Monday, May 11, 2020

वैदिक एवं औपनिषदिक

प्रथम इकाई
वैदिक एवं औपनिषदिक दर्शन
1- भारतीय दर्शन का प्राचीनतम एवं आरम्भिक अंग किस काल को माना जाता है - वैदिककाल को
2- भारत का सम्पूर्ण दर्शन किससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है - वेद एवं उपनिषद से
3- दार्शनिक विचारों के स्रोत के रूप में किसे शामिल किया जाता है - वेद, आरण्यक एवं उपनिषद
4- ऋग्वेद के किस मण्डल को क्षेपक माना जाता है - प्रथम एवं दशम
5- किस वेद में अनुष्ठानों तथा कर्मकाण्डों में प्रयुक्त होने वाले स्लोकों तथा मन्त्रों का संग्रह है - यजुर्वेद
6- कौन-सा उपनिषद अध्यात्म चिन्तन की विचारधारा से सम्बन्धित है - ईशोंपनिषद
7- देवताओं की स्तुति में गाए जाने वाले मन्त्रों का संग्रह किस वेद में किया गया है - सामवेद
8- सामवेद के पुरोहित को क्या कहा जाता है - उद्गाता
9- किस वेद को उसके दार्शनिक स्वरूप के कारण ब्रह्मवेद की संज्ञा दी जाती है - अथर्ववेद
10- भारतीय दर्शन का प्रमुख स्रोत किसे माना जाता है - उपनिषद
11- कौन-सा उपनिषद ईश्वर को तज्जलन कहता है - छान्दोग्य
12- उपनिषदों में किस तत्व की प्रधानता सर्वाधिक है - आत्मज्ञान, मोक्षज्ञान एवं ब्रह्मज्ञान
13- उपनिषदों के अनुसार सभी वस्तुएं किस से प्रकाशित है - ब्रह्म से
14- किस उपनिषद में वर्णित है कि "सभी सांसारिक शक्तियाँ ब्रह्म की आंशिक अभिव्यक्ति है" - माण्डुक्य
15- उपनिषदों में जीव के कितने कोषों का वर्णन है - पाँच
16- मन ही परम सत्य है, का वर्णन उपनिषद के किस जीव कोष में किया गया है - मनोमय कोष में
17- 'प्रज्ञा ही ब्रह्म है' का वर्णन किस उपनिषद में किया गया है- ऐतरेय उपनिषद
18- ऋत क्या है - सृष्टि का नियम
19- किस देवता को नैतिकता अर्थात ऋत का स्वामी कहा गया है - वरुण
20- आचार्य यास्क ने ऋत का सम्बन्ध किसके साथ स्थापित किया है - जल के साथ
21- महर्षि अरविन्द ने ऋत का सम्बन्ध किसके साथ किया है - सत्य एवं सदाचार
22- कौन-सा सिद्धांत यह मानता कि कर्म का फल कभी नष्ट नहीं होता है एवं बिना किए हुये कर्म का फल प्राप्त नहीं होता है - कर्मवाद
23- वैदिक साहित्य के चार भाग है- संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद
24- कौन-सा यज्ञ अग्नि देवता की उपासना के साथ सम्पन्न होता है - अग्निहोत्र
25- रजसूय यज्ञ किसके लिए सम्पादित किया जाता है - राजा के राज्याभिषेक करने के लिए
26- राजा द्वारा अपने साम्राज्य के विस्तार हेतु कौन-सा यज्ञ किया जाता है - अश्वमेघ यज्ञ
27- अध्यात्म के सन्दर्भ में प्रकृतिक शक्तियों को कृतज्ञता प्रकट करने के लिए कौन-सा यज्ञ किया जाता है - देवयज्ञ
28- सृष्टि के सिद्धान्तों की जानकारी के लिए कौन-सा सूक्त महत्वपूर्ण है - पुरुषसूक्त और नासदीय सूक्त
29- वेदों में सामान्यतः किस देवता को जगत का उत्पत्तिकर्ता माना गया है - प्रजापति
30- आत्मा की उत्पत्ति को भारतीय दर्शन के अनुसार किससे सम्बन्धित माना गया है - उपनिषद से
31- किस उपनिषद में कहा गया है कि "आत्मा ही एकमात्र परमतत्व है, शेष सभी वस्तुएं नाममात्र की है" - छान्दोग्य उपनिषद
32- जीव तथा आत्मा को उपनिषद में क्या माना गया है - अज एवं नित्य
33- जीवात्मा की किस अवस्था को चेतन की प्रथम अवस्था कहा जाता है - जाग्रत
34- जीवात्मा की किस अवस्था में चेतन को तेजस कहा गया है - स्वप्नवस्था
35- उपनिषदों में किसे परमतत्व माना गया है - ब्रह्म को
36- परब्रह्म की कौन-सी शक्तियाँ होती है - निर्गुण एवं निर्विशेष
37- किस उपनिषद में ब्रह्म को मन एवं वाणी से परे बताया गया है - तैत्तिरीय उपनिषद
38- दक्षिणी भारत के किस सन्त ने उपनिषदों की व्याख्या में सगुण ब्रह्म पर बल दिया है - रामानुज
39- जीव के पाँच कोषों का सही क्रम है - अन्न, प्राण, मनस्, विज्ञान एवं आनन्द
40- किस दार्शनिक ने 'ऋत को विश्व की व्यवस्था, नैतिक व्यवस्था, एवं कर्मकाण्डीय व्यवस्था के रूप में स्वीकार किया है - डॉ राजबली पाण्डेय
41- वैदिक परम्परा में ईश्वर की सभी शक्तियों का स्रोत है - ऋत
42- यज्ञ किसके लाभ के लिए किया जाता है - यजमान के लाभ के लिए
43- वैदिक परम्परा में ऋत को किसके साथ पहचाना जाता है - सत्य और धर्म
44- वैदिक परम्परा के अनुसार खगोलीय पिण्डों की गति निर्देशित होती है - ऋत के अनुसार
45-महावाक्य 'तत्वमसि' किस उपनिषद से उद्धृत है - छन्दोग्य उपनिषद से
46- वैदिक परम्परा में पृथ्वी की संरचना किसके द्वारा नियंत्रित होती है - ऋत के द्वारा
47- वैदिक परम्परा में किस प्रकार के ऋण दे यज्ञ के अनुष्ठान के द्वारा उऋण हुआ जा सकता है - देव ऋण
48- वैदिक परम्परा में यज्ञ को किसके निर्देशन में सम्पन्न किया जाता है - ऋत्विक
49- नैतिक संदर्भ में किसके साथ ऋत की साम्यता सम्भव है - सत्य के साथ
50- उपनिषद में 'हिरण्यगर्भ' को किस रूप में जाना जाता है - प्रजापति के रूप में
51- कौन-सा सूक्त सृष्टि की प्रक्रिया को यज्ञ के रूप में स्वीकार करता है - पुरुष सूक्त
52- वैदिक परम्परा में दक्षिण का भाव संयुक्त हे - यज्ञ से
53- सुमेलित
उक्ति
उपनिषद
अहम् ब्रह्मास्मि (मैं ही ब्रह्म हूँ)
वृहदारण्यक उपनिषद
अयमात्मा ब्रह्म (यह आत्मा ही ब्रह्म है)
माण्डुक्य उपनिषद
तत्वमसि (वह तुम ही हो)
छान्दोग्य उपनिषद
प्रज्ञान ब्रह्म (प्रज्ञा ही ब्रह्म है)
ऐतरेय उपनिषद

54- सुमेलित
यज्ञ
सम्बन्ध
अग्निहोत्र
ग्रहस्थ जीवन से सम्बन्धित
राजसूय यज्ञ
राज्याभिषेक से सम्बन्धित
अश्वमेध यज्ञ
साम्राज्य विस्तार से सम्बन्धित
वाजपेय यज्ञ
राजा की शक्ति विस्तार से सम्बन्धित

55- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
जाग्रत अवस्था
प्रथम
स्वप्नवस्था
द्वितीय
सुषुप्तवस्था
तृतीय
तुरीयावस्था
चतुर्थ

56- सुमेलित
वेद
विधि
ऋग्वेद
देवताओं की स्तुति के मन्त्र
यजुर्वेद
तन्त्र-मन्त्र व यज्ञ रीति-विधि
सामवेद
संगीत
अथर्ववेद
लोक परम्पराएं

57- सुमेलित
जीव अवस्था
नाम
जाग्रत
वैश्वानर
स्वप्न
तेजस
सुषुप्त
प्रज्ञा
तुरीय
शुद्ध चैतन्य

58- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
वेद
ईश्वर की वाणी
ऋग्वेद
स्तुतिपरक
आनन्दमय कोष
आत्मा का सार
मैं ही ब्रह्म हूँ
वृहदारण्यक उपनिषद

59- सुमेलित
वेद
सम्बन्धित उपनिषद
ऋग्वेद
कौशीतिकी
यजुर्वेद
ईशोंपनिषद
सामवेद
छान्दोग्य
अथर्ववेद
मुण्डक

60- सुमेलित
वेद
ब्रह्मण ग्रन्थ
ऋग्वेद
ऐतरेय
यजुर्वेद
शतपथ
सामवेद
जैमिनीय
अथर्ववेद
गोपथ

61- सुमेलित
ऋग्वेद में मण्डल
रचयिता
द्वितीय
गृत्समद
तृतीय
विश्वामित्र
चतुर्थ
वामदेव
पंचम
अत्रि
62- सुमेलित
कथन
सम्बन्धित कोष
यह हमारे स्थूल शरीर अन्न पर आश्रित होता है। अन्न ही परम सत्य है।
अन्नमय कोष
यह शरीर में गति देने वाली प्राणशक्तियों से बना है। प्राण ही परम सत्य है।
प्राणमय कोष
यह बुद्धि पर निर्भर करता है इसमें ज्ञाता व ज्ञेय का भेद करने वाला ज्ञान समाहित है।
विज्ञानमय कोष
यह मन पर निर्भर करता है। मन ही परम सत्य है।
मनोमय कोष

63- सुमेलित
सूची 1
सूची 2
ऋक्
होता
साम
उद्गाता
यजुः
अध्वर्यु
अथर्व
ब्रह्मा
64- आत्मा के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन सही है –
a) आत्मा का अर्थ आन्तरिक सत्ता होता है
b) उपनिषदों में आत्मा को परमतत्व माना गया है
c) आत्मा मूलतः चैतन्य है
d) उपरोक्त सभी
उत्तर – d
65- जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति तथा तुरियावस्था है –
a) ब्रह्म की
b) जीव की
c) ईश्वर की
d) आत्मा की
उत्तर – b
66- माण्डुक्य उपनिषद के अनुसार विश्व, तेजस एवं प्रज्ञा स्थितियों के अनुरूप है –
a) स्वप्न, जाग्रत, सुषुप्त
b) सुषुप्त, जाग्रत, स्वप्न
c) जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्त
d) सुषुप्त, स्वप्न, जाग्रत
उत्तर – c
67- जीव के पाँच कोषों का सही क्रम है –
a) अन्न, मनस्, प्राण, विज्ञान, आनन्द
b) मनस्, प्राण, अन्न, विज्ञान, आनन्द
c) आनन्द, मनस्, प्राण, विज्ञान, अन्न
d) अन्न, प्राण, मनस्, विज्ञान, आनन्द
उत्तर – d
68- निमलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है –
a) स्वामी दयानन्द सरस्वती ने भी मुख्य रूप से ऋत को सत्य के अर्थ में स्वीकार किया है ।
b) कर्मवाद के अनुसार कर्म का फल कभी नष्ट नहीं होता है।
c) वाजपेय यज्ञ राज्य विस्तार हेतु किया जाता है।
d) कर्मकाण्ड मुख्य रूप से यज्ञ से सम्बन्धित है।
उत्तर – c
69- निम्नलिखित में से कौन-सा एक युग्म सुमेलित नहीं है –
a) जाग्रत अवस्था – प्रथम
b) स्वप्नवस्था – द्वितीय
c) सुषुप्तावस्था – तृतीय
d) तुरियावस्था – पंचम
उत्तर – d
70- निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है –
a) जाग्रत अवस्था – चेतन की प्रथम अवस्था
b) स्वप्न अवस्था – चेतन की दूसरी अवस्था
c) सुषुप्त अवस्था – चेतन की तृतीय अवस्था
d) सक्रिय अवस्था – चेतन की चतुर्थ अवस्था
उत्तर – d
71- उपनिषदों के अनुसार सही क्रम है –
a) निधिध्यासन, मनन, श्रवण
b) मनन, श्रवण, निधिध्यासन
c) श्रवण, मनन, निधिध्यासन
d) श्रवण, निधिध्यासन, मनन
उत्तर – c
72- औपनिषदिक आत्मा की अवस्थाओं का सही क्रम है –
a) सुषुप्त, स्वप्न, जाग्रत, तुरीया
b) जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्त, तुरीया
c) जाग्रत, सुषुप्त, स्वप्न, तुरीया
d) तुरीया, स्वप्न, सुषुप्त, जाग्रत
उत्तर – b
73- निम्नलिखित में से सही क्रम का चयन करे –
a) ब्राह्मण, संहिता, आरण्यक, उपनिषद
b) उपनिषद, संहिता, आरण्यक, ब्राह्मण
c) संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद
d) संहिता, उपनिषद, ब्राह्मण, आरण्यक
उत्तर – c
74- निम्न में सत्य कथन है –
1.उपनिषद में ब्रह्म को अचल कहा गया है।
2.ब्रह्म सभी प्रकार की सीमाओं से शून्य है।
3.रामानुज ने अपनी व्याख्या में निर्गुण ब्रह्म पर बल दिया है।
कूट
a) 1 और 3
b) 1 और 2
c) 1, 2 और 3
d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – b
75- दिए गए निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सत्य है –
1. भारतीय दर्शन का आरम्भिक अंग वैदिककाल को माना जाता है।
2. विज्ञानमय कोष में ज्ञाता एवं ज्ञेय का भेद करने वाला ज्ञान समाहित है।
3. आचार्य यास्क ने ऋत को जल के पर्याय के रूप में माना है।
कूट
a) 1 और 2
b) केवल 2
c) 2 और 3
d) 1, 2 और 3
उत्तर – d
76- दिए गए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सृष्टि के सिद्धांत की जानकारी के लिए पुरुष सूक्त महत्वपूर्ण है।
2. गौतम बुद्ध ने माना कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में बुद्ध या बोधिसत्व होने की क्षमता रखता है।
3. जाग्रत अवस्था जीवात्मा की द्वितीय अवस्था है।
4. उपनिषदों में जीव एवं आत्मा के स्वरूप पर प्रकाश डाला गया है।
कूट
a) 1 और 2
b) 2 और 3
c) 1, 2 और 4
d) 1, 2, 3, और 4
उत्तर – c
*निर्देश - निम्नलिखित कथन एवं कारणों को ध्यानपूर्वक पढ़कर कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए
कूट
(a) A और R दोनों सही है तथा R,A की सही व्याख्या है।
(b) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R,A की सही व्याख्या नहीं है।
(c) A सही है, किन्तु R गलत है।
(d) A गलत है, किन्तु R सही है।
77- कथन (A) भारत का सम्पूर्ण दर्शन वेद एवं उपनिषद् की विचारधाराओं से प्रभावित है।
कारण (R) दार्शनिक विचारों के स्रोत आरण्यक, उपनिषद्, वेद तथा टीकाएँ हैं।
उत्तर – b
78- कथन (A) यजुर्वेद में अनुष्ठानों तथा कर्मकाण्डों में प्रयुक्त होने वाले श्लोकों तथा मन्त्रों का संग्रह है।
कारण (R) प्राणमय कोष शरीर में गति देने वाली प्राणशक्तियों से बना है।
उत्तर – b
79- कथन (A) यह आत्मा ही ब्रह्म है, का वर्णन वृहदारण्यक उपनिषद् में किया गया है।
कारण (R) ऋत को सर्वोच्च प्राकृतिक नियम की संज्ञा दी जाती है।
उत्तर – d
80- कथन (A) प्रजापति ने आत्मा को शारीरिक, आनुभविक, विश्वातीत एवं निरपेक्ष बताया है।
कारण (R) स्वप्नावस्था में ज्ञान का विषय आन्तरिक होता है।
उत्तर – b
81- कथन (A) तुरीयावस्था आत्मचेतना की अवस्था है।
कारण (R) इस अवस्था में आत्मा जीवात्मा कहलाती है।
उत्तर – a

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