
साधारणः विद्युत धारा की दिशा धन आवेश के गति की दिशा की ओर तथा ॠण अवेश के गति की विपरीत दिशा में मानी जाती है। ठोस चालकों में विद्युत धारा की दिशा, इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत मानी जाती है। एस. आई. पद्धति में विद्युत धारा का मात्रक एम्पियर होता है।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना
विद्युत मूलभूत भौतिक राशि है, जिसका मान प्रति सेकण्ड किसी चालक से गुजरने वाले अनुप्रस्थ क्षेत्रफल पर आवेश के बराबर होता है, अतः धारा की इस परिभाषा से,
i = q/t
चूँकि धारा एक मूलभूत भौतिक राशि है अतः इसकी विमा कोई प्रतीक होगा।
अतः i का विमीय सूत्र =[A]

विद्युत आवेश का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण उसमें विद्युत तथा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न होते हैं विद्युत आवेश कहलाता है इसे q से प्रदर्शित करते हैं। यह एक अदिश राशि है, जिसका मात्रक कूलॉम होता है।
किसी आवेशित पदार्थ में आवेश की मात्रा q = ne कूलॉम होती है, जहाँ n पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा e = इलेक्ट्रॉन पर आवेश होता है जिसका आंकिक मान
आवेश दो प्रकार का होता है-
धनात्मक आवेश ( Positive Charge )
ऋणात्मक आवेश ( Negative Charge )
काँच की छड़ अथवा बिल्ली के समूर पर आवेश धनात्मक कहलाता है तथा प्लास्टिक-छड़ अथवा रेशम पर आवेश ऋणात्मक कहलाता है। जब किसी वस्तु पर कोई आवेश होता है तो वह वस्तु विद्युन्मय अथवा आवेशित (आविष्ट) कही जाती है। जब उस पर कोई आवेश नहीं होता तब उसे अनावेशित कहते हैं।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना 
विद्युत मूलभूत भौतिक राशि है, जिसका मान प्रति सेकण्ड किसी चालक से गुजरने वाले अनुप्रस्थ क्षेत्रफल पर आवेश के बराबर होता है, अतः धारा की इस परिभाषा से,
q = it
q का विमीय सूत्र = it का विमीय सूत्र

Monday, April 27, 2020

वाण्डर वाल्स् नियतांक{a, b} का विमीय सूत्र

परिभाषा
वान डर वाल्स समीकरण, गैसों के अवस्था का समीकरण है जिसे वान डर वाल्स ने 1877 में प्रस्तुत किया था।
वास्तविक गैसें, आदर्श गैस समीकरण का ठीक से पालन नहीं करतीं, जबकि वान डर वाल्स का समीकरण काफी सीमा तक वास्तविक गैसों के व्यवहार का ठीक से वर्णन करता है।
इसका भौतिक समीकरण
जहाँ R सार्वत्रिक गैस नियतांक है, T गैस का ताप है, P दाब है तथा V आयतन तथा a और b वान डर वाल्स गैस नियतांक है।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना 

ऊष्मा का यांत्रिक तुल्यांक का विमीय सूत्र


परिभाषा
यह संकल्पना कहती है कि गति का ऊष्मा में और ऊष्मा का गति में परिवर्तन किया जा सकता है तथा प्रत्येक स्थिति में समान मात्रा के कार्य के द्वारा समान मात्रा की ऊष्मा उत्पन्न होगी परन्तु शर्त केवल यह होगी कि किया गया कार्य पूर्णतः ऊष्मा में बदल जाय।
इस संकल्पना के परिणामस्वरूप ऊर्जा संरक्षण का सिद्धान्त विकसित हुआ और उसे स्वीकृति मिली। इसी के परिणामस्वरूप ऊष्मागतिकी के विज्ञान की स्थापना हुई और एक नवीन शाखा के रूप में यह विकसित हुआ।
सन् 1850 में अंग्रेज भौतिकशास्त्री जेम्स प्रेस्कॉट जूल ने एक प्रसिद्ध प्रयोग किया जिससे पहली बार ऊष्मा के यांत्रिक तुल्यांक का मान प्राप्त हुआ। जूल द्वारा प्राप्त मान 4.18 जूल प्रति कैलरी था जो उस समय के लिये अति परिशुद्ध मान माना जा सकता है। बाद में अधिक जटिल विद्युतचुम्बकीय प्रयोगों से और भी अधिक परिशुद्ध मान प्राप्त किया गया जो 4.1855 जूल प्रति कैलरी है।
इसे j से प्रदर्शित करते है, इसका भौतिक सूत्र, j = W/Q जूल/कैलोरी
यह वह उपकरण है जिससे जूल ने यह प्रयोग सिद्ध किया था। 

विमीय-सूत्र ज्ञात करना 

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...