Saturday, May 2, 2020

चुम्बकीय तीव्रता का विमीय सूत्र

परिभाषा
यह चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा किसी पदार्थ के चुम्बकन की मात्रा को प्रदर्शित करता है। निर्वात में चुम्बकीय प्रेरण एवं निर्वात की चुम्बकीय पारगम्यता के अनुपात को चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता कहलाता है। इसे H से प्रदर्शित करते है। अतः इसका मान
H = B/μ एम्पियर/मीटर
CGS पद्धति में इसका मात्रक ऑर्स्टेड होता है।
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Friday, May 1, 2020

चुम्बकीय प्रेरण का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी चालक को किसी परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर उस चालक के सिरों के बीच विद्युतवाहक बल उत्पन्न होने को विद्युत्-चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic induction) कहते हैं।
उत्पन्न विद्युत्वाहक बल का मान गणितीय रूप से फैराडे का प्रेरण का नियम द्वारा दिया जाता है। प्रायः माना जाता है कि फैराडे ने ही 1831 में विद्युतचुम्बकीय प्रेरण की खोज की थी।
इसे B से प्रदर्शित करते है, इसका मात्रक टेसला है।
चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन से उत्पन्न वैद्युत वाहक बल
ε = dϕE/dt वॉल्ट
कूलॉम का प्रयोग उपकरण 
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चुम्बकीय फ्लक्स का विमीय सूत्र

परिभाषा
चुम्बकीय फ्लक्स वह भौतिक राशि है जो किसी तल से होकर गुजरने वाले चुम्बकीय क्षेत्र का सम्पूर्ण परिमाण की माप है। इसे संक्षेप में Φm से निरूपित किया जाता है। इसका SI मात्रक वेबर (weber) है, व्युत्पन्न मात्रक वोल्ट-सेकेण्ड है तथा CGS मात्रक 'मैक्सवेल' है।
किसी चुम्बकीय क्षेत्र में, किसी बिन्दु पर स्थित छोटे से तल से यदि Φ वेबर चुम्बकीय फ्लक्स गुजरता है तो उस क्षेत्र के लम्बवत चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व (B) = Φ/A होगा, जहाँ A उस तल का क्षेत्रफल है।
चुम्बकीय फ्लक्स अत्यन्त महत्वपूर्ण भौतिक राशि है क्योंकि -
किसी बन्द लूप में उत्पन्न विद्युतवाहक बल का मान उस लूप में स्थित चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के बराबर होता है (फैराडे का प्रेरण का नियम)
विभिन्न स्थितियों में लगने वाले चुम्बकीय बल का परिमाण चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व (B) का फलन होता है। उदाहरण के लिये, किसी चुंबकीय क्षेत्र में में गतिशील किसी आवेशित कण पर लगने वाला बल = q v B चुम्बकीय अभिवाह अदिश राशि है
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Thursday, April 30, 2020

स्वप्रेरण गुणांक का विमीय सूत्र

परिभाषा
जब किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जा रही हो और उसका मान समय के साथ बदल रहा हो तो उसी कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न हो जाती है ऐसे स्वप्रेरण कहते हैं।
लेंज के नियम के अनुसार उत्पन्न हुई प्रेरित धारा अपने उत्पन्न होने के कारण का विरोध करती है अर्थात धारा के परिवर्तन का विरोध करती है।  उत्पन्न हुई प्रेरित धारा मुख्यधारा के विपरीत दिशा में प्रवाहित होती है जिससे इसका मान नहीं बढ़ सके।
स्वप्रेरण पर मुख्यधारा का मान निर्भर नहीं करता यहां पर मुख्यधारा के मान में परिवर्तन पर प्रेरित धारा का मान निर्भर करता है की धारा में परिवर्तन कितना हुआ उसी पर प्रेरित धारा की तीव्रता निर्भर करेगी।
कुंडली में प्रवाहित की जा रही विद्युत धारा के कारण कुंडली के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र पैदा हो जाता है जिससे कुंडली में से चुंबकीय बल रेखाएं या चुंबकीय फ्लक्स गुजरने लगता है यह चुंबकीय फ्लक्स कुंडली में प्रवाहित की गई धारा के समानुपाती होता है। यदि प्रवाहित की गई धारा I हो और चुम्बकीय फ्लक्स ϕ हो तब ϕ = LI हेनरी।  यह L एक स्थिरांक है इसे स्वप्रेरण गुणांक या स्वप्रेरकत्व कहते है

स्वप्रेरण गुणांक का S.I मात्रक हेनरी है इसे H से दर्शाते है

विमीय-सूत्र ज्ञात करना -


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विशिष्ठ प्रतिरोध का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी पदार्थ की प्रतिरोधकता उस पदार्थ का वह गुण है, जो यह दर्शाता है कि वह कितनी तीव्रता के साथ धारा का प्रतिरोध करेगा। प्रतिरोधकता चालक के पदार्थ पर निर्भर करता है, जिस करना इसे चालक का विशिष्ठ प्रतिरोध भी कहते है। इसे ρ से प्रदर्शित करते है। इसका मात्रक ओम-मीटर होता है।
यदि किसी चालक का प्रतिरोध R, चालक की लम्बाई l तथा चालक के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A हो तो चालक का विशिष्ठ प्रतिरोध
ρ = RA/l ओम-मीटर
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प्रतिरोध का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर तथा उससे प्रवाहित विद्युत धारा के अनुपात को उसका विद्युत प्रतिरोध कहते हैं।इसे R से प्रदर्शित करते है। इसको मात्रक ℧ ओह्म में मापा जाता है।
यदि किसी चालक के सिरों के बीच विभवान्तर V तथा उसमें प्रवाहित धारा I हो तो चालक का प्रतिरोध R = V/I ओह्म
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Wednesday, April 29, 2020

परावैद्युतांक नियतांक का विमीय सूत्र


परिभाषा
उन कुचालक पदार्थों को परावैद्युत कहते हैं जिनके अन्दर विद्युत क्षेत्र पैदा करने पर या जिन्हें विद्युत क्षेत्र में रखने पर वे ध्रुवित हो जाते हैं।
कुचालक से आशय उन सभी पदार्थों से है जिनकी प्रतिरोधकता अधिक या विद्युत चालकता कम होती है किन्तु परावैद्युत पदार्थ वे हैं जो कुचालक होने के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में ध्रुवण का गुण भी प्रदर्शित करते हैं।
किसी पदार्थ के ध्रुवण की मात्रा को उसके परावैद्युत स्थिरांक अर्थात परावैद्युतांक से मापा जाता है। परावैद्युत पदार्थों का एक प्रमुख उपयोग संधारित्र की प्लेटों के बीच में किया जाता है ताकि समान आकार में अधिक धारिता मिले। पॉलीप्रोपीलीन एक परावैद्युत पदार्थ है।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना
किसी पदार्थ का परावैद्युतांक एक आनुपातिक राशि है, जिसका मान उस पदार्थ की वैद्युतशीलता पर निर्भर करता है। इसे K से प्रदर्शित करते है। इसका भौतिक रूप
K = ε/ε0
जहाँ ε = माध्यम की विद्युतशीलता
तथा ε0 = निर्वात की विद्युतशीलता
चूँकि यह एक ही प्रकार की भौतिक राशि का आनुपातिक मान होता है अतः इसकी कोई विमा नहीं होगी।

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

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