शिक्षण में खेलों को सर्वाधिक महत्व ‘फ्रॉबेल’ ने दिया और खेल विधि की दार्शनिक व्याख्या भी दी। इस विधि के जनक ब्रिटेन के गणितज्ञ ‘कोल्ड़वेल कुक’ थे, इन्होंने ही सर्वप्रथम गणित विषय में खेल विधि का उपयोग किया था। यह विधि सभी आयु के विद्यार्थीयों के लिए उपयोगी है।
खेल शिक्षण विधि के गुण
- खेल शिक्षण विधि द्वारा छात्रों में सृजनात्मक कौशलों के साथ-साथ जीवन कौशलों जैसे- समस्या का समाधान करना, तर्क-पूर्ण ढंग से सोचना, सम्प्रेषण शक्ति, टीम भावना आदि का विकास होता है।
- इस विधि में छात्रों में स्फूर्ति के साथ-साथ शारीरिक विकास भी होता है।
- यह विधि शारीरिक, संज्ञानात्मक, भावनात्मक, अधिगम रोचकता, सहजता और ऊर्जा देने वाली होती है।
- इस विधि से बच्चों में खेल की भावना अधिक विकसित होती है, किन्तु उसमें सीखने की दिलचस्पी कम हो जाती है।
- इसे पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक स्तर पर अनुपयोगी समझा जाता है।
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