Monday, April 27, 2020

रेखीय प्रसार गुणांक का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी पदार्थ की एकांक लम्बाई की छड का ताप 1°C बढ़ाने पर छड की लम्बाई मे होने वाली वृद्धि को उस पदार्थ का रेखीय प्रसार गुणांक अथवा दैर्ध्य प्रसार गुणां अल्फा कहते है। इसका मात्रक प्रति°C है।
माना किसी वस्तु की प्रारम्भिक लम्बाई l है, यदि ΔT ताप परिवर्तन करने से इसकी लम्बाई में Δl वृद्धि हो जाती है तो,
रेखाय प्रसार गुणांक = लम्बाई में वृद्धि / मूल लम्बाई × ताप वृद्धि
अर्थात           αl/lΔT
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Sunday, April 26, 2020

प्लांक नियतांक का विमीय सूत्र

परिभाषा
प्लांक के अनुसार विकिरण का उत्सर्जन अथवा अवशोषण सतत न होकर निश्चित ऊर्जा के बंडलों या पेकिटो के रूप में होता है। जिसे फोटोन कहते है।
प्रत्येक फोटोन में निश्चित संवगे निहित होता है, जिसका मान विकिरण की आवृति के समानुपती होता है। यदि विकिरण की आवृति v है तो प्रत्येक फोटोन से सम्बन्धित ऊर्जा E=hv तथा संवेग P=hv/c
जहाँ
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वीन नियतांक का विमीय सूत्र

परिभाषा
वीन विस्थापन नियम के अनुसार, किसी कृष्णिका से उत्सर्जित विकिरण की अधिकतम तरंगधैर्ध्य 𝜆max कृष्णिका के परम ताप T के व्युत्क्रमनुपाती होती है। अर्थात
या
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स्टीफन नियतांक का विमीय सूत्र

परिभाषा
स्टीफन के विकिरण सम्बन्धी नियम से इकाई समय में सभी तरंगदैर्घ्य परास में कृष्णिका द्वारा प्रति इकाई पृष्ठिय क्षेत्रफल द्वारा विकरित कुल ऊर्जा j कृष्णिका के ऊष्मगतिकीय ताप T के चतुर्थ घात के अनुक्रमानुपाती होता है। अतः
या
अनुक्रमानुपाती नियतांक σ को स्टीफन स्थिरांक अथवा स्टीफन नियतांक कहा जाता है जिसे अन्य ज्ञात मूलभूत भौतिक नियतांकों से व्युत्पन किया जाता है। इसका अंकिक मान निम्न होता है-
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ऊष्मा चालकता गुणांक का विमीय सूत्र

परिभाषा
भौतिकी में, ऊष्मा चालकता पदार्थों का वह गुण है जो दिखाती है कि पदार्थ से होकर ऊष्मा आसानी से प्रवाहित हो सकती है या नहीं। ऊष्मा चालकता को k, λ, या κ से निरूपित करते हैं।
जिन पदार्थों की ऊष्मा चालकता अधिक होती है उनसे होकर समान समय में अधिक ऊष्मा प्रवाहित होती है तथा जिन पदार्थों की ऊष्मा चालकता बहुत कम होती हैं उन्हें ऊष्मा का कुचालक कहा जाता है।
ऊष्मा चालकता गुणांक का मात्रक जूल/मीटर-सेकण्ड-कैल्विन होता है।
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Saturday, April 25, 2020

अक्षर

अक्षर - क्षर धातु से अच् प्रत्यय करने पर क्षर शब्द बनता है। निषेधार्थक नञ् से संयुक्त होकर यह शब्द अक्षर कहलाता है।
‘न क्षरमिति अक्षरम्’ अर्थात् जो अपने स्वरूप से विचलित नहीं होता, उसे अक्षर कहते हैं। यह वर्ण के अर्थ में भी प्रयुक्त होता है। ‘अक्षर वर्ण निर्माणं वर्णमप्यक्षर विदुः’ ( वाच स्पत्यम् )। 
बृहदारण्यक उपनिषद् ( ३ . ८ . ६ ) में कहा गया है — एतस्य अक्षरस्य प्रशासने मागि द्यावापृथिव्यो विधतेतिष्ठतः। आशय यह है कि इस अक्षर के प्रशासन में सूर्य और चन्द्रमा अपने-अपने पक्ष में स्थित रहते हैं। यहां पर यह शब्द परमात्मा के अर्थ में प्रयुक्त किया गया है।
मुण्डकोपनिषद् ( १ . १ . ७ ) में इस अक्षर के द्वारा ही जगत की रचना का वर्णन है — ‘यथोर्णनाभिः सृजते गृह्यते च, यथापृथिव्यामोषधयः सम्भवन्ति। यथासतः पुरुषात्केशलोमानि, तथाक्षरात्सम्भवतीह विश्वम्। अर्थात् मकड़ी जैसे अपने शरीर के भीतर विद्यमान जाले को बाहर निकाल कर बुनती है और फिर निगल लेती है, पथ्वी जैसे विभिन्न प्रकार की औषधियां उत्पन्न करती है, मनुष्य से जैसे केश और लोम प्रकट होते हैं, वैसे ही इस अक्षर से विश्व प्रकट होता है।
वेदान्त दर्शन में भी अक्षर शब्द को इसी रूप में ग्रहण किया गया है- अक्षरनम्बरान्तधतेः ( ब्र०सू० , १. ३. १० ) आशय यह है कि अक्षर परमात्मा ही है। यह आकाश पर्यन्त समस्त पदार्थों को धारण किये हुए है। वाक्यपदीयकार ने इस ग्रन्थ के प्रथम श्लोक में ही अक्षर के द्वारा सम्पूर्ण सृष्टि की संरचना की बात कही है-
अनादि निधनं ब्रह्म शब्दतत्वं यदक्षरम् ।
विवर्ततेऽर्थ भावेन प्रक्रिया जगतोयतः ॥ ( वा०प० , १ . १ )
श्रीमदभगवद्गीता में अक्षर रूप ब्रह्म से ही परम गति की प्राप्ति का उपाय बताया गया है-
ॐ इत्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् ।
यः प्रयाति त्यजन्देहं सयाति परमां गतिम् ॥ ( गी० , ८ . १३ )
अर्थात् जो पुरुष ॐ ऐसे उस एक अक्षर रूप ब्रह्म को उच्चारण करता हुआ और उसके अर्थ स्वरूप मेरे को (श्रीकृष्ण का) चिन्तन करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है, वह पुरुष परमगति को प्राप्त होता है।

अंकन

अंकन - ईश्वर सेवा का भेद।
पूर्णप्रज्ञ दर्शन के अनुसार जब ईश्वर के रूप के स्मरण के लिए उनके आयुध ( अस्त्र-शस्त्र ) आदि का चिह्न शरीर के किसी भाग पर अंकित कर दिया जाता है, तब उसे अंकन कहते हैं (सर्व० सं० , पृ० २६३)।

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...