अकृतकर्मभोग
अकृतकर्मभोग का अर्थ है – “नहीं
किये गये कर्मफल की प्राप्ति है”।
जब हम कहते हैं कि देवदत्त द्वारा किये गये कर्म
का फल भोगता है- यज्ञदत्त, तो इसमें देवदत्त द्वारा किये गये कर्मफल का भोग
यज्ञदत्त द्वारा करना ही अकृत कर्मभोग कहलाता है।
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