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निरीक्षण विधि Observation Method


निरीक्षण विधि 
शिक्षार्थी केन्द्रित निरीक्षण विधि में विषय के सभी पहलुओं के अध्ययन पर बल दिया जाता है। यह विधि शिक्षण की एक रोचकपूर्ण पद्धति है, जो विद्यार्थीयों की पूर्ण सक्रियता को सुनिश्चित करती है। यह विधि कला और विज्ञान संकाय दोनों ही विषयों में लोकप्रिय है, किन्तु विज्ञान में इसका प्रचलन सर्वाधिक लोकप्रिय है।
निरीक्षण विधि के गुण
  • शिक्षण की यह विधि विद्यार्थीयों में स्वाध्याय की प्रवृत्ति का संचार करती है। 
  • इसमें विद्यार्थी को अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार अध्ययन करने के अवसरों की प्राप्ति होती है। 
  • इसके माध्यम से शिक्षक और शिक्षार्थियों के मध्य सहभागिता के उच्च स्तर स्थापित होते है। 
निरीक्षण विधि के दोष
  • निरीक्षण विधि को छोटी कक्षाओं के बच्चों के लिए प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है। 
  • इस विधि में सीखने के लिए अधिक समय और संसाधन की आवश्यकता होती है। 
  • शिक्षण की इस विधि के द्वारा मानविकी के कुछ विषयों जैसे- राजनीति विज्ञान या नगरिकशास्त्र से सम्पूर्ण पाठ्यक्रम की शिक्षा देना सम्भव नहीं है। 

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शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन Audio tools in the teaching process

शिक्षण प्रक्रिया में श्रव्य-साधन के अन्तर्गत उन सामग्रीयों को रखा जाता है, जिनके द्वारा सुनकर ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जैसे- फोनोग्राफ रिकॉर्ड, रेडियो प्रसारण तथा मैग्नेटिक टेपरिकॉर्डर आदि। शिक्षण में श्रव्य साधन तीन प्रकार से सहायक होते है- रेडियो  टेप रिकॉर्डर  ग्रामोफोन   रेडियो  रेडियो शिक्षा प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है। भारत में वर्ष 1936 में सर्वप्रथम आकाशवाणी से समाचार बुलेटिन का प्रसारण हुआ था। वर्ष 1957 में विविध भारती की शुरुआत हुई थी।  टेप रिकॉर्डर  टेपरिकॉर्डर के माध्यम से विषय-वस्तु को विद्यार्थी के लिए आवश्यकतानुसार प्रस्तुत किया जा सकता है। यह निदानात्मक और उपचरात्मक दोनों ही शिक्षण विधियों में प्रयुक्त किया जा सकता है।   ग्रामोफोन  ग्रामोफोन रेडियो की तरह ही शिक्षण का प्राचीन माध्यम है। इसके द्वारा छात्रों को उच्चारण के शुद्धिकरण में सहायता मिलती है।

गुरुत्व के अधीन गति Motion under Gravity

पृथ्वी का वस्तुओं पर आकर्षण बल, गुरुत्व बल कहलाता है। इस गुरुत्व बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते है। इसे g से प्रदर्शित करते है। वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में सभी वस्तुएं पृथ्वी सतह पर समान त्वरण से गिरती है। किसी ऊँचाई h < < R से पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु की गति, मुक्त गति कहलाती है। गुरुत्व के अधीन गति, एकविमीय गति का आदर्श उदाहरण है जिसमें वायु प्रतिरोध तथा ऊँचाई के साथ त्वरण में सूक्ष्म परिवर्तन को नगण्य मान लेते है। गुरुत्व के अधीन गति को हम तीन प्रकार से समझ सकते है- 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए। 2- यदि वस्तु ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कुछ प्रारम्भिक वेग से फेंकी जाए। 3- यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाए। 1- किसी ऊँचाई से यदि किसी वस्तु को गिराया जाए- माना कोई वस्तु h ऊँचाई से प्रारम्भिक वेग शून्य से छोड़ी जाती है, तब इस स्थिति में, उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है कि मुक्त रूप से गिरते किसी कण द्वारा क्रमागत सेकन्डों में चली गई दूरियाँ क्रमशः 1:3:5: …. अर्थात विषम पूर्णकों के अनुपात में होगी।  प्र...