Saturday, October 12, 2019

शिक्षण की प्रकृति Nature of Teaching




शिक्षण की प्रकृति Nature of Teaching

         शिक्षण की प्रकृति सकारात्मक होती है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी में संज्ञानात्मक, भावात्मक और क्रियात्मक पक्षों को अभिप्रेरित किया जाता है। शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जिसके गहन विश्लेषण पर ही शिक्षार्थी को शिक्षण की प्रकृति का बोध होता है।  शिक्षण की प्रकृति को निम्न रूपों में समझा जा सकता है-
  • शिक्षण कला एवं विज्ञान है। 
  • शिक्षण एक त्रिध्रुवीय प्रक्रिया है, जिसके तीन ध्रुव शिक्षक, बालक और पाठ्यक्रम है। 
  •  शिक्षण उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है। 
  • शिक्षण अन्तःप्रक्रिया है। 
  • शिक्षण उपचरात्मक प्रक्रिया है। 
  • शिक्षण विकासात्मक प्रक्रिया है। 
  • शिक्षण एक भाषायी प्रक्रिया है।
      शिक्षण में विद्यार्थियों की पाठ्यचर्या तथा विषयवस्तु का विश्लेषण तार्किक आधार पर ही किया जाता है।
शिक्षण की निर्देशन प्रक्रिया का प्रारूप छः स्तरों पर किया जाता है, जो कि निम्नलिखित है-
  1. अन्वेषण 
  2. संलग्नता 
  3. विस्तार
  4. व्याख्या 
  5. मूल्यांकन 
  6. मानक 

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