Tuesday, May 5, 2020

स्थिति एवं निर्देश तंत्र Position or Frame

स्थिति Position
स्वयं से किसी वस्तु की दिशा एवं दूरी का निर्धारण करना उस वस्तु की स्थिति कहते है। जैसे जब हम किसी अज्ञात स्थान के बारे में जानकारी करते है तो सबसे पहले यह जाना जाता है की वह स्थान किस दिशा में है और फिर उसकी दूरी जानकार हम उस स्थान का सही-सही ज्ञान कर लेते है। इस प्रकार दूरी ओर दिशा के द्वारा किसी वस्तु का सही-सही ज्ञान करना ही उस उस वस्तु की स्थिति निर्धारण कहलाता है। भौतिकी में किसी गतिमान वस्तु के बारे में किसी समय विशेष के बारे में जानकारी इसी विधि से प्राप्त की जाती है।
निर्देश तंत्र  Frame 
जब कसी वस्तु की स्थिति का निर्धारण किया जाता है तो हमें किसी एक विशेष स्थान को या बिन्दु को स्थिर मानना होता है। इस स्थिर बिन्दु को प्रेक्षण बिन्दु कहा जाता है। इसे O से निर्देशित किया जाता है। इस प्रेक्षण बिन्दु से तीन परस्पर लम्बवत दिशा का निर्धारण किया जाता है, जिन्हें क्रमशः X-अक्ष, Y-अक्ष तथा Z-अक्ष कहा जाता है। इस प्रकार निर्देश बिन्दु से किसी वस्तु की दिशा एवं दूरी का निर्धारण जिस भौतिक निकाय के द्वारा किया जाता है उसे निर्देश तंत्र कहते है।

Monday, May 4, 2020

घतीय फलन में त्रुटि

जब किसी भौतिक राशि का परिमाण दो या दो से अधिक राशियों के घात पर निर्भर करता है तो इस प्रक्रिया में होने वाली त्रुटि घतीय फलन में त्रुटि कहलाती है।

राशियों के विभाजन में त्रुटि

जब किसी भौतिक राशि का परिमाण दो या दो से अधिक राशियों के विभाजन पर निर्भर करता है तो इस प्रक्रिया में होने वाली त्रुटि विभाजन त्रुटि कहलाती है।

राशियों के गुणनफल में त्रुटि

जब किसी भौतिक राशि का परिमाण दो या दो से अधिक राशियों के गुणन पर निर्भर करता है तो इस प्रक्रिया में होने वाली त्रुटि गुणनफल त्रुटि कहलाती है।

राशियों के अन्तर में त्रुटि

जब किसी भौतिक राशि का परिमाण दो या दो से अधिक राशियों के अन्तर पर निर्भर करता है तो इस प्रक्रिया में होने वाली त्रुटि अन्तर त्रुटि कहलाती है।

राशियों के योग में त्रुटि

जब किसी भौतिक राशि का परिमाण दो या दो से अधिक राशियों के योग पर निर्भर करता है तो इस प्रक्रिया में होने वाली त्रुटि योग त्रुटि कहलाती है।

त्रुटियों का संयोजन Propagation of Errors

जब कोई भौतिक राशि दो या दो से अधिक भौतिक राशियों पर निर्भर करती है तो उस राशि की माप में त्रुटि मान ज्ञात करना त्रुटियों का संयोजन कहलाता है। जोड़, घटाव, गुणा भाग व घतीय गणनाओं के आधार पर त्रुटियों का संयोजन भी 5 प्रकार का होता है जो निम्न प्रकार है-
  1. 📁राशियों के योग में त्रुटि
  2. 📁राशियों के अन्तर में त्रुटि
  3. 📁राशियों के गुणनफल में त्रुटि
  4. 📁राशियों के विभाजन में त्रुटि
  5. 📁घतीय फलन में त्रुटि

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...