अंकन - ईश्वर सेवा का भेद।
पूर्णप्रज्ञ दर्शन के अनुसार जब ईश्वर के रूप के
स्मरण के लिए उनके आयुध ( अस्त्र-शस्त्र ) आदि का चिह्न शरीर के किसी भाग पर अंकित
कर दिया जाता है, तब उसे अंकन कहते हैं (सर्व०
सं० , पृ० २६३)।
अपने लक्ष्य को मेहनत से वरण करना ही प्रत्येक विद्यार्थी का एकमात्र ध्येय होना चाहिए - विकास विद्यालंकार
भारतीय इतिहास एवं संस्कृति कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है - मेहरगढ से कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...
No comments:
Post a Comment