Thursday, May 7, 2020

दूरी तथा विस्थापन Distance and Displacement

दूरी -: दिए गए समय अंतराल में गतिमान कण द्वारा तय किए गए वास्तविक पथ की लम्बाई को दूरी कहते है। यह एक अदिश राशि है। इसका मात्रक मीटर है।
विस्थापन-: किसी वस्तु के स्थिति सदिश में परिवर्तन को उसका विस्थापन कहते है। यह एक सदिश राशि है। इसका मात्रक मीटर है।
दूरी तथा विस्थापन के बीच तुलना
1- विस्थापन का परिमाण, दो स्थितियों के बीच न्यूनतम संभव दूरी के बराबर होता है, जबकि दूरी दो स्थितियों के बीच की अधिकतम माप होती है। अतः दूरी ≥ विस्थापन

2- गतिमान कण के लिए दूरी कभी ऋणात्मक अथवा शून्य नहीं हो सकती जबकि विस्थापन हो सकता है।
3- दो बिंदुओं के मध्य गति के लिए विस्थापन अद्वितीय फलन होता है, जबकि दूरी वास्तविक पथ पर निर्भर करती है तथा इसके अनन्त मान हो सकते है।
4- गतिमान कण के लिए दूरी समय के साथ कभी घट नहीं सकती जबकि विस्थापन समय के साथ घट सकता है। समय के साथ विस्थापन के घटने का अर्थ है कि वस्तु प्रारम्भिक बिन्दु की ओर गतिमान है।
5- सामान्यतः विस्थापन का परिमाण दूरी के बराबर नहीं हो सकता फिर भी यदि गति सरल रेखा के अनुदिश हो तो तो विस्थापन का परिमाण दूरी के बराबर हो सकता है।


Wednesday, May 6, 2020

कण अथवा बिन्दु द्रव्यमान Particle or Point Mass

पदार्थ का सबसे सूक्ष्म भाग जिसकी विमाएं शून्य हो तथा जिसे द्रव्यमान तथा स्थिति से अभिव्यक्त किया जा सके कण अथवा बिन्दु द्रव्यमान कहलाता है। यदि वस्तु का आकार, वस्तु द्वारा तय की गई दूरी की तुलना में नगण्य हो तो इसे कण कहते है। एक वस्तु को कण कहा जाना, गति के प्रकार पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति में विभिन्न ग्रहों को कण माना जा सकता है।
उपरोक्त अवधारणा में जब किसी वस्तु को कण मानते है तो वस्तु के सभी भागों में विस्थापन, वेग तथा त्वरण समान होता है।  

त्रिविमीय गति

आकाश में वस्तु की गति त्रिविमीय गति कहलाती है।
त्रिविमीय गति में वस्तु निर्देश तंत्र की तीनों अक्षों X-अक्ष, Y-अक्ष, तथा Z-अक्ष के अनुदिश गति करती है अर्थात त्रिविमीय गति में वस्तु की निर्देश तंत्र की तीनों अक्षों के साथ समय-परिवर्तन पर स्थिति परिवर्तित होती है।
उदाहरण –
1- उड़ती पतंग की गति
2- उड़ते हुए पक्षी की गति

द्विविमीय गति

समतल में वस्तु की गति द्विविमीय गति कहलाती है।
द्विविमीय गति में गतिमान वस्तु निर्देश तंत्र की किन्हीं दो अक्षों के साथ समय परिवर्तन पर अपनी स्थिति को परिवर्तित करती है। अतः समय के साथ जब कोई वस्तु निर्देश तंत्र की किन्हीं दो अक्षों के सापेक्ष गति करती है तो वस्तु की यह गति द्विविमीय कहलाती है।
उदाहरण –
1- वृतीय मार्ग पर कार की गति
2- बिलियर्ड गेंद की गति 

एक विमीय गति

सरल रेखा में वस्तु की गति एकविमीय गति कहलाती है।
एकविमीय गति में वस्तु निर्देश तंत्र की किसी एक अक्ष के अनुदिश गतिमान होती है जैसी X-अक्ष के अनुदिश कोई वस्तु जब गतिमान होती है तो वस्तु की यह गति एकविमीय गति कहलाती है।
उदारहरण-
1- सीधी सड़क पर कर की गति
2- मुक्त रूप से गिरती वस्तु की गति  

विराम तथा गति Rest and Motion

जब कोई वस्तु समय के साथ दिए गए निर्देश तंत्र के सापेक्ष अपनी स्थिति नहीं बदलता तो यह विराम में कही जाती है तथा इसके विपरीत यदि कोई वस्तु समय के साथ निर्देश तंत्र के सापेक्ष अपनी स्थिति बदलती है तो यह गति कही जाती है। अतः विराम तथा गति सापेक्ष पद है, जो कि निर्देश तंत्र पर निर्भर करती है।
समय के साथ निर्देश तंत्र की X-अक्ष, Y-अक्ष तथा Z-अक्ष के सापेक्ष स्थिति परिवर्तन के आधार पर गति तीन प्रकार की होती है-
  1. 📁एक विमीय गति
  2. 📁द्विविमीय गति
  3. 📁त्रिविमीय गति

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...