अपने लक्ष्य को मेहनत से वरण करना ही प्रत्येक विद्यार्थी का एकमात्र ध्येय होना चाहिए - विकास विद्यालंकार
Saturday, April 25, 2020
अकृतकर्मभोग
अकृतकर्मभोग
अकृतकर्मभोग का अर्थ है – “नहीं
किये गये कर्मफल की प्राप्ति है”।
जब हम कहते हैं कि देवदत्त द्वारा किये गये कर्म
का फल भोगता है- यज्ञदत्त, तो इसमें देवदत्त द्वारा किये गये कर्मफल का भोग
यज्ञदत्त द्वारा करना ही अकृत कर्मभोग कहलाता है।
Friday, April 24, 2020
विशिष्ठ ऊष्मा का विमीय सूत्र
किसी 1 ग्राम वस्तु में 1° सेल्सियस ताप-परिवर्तन करनेवाली उष्मा को उसकी विशिष्ट उष्मा (स्पेसिफ़िक हीट) कहते हैं ।
इसे s के प्रदर्शित करते है इसका मात्रक जुल/किग्रा-केल्विन होता है ।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना
किसी वस्तु की विशिष्ट उष्मा s हो तो उसके m ग्राम का ताप Δt डिग्री सेल्सियस बढ़ाने में mSΔt कैलोरी ऊर्जा व्यय होती हैं।
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