Saturday, May 9, 2020

सामान्य ज्ञान विषय सूची

भारत में प्रथम

त्वरण Acceleration

किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर उसका त्वरण कहलती है।
यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वेग परिवर्तन की दिशा होती है तथा इसका मात्रक मीटर/वर्ग सेकण्ड होता है। इसे a से प्रदर्शित करते है।
वेग की दिशा में परिवर्तन तीन प्रकार से होता है-
1- जब केवल वेग की दिशा परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण वेग के लम्बवत होता है। जैसे – एकसमान वृत्तीय गति।
2- जब केवल वेग का परिमाण परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण वेग के समान्तर अथवा प्रतिसमान्तर होता है। जैसे – गुरुत्व के अधीन गति।
3- जब वेग के परिमाण तथा दिशा दोनों परिवर्तित हो, तो इस अवस्था में त्वरण के दो घटक होते है, एक वेग के लम्बवत तथा दूसरा वेग के समान्तर या प्रतिसमान्तर होगा। जैसे – प्रक्षेप्य गति।
वेग में परिवर्तन के आधार पर त्वरण चार प्रकार का होता है-
1- एकसमान त्वरण
2- परिवर्ती त्वरण
3- औसत त्वरण
4- तात्क्षणिक त्वरण
1- एकसमान त्वरण 
यदि कण की गति के दौरान त्वरण का परिमाण व दिशा नियत रहे तो कण का त्वरण एकसमान कहलाता है। जैसे – पृथ्वी तल पर गिरते पिंड की गति में लगने वाला गुरुत्वीय त्वरण।
2- परिवर्ती त्वरण 
जब गति के दौरान कण के त्वरण का परिमाण अथवा दिशा अथवा दोनों परिवर्तित होते है, तो कण का त्वरण परिवर्ती अथवा आसमान त्वरण कहलाता है। जैसे-
1- सड़क पर दौड़ती गाड़ी की गति, जिसमे गाड़ी पर त्वरण का परिमाण कम और अधिक होता रहता है।
2- वृत्तीय पथ पर घूमते पिंड की गति जिसमे लगातार दिशा परिवर्तित होती रहती है।
3- टेढ़े-मेढ़े मार्ग पर दौड़ती गाड़ी की गति जिसमे गाड़ी की गति परिमाण व दिशा दोनों बदलते रहते है।
3- औसत त्वरण 
किसी गतिमान पिंड की किन्हीं दो अवस्थाओ के बीच में पिंड के वेग परिवर्तन और समय अन्तराल का अनुपात उन अवस्थाओं के बीच पिंड का औसत त्वरण कहलाता है। इसकी दिशा वेग सदिश में परिवर्तन की दिशा होती है।
4- तात्क्षणिक त्वरण 
किसी त्वरण से गतिमान कण का किसी सूक्ष्म समय अन्तराल का औसत त्वरण कण का तात्क्षणिक त्वरण कहलाता है। वास्तव में जब हम त्वरण की बात करते है तो यह तात्क्षणिक त्वरण ही होता है। गतिमान वस्तु के तात्क्षणिक वेग की दिशा तथा त्वरण की दिशा में कोई सम्बन्ध नहीं होता। 
त्वरण के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण 

Friday, May 8, 2020

चाल तथा वेग में तुलना

1- चाल एक अदिश राशि है जबकि औसत वेग सदिश राशि है। दोनों कें मात्रक तथा विमा समान है।
2- चाल तथा वेग उस समय अन्तराल पर निर्भर करता है, जिसमें यह परिभाषित होता है। दिए गए समय अन्तराल के लिए औसत वेग का सिर्फ एक ही मान होता जबकि औसत चाल के कई मान हो सकते है जो तय किए गए पथ पर निर्भर करते है।
3- यदि वस्तु गति के पश्चात अपनी प्रारम्भिक स्थिति में लौट आती है तो वस्तु का औसत वेग शून्य होगा परन्तु चाल कभी शून्य नहीं हो सकती।
4- गतिमान वस्तु के लिए औसत चाल कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती जबकि औसत वेग ऋणात्मक हो सकता है।
5- किसी गतिमान कण के लिए यह सम्भव हो सकता है कि उसकी तात्क्षणिक चाल नियत हो परन्तु तात्क्षणिक वेग परिवर्ती हो। जैसे – वृत्तीय मार्ग पर नियत चाल से गतिमान कण की गति।
6- तात्क्षणिक वेग का मान सदैव तात्क्षणिक चाल के बराबर होता है।
7- यदि कोई कण नियत वेग से गतिमान है, तब इनके औसत वेग तथा तात्क्षणिक वेग सदैव सामन होंगें।
8- यदि विस्थापन समय का फलन है, तो विस्थापन का समय के साथ अवकलन, वेग के तुल्य होता है। अर्थात
इस प्रकार t के मान के लिए हम तात्क्षणिक वेग ज्ञात कर सकते है। 
9- यदि कोई कण विराम अवस्था से प्रारम्भ होकर निश्चित समय के लिए नियत दर α से त्वरित होता है तथा उसके बाद नियत दर β से अवमंदित होते हुए प्रारम्भिक बिन्दु से t सेकण्ड बाद विराम अवस्था में आ जाता है, तब

वेग Velocity

किसी गतिमान वस्तु की एक निश्चित दिशा में स्थिति परिवर्तन की दर को वस्तु की चाल कहते है। यह एक सदिश राशि है, जिसे वेक्टर v से प्रदर्शित करते है। इसका मात्रक मीटर/सेकण्ड होता है। समय के साथ विस्थापन परिवर्तन के आधार पर वेग के चार प्रकार होते है-
1- एकसमान वेग
2- असमान वेग
3- औसत वेग
4- तात्क्षणिक वेग
1- एकसमान वेग 
जब कोई कण समान समय अन्तरालों में समान विस्थापन तय करती है अर्थात इसका परिमाण एवं दिशा दोनों ही समान हो तो इसका वेग एकसमान कहलाता है।
उदाहरण
1- एकसमान चाल से वृत्तीय पथ पर घूमते कण की गति
2- पृथ्वी के चारों ओर घूमते उपग्रह की गति
2- असमान वेग 
जब कोई कण समान समय अन्तरालों में असमान विस्थापन तय करती है अर्थात इसकी दिशा एवं परिमाण भिन्न भिन्न हो तो इसका वेग  असमान या परिवर्ती कहलाता है।
उदाहरण
1- सड़क पर चलती किसी बस की गति
2- नदी में बहते जल की गति
3- औसत वेग 
किसी दिए गए समय अन्तराल में तय कुल विस्थापन तथा कुल समय के अनुपात को औसत वेग कहते है। अतः
औसत वेग = तय कुल विस्थापन/लिया गया कुल समय
4- तात्क्षणिक वेग 
किसी विशेष क्षण पर वस्तु का वेग उस क्षण तात्क्षणिक वेग कहलाता है। अर्थात किसी निश्चित क्षण पर किसी सदिश में परिवर्तन की दर तात्क्षणिक वेग कहलाती है। 
तात्क्षणिक वेग बहुत सूक्ष्म समय अन्तराल के लिए औसत वेग ही होता है। अर्थात तात्क्षणिक वेग  

Thursday, May 7, 2020

चाल Speed

किसी गतिमान वस्तु की स्थिति परिवर्तन की दर को वस्तु की चाल कहते है। यह एक अदिश राशि है, जिसे v से प्रदर्शित करते है। इसका मात्रक मीटर/सेकण्ड होता है। समय के साथ स्थिति परिवर्तन के आधार पर चाल के चार प्रकार होते है-
1- एकसमान चाल
2- असमान चाल
3- औसत चाल
4- तात्क्षणिक चाल
1- एकसमान चाल
जब कोई कण समान समय अन्तरालों में समान दूरी तय करती है तो इसकी चाल एकसमान चाल कहलाती है।
उदाहरण
  • निर्वात में प्रकाश की चाल 
  • वायु में ध्वनि की चाल
2- असमान चाल
जब कोई कण समान समय अन्तरालों में असमान दूरी तय करती है तो इसकी चाल असमान चाल या परिवर्ती चाल कहलाती है।
उदाहरण
  • सड़क पर चलती किसी बस की चाल 
  • नदी में बहते जल की चाल 
3- औसत चाल
किसी दिए गए समय अन्तराल में चली गई कुल दूरी तथा कुल समय के अनुपात को औसत चाल कहते है। अतः
औसत चाल = चली गई कुल दूरी/लिया गया कुल समय
यह दो प्रकार की होती है-
  1. समय औसत चाल 
  2. दूरी औसत चाल 
1- समय औसत चाल – जब कोई कण भिन्न-भिन्न समय अन्तरालो में भिन्न-भिन्न चालों से चलता है तो यात्रा के सम्पूर्ण समय हेतु इसकी औसत चाल ‘समय औसत चाल’ कहलाती है। 
2- दूरी औसत चाल – जब कोई कण भिन्न-भिन्न दूरियाँ भिन्न-भिन्न समय अन्तरालों से तय करता है तो यात्रा के सम्पूर्ण समय हेतु इसकी औसत चाल ‘दूरी औसत चाल’ कहलाती है। 
4- तात्क्षणिक चाल
किसी विशेष क्षण पर वस्तु की चाल को उस क्षण तात्क्षणिक चाल कहते है। जब हम चाल कहते है तो इसका सामान्य अर्थ तात्क्षणिक चाल से ही होता है। 
तात्क्षणिक चाल बहुत सूक्ष्म समय अन्तराल के लिए औसत चाल ही होती है। अर्थात तात्क्षणिक चाल 


दूरी तथा विस्थापन Distance and Displacement

दूरी -: दिए गए समय अंतराल में गतिमान कण द्वारा तय किए गए वास्तविक पथ की लम्बाई को दूरी कहते है। यह एक अदिश राशि है। इसका मात्रक मीटर है।
विस्थापन-: किसी वस्तु के स्थिति सदिश में परिवर्तन को उसका विस्थापन कहते है। यह एक सदिश राशि है। इसका मात्रक मीटर है।
दूरी तथा विस्थापन के बीच तुलना
1- विस्थापन का परिमाण, दो स्थितियों के बीच न्यूनतम संभव दूरी के बराबर होता है, जबकि दूरी दो स्थितियों के बीच की अधिकतम माप होती है। अतः दूरी ≥ विस्थापन

2- गतिमान कण के लिए दूरी कभी ऋणात्मक अथवा शून्य नहीं हो सकती जबकि विस्थापन हो सकता है।
3- दो बिंदुओं के मध्य गति के लिए विस्थापन अद्वितीय फलन होता है, जबकि दूरी वास्तविक पथ पर निर्भर करती है तथा इसके अनन्त मान हो सकते है।
4- गतिमान कण के लिए दूरी समय के साथ कभी घट नहीं सकती जबकि विस्थापन समय के साथ घट सकता है। समय के साथ विस्थापन के घटने का अर्थ है कि वस्तु प्रारम्भिक बिन्दु की ओर गतिमान है।
5- सामान्यतः विस्थापन का परिमाण दूरी के बराबर नहीं हो सकता फिर भी यदि गति सरल रेखा के अनुदिश हो तो तो विस्थापन का परिमाण दूरी के बराबर हो सकता है।


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