शिक्षक द्वारा पाठ्य-पुस्तक के अध्यापन के दौरान जिन वस्तुओं अथवा सेवाओं को प्रयोग में लाया जाता है, उन्हें शिक्षण सहायक सामग्री कहते है। उत्तम शिक्षण सामग्री शिक्षार्थियों में विद्याध्ययन के प्रति रुचि पैदा करती है और उनमें शिक्षा के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति का विकास करती है।
कार्टन ए गुड के अनुसार, “कोई भी ऐसी सामग्री जिसके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को उद्दीप्त किया जा सके अथवा श्रवणेंद्रियों संवेदनाओं के द्वारा आगे बढ़ाया जा सके, वह शिक्षण सामग्री कहलाती है।”
शिक्षण में सहायक सामग्री का मुख्य उद्देश्य छात्रों में रोचक तरीकों के माध्यम से शिक्षण प्रदान करना है।
शिक्षण सहायक सामग्री को परम्परागत रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है-
- श्रव्य साधन
- दृश्य साधन
- श्रव्य-दृश्य साधन
श्रव्य साधनइस श्रेणी में ऐसी सहायक सामग्री को रखा जाता है, जिसके द्वारा सुनकर ज्ञान प्राप्त किया जा सके।
शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य साधन मुख्यतः तीन प्रकार के होता है-
1- रेडियो
2- टेप रिकार्डर
3- ग्रामोफोन
दृश्य साधनइसमें ऐसी सामग्रीयों को रखा जाता है, जिनको देखकर ज्ञान प्राप्त होता है।
शिक्षण प्रक्रिया में दृश्य साधन मुख्यतः सात प्रकार के होते है-
1- रेखाचित्र एवं चार्ट
2- मानचित्र एवं ग्लोब
3- प्रतिमान
4- स्लाइड
5- ग्राफ
6- फ्लैश कार्ड
7- पत्र-पत्रिका
श्रव्य-दृश्य सामग्रीशिक्षण की इस सामग्री के अन्तर्गत वे साधन रखे जाते है, जिनके द्वारा छात्र देखकर और सुनकर दोनों प्रकार से ज्ञान प्राप्त करते है।
श्रव्य-दृश्य सामग्री भी सात परकर की होती है-
1- टेलीविजन
2- कम्प्यूटर
3- मल्टीमीडिया
4- श्यामपट्ट
5- प्रदर्शन बोर्ड
6- चलचित्र अथवा सिनेमा
7- संवाद सामग्री
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