Wednesday, May 6, 2020

कण अथवा बिन्दु द्रव्यमान Particle or Point Mass

पदार्थ का सबसे सूक्ष्म भाग जिसकी विमाएं शून्य हो तथा जिसे द्रव्यमान तथा स्थिति से अभिव्यक्त किया जा सके कण अथवा बिन्दु द्रव्यमान कहलाता है। यदि वस्तु का आकार, वस्तु द्वारा तय की गई दूरी की तुलना में नगण्य हो तो इसे कण कहते है। एक वस्तु को कण कहा जाना, गति के प्रकार पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति में विभिन्न ग्रहों को कण माना जा सकता है।
उपरोक्त अवधारणा में जब किसी वस्तु को कण मानते है तो वस्तु के सभी भागों में विस्थापन, वेग तथा त्वरण समान होता है।  

त्रिविमीय गति

आकाश में वस्तु की गति त्रिविमीय गति कहलाती है।
त्रिविमीय गति में वस्तु निर्देश तंत्र की तीनों अक्षों X-अक्ष, Y-अक्ष, तथा Z-अक्ष के अनुदिश गति करती है अर्थात त्रिविमीय गति में वस्तु की निर्देश तंत्र की तीनों अक्षों के साथ समय-परिवर्तन पर स्थिति परिवर्तित होती है।
उदाहरण –
1- उड़ती पतंग की गति
2- उड़ते हुए पक्षी की गति

द्विविमीय गति

समतल में वस्तु की गति द्विविमीय गति कहलाती है।
द्विविमीय गति में गतिमान वस्तु निर्देश तंत्र की किन्हीं दो अक्षों के साथ समय परिवर्तन पर अपनी स्थिति को परिवर्तित करती है। अतः समय के साथ जब कोई वस्तु निर्देश तंत्र की किन्हीं दो अक्षों के सापेक्ष गति करती है तो वस्तु की यह गति द्विविमीय कहलाती है।
उदाहरण –
1- वृतीय मार्ग पर कार की गति
2- बिलियर्ड गेंद की गति 

एक विमीय गति

सरल रेखा में वस्तु की गति एकविमीय गति कहलाती है।
एकविमीय गति में वस्तु निर्देश तंत्र की किसी एक अक्ष के अनुदिश गतिमान होती है जैसी X-अक्ष के अनुदिश कोई वस्तु जब गतिमान होती है तो वस्तु की यह गति एकविमीय गति कहलाती है।
उदारहरण-
1- सीधी सड़क पर कर की गति
2- मुक्त रूप से गिरती वस्तु की गति  

विराम तथा गति Rest and Motion

जब कोई वस्तु समय के साथ दिए गए निर्देश तंत्र के सापेक्ष अपनी स्थिति नहीं बदलता तो यह विराम में कही जाती है तथा इसके विपरीत यदि कोई वस्तु समय के साथ निर्देश तंत्र के सापेक्ष अपनी स्थिति बदलती है तो यह गति कही जाती है। अतः विराम तथा गति सापेक्ष पद है, जो कि निर्देश तंत्र पर निर्भर करती है।
समय के साथ निर्देश तंत्र की X-अक्ष, Y-अक्ष तथा Z-अक्ष के सापेक्ष स्थिति परिवर्तन के आधार पर गति तीन प्रकार की होती है-
  1. 📁एक विमीय गति
  2. 📁द्विविमीय गति
  3. 📁त्रिविमीय गति

Tuesday, May 5, 2020

एक विमीय गति

स्थिति एवं निर्देश तंत्र Position or Frame

स्थिति Position
स्वयं से किसी वस्तु की दिशा एवं दूरी का निर्धारण करना उस वस्तु की स्थिति कहते है। जैसे जब हम किसी अज्ञात स्थान के बारे में जानकारी करते है तो सबसे पहले यह जाना जाता है की वह स्थान किस दिशा में है और फिर उसकी दूरी जानकार हम उस स्थान का सही-सही ज्ञान कर लेते है। इस प्रकार दूरी ओर दिशा के द्वारा किसी वस्तु का सही-सही ज्ञान करना ही उस उस वस्तु की स्थिति निर्धारण कहलाता है। भौतिकी में किसी गतिमान वस्तु के बारे में किसी समय विशेष के बारे में जानकारी इसी विधि से प्राप्त की जाती है।
निर्देश तंत्र  Frame 
जब कसी वस्तु की स्थिति का निर्धारण किया जाता है तो हमें किसी एक विशेष स्थान को या बिन्दु को स्थिर मानना होता है। इस स्थिर बिन्दु को प्रेक्षण बिन्दु कहा जाता है। इसे O से निर्देशित किया जाता है। इस प्रेक्षण बिन्दु से तीन परस्पर लम्बवत दिशा का निर्धारण किया जाता है, जिन्हें क्रमशः X-अक्ष, Y-अक्ष तथा Z-अक्ष कहा जाता है। इस प्रकार निर्देश बिन्दु से किसी वस्तु की दिशा एवं दूरी का निर्धारण जिस भौतिक निकाय के द्वारा किया जाता है उसे निर्देश तंत्र कहते है।

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