किसी दी गई राशि के मापन में सार्थक अंकों की संख्या ज्ञात करते समय कुछ नियमों का पालन किया जाता है, जो कि निम्न प्रकार है-
- गणना में सभी अशून्य अंक सार्थक होते है।
- दो अशून्य अंकों के बीच आने वाला शून्य अंक सार्थक होता है।
- संख्या के बायीं ओर के शून्य कभी सार्थक नहीं होते।
- संख्या के दायीं ओर के शून्य सार्थक अंक होते है।
- चरघातांकी निरूपण में दी गई संख्या का अंकिक भाग ही सार्थक अंक होता है।

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