Monday, May 11, 2020

नास्तिक दर्शन

नास्तिक दर्शन
चार्वाक, जैन, बौद्ध
1- चार्वाक दर्शन किस प्रकार का दर्शन है - नास्तिक
2- किस दर्शन का प्राचीन नाम लोकायत है - चार्वाक दर्शन
3- चार्वाक दर्शन पाँच तत्वों में किन चार तत्वों को ही ही मानता है - पृथिवी, अग्नि, वायु और जल
4- 'प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्' किस दर्शन की उक्ति है - चार्वाक दर्शन की
5- कौन-सा दर्शन है जो केवल एकमात्र प्रत्यक्ष को ही प्रमाण मानता है - चार्वाक दर्शन
6- चार्वाक के अनुसार चेतना का विकास किन से होता है - भूत से
7- यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति के लिए चार्वाक किस प्रमाण को स्वीकार करता है - प्रत्यक्ष को
8- चार्वाक किस प्रमाण का प्रबलता से खण्डन करता है - अनुमान प्रमाण का
9- चार्वाक के अनुसार व्याप्ति के सम्बन्ध को कैसे जाना जाता है - किसी भी प्रकार नहीं
10- प्रत्यक्ष को ही एकमात्र साधन मानने वाला कहलाता है - प्रत्यक्षवाद
11- वस्तु की सत्ता ज्ञाता से पृथक व स्वतन्त्र मानने वाला सिद्धान्त कहलाता है - वस्तुवाद
12- चार्वाक दर्शन का एक अन्य नाम हो सकता है - सुखवादी दर्शन
13- 'सफल जीवन वही है, जिसमें अधिक-से-अधिक सुखभोग हो' यह उक्ति किस दर्शन से सम्बन्धित है - चार्वाक दर्शन से
14- चार्वाक के अनुसार विश्व का निर्माण हुआ है - चार भूतों के संयोग से
15- व्याप्ति यदि अनुमान पर आधारित हो तो उसमें कौन-सा दोष होगा - अन्योन्याश्रित दोष
16- 'यावत् जीवेत सुखं जीवेत् ऋणं कृत्वा घृतम पिबेत्' उक्ति किस दर्शन की है - चार्वाक दर्शन की
17- चार्वाक दर्शन शब्द प्रमाण को क्यों अस्वीकृत करता है - इससे अयथार्थ ज्ञान की प्राप्ति होती है
18- चार्वाक के अनुसार जगत क्या है - वास्तविक
19- 'मरणम् एवं उपवर्ग' किस ग्रन्थ की उक्ति है - बृहस्पति सूत्र की
20- चार्वाक के अनुसार पुरुषार्थ कितने है - तीन
21- चार्वाक की निन्दा का करण क्या है - सुखवाद
22- व्याप्ति क्या है - हेतु व साध्य का सम्बन्ध
23- चार्वाक दर्शन के भौतिकवादी होने का कारण है - यह जड़ पदार्थ को मूलतत्व मानता है
24- यदि व्याप्ति अनुमान पर आधारित हो, तो यह कौन-सा दोष है - अन्योन्याश्रिता
25- चार्वाक के लिए मुक्ति क्या है - मृत्यु
26- चार्वाक के अनुसार प्रमाण है - प्रत्यक्ष
27- 'मृत्यु ही मोक्ष है' यह कथन किसका है - चार्वाक का
28- स्वभाववाद का सिद्धान्त किसको स्वीकृत है - चार्वाक को
29- जैन धर्म के अन्तिम तीर्थंकर है - महावीर स्वामी
30- जैन धर्म का कौन-सा सम्प्रदाय नग्नावस्था में रहता है - दिगम्बर
31- जैन साहित्य के अन्तर्गत 'आत्मानुशासन' किसकी रचना है - गुणभद्र की
32- जैन दर्शन उत्पाद, नाश और नित्यता से युक्त पदार्थ को मानता है - सत्
33- जैन दर्शन के अनुसार द्रव्य है - सत्
34- जैन दर्शन में स्वरूप धर्मों को क्या कहा जाता है - गुण
35- जैन दर्शन के अनुसार आगन्तुक या परिवर्तनशील धर्म कहलाता है - पर्याय
36- जैन दर्शन में आत्मा के स्थान पर किस शब्द का प्रयोग किया गया है - जीव
37- किस दर्शन में जीव को परिभाषित करते हुये कहा गया है कि 'चेतना लक्षणों जीव' - जैन दर्शन में
38- जैन दर्शन में चैतन्य को माना गया है - आत्मा का स्वभाव
39- जैन दर्शन में समस्त जीवों को कितनी श्रेणियों में बाँटा गया है -दो
40- अजीव द्रव्य का एक अन्य नाम क्या है - जड़
41- अजीव द्रव्य के कितने प्रकार है - पाँच
42- पुद्गल के सबसे छोटे भाग को, जिसका विभाजन नही हो सकता कहलाता है - अणु
43- स्पर्श, रस, गन्ध एवं वर्ण किसके गुण है - पुद्गल के
44- अनेकान्तवाद किस दर्शन में माना गया है - जैन दर्शन में
45- 'अनन्त धर्मकम वस्तु' का सम्बन्ध किस सिद्धान्त से है - अनेकान्तवाद से
46- अनेकान्तवाद का सम्बन्ध किस से है - वस्तुओं की अनेकता से
47- जैन दर्शन के अनुसार बंधन का क्या कारण है - जीव का पुद्गल से संयोग
48- पुद्गल को जड़रूप किस दर्शन ने माना है - जैन दर्शन ने
49- जैन दर्शन का स्यादवाद है - वस्तुवादी सापेक्षता
50- जैन दर्शन का स्यादवाद स्पष्ट रूप से क्या निर्देशित करता है - प्रत्येक ज्ञान सापेक्ष सत्य होता है
51- 'नय किसी वस्तु का आंशिक ज्ञान है' यह कथन किस दर्शन से सम्बन्धित है - जैन दर्शन से
52- जैन दार्शनिकों के अनुसार सांसारिक ज्ञान से पूर्व स्याद शब्द का प्रयोग करने पर किसी वस्तु के सन्दर्भ में कितने नय या परामर्श प्राप्त होते है - सात
53- जैन दर्शन में चौथा परामर्श या नय है - स्याद अव्यक्तव्यम्
54- जैन दर्शन के अनुसार इन्द्रियों एवं मन से प्राप्त ज्ञान को कहते है - मति ज्ञान
55- बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतमबुद्ध का जन्म कहाँ हुआ था - लुम्बिनी
56- गौतम बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित महाभिनिष्क्रमण का अर्थ है -गृहत्याग
57- ज्ञान प्राप्ति के पश्चात बुद्ध ने अपना उपदेश सर्वप्रथम कहाँ दिया - सारनाथ
58- किस पिटक में दार्शनिक विचारों की चर्चा है - अभिधम्मपिटक
59- बौद्ध धर्म में धर्मचक्र प्रवर्तन का अर्थ है - बुद्ध के द्वारा दिया गया प्रथम उपदेश
60- बौद्ध धर्म में कितने आर्य सत्य है - चार
61- किस आर्य सत्य में बुद्ध ने उपदेश देते हुये कहा कि "सर्व-दुखं दुखम्' अर्थात समस्त संसार में सर्वत्र दुःख ही दुःख है - प्रथम आर्य सत्य में
62- किस आर्य सत्य में बुद्ध ने दुःख के कारण का विश्लेषण के लिए प्रतीत्यसमुत्पाद सिद्धान्त का सहारा लिया - द्वितीय आर्य सत्य में
63- हीनयान सम्प्रदाय के अनुसार निर्वाण का शाब्दिक अर्थ है - बुझ जाना
64- किस आर्य सत्य में यह कहा गया है कि निर्वाण प्राप्ति के पश्चात समस्त दुःखों की आत्यान्तिक निवृत्ति हो जाती है तथा व्यक्ति संसार चक्र से मुक्त हो जाता है - तृतीय आर्य सत्य में
65- आष्टांगिक मार्ग की चर्चा किस आर्य सत्य में है - चतुर्थ आर्य सत्य में
66- महात्मा बुद्ध की शिक्षा का सारांश निहित है - चार आर्य सत्यों में
67- बुद्ध का द्वदश निदान किस आर्य सत्य में निहित है - द्वितीय आर्य सत्य में
68- बौद्ध धर्म के आष्टांगिक मार्ग के अन्तर्गत किस मार्ग में कहा गया है कि बुरे वचन तथा कर्म को त्यागकर मनुष्य को शुद्ध उपाय से जीविकोपार्जन करना चाहिए तथा जीविका के लिए उचित मार्ग का अनुसरण करना चाहिए - सम्यक् आजीव
69- बौद्ध दर्शन के प्रतीत्यसमुत्पाद की सही अभिव्यक्ति है - प्रत्येक कार्य अपने कारण पर आश्रित होता है
70- बौद्ध धर्म में किसे सापेक्ष कारणतावाद कहा जाता है - प्रतीत्यसमुत्पाद को
71- बौद्ध धर्म का कौन-सा सिद्धान्त मध्यम मार्ग का परिचायक है - प्रतीत्यसमुत्पाद
72- किस सिद्धान्त की मान्यता है कि वस्तुएं न तो नित्य है और न ही पूर्ण विनाशी, बल्कि परिवर्तनशील है - प्रतीत्यसमुत्पाद की
73- प्रतीत्यसमुत्पाद सिद्धान्त के अनुसार दुःख के कुल कितने कारण है - ग्यारह
74- अनात्मवाद का सिद्धान्त किस धर्म का है - बौद्ध धर्म का
75- अनात्मवाद में किस विषय की चर्चा है - आत्मा एवं भौतिक जगत की
76- प्रसिद्ध दार्शनिक नागसेन का सम्बन्ध किस दर्शन से है - बौद्ध दर्शन से
77- किस सम्प्रदाय को थेरवाद भी कहा जाता है - हीनयान
78- किस सम्प्रदाय का नाम सर्वास्तिवाद है - वैभासिक
79- प्रसिद्ध ग्रन्थ 'अभिसमयालंकार' के लेखक है - मैत्रयनाथ
80- महायान विचारधारा से सम्बन्धित माध्यमिक दर्शन के प्रवर्तक कौन थे - नागार्जुन
81- शून्यवाद की आधारशिला है - माध्यमिककारिका में
82- किसी भी वस्तु का अस्तित्व नहीं है, यह मत किसका है - शून्यवाद एवं विज्ञानवाद दोनों का
83- शून्यवाद का एक अन्य नाम है - सापेक्षवाद
84- शून्यवाद किस से उत्पन्न हुआ है - प्रतीत्यसमुत्पाद सिद्धान्त से
85- 'लंकावतार सूत्र' किस बौद्ध सम्प्रदाय का ग्रन्थ है - योगाचार का
86- कौन-सा बौद्ध सम्प्रदाय चित्त एवं बाह्य जगत दोनों को सत्य मानता है - सौत्रान्तिक
87- योगाचार दर्शन के प्रतिपादक है - असंग, वसुमित्र एवं दिङनाग
88- माध्यमिक सम्प्रदाय विश्व को किस रूप में स्वीकार करता है - विश्व असत् है
89- महायान बौद्ध दर्शन के अनुसार जीवन का आदर्श क्या है - बोधिसत्व पद प्राप्त करना
90- कश्मीर में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति की अध्यक्षता किसने की थी - वसुमित्र ने
91- तिब्बती बौद्ध दर्शन की उत्पत्ति बौद्ध धर्म की किस शाखा से हुआ - महायान
92- किस शासक ने तिब्बती बौद्ध धर्म को सर्वप्रथम तिब्बत का राजकीय धर्म घोषित किया था - ट्रीसाँग डेट्सन ने
93- तिब्बती बौद्ध धर्म की सबसे प्राचीन शाखा निंगमा के संस्थापक कौन थे- पद्यसम्भव
94- यूनानी राजदूत मेगस्थनीज किसके दरबार में आया था - चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में
95- मेगस्थनीज ने श्रमणों को कितने भागों में बाँटा है - दो
96- किस साहित्य में श्रमण का अर्थ बताया गया है कि व्यक्ति अपना विकास अपने ही परिश्रम द्वारा कर सकता है - वृहदारण्यक उपनिषद में
97- जैन दर्शन में जड़तत्व के लिए किस शब्द का प्रयोग किया है - पुद्गल
98- सुत्तपिटक में किस प्रकार के विचारों की चर्चा है - धर्म सम्बन्धी विचारों की
99- बौद्ध धर्म में अनात्मवाद का क्या अर्थ लिया गया है - आत्मा स्कंधों का समुच्चय है
100- आत्मा के बन्धन दो प्रकार के होते है - भावबन्धन और द्रव्यबन्धन । यह विचार किस दर्शन का है - जैन दर्शन का
101- अनुमान को प्रत्यभिज्ञा के रूप में किस दर्शन ने स्वीकार किया है - जैन दर्शन ने
102- किस दर्शन के अनुसार, प्रमा की सत्यता को "अबाधितार्थ विषयकत्व" माना जाता है - जैन दर्शन
103- 'नाम और सामान्य-अवधारणा, हमारी कल्पना द्वारा प्रदान किए जाते है' इस मत का प्रतिपादन किस दर्शन द्वारा किया गया है - बौद्ध दर्शन द्वारा
104- जैन विचारधारा में 'पर्याय' शब्द से किसका उल्लेख किया गया है - आगन्तुक धर्म का
105- किस दार्शनिक सम्प्रदाय की यह अवधारणा है कि देहपरिमाण ही आत्मा का भी परिमाण है - जैन सम्प्रदाय
106- किस दर्शन के अनुसार एव वस्तु एक ही समय में हो भी सकती है औरं नहीं भी - जैन दर्शन
107- चार्वाक के अनुसार आत्मा क्या है - चेतनयुक्त शरीर
108- मानसिक स्थिति को प्रकट करने के ज्ञान को जैन दर्शन में किस रूप में जाना जाता है - मनः पर्याय
109- 'जब द्रव्य आस्तित्ववान नहीं है, तो गुण, जो इन पर आश्रित है, भी आस्तित्ववान नहीं है" यह मत किस सम्प्रदाय का है - बौद्धों का
110- बौद्ध मत के अनुसार कौन त्रिशरण' के रूप में जाना जाता है - बुद्ध, धम्म और संघ
111- बौद्ध धर्म के अनुसार अविनाभाव सम्बन्ध किस पर निर्भर करता है - तादात्म्य, कारणता एवं निषेध पर
112- 'जिन' किस से सम्बन्धित है - जैन धर्म से
113- सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् आचरण को जैन दर्शन में क्या कहा जाता है - त्रिरत्न
114- प्रज्ञा, शील और समाधि यह अवधारणा किस धर्म की है - बौद्ध धर्म की
115- बौद्धों के अनुसार 'स्वलक्षण' है - क्षणिक और वास्तविक
116- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
तत्वार्थाधिगम
उमास्वामी
न्यायावतर
सिद्धसेन दिवाकर
द्रव्य संग्रह
नेमिचन्द्र
आत्मानुशासन
गुणभद्र
 
117- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
प्रथम आर्य सत्य
दुःख है
द्वितीय आर्य सत्य
दुःख का कारण है
तृतीय आर्य सत्य
दुःख का निरोध
चतुर्थ आर्य सत्य
निरोध के उपाय है

118- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
सौत्रान्तिक
कुमारलात
योगाचार
मैत्रेयनाथ
माध्यमिक
नागार्जुन
लोकायतन
चार्वाक

119- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
अभिसमयालंकार
मैत्रेयनाथ
मध्यमकशास्त्र
नागार्जुन
मिलिन्द प्रश्न
नागसेन
षड्दर्शन विचार
मेरुतुंग

120- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
हिन्दू
वर्णाश्रम
बौद्ध
प्रतीत्यसमुत्पाद
जैन
सप्त भंगीनय
इस्लाम
पाँच मुख्य स्तम्भ

121- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
बौद्ध धर्म
आष्टांगिक मार्ग
इस्लाम
दिन में पाँच बार प्रार्थना
सिख धर्म
नामस्मरण
जैन धर्म
गुणस्थानक

122- सुमेलित122- सुमेलित

सूची 1
सूची 2
नैगम नय
जहाँ वस्तुएं सामान्य और विशेष गुणों वाली समझी जाती है और हम उसमें भेद नहीं कर पाते
संग्रह नय
जहाँ सामान्य गुण पूर्णतः वास्तविक समझे जाते है एवं विशेष का अवास्तविक के रूप में निषेध हो जाता है
व्यवहार नय
जहाँ वस्तुओं को केवल मूर्त विशेष समझा जाता है
ऋतुसूत्र नय
जहाँ यथार्थ का क्षण के साथ अभिज्ञान किया जाता है
123- चार्वाक दर्शन पाँच तत्त्वों में केवल चार तत्त्वों को ही मानता है, निम्न में से किस तत्त्व को इस दर्शन में नहीं माना गया है?
(a) पृथ्वी
(b) अग्नि
(c) आकाश
(d) वायु
उत्तर – b
124- चार्वाक इनमें से किस प्रमाण का खण्डन करता है?
(a) शब्द प्रमाण
(b) अनुमान प्रमाण
(c) अर्थापत्ति
(d) इन सभी का
उत्तर – d
125- असत्य कथन का चयन कीजिए
(a) चार्वाक दर्शन प्रमाण विचार पर आधारित है
(b) चार्वाक दर्शन में यथार्थ ज्ञान को महत्त्व दिया गया है।
(c) प्रत्यक्ष द्वारा यथार्थ ज्ञान प्राप्त होता है
(d) चार्वाक मात्र दो प्रमाणों को स्वीकार करता है
उत्तर – d
126- जगत के सन्दर्भ में चार्वाक का कौन-सा मत सही नहीं है?
(a) जगत की उत्पत्ति जड़ भूतों से हुई है।
(b) संसार जड़ तत्त्वों का आकस्मिक संयोग है।
(c) संसार की उत्पत्ति किसी प्रयोजन के लिए हई है
(d) चार्वाक का मत प्रत्यक्षवाद भी कहलाता है।
उत्तर – d
127- निम्नलिखित में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) चार्वाक दर्शन के अतिरिक्त अन्य दर्शन प्रत्यक्ष प्रमाण के अतिरिक्त कम-से-कम एक प्रमाण को मानते हैं
(b) प्रमाण विचार चार्वाक दर्शन की दिशा निश्चित करता है।
(c) चार्वाक निकृष्ट सुखवादी है
(d) चार्वाक दर्शन में आत्म सत्ता को स्वीकार किया गया है
उत्तर – d
128- निम्नलिखित में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) चार्वाक ईश्वर की सत्ता को सिद्ध करने के लिए अनुमान का सहारा लेता है
(b) चार्वाक का देहात्मवाद भी अनुमान पर आधारित है
(c) चार्वाक के प्रमाण विचार में विसंगतियाँ नहीं हैं
(d) चार्वाक का प्रमाण विचार बहु-आयामी दृष्टिकोण इंगित करता है
उत्तर – c
129- निम्नलिखित में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) प्रत्यक्ष से अभ्रान्त अनिश्चयात्मक ज्ञान प्राप्त होता है
(b) प्रत्यक्ष ज्ञान को प्रमाणित करने के लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती
(c) 'प्रत्यक्षे किम् प्रमाणम्' चार्वाक की प्रसिद्ध उक्ति है
(d) अनुमान से अभ्रान्त ज्ञान सम्भव है
उत्तर – d
130- निम्नलिखित में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) चार्वाक तीन पुरुषार्थों को स्वीकार करता है
(b) चार्वाक मोक्ष को स्वीकार नहीं करता है
(c) अर्थ व काम को चार्वाक जीवन का लक्ष्य मानता है
(d) अर्थ अन्तिम लक्ष्य है
उत्तर d
131- निम्नलिखित में से कौन-सा एक युग्म चार्वाक स्वीकार करता है?
(a) वायु एवं जल
(b) अग्नि एवं आकाश
(c) प्रत्यक्ष एवं अनुमान
(d) शब्द प्रमाण एवं अनुमान
उत्तर – a
132- निम्नलिखित में से कौन-सा समूह संगत है?
(a) नास्तिक दर्शन, चार्वाक, जैन
(b) नास्तिक दर्शन, न्याय, जैन
(c) नास्तिक दर्शन, सांख्य, बौद्ध
(d) नास्तिक दर्शन, वैशेषिक, बौद्ध
उत्तर – a
133- जैन दर्शन के सन्दर्भ में कौन-सा असत्य है?
(a) आकाश के कारण ही विस्तार सम्भव है
(b) जीव पुद्गल धर्म व अधर्म आकाश में स्थित है।
(c) आकाश का अस्तित्व अनुमान के कारण सिद्ध नहीं होता है।
(d) आकाश के दो भेद माने गए हैं लोकाकाश तथा अलोकाकाश
उत्तर – c
134- जैन दर्शन से सम्बन्धित नहीं है।
(a) अनेकान्तवाद
(b) स्यादवाद
(c) नयवाद
(d) क्षणिकवाद
उत्तर – d
135- निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) क्षणभंगवाद उत्तरकालीन बौद्ध दार्शनिकों का विचार है
(b) बुद्ध के अनुसार वस्तुएँ अपरिवर्तनशील हैं
(c) क्षणिकवादी के अनुसार वस्तुएँ क्षणभंगुर हैं
(d) क्षणभंगवाद के दो मूल उद्देश्य हैं
उत्तर – b
136- वैभाषिक बौद्ध दर्शन के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा असंस्कृत धर्म नहीं है?
(a) प्रतिसंख्या निरोध
(b) अप्रतिसंख्या निरोध
(c) चित्त धर्म
(d) आकाश
उत्तर – c
137- बौद्ध मत का सिद्धान्त नहीं है
(a) क्षणिकवाद
(b) नैरात्मवाद
(c) स्यादवाद
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – c
138- निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) सौत्रान्तिक चित्त व बाह्य जगत दोनों की सत्ता को मानते हैं
(b) सौत्रान्तिक सूत्र के मूल प्रतिष्ठापक मैत्रेयनाथ थे
(c) योगाचार या विज्ञानवाद महायान दर्शन का एक दार्शनिक निकाय है
(d) वैभाषिक व सौत्रान्तिक हीनयान दर्शन के सम्प्रदाय हैं
उत्तर – b
139- बौद्ध दर्शन का सौत्रान्तिक सम्प्रदाय निम्नलिखित में से विश्वास नहीं करता
(a) बाह्य पदार्थ वास्तविक हैं
(b) बाह्य पदार्थ प्रत्यक्षत: जाने जाते हैं
(c) बाह्य पदार्थ अप्रत्यक्षतः जाने जाते हैं
(d) आत्मा विज्ञानों का प्रवाह है
उत्तर – b
140- बौद्ध दर्शन की इनमें से कौन-सी एक शाखा नहीं है?
(a) विज्ञानवाद
(b) सौत्रान्तिक
(c) वैभाषिक
(d) नैयायिक
उत्तर – d
141- निम्नलिखित में से कौन जैन दर्शन को स्वीकार्य नहीं है?
( a ) वास्तव एवं सापेक्ष बहुलवाद ।
( b ) 'द्रव्य' और 'गुण' अवियोज्य होते हैं
( c ) हम एक वस्तु को उसके सभी पहलुओं में जान सकते हैं
( d ) केवल-ज्ञान असीमित और निरपेक्ष ज्ञान है
उत्तर – c
142- निम्नलिखित में से कौन-से पुरुषार्थ चार्वाक को स्वीकार्य हैं ? नीचे दिए गए कूट का चयन कीजिए
( a ) अर्थ और काम
( b ) अर्थ, काम और धर्म
( c ) मोक्ष और काम
( d ) काम और धर्म
उत्तर – a
143- चार्वाक के अनुसार, अनुमान एक प्रमाण नहीं हो सकता, क्योंकि
( a ) यह ईश्वर को सिद्ध नहीं कर सकता है
( b ) यह भ्रमातीत नहीं है
( c ) इसकी व्याप्ति को स्थापित नहीं किया जा सकता है
( d ) यह स्वय व्याघाती है
उत्तर – c
144- 18 स्कन्ध को सही क्रम में प्रस्तुत करने वाले विकल्प का चयन कीजिए
( a ) विज्ञान, रूप, वेदना, संज्ञा और संस्कार
( b ) संज्ञा, विज्ञान, रूप, वेदना और संस्कार
( c ) रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार और विज्ञान
( d ) रूप, संज्ञा, वेदना, संस्कार और विज्ञान
उत्तर – c
145- 24 जैन मत में आत्मोत्थान के क्रमिक चरण जाने जाते हैं
( a ) अप्रमत्तसंयत
( b ) अविरत
( c ) उपशान्तकषाय
( d ) गुणस्थान
उत्तर – d
146- 30 निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प बौद्धमत के अनुसार, प्रत्यक्ष के रूपों का अभिकथन करता है?
( a ) इन्द्रियविज्ञान, मनोविज्ञान, सामान्यलक्षण, योगविज्ञान
( b ) मनोविज्ञान, स्व-संवेदन, इन्द्रियविज्ञान, ज्ञानलक्षण
( c ) स्व-संवेदन, मनोविज्ञान, योगविज्ञान, ज्ञानलक्षण
( d ) इन्द्रियविज्ञान, मनोविज्ञान, स्व-संवेदन, योगविज्ञान
उत्तर – d
147- चार्वाक के अनुसार, ज्ञान प्राप्ति के साधन के रूप में अनुमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि
( a ) पक्ष तथा साध्य में कोई अनिवार्य सम्बन्ध नहीं है
( b ) पक्ष के ज्ञान के सम्बन्ध में सन्देह है
( c ) व्याप्ति की स्थापना नहीं की जा सकती है
( d ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर – c
148- निम्नलिखित में से कौन-सा एक विकल्प कतिपय बौद्ध मत में स्वीकार्य है?
( a ) स्वत:-प्रामाण्य, परत:-अप्रमाण्य
( b ) स्वत:-प्रामाण्य, स्वतः-अप्रमाण्य
( c ) परत:-प्रमाण्य, स्वत:-अप्रमाण्य
( d ) परत:-प्रामाण्य, परत:-अप्रामाण्य
उत्तर – c
149- निम्नलिखित में से कौन-सा एक बौद्धमत के बारे में सही है?
( a ) इस जीवन में ही निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है।
( b ) मृत्योपरान्त जीवन में निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है
( c ) इस जीवन और मृत्योपरान्त जीवन दोनों में निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है
( d ) तथागत की अनुकम्पा से निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है
उत्तर – c
150- बौद्धों के अनुसार, द्वादशनिदान के कुछ चरणों का सही अनुक्रम है
( a ) नामरूप, विज्ञान, षडायतन, स्पर्श
( b ) विज्ञान, नामरूप, षडायतन, स्पर्श
( c ) विज्ञान, नामरूप, स्पर्श, षडायतन
( d ) षडायतन, विज्ञान, नामरूप, स्पर्श
उत्तर – b
151- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. चार्वाक दर्शन का सबसे प्राचीन नाम लोकायतन है, क्योंकि यह दर्शन लोगों में आयत अर्थात् फैला हुआ है।
2. चार्वाक दर्शन ईश्वर के साथ-साथ वेदों इत्यादि को भी नहीं मानता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
152- कथनों पर विचार कीजिए
1. चार्वाक भौतिकवाद की स्थापना करता है।
2. चार्वाक सुखवाद का समर्थक है।
3. चार्वाक कर्मवाद एवं पुनर्जन्म में विश्वास करता है।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) 1, 2 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1 और 2
उत्तर – d
153- चार्वाक द्वारा स्वीकृत तत्त्व हैं
1. अग्नि
2. पृथ्वी
3. जल
4. वायु
5. आकाश
कूट
(a) 1, 2, 3 और 4
(b) 2, 3, 4 और 5
(c) 2, 3, 1 और 4
(d) 5, 1, 2 और 4
उत्तर – c
154- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जिन वह है, जिसने अपने स्वभाव या मनोवेगों पर विजय प्राप्त कर ली है।
2. जैन धर्म में तीर्थंकर को आदरणीय पुरुष भी कहा जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
155- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जैन धर्म में दो सम्प्रदायों का उल्लेख मिलता है-श्वेताम्बर एवं दिगम्बर
2. भद्रबाहु के अनुयायी श्वेताम्बर नया स्थूलभद्र के अनुयायी दिगम्बर कहलाए।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
156- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जैन दर्शन के अनुसार प्रत्येक पदार्थ में सत् और असत् दोनों ही अंश विद्यमान रहते हैं।
2.जैन दर्शन में द्रव्य को धर्मी भी कहते हैं।
3. जैन दर्शन में आगन्तुक या परिवर्तनशील धर्म की पर्याय कहा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 3
(c) 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
157- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जैन दर्शन में आत्मा शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है।
2. जैन दार्शनिकों के अनुसार जीव का अपना निश्चित आकार होता है
3. जैन दर्शन में समस्त जीवों को दो श्रेणियों में बाँटा गया है-मुक्त जीव और बद्धजीव।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – c
158- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जैन धर्म के अनुसार मुक्त जीव उन आत्माओं को कहा जाता है, जो बन्धनग्रस्त हैं।
2. जैन दर्शन के अनुसार बद्ध जीव उन आत्माओं को कहा गया है, जिन्होंने मोक्ष को प्राप्त कर लिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
159- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जैन दर्शन में अजीव द्रव्य चार होते हैं।
2. जैन दर्शन में पुद्गल जड़तत्त्व या भौतिक तत्त्व है।
3. स्पर्श, रस, गन्ध और वर्ण पुद्गल के गुण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) 1 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – b
160- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. पुद्गल के विभाजन की अन्तिम एवं सूक्ष्मतम अवस्था जो पुनः अविभाज्य हो, अणु कहलाती है।
2 जैन दर्शन की सृष्टिमीमांसा में विश्व का ढाँचा परमाणुओं से निर्मित माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
161- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अनेकान्तवाद का सम्बन्ध बौद्ध दर्शन से है।
2. अनेकान्तवाद के अनुसार जगत में अनेक वस्तुएँ विद्यमान हैं तथा प्रत्येक वस्तु में अनन्त धर्म हैं।
3. जैन दर्शन अकेला दर्शन है जिसमें जड़तत्त्व के लिए पुद्गल शब्द का प्रयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – b
162- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1.जैन दार्शनिकों के अनुसार जीवन अल्पाण है, क्योंकि कुछ कर्म पुद्गल पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं।
2. स्यादवाद का सम्बन्ध जैन दर्शन से है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
163- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. शंकराचार्य ने स्यादवाद को पागलों का प्रलाप कहा है।
2. महावीर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
164- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जैन दार्शनिकों के अनुसार सांसारिक ज्ञान से पूर्व स्याद शब्द का प्रयोग करने पर किसी वस्तु के सन्दर्भ में सात नय या परामर्श प्राप्त होते हैं।
2. नय से तात्पर्य किसी सांसारिक ज्ञान को स्याद शब्द का प्रयोग उसकी आंशिक सत्यता को अभिव्यक्त करने से है।
3. सात भिन्न-भिन्न दृष्टिकोणों से प्राप्त सात नय को ही सप्तभंगीनय कहा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 3
(c) 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
165- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जैन दर्शन की मान्यता है कि ज्ञान स्वयं को प्रकाशित करने के साथ-साथ अन्य पदार्थों को भी प्रकाशित करता है।
2. जैन दर्शन में ज्ञान दो प्रकार का होता है- परोक्ष ज्ञान तथा अपरोक्ष ज्ञान
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) के 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
166- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. किसी के बताने, प्रमाणिक ग्रन्थों को सुनने अथवा आप्त वचनों से जो ज्ञान प्राप्त होता है उसे मति ज्ञान कहते हैं।
2. इन्द्रियों एवं मन से प्राप्त ज्ञान को श्रुति ज्ञान कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – d
167- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बौद्ध दर्शन की गिनती भारतीय दर्शन के वैदिक या आस्तिक दर्शन में होती है।
2. बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतमबुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
168- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बुद्ध के उपदेशों को उनके शिष्यों ने त्रिपिटक में संकलित किया है।
2. विनयपिटक में आचरण सम्बन्धी तथा सुत्तपिटक में धर्म सम्बन्धी विचारों की चर्चा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
169- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बुद्ध के सारे उपदेश चार आर्य सत्यों में ही सन्निहित हैं।
2. बुद्ध ने सारनाथ में ज्ञान प्राप्त किया तथा बोधगया में प्रथम उपदेश दिया।
3. बुद्ध के द्वारा दिया गया प्रथम उपदेश धर्मचक्र प्रवर्तन कहलाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 3
(c) 2 और 3
(d) 1 और 3
उत्तर – d
170- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. तृतीय आर्य सत्य दुःख का निरोध ही निर्वाण है।
2. चतुर्थ आर्य सत्य के अन्तर्गत दुःख निरोध उपाय या निर्वाण प्राप्ति उपाय के सन्दर्भ में अष्टांगिक मार्ग का उल्लेख किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
171- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. प्रतीत्यसमुत्पाद सिद्धान्त के अन्तर्गत बुद्ध ने दुःख और उसके ग्यारह कारणों की विवेचना की है।
2. दुःख और ग्यारह कारणों को ही द्वादशनिदान या संसार चक्र की संज्ञा दी जाती है।
3. प्रतीत्यसमुत्पाद सिद्धान्त को सापेक्ष कारणतावाद भी कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 2
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
172- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. क्षणभंगवादी के अनुसार एक क्षण से अधिक कोई वस्तु नहीं रहती है। सभी पदार्थ सभी घटनाएँ तथा सभी अनुभूतियाँ एक क्षण के लिए होती हैं।
2. इसके मूल में महात्मा बुद्ध द्वारा प्रस्तुत अर्थक्रियाकार्यत्व का विचार है जिसका उल्लेख उन्होंने अपने प्रतीत्यसमुत्पाद के सिद्धान्त के अन्तर्गत किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
173- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बुद्ध के अनुसार, नित्य आत्म में विश्वास करना उसी प्रकार हास्यास्पद है। जिस प्रकार कल्पित सुन्दर रमणी के प्रति आसक्ति रखना हास्यास्पद है।
2. बौद्ध ग्रन्थ मिलिन्द प्रश्न के लेखक नागार्जुन हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – a
174- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय को थेरावाद भी कहते हैं।
2. वैभाषिक तथा सौत्रान्तिक सम्प्रदाय का सम्बन्ध महायान से है।
3. योगाचार व माध्यमिक सम्प्रदाय का सम्बन्ध हीनयान से है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) 1 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – d
175- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वैभाषिक सम्प्रदाय के अनुसार जगत की समस्त वस्तुओं की सत्ता है।
2. वैभाषिक का एक अन्य नाम सर्वास्तिवाद है।
3. वैभाषिक सम्प्रदाय का सम्बन्ध बौद्ध धर्म के हीनयान से है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
176- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सौत्रान्तिक सम्प्रदाय केवल बाह्य जगत की सत्ता को स्वीकार करता है।
2. सौत्रान्तिक सूत्र के मूल प्रतिष्ठापक कुमारलात थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – b
177- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. योगाचार या विज्ञानवाद महायान दर्शन का एक दार्शनिक निकाय है।
2. योगाचार के अनुसार केवल विज्ञानों को ही सत्ता है, बाह्य वस्तु की कोई सत्ता नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
178- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. माध्यमिक दर्शन को शून्यवाद भी कहा जाता है।
2. शून्यवाद का प्रवर्तक मैत्रेयनाथ को माना जाता है।
3. माध्यमिक की दृष्टि में उत्पत्ति की धारणा मिथ्या प्रत्यय मात्र है, वस्तुस्वभाव नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर – b
179- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. माध्यमिक दर्शन उन्हीं तत्त्वों को शून्य कहता है, जिनकी व्याख्या नहीं हो सकती।
2. शून्यवादी दार्शनिक प्रवृत्ति भावात्मक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
180- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. तिब्बती बौद्ध दर्शन में महायान, वज्रयान आदि का प्रभाव देखा जा सकता है।
2. राजा सोंगत्सान्पो गम्पो के शासनकाल में भारत के संस्कृत बौद्ध ग्रन्थों का तिब्बती भाषा में अनुवाद कराया गया।
3. पद्मसम्भव को निंगमा का संस्थापक माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है
(a) केवल 1
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
181- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. तिब्बती बौद्ध दर्शन में बोधिसत्व की चर्चा नहीं है।
2. तिब्बती बौद्ध शिक्षक को लामा कहा जाता है।
कूट
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और नहीं 2
उत्तर – b
182- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. मेगस्थनीज ने श्रमणों और ब्राह्मणों को दार्शनिक जाति कहा
2. श्रमण परम्परा की उत्पत्ति में ब्राह्मणवाद का बड़ा योगदान था।
3. बौद्ध दर्शन श्रमण परम्परा के अन्तर्गत नहीं आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) 1 और 3
(b) 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1 और 2
उत्तर – d
183- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. ब्राह्मण परम्परा का मूल आधार वैदिक साहित्य है।
2. श्रमण परम्परा में आध्यात्मिक ज्ञान, आत्मविजय तथा आत्म-साक्षात्कार पर विशेष बल दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/ से सही है/ हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर – c
184- चार्वाक दर्शन में जगत के तत्त्व के रूप में स्वीकारा गया है
1. पृथ्वी
2. जल
3. तेज
4. वायु
5. आकाश
कूट
(a) 1, 2 तथा 3
(b) 2,3,4 तथा 5
(c) 1,2,3 तथा 4
(d) 1, 2, 3, 4 तथा 5
उत्तर – c
185- अजीव द्रव्य हैं
1. पुद्गल
2. आकाश
3. काल
4. धर्म
5. अधर्म
कूट
(a) 1, 2, 3 तथा 4
(b) 2, 3, 4 तथा 5
(c) 1, 2 तथा 3
(d) 1, 2, 3, 4 तथा 5
उत्तर – d
186- महायान सम्प्रदाय से सम्बन्धित है
1. वैभाषिक
2. सौत्रान्तिक
3. योगाचार
4. माध्यमिक
कूट
(a) 1, 2 तथा 3
(b) 2, 3 तथा 4
(c) 3 तथा 4
(d) 1, 2, 3 तथा 4
उत्तर – c
187- निम्नलिखित में से कौन-सा सही क्रमानुसार है?
(a) स्याद नस्ति, स्याद अस्ति, स्याद अस्ति च नस्ति च, स्याद अव्यक्तव्यम्
(b) स्याद अस्ति, स्याद नस्ति, स्याद अस्ति च नस्ति च, स्याद अव्यक्तव्यम
(c) स्याद अव्यक्तव्यम, स्याद अस्ति च नस्ति च, स्याद अस्ति, स्याद नस्ति
(d) स्याद अस्ति, स्याद नस्ति, स्याद अव्यक्तव्यम, स्याद अस्ति च नस्ति च
उत्तर – b
188- बौद्ध दर्शन के अनुसार चार आर्य सत्य का सही क्रम है
(a) दु:ख का कारण है, दुःख का निरोध है, दुःख है, निरोध के उपाय हैं
(b) दुःख का कारण है, दुःख है, दु:ख का निरोध है, निरोध के उपाय हैं
(c) दुःख है, दुःख का कारण है, निरोध के उपाय हैं, दुःख का निरोध है
(d) दुःख है, दुःख का कारण है, दु:ख का निरोध है, निरोध के उपाय हैं
उत्तर – d
189- निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म संगत नहीं है?
(a) चार्वाक-प्रत्यक्ष प्रमाण
(b) जैन-नयवाद
(c) बौद्ध-प्रतीत्यसमुत्पाद
(d) महायान-सर्वास्तिवाद
उत्तर – d
190- निम्नलिखित में कौन-सा युग्म सुमेलित है?
(a) लोकायतन—बृहस्पति
(b) जैन--गौतम
(c) बौद्ध-महावीर
(d) सांख्य-शंकराचार्य
उत्तर – a
191- निम्नलिखित कूट में से कौन - सा एक चार्वाकों को स्वीकार्य है ?
1 . क्षिति और काम
2 . अर्थ और पुण्य ,
3 . सुख और अर्थ
4 . मरुत और व्योम
कूट
( a ) 1 और 2
( b ) 1 और 3
( c ) 1 और 4
( d ) 2 और 3
उत्तर – b
192- निम्नलिखित सिद्धान्तों को उनके सही क्रम में लगाइए
1 . प्रतीत्य समुत्पाद
2 . निर्वाण
3 . प्रथम आर्य सत्य
4 . आष्टांगिक मार्ग (दुःख निरोध मार्ग)
कूट
( a ) 1 , 2 , 3 , 4
( b ) 4 , 3 , 2 , 1
( c ) 3 , 1 , 2 , 4
( d ) 2 , 3 , 1 , 4
उत्तर – c
*निर्देश - नीचे दिए गए कथन एवं कारणों को ध्यानपूर्वक पढ़कर कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए
कूट
(a) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
(b) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R,A की सही व्याख्या नहीं है
(c) A सही है, किन्तु R गलत है
(d) A गलत है, किन्तु R सही है
193- कथन (A) अनुमान को चार्वाक ने प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया है।
कारण (R) अनुमान से यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती।
उत्तर – a
194- कथन (A) चार्वाक के अनुसार व्याप्ति की स्थापना नहीं हो सकती।
कारण (R) हम सभी हेतु व साध्यों का निरीक्षण नहीं कर सकते।
उत्तर – a
195- कथन (A) ज्ञान के साधन की व्याख्या करना प्रमाण विचार का मुख्य उद्देश्य है।
कारण (R) चार्वाक प्रत्यक्ष को ही एकमात्र प्रमाण स्वीकार करता है।
उत्तर – a
196- कथन (A) चार्वाक वैदिक पदों का खण्डन करता है।
कारण (R) चार्वाक ने शब्द प्रमाण को अस्वीकार किया है।
उत्तर – a
197- कथन (A) चार्वाक ने आत्मा के अस्तित्व का खण्डन किया है।
कारण (R) आत्मा का प्रत्यक्ष नहीं होता।
उत्तर – a
198- कथन (A) चार्वाक का आत्मा सम्बन्धी मत देहात्मवाद कहलाता है।
कारण (R) चार्वाक चेतना से युक्त शरीर को ही आत्मा मानता है।
उत्तर – a
199- कथन (A) चार्वाक मोक्ष को स्वीकार नहीं करता।
कारण (R) आत्मा का प्रत्यक्ष नहीं होता।
उत्तर – a
200- कथन (A) चार्वाक 'आकाश' तत्त्व को स्वीकार नहीं करता।
कारण (R) इसके परमाणुओं का प्रत्यक्ष नहीं होता।
उत्तर – a
201- कथन (A) चार्वाक कर्म नियम को अस्वीकृत करता है।
कारण (R) कर्मों को फल देने की शक्ति का उसे प्रत्यक्ष नहीं होता।
उत्तर – a
202- कथन (A) व्याप्ति की स्थापना हम शब्द के द्वारा नहीं कर सकते।
कारण (R) शब्द प्रमाण की सिद्धि अनुमान के द्वारा होती है।
उत्तर – a
203- कथन (A) शब्द प्रमाण से भ्रान्त व अनिश्चयात्मक ज्ञान प्राप्त होता है।
कारण (R) शब्द से प्राप्त सभी ज्ञान अनुमान सिद्ध है।
उत्तर – a
204- कथन (A) चार्वाक दर्शन एक अनीश्वरवादी एवं नास्तिक दर्शन है।
कारण (R) यह ईश्वर एवं वेदों की प्रमाणिकता को स्वीकार नहीं करता।
उत्तर – a
205- कथन (A) चार्वाक का सम्पूर्ण दर्शन उसके प्रमाण विचार पर आधारित है।
कारण (R) चार्वाक ने यथार्थ ज्ञान को एकमात्र प्रमाण के रूप में प्रत्यक्ष को स्वीकार किया है।
उत्तर – a
206- कथन (A) प्रत्यक्ष ज्ञान अभ्रान्त होता है।
कारण (R) यह आँखों देखा होता है।
उत्तर – a
207- कथन (A) अनुमान यथार्थ ज्ञान का साधन नहीं हो सकता।
कारण (R) यह भ्रान्तिमूलक ज्ञान है।
उत्तर – a
208- कथन (A) चार्वाक उपमान प्रमाण को भी एक स्वतन्त्र प्रमाण नहीं मानता।
कारण (R) उसकी मान्यता है कि सादृश्यता का प्रत्यक्ष करने पर हम नामी के होने का अनुमान कर लेते हैं।
उत्तर – a
209- कथन (A) चार्वाक के मतानुसार जगत वास्तविक है।
कारण (R) जगत की उत्पत्ति चार प्रकार के जड़ तत्त्वों से हुई है।
उत्तर – a
210- कथन (A) चार्वाक के अनुसार चेतना शरीर का गुण है।
कारण (R) चेतना चार प्रकार के जड़ तत्त्वों के संयुक्त होने से उत्पन्न होती है।
उत्तर – d
211- कथन (A) चार्वाक के अनुसार चेतना युक्त शरीर ही आत्मा है।
कारण (R) चार्वाक का आत्म सम्बन्धी मत देहात्मवाद कहलाता है।
उत्तर – a
212- कथन (A) चार्वाक ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता।
कारण (R) ईश्वर का प्रत्यक्ष नहीं होता।
उत्तर – a
213- कथन (A) चार्वाक मोक्ष को स्वीकार नहीं करता।
कारण (R) मोक्ष दुःखों से आत्यान्तिक निवृत्ति है।
उत्तर – a
214- कथन (A) शब्द प्रमाण नहीं है।
कारण (R) यह भी एक प्रकार का अनुमान है।
उत्तर – a
215- कथन (A) अनुमान प्रमाण नहीं है।
कारण (R) यह कभी-कभी असत्य होता है।
उत्तर – c
216- कथन (A) केवल प्रत्यक्ष ज्ञान का प्रमाण है।
कारण (R) व्याप्ति की स्थापना सम्भव नहीं है।
उत्तर – b
217- कथन (A) चार्वाक दर्शन धार्मिक अनुष्ठानों का विरोध करता है।
कारण (R) चार्वाक के अनुसार सुख ही जीवन का आदर्श है।
उत्तर – b
218- कथन (A) चार्वाक तर्क देते हैं कि अनुमान कभी वैध नहीं होता।
कारण (R) वे कहते हैं कि साध्य तथा हेतु के बीच नियत साहचार्य कभी भी स्थापित नहीं किया जा सकता।
उत्तर – a
219- कथन (A) चार्वाक दार्शनिक तर्क देते हैं कि अनुमान कभी वैध नहीं हो सकता।
कारण (R) वे कहते हैं कि साध्य एवं हेतु के मध्य नियत साहचर्य की स्थापना कभी भी नहीं की जा सकती।
उत्तर – a
220- कथन (A) वस्तु का ज्ञाता से पृथक् व स्वतन्त्र अस्तित्व है।
कारण (R) वस्तुओं के गुण हमारे मन पर निर्भर न होकर वस्तु पर निर्भर हैं।
उत्तर – a
221- कथन (A) जीव अल्पज्ञ है।
कारण (R) कुछ कर्म पुद्गल पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं।
उत्तर – a
222- कथन (A) संसार में अनेक वस्तुएँ विद्यमान हैं।
कारण (R) प्रत्येक वस्तु में अनन्त धर्म विद्यमान हैं।
उत्तर – b
223- कथन (A) सप्तभंगीनय सात नयों का एकीकरण है।
कारण (R) सातों नय निर्णयात्मक होने के कारण आंशिक सत्य हैं।
उत्तर – b
224- कथन (A) विज्ञानवाद के अनुसार चित् ही एकमात्र सत्ता है।
कारण (R) विज्ञान के प्रवाह को चित् कहते हैं।
उत्तर – b
225- कथन (A) वस्तुओं का प्रत्येक धर्म अन्य वस्तुओं पर निर्भर होता है।
कारण (R) शून्यवाद को सापेक्षवाद भी कहते हैं।
उत्तर – b
226- कथन (A) बाह्य पदार्थों का कोई अस्तित्व नहीं है।
कारण (R) विज्ञान ही एकमात्र सत्य है।
उत्तर – b
227- कथन (A) कारण के नष्ट होने पर कार्य का नाश हो जाता है।
कारण (R) किसी भी वस्तु की उत्पत्ति किसी कारण से होती है।
उत्तर – a
228- कथन (A) निर्वाण को उपमाओं द्वारा वर्णित नहीं किया जा सकता।
कारण (R) निर्वाण वर्णनातीत है।
उत्तर – a
229- कथन (A) निर्वाण प्राप्ति के लिए बौद्ध धर्म में आष्टांगिक मार्ग है।
कारण (R) यह बौद्ध धर्म का सार है।
उत्तर – a
230- कथन (A) निर्वाण के पश्चात् पुनर्जन्म नहीं होता।
कारण (R) पुनर्जन्म के लिए आवश्यक कारण नष्ट हो जाते हैं।
उत्तर – a
231- कथन (A) दुःख निरोध को निर्वाण कहते हैं।
कारण (R) निर्वाण की प्राप्ति जीवन काल में भी हो सकती है।
उत्तर – b
232- कथन (A) यथार्थ ज्ञान के प्रति श्रद्धा का होना सम्यक् दर्शन कहलाता है।
कारण (R) सम्यक् दर्शन जैन धर्म के त्रिरत्नों में से एक है।
उत्तर – b
233- कथन (A) जीव और पुद्गल के संयोग को बन्धन कहते हैं।
कारण (R) जीव का पुद्गल से वियोग होना मोक्ष है।
उत्तर – b
234- कथन (A) प्रतीत्यसमुत्पाद बौद्ध दर्शन का कारण-कार्य सम्बन्धी सिद्धान्त है?
कारण (R) प्रतीत्यसमुत्पाद का उल्लेख बौद्ध दर्शन के प्रथम आर्य सत्य में है।
उत्तर – c
235- कथन (A) बौद्ध दार्शनिकों के अनुसार मनुष्य को निर्वाण तभी प्राप्त हो सकता है, जब आष्टांगिक मार्ग का पालन किया जाए।
कारण (R) आष्टांगिक मार्ग का उल्लेख चतुर्थ आर्य सत्य में है।
उत्तर – b
236- नीचे अभिकथन (A) और तर्क (R) दिए गए हैं। उन पर विचार कीजिए और चार्वाक दर्शन के सन्दर्भ में नीचे दिए गए सही कूट को चुनिए
अभिकथन (A) चेतना केवल चार भूतों - पृथ्वी, अप, तेजस और वायु का उत्पाद है।
तर्क (R) चार भूतों से अतिरिक्त और ऊपर कुछ भी नहीं है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( b ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( c ) A गलत है , किन्तु R सही है
( d ) A सही है , किन्तु R गलत है
उत्तर – b
237- नीचे अभिकथन (A) और तर्क (R) दिए गए हैं। जैन दर्शन के आलोक में (A) और (R) पर विचार करते हुए सही कूट चुनिए
अभिकथन (A) द्रव्य और गुण अपृथक्करणीय हैं
तर्क (R) द्रव्य गुण का आश्रय है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – b
238- नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। उन पर विचार करें और बौद्ध मत के सन्दर्भ में नीचे दिए गए सही कूट का चयन करें
अभिकथन (A) निर्वाण दु:खरहित नहीं हो सकता।
कारण (R) सर्वम् दुःखम् दुःखम्।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – d
239- नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। उन पर विचार करें और बौद्ध मत के सन्दर्भ में नीचे दिए गए सही कूट का चयन करें
अभिकथन (A) दुनिया में कष्ट है।
कारण (R) इसकी उत्पत्ति हमारे द्वारा नहीं की गई है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A गलत है, किन्तु R सही है
( d ) A सही है, किन्तु R गलत है
उत्तर – d
240- नीचे दिए गए दो कथनों में एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) की संज्ञा की दी गई है। चार्वाक दर्शन के सन्दर्भ में इन पर विचार करते हुए नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए
कथन (A) मृत शरीर को चेतन होना चाहिए।
कारण (R) चेतना शरीर का एक गुण है।
कूट
( a ) A और R दोनों सही हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A और R दोनों सही हैं , परन्तु R , A की सही व्याख्या नहीं है
( c ) A सही है , किन्तु R गलत है
( d ) A गलत है , किन्तु R सही है
उत्तर – d
241- अभिकथन (A) निर्वाण भी दुःख की स्थिति है।
तर्क (R) सर्वम् दुःखम् दुःखम्।
कूट
( a ) A और R दोनों सत्य हैं तथा R , A की सही व्याख्या है
( b ) A सत्य है और R असत्य है और R , A की सही व्याख्या है
( c ) A असत्य है और R सत्य है और R , A की व्याख्या नहीं है
( d ) A और R दोनों असत्य हैं और R , A की सही व्याख्या नहीं है
उत्तर – c

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