Saturday, October 12, 2019

शिक्षक केन्द्रित विधियाँ Teacher Centred Methods

शिक्षक केन्द्रित विधियाँ
इस विधि में शिक्षक जटिल संप्रत्ययों की व्याख्या करते है तथा शिक्षार्थी उन्हें समझने का प्रयास करते है। इस विधि में अध्यापन के दौरान कक्षा का वातावरण पूर्णतः औपचारिक और कठोर होता है। शिक्षक केन्द्रित विधि को अनुदेशात्मक विधि भी कहा जाता है।
शिक्षक केन्द्रित विधियाँ छः प्रकार की होती है, जो निम्न प्रकार है-
1- व्याख्यान विधि
2- व्याख्यान प्रदर्शन विधि
3- समूह शिक्षण विधि
4- टेलीविजन या वीडियो प्रस्तुति विधि
5- समीक्षा नीति सम्बन्धी विधि
6- प्रश्नोत्तर शिक्षण नीति विधि
व्याख्यान विधि 
व्याख्यान विधि से आशय शिक्षक द्वारा निर्मित और उपयोग में लाए जाने वाले नियोजित कार्य योजना से है। यह विधि प्राचीन काल से ही चली आ रही है, यह एक प्रकार से मौखिक शिक्षा का ही रूप है। थॉमस एम रिस्क के अनुसार, “व्याख्यान, तथ्यों, सिद्धान्तों या अन्य सम्बन्धों का प्रतिपादन है, जिनको शिक्षक अपने सुनने वालों को समझना चाहता है।”
व्याख्यान प्रदर्शन विधि 
भारतीय शिक्षा के अनुरूप यह सर्वाधिक उपयुक्त, व्यवहारिक एवं उपयोगी विधि है। यह विधि किसी भी वस्तु की रचना व कार्यप्रणाली का वास्तविक रूप में ज्ञान करती है। किसी घटना, परिस्थिति, वस्तु आदि को दृश्यरूप में विद्यार्थी के समक्ष प्रदर्शित कर उसे स्पष्ट करना ही इस विधि का ध्येय होता है।
समूह शिक्षण विधि 
समूह शिक्षण विधि बड़े स्तर पर अध्यापन का एक कार्य है, जिसमें दो या दो से अधिक शिक्षक मिलकर कार्य योजना का निर्माण एवं उसका क्रियान्वयन करते है। पैनल चर्चा, विचार गोष्ठी आदि शिक्षण सम्बन्धी क्रियाएं इसी समूह शिक्षण के अन्तर्गत आती है।
टेलीविजन या वीडियो प्रस्तुति विधि 
टेलीविजन या वीडियो प्रस्तुति विधि एक अच्छे स्तर की शिक्षण विधि है, जिसके द्वारा शिक्षण गतिविधि को अच्छे तरीके से शिक्षार्थी तक संप्रेषित किया जा सकता है।
समीक्षा नीति सम्बन्धी विधि 
शिक्षण सम्बन्धी शिक्षक केन्द्रित सभी विधियों का पुनरावलोकन करने ही समीक्षा नीति कहलाता है। इस विधि का मुख्य उद्देश्य कक्षा में चल रहे अध्ययन-अध्यापन की प्रगति का लेखा-जोखा लेना होता है, जिससे शिक्षण विधि की कमियों को जानकार उसका उपचार किया जा सके।
प्रश्नोत्तर शिक्षण नीति विधि 
इस विधि को सुकरती विधि भी कहा जाता है। यह विधि मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित होती है।
इस विधि के मूलतः तीन सोपान होते है-
  • प्रश्न निर्माण 
  • प्रश्न का प्रस्तुतीकरण 
  • विद्यार्थी के माध्यम से नवीन ज्ञान का अनावरण 

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