शिक्षण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत शिक्षण सूत्र एवं शिक्षण को प्रभावित करने वाले कारक आते है। शिक्षण को प्रभावी बनाने में शिक्षण विधियों एवं शिक्षण सामग्रियों का महत्व होता है। मन, मस्तिष्क, ज्ञान, आचरण, वातावरण आदि शिक्षण के प्रमुख कारक है, जो शिक्षक के कार्यों को प्रभावित करते है।
शिक्षण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शिक्षक एवं शिक्षार्थी की भूमिका निम्नलिखित आधार पर निर्धारित होती है-
- शिक्षण कौशल
- शैक्षणिक योग्यता
- विषय-वस्तु की विशेषज्ञता
- शिक्षक का अनुभव एवं प्रबन्धन
- शिक्षक एवं शैक्षणिक संस्थानों में समन्वय
- कार्य का विश्लेषण
कुछ शिक्षकों में शिक्षण कौशल जन्मजात होता है, परन्तु अधिकतर शिक्षकों को यह कौशल अर्जित करना पड़ता है। कुछ प्रमुख शिक्षण कौशल है-
- प्रश्न पूछना
- प्रयोग करना
- व्याख्यान देना
- समस्या का निदान करना
शिक्षक की शैक्षणिक योग्यता बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक योग्य शिक्षक ही शिक्षण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकता है। एक कुशल शिक्षक के लिए निम्नलिखित योग्यताएं निर्धारित की जाती है-
- JBT
- B.Ed
- CTET
- NET
शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है कि शिक्षक को उसके विषय का विशेष ज्ञान प्राप्त हो, यदि शिक्षक अपनी विषय-वस्तु का विशेषज्ञ नहीं है तो शिक्षण प्रभावी नहीं होता।
4- शिक्षक का अनुभव एवं प्रबन्धन
एक शिक्षक सदैव एक शिक्षार्थी भी होता है। वह अपने ज्ञान एवं अनुभव से शिक्षार्थी के प्रश्नों के उत्तर देकर उसकी जिज्ञासा को शान्त कर पता है।
5- शिक्षक एक शैक्षणिक संस्थानों में समन्वय
एक शिक्षक के लिए आवश्यक है कि उसकी शिक्षण प्रक्रिया एक स्वतन्त्र वातावरण में सम्पन्न हो। इसके लिए शिक्षक का स्वयं का प्रबन्धन एवं शैक्षणिक संस्थानों में समन्वय रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है।
6- कार्य का विश्लेषण
शिक्षण की प्रक्रिया में शिक्षक एवं शिक्षार्थी दोनों ही एक दूसरे पर प्रभाव डालते है। शिक्षक को आवश्यक है की अपने शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए अपने कार्य के साथ-साथ शिक्षार्थियों के कार्यों का भी विश्लेषण करे।
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