Monday, May 4, 2020

नये सम्बन्धों की स्थापना करना

नये सम्बन्धों की स्थापना करना

नये सम्बन्धों की स्थापना करना

      यदि किसी भौतिक राशि की अन्य राशियों पर निर्भरता ज्ञात हो और यदि निर्भरता गुणनफल प्रकार की हो, तो विमीय विश्लेषण का उपयोग करके, राशियों के मध्य सम्बन्ध स्थापित किया जा सकता है ।
उदाहरण:

1- सरल लोलक का आवर्तकाल का सूत्र ज्ञात करना-

2- स्टोक का नियम सूत्र स्थापित करना- 

दिये गये भौतिक सम्बंध की विमीय रूप से सत्यता की जाँच करना

दिये गये भौतिक सम्बंध की विमीय रूप से सत्यता की जाँच करना

दिये गये भौतिक सम्बंध की विमीय रूप से सत्यता की जाँच करना

          यह " विमीय ऐक्यता के सिद्धांत ” पर आधारित है । इस सिद्धांत के अनुसार समीकरण के दोनों ओर के प्रत्येक पदों की विमायें अवश्य समान होनी चाहिए ।
यदि दोनों ओर के प्रत्येक पद की विमायें समान हैं तो समीकरण विमीय रूप से शुद्ध होगा अन्यथा नहीं । विमीय रूप से शुद्ध समीकरण आंकिक रूप से शुद्ध हो सकता है और नहीं भी ।
उदाहरण :

1- अभिकेन्द्र बल के सूत्र की जाँच करना- 

2- गति के द्वितीय समीकरण की जाँच करना- 

किसी भौतिक राशि को एक पद्धति से अन्य पद्धति में बदलना

किसी भौतिक राशि को एक पद्धति से अन्य पद्धति में बदलना

किसी भी भौतिक राशि की माप P = nu नियत होती है । इसी आधार पर हम किसी भी भौतिक राशि को एक मात्रक पद्धति से दूसरे मात्रक पद्धति में बदल सकते है।
उद्धहरण -

1- न्यूटन का डाइन में रूपान्तरण-

2- गुरुत्वाकर्षण नियतांक G को CGS से MKS पद्धति में बदलना-

भौतिक नियतांक अथवा गुणांक की विमायें ज्ञात करना


भौतिक नियतांक अथवा गुणांक की विमायें ज्ञात करना


चूंकि किसी भौतिक राशि की विमायें अद्वितीय होती हैं । अतः हमें सर्वप्रथम ऐसा सूत्र अथवा व्यंजक लिखना चाहिए जिसमें वह नियतांक प्रयुक्त होता हो जिसकी विमा ज्ञात करनी है । तत्पश्चात् उस सूत्र में शेष सभी राशियों की विमाओं को प्रतिस्थापित करके, अज्ञात नियतांक की विमा प्राप्त की जा सकती है । जैसे-

1-गुरुत्वाकर्षण नियतांक

2- प्लांक नियतांक

3- श्यानता गुणांक

विमीय विश्लेषण के अनुप्रयोग Applications of Dimensional Analysis

किसी भौतिक राशि का दी हुई मात्रक पद्धति में मात्रक ज्ञात करना

किसी भौतिक राशि का सूत्र अथवा परिभाषा लिखने के लिये हम इसकी विमायें ज्ञात करते हैं । विमीय सूत्र में M , L तथा T के स्थान पर आवश्यक पद्धति के मूलभूत मात्रक रखकर उस पद्धति में हम भौतिक राशि का मात्रक ज्ञात कर लेते हैं । फिर भी कभी-कभी इस मात्रक के लिए हम एक विशिष्ट नाम दे देते हैं ।
उदाहरण के लिए , कार्य = बल × विस्थापन, अतः



चालकता का विमीय सूत्र

परिभाषा
किसी पदार्थ से बने किसी 'चालक' के दो सिरों के बीच विभवान्तर आरोपित किया जाता है तो इसमें आवेश प्रवाहित होने लगते हैं जिसे विद्युत धारा कहते हैं। आंकिक रूप से धारा घनत्व J तथा विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E के अनुपात को चालकता कहते हैं। इसे σ से प्रदर्शित करते है। अर्थात σ =  J/E .  इसका मात्रक म्हो/मीटर होता है।
विमीय-सूत्र ज्ञात करना 

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