Monday, May 18, 2020

भारत की राष्ट्रीय नदी

राष्ट्रीय नदी गंगा भारत की सबसे लम्बी नदी है, अपनी सम्पूर्ण यात्रा में 2510 किमी की दूरी तय करती है। यह हिमालय के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है तथा पहाड़ों पर भागीरथी के नाम से जानी जाती है। आगे चलकर इसमें अनेक नदियाँ मिलती चली जाती है जिनमें से मुख्य यमुना, सोन, गोमती, कोसी एवं घाघरा हैं। गंगा नदी का बेसिन विश्व के सबसे अधिक उपजाऊ क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, इस कारण यहाँ सबसे अधिक घनी आबादी निवास करती है। इस नदी पर दो वृहत बाँध हरिद्वार एवं फरक्का में बनाए गए हैं। गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन एक संकटापन्न जन्तु है, जो विशिष्ट रूप से इसी नदी में वास करती है। गंगा नदी को हिन्दुओं की सबसे अधिक पवित्र नदी माना जाता है। इस नदी के किनारे अनेक प्रसिद्ध स्थल है जिनमें वाराणसी, हरिद्वार, इलाहाबाद इत्यादि में मुख्य धार्मिक आयोजन आयोजित किए जाते हैं। यह नदी बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले सुन्दरवन में विश्व के सबसे बड़े डेल्टा का निर्माण करती है।

भारत का राष्ट्रीय ध्वज

राष्ट्रीय ध्वज
भारत की संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप 22 जुलाई, 1947 को अपनाया। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में समान अनुपात वाली तीन क्षैतिज पट्टियाँ हैं, सबसे ऊपर गहरा केसरिया रंग (जाग्रति, शौर्य एवं त्याग का प्रतीक) बीच में सफेद (सत्य एवं पवित्रता का प्रतीक) और हरा रंग (जीवन एवं समृद्धि का प्रतीक) सबसे नीचे है। ध्वज की लम्बाई-चौड़ाई का अनुपात 3 : 2 है। सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का 24 तीलियों वाला एक चक्र है, जिसका प्रारूप सारनाथ के अशोक स्तम्भ पर बने चक्र से लिया गया है।

भारत का राष्ट्रीय चिह्न

राष्ट्रीय चिह्न
भारत का राष्ट्रीय चिह्न सारनाथ स्थित अशोक स्तम्भ की अनुकृति है, जो सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। मूल स्तम्भ में शीर्ष पर चार सिंह है, जो एक दूसरे की ओर पीठ किए हुए हैं। इसके नीचे घण्टे के आकार के पद्म के ऊपर एक चित्र वल्लरी में एक हाथी, चौकड़ी भरता हुआ एक घोड़ा, एक साँड़ तथा एक सिंह की उभरी हुई मूर्तियाँ हैं। इसके बीच-बीच में चक्र बने हुए हैं। एक ही पत्थर को काटकर बनाए गए इस सिंह स्तम्भ के ऊपर धर्मचक्र रखा हुआ है। भारत सरकार ने यह चिह्न 26 जनवरी, 1950 को अपनाया। इसमें केवल तीन सिंह दिखाई पड़ते हैं, चौथा दिखाई नहीं देता। फलक के नीचे मुण्डकोपनिषद् का सूत्र 'सत्यमेव जयते' देवनागरी लिपि में अंकित है, जिसका अर्थ है - 'सत्य की ही विजय होती है'। भारत के राजचिह्न का उपयोग भारत के राजकीय (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम, 2005 के तहत नियन्त्रित होता है।

भारत का राष्ट्रगान


राष्ट्रगान 'जन-गण-मन ' ! रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा मूल रूप से बांग्ला में रचित और संगीतबद्ध 'जन-गण-मन' को सर्वप्रथम 27 दिसम्बर, 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। इस गीत का प्रकाशन सर्वप्रथम वर्ष 1912 में तत्त्व-बोधिनी पत्रिका में भारत विधाता शीर्षक से हुआ था, जिसका वर्ष 1919 में अंग्रेजी अनुवाद मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इण्डिया नाम से प्रकाशित किया गया। पूरे गीत में पाँच पद हैं। संविधान सभा ने इस गीत के हिन्दी संस्करण को 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया। राष्ट्रगान गाने का समय लगभग 52 सेकण्ड है, कुछ अवसरों पर राष्ट्रगान को संक्षिप्त रूप में (लगभग 20 सेकण्ड) भी गाया जाता है। इसे इस प्रकार पढ़ा जाए-
जन-गण-मन अधिनायक, जय हे
भारत-भाग्‍य-विधाता,
पंजाब-सिंधु गुजरात-मराठा,
द्रविड़-उत्‍कल बंग,
विन्‍ध्‍य-हिमाचल-यमुना गंगा,
उच्‍छल-जलधि-तरंग,
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ आशिष मांगे,
गाहे तव जय गाथा,
जन-गण-मंगल दायक जय हे
भारत-भाग्‍य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय जय जय जय हे।

भारत का राष्ट्रगीत


राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् ! सुप्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार बंकिम चन्द्र चटर्जी ने संस्कृत में 1882 ई. में प्रकाशित अपने उपन्यास आनन्द मठ में इस गीत को लिखा। यह गीत 1896 ई. में सर्वप्रथम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया। संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रगान के साथ-साथ इसे भी राष्ट्रगीत के रूप में अंगीकृत किया। इसका अंग्रेजी अनुवाद श्री अरविन्द घोष ने किया है। इस गीत का प्रथम पद ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकृत है। इसे 65 सेकण्ड में गाया जाना चाहिए। यदुनाथ भट्टाचार्य ने सर्वप्रथम इस गीत को संगीत बद्ध किया था। वर्तमान में इसे पन्नालाल घोष द्वारा बनाई गई धुन पर गाया जाता है। इसका पहला अंतरा इस प्रकार है-
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!
शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥


Sunday, May 17, 2020

प्रक्षेप्य गति के प्रकार

प्रक्षेप्य गति के प्रकार 
प्रक्षेप्य गति तीन प्रकार की होती है-
  1. 📁तिर्यक प्रक्षेप्य गति
  2. 📁क्षैतिज प्रक्षेप्य गति
  3. 📁नत समतल पर प्रक्षेप्य गति

क्षैतिज प्रक्षेप्य गति Horizontal Projectile Motion

जब कोई पिण्ड पृथ्वी तल से किसी ऊँचाई से किस क्षैतिज वेग से इस प्रकार फेंक जाता है कि पिण्ड का मार्ग परवलयाकार हो तो पिण्ड की यह गति क्षैतिज प्रक्षेप्य गति कहलाती है। जैसे – जेट विमान से गिराए गए गोले की गति।
क्षैतिज प्रक्षेप्य गति में, वेग का क्षैतिज घटक, गुरुत्वीय त्वरण तथा यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती है, तथा वस्तु क्षैतिज दिशा में समान समय अन्तराल में समान दूरी तय करती है।

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...