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अपने लक्ष्य को मेहनत से वरण करना ही प्रत्येक विद्यार्थी का एकमात्र ध्येय होना चाहिए - विकास विद्यालंकार
Friday, April 24, 2020
सदिश परिचय एवं योग
ताप का विमीय सूत्र
तापमान किसी वस्तु की उष्णता की माप है । अर्थात्, तापमान से यह पता चलता है कि कोई वस्तु ठंढी है या गर्म।
उदाहरणार्थ, यदि किसी एक वस्तु का तापमान 20 डिग्री है और एक दूसरी वस्तु का 40 डिग्री, तो यह कहा जा सकता है कि दूसरी वस्तु प्रथम वस्तु की अपेक्षा गर्म है।
गैसों के अणुगति सिद्धान्त के विकास के आधार पर यह माना जाता है कि किसी वस्तु का ताप उसके सूक्ष्म कणों (इलेक्ट्रॉन, परमाणु तथा अणु) के यादृच्छ गति (रैण्डम मोशन) में निहित औसत गतिज ऊर्जा के समानुपाती होता है।
उदाहरणार्थ, यदि किसी एक वस्तु का तापमान 20 डिग्री है और एक दूसरी वस्तु का 40 डिग्री, तो यह कहा जा सकता है कि दूसरी वस्तु प्रथम वस्तु की अपेक्षा गर्म है।
गैसों के अणुगति सिद्धान्त के विकास के आधार पर यह माना जाता है कि किसी वस्तु का ताप उसके सूक्ष्म कणों (इलेक्ट्रॉन, परमाणु तथा अणु) के यादृच्छ गति (रैण्डम मोशन) में निहित औसत गतिज ऊर्जा के समानुपाती होता है।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना
ताप एक मूलभूत भौतिक राशि है अतः इसका विमीय सूत्र कोई एक प्रतीक चिन्ह होगा ।
भौतिकी में ताप की विमा को प्रकट करने के लिए θ प्रयुक्त किया जाता है ।
अतः ताप का विमीय सूत्र =[θ]
भौतिक राशियों की विमाएं Dimensions
जब किसी व्युत्पन्न राशि को मूलभूत राशि के पदों में व्यक्त किया जाता है तो इसे मूलभूत राशियों की विभिन्न घातों के गुणनफल के रूप में लिखा जाता है । इन्हीं घातों को विमाएं कहते है । जैसे–
बल का मात्रक न्यूटन होता है, परन्तु जब इसको मूलभूत राशियों के रूप में लिखते है तब, इसका गणितीय सूत्र –
बल का मात्रक न्यूटन होता है, परन्तु जब इसको मूलभूत राशियों के रूप में लिखते है तब, इसका गणितीय सूत्र –
अतः बल की विमाएं द्रव्यमान में 1, विस्थापन या लम्बाई में 1, तथा समय मैं -2 है ।
भौतिक राशियों का विमीय-सूत्र
किसी भौतिक राशि के प्रतीकों को उसकी विमा सहित बड़े कोष्ठक [ ] के अन्दर लिखना उस भौतिक राशि का विमीय सूत्र कहलाता है । जैसे- बल की विमीय समीकरण
जहाँ M द्रव्यमान का विमीय प्रतीक है , L लम्बाई या विस्थापन का विमीय प्रतीक है, तथा T समय का विमीय प्रतीक है ।
समान विमाओं वाली भौतिक राशियाँ
- आवृति
- कोणीय आवृति
- कोणीय वेग
- वेग प्रवणता
- क्षय नियतांक
- कार्य
- आन्तरिक ऊर्जा
- स्थितिज ऊर्जा
- गतिज ऊर्जा
- बल आघूर्ण
- दाब
- प्रतिबल
- यंग प्रत्यास्थता गुणांक
- आयतन प्रत्यास्थता गुणांक
- दृढ़ता गुणांक
- ऊर्जा घनत्व
- संवेग
- आवेग
- गुरुत्वीय त्वरण
- गरुत्वीय क्षेत्र की तीव्रता
- प्रणोद
- बल
- भार
- ऊर्जा प्रवणता
- कोणीय संवेग
- प्लांक नियतांक
- पृष्ठ तनाव
- पृष्ठीय ऊर्जा
- विकृति
- अपवर्तनांक
- आपेक्षिक घनत्व
- कोण
- घन कोण
- दूरी प्रवणता
- आपेक्षिक विद्युतशीलता (परावैद्युतांक)
- आपेक्षिक चुम्बकशीलता
- पायसन अनुपात
- गुप्त ऊष्मा
- गुरुत्वीय विभव
- ऊष्मीय धारिता
- वॉल्ट्जमेन नियतांक
- एन्ट्रॉपी
Thursday, April 23, 2020
मूल मात्रकों की परिभाषाएं
वे मात्रक जिनके द्वारा मूलभूत भौतिक राशियों का मापन किया जाता है मूल मात्रक कहलाते ही । ये सात है
1- मीटर
2- किलोग्राम
3- सेकण्ड
4- ऐम्पियर
5- केल्विन
6- मोल
7- केण्डिला
1- मीटर
प्रकाश द्वारा निर्वात में एक सेकंड के 299,792,458 वें समय अंतराल में तय किए गए पथ की लंबाई एक मीटर है । ( 1983 से मान्य )
2- किलोग्राम
फ्रांस में पेरिस के पास सेवरिस में अंतर्राष्ट्रीय माप - तोल विभाग में रखे प्लेटिनम - इरिडियम मिश्रधातु से बने सिलिंडर का द्रव्यमान मानक किलोग्राम है । ( 1889 से मान्य )
3- सेकण्ड
एक सेकंड वह अंतराल है जो सीजियम के समस्थानिक - 133 के परमाणु के विशेष विकिरण के 9,192,631,770 कंपनों की अवधि के बराबर है । ( 1967 से मान्य )
4- ऐम्पियर
एक ऐम्पियर वह नियत विद्युत् धारा है जो कि निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर स्थित दो सीधे अनंत लंबाई वाले समानांतर एवं नगण्य वृत्तीय अनुप्रस्थ काट में प्रवाहित होने पर, तारों के बीच प्रति मीटर लंबाई पर 2×〖10 〗^(7 )न्यूटन का बल उत्पन्न करती है । ( 1948 से मान्य )
5- केल्विन
जल के त्रिक - बिंदु के ऊष्मागतिक ताप के 1 / 273.16 वें भाग को केल्विन कहते है । ( 1967 से मान्य )
6- मोल
मोल, किसी निकाय में पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें मूल सत्वों ( तत्वों ) की संख्या उतनी ही है जितने 0.012 kg कार्बन - 12 में परमाणुओं की संख्या । ( 1971 से मान्य )
7- केण्डिला
कैंडेला, किसी दिशा में 500×〖10 〗^(1 2)Hz आवृत्ति वाले स्रोत की ज्योति-तीव्रता है जो उस दिशा में (1/683) वाट, प्रति स्टिरेडियन की विकिरण तीव्रता का एकवर्णीय प्रकाश उत्सर्जित करता है । (1979 से मान्य)
मात्रक Units
प्रत्येक भौतिक राशि को परिभाषित करने के लिए एक मात्रक की आवश्यकता होती है। मूल तथा व्युत्पन्न भौतिक राशियों के आधार पर मात्रक भी दो प्रकार के होते है-
1- मूल मात्रक
2- व्युत्पन्न मात्रक
1- मूल मात्रक
2- व्युत्पन्न मात्रक
1- मूल मात्रक
मूलभूत भौतिक राशियों के मात्रक मूल मात्रक कहलाते है ।
मूलभूत भौतिक राशियों की सांख्य के आधार पर मूल मात्रक भी सात है, जिन्हें निम्न तालिका से स्पष्ट किया गया है -
2- व्युत्पन्न मात्रक
व्युत्पन्न भौतिक राशियों के मात्रक व्युत्पन्न मात्रक कहलाते है ।
मूल मात्रकों को छोड़कर अन्य सभी भौतिक मात्रक व्युत्पन्न मात्रक होते है जिन्हें मूल मात्रकों की सहायता से बनाया जाता है।
निम्न तालिका में कुछ व्युत्पन्न मात्रकों को स्पष्ट किया गया है -
आदि -----
मात्रकों की पद्धति
भौतिकी में चार प्रकार की मात्रक पद्धति प्रचलित है –
1- CGS पद्धति
2- MKS पद्धति
3- FPS पद्धति
4- SI पद्धति
1- CGS पद्धति
यह पद्धति मात्रकों की गॉसीय पद्धति कहलाती है ।
इसमें लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय को सम्मिलित किया जाता है, जिनके संगत मात्रक निम्नलिखित है-
1- लम्बाई का मात्रक सेंटीमीटर (cm)
2- द्रव्यमान का मात्रक ग्राम (g)
3- समय का मात्रक सेकण्ड (s) होता है ।
2- MKS पद्धति
यह पद्धति मात्रकों की जॉर्जी पद्धति कहलाती है ।
इसमें लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय को सम्मिलित किया जाता है, जिनके संगत मात्रक निम्नलिखित है-
1- लम्बाई का मात्रक मीटर (m)
2- द्रव्यमान का मात्रक किलोग्राम (kg)
3- समय का मात्रक सेकण्ड (s) होता है ।
3- FPS पद्धति
यह पद्धति मात्रकों की अमेरिकन पद्धति कहलाती है ।
इसमें लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय को सम्मिलित किया जाता है, जिनके संगत मात्रक निम्नलिखित है-
1- लम्बाई का मात्रक फुट (Foot)
2- द्रव्यमान का मात्रक पॉउण्ड (Pound)
3- समय का मात्रक सेकण्ड (s) होता है ।
4- SI पद्धति
यह मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति है तथा सम्पूर्ण भौतिकी में प्रयुक्त होती है ।
इसमें आधुनिक MKS पद्धति भी कहते है
इसमें सातों मूलभूत राशियाँ तथा दो पूरक राशियों को सम्मिलित किया जाता है, जिनके संगत मात्रक निम्नलिखित है-
1- लम्बाई का मात्रक मीटर (m)
2- द्रव्यमान का मात्रक किलोग्राम (kg)
3- समय का मात्रक सेकण्ड (s)
4- विद्युत धारा का मात्रक ऐम्पियर (A)
5- ताप का मात्रक केल्विन (K)
6- पदार्थ का मात्रक मोल (mol)
7- ज्योति तीव्रता का मात्रक केण्डिला (cd) होता है ।
दो पूरक राशियाँ
8- समतल कोण का मात्रक रेडियन (rad)
9- घन कोण का मात्रक स्टेरेडियन (sr) होता है ।
व्यवहारिक मात्रक
वैज्ञानिकों द्वारा गणितीय आधार पर बड़ी से बड़ी तथा छोटी से छोटी गणनाओं के लिए जो प्रायोगिक मात्रक प्रयुक्त किए जाते है, उन्हें व्यवहारिक मात्रक कहते है। कुछ व्यवहारिक मात्रक निम्नलिखित है-
लम्बाई के मात्रक
द्रव्यमान के मात्रक
समय के मात्रक
मूलभूत तथा व्युत्पन्न राशियाँ Fundamental and Derived Quantities
1- मूल राशियाँ
2- व्युत्पन्न राशियाँ
1- मूल राशियाँ
वे भौतिक राशियाँ जो किसी अन्य भौतिक राशि पर निर्भर नहीं करती, जो पूर्णतः स्वतंत्र होती है, मूल भौतिक राशियाँ कहलाती है ।
अब तक सात मूल भौतिक राशियाँ मानी गई है-
1- लम्बाई
2- द्रव्यमान
3- समय
4- विद्युत धारा
5- ताप
6- पदार्थ की मात्रा
7- ज्योति तीव्रता
5- ताप
6- पदार्थ की मात्रा
7- ज्योति तीव्रता
2- व्युत्पन्न राशियाँ
वे भौतिक राशियाँ जो मूल भौतिक राशि पर निर्भर नहीं करती, तथा जो मूल राशियों की विभिन्न घातों से भाग या गुणनफल द्वारा व्युत्पन्न किया जा सकता है, व्युत्पन्न भौतिक राशियाँ कहलाती है ।
सात मूल भौतिक राशियों को छोड़कर अन्य सभी भौतिक राशियों को व्युत्पन्न राशियाँ माना गया है। जैसे -
1- वेग
2- त्वरण
3- बल
4- ऊर्जा
5- कार्य
6- धारित
7- विद्युत विभव आदि
वे भौतिक राशियाँ जो मूल भौतिक राशि पर निर्भर नहीं करती, तथा जो मूल राशियों की विभिन्न घातों से भाग या गुणनफल द्वारा व्युत्पन्न किया जा सकता है, व्युत्पन्न भौतिक राशियाँ कहलाती है ।
सात मूल भौतिक राशियों को छोड़कर अन्य सभी भौतिक राशियों को व्युत्पन्न राशियाँ माना गया है। जैसे -
1- वेग
2- त्वरण
3- बल
4- ऊर्जा
5- कार्य
6- धारित
7- विद्युत विभव आदि
भौतिक राशि Physical Quantity
वह भौतिक घटना जिसे मापा जा सके तथा जिसको भौतिक नियमों के रूप में समझाया अथवा व्यक्त किया जा सके, भौतिक राशि कहलाती है।
भौतिक राशि को इसके परिमाण तथा मात्रक द्वारा द्वारा प्रदर्शित किया जाता है ।
यदि किसी भौतिक राशि Q का परिमाण n तथा मात्रक u हो तो भौतिक राशि का गणितीय समीकरण
Q = n × u
विभिन्न मापन की पद्धतियों के लिए किसी भौतिक राशि का परिमाण एवं संगत मात्रक का गुणनफल सदैव नियतांक होता है, अर्थात
भौतिक राशियों के प्रकार -
भौतिक राशियाँ तीन प्रकार की होती है –
1- आनुपातिक
2- अदिश
3- सदिश
1- आनुपातिक
जब एक भौतिक राशि दो समान राशियों का अनुपात होती है, तो इसका कोई मात्रक नहीं होता । ऐसी भौतिक राशियों का केवल अंकिक मान होता है । जैसे –
1- आपेक्षिक घनत्व = (वस्तु का घनत्व )/(4°C पर पानी का घनत्व)
2- अपवर्तनक = (वायु में प्रकाश का वेग )/(माध्यम में प्रकाश का वेग)
3- विकृति = (विमा में परिवर्तन)/(मूल विमा)
ऐसी भौतिक राशियों की विमा भी नहीं होती ।
2- अदिश
जिन भौतिक राशियों की दिशा नहीं होती वे अदिश राशियाँ कहलाती है । इन राशियों के मापन में अंकिक मान मात्रक के साथ मापा जाता है । जैसे-
1- चाल = (दूरी )/(समय )
2- कार्य = बल × विस्थापन
3- घनत्व = (द्रव्यमान )/(आयतन )
3- सदिश
जिन भौतिक राशियों में दिशा होती वे सदिश राशियाँ कहलाती है । इन राशियों के मापन में अंकिक मान और मात्रक के साथ-साथ दिशा भी प्रदर्शित होती है । जैसे-
1- वेग = (विस्थापन )/(समयान्तराल )
2- त्वरण = (वेग परिवर्तन )/समयान्तराल
3- बल = कार्य × विस्थापन
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