शिक्षण के स्तर Level of teaching
शिक्षण एक सोद्देश्य प्रक्रिया है या कह सकते हैं कि यह कक्षा में विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करने की एक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य छात्रा को सोचने के लिए प्रेरित करना है। शिक्षण और सीखने का घनिष्ट सम्बन्ध है, यहाँ तक कि शिक्षण सीखने का ही एक प्रत्यय माना जाता है, एक ही पाठ्य-वस्तु को विद्यालय के विभिन्न स्तरों पर पढ़ाया जाता है, क्योंकि पाट्य वस्तु का अपना स्वरूप होता है, जिससे शिक्षण के विभिन्न उद्देश्य की प्राप्ति की जाती है और अधिगम के विभिन्न स्तरों को प्रभावित किया जाता है। शिक्षण के उद्देश्य अत्यन्त स्पष्ट होने चाहिए तभी शिक्षक प्रभावशाली साधनों का प्रयोग कर इसे अधिक शक्तिवान बना सकता है। शिक्षण की प्रक्रिया की परिस्थितियों को हम एक सतत क्रम, विचारशील क्रियाओं की अवस्थाओं या स्तरों में विभाजित कर सकते हैं। नीचे की अवस्थाएँ उच्च अवस्थाओं के लिए पूरक का कार्य करती हैं; जैसे—उद्देश्यों की प्राप्ति में ज्ञान उद्देश्यपूर्वक का कार्य करता है।
शिक्षण के इस सतत क्षेत्र को प्रमुख रूप से तीन स्तरों में विभाजित किया गया है।1. स्मृति स्तर या स्मरण शक्ति स्तर की शिक्षण व्यवस्था
2. बोध स्तर या समझ स्तर की शिक्षण व्यवस्था
3. चिन्तन स्तर की शिक्षण व्यवस्था
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