Monday, May 4, 2020

सार्थक अंक Significant Figures


किसी भौतिक राशि के मापन में सार्थक अंक उन अंकों की संख्या को दर्शाते है जिनसे हम गणना में पूर्ण आश्वस्त होते है। मापन की क्रिया में अधिक सार्थक अंकों का प्राप्त होना शुद्धता का परिचायक होता है।
किसी दी गई राशि के मापन में सार्थक अंकों की संख्या ज्ञात करते समय कुछ नियमों का पालन किया जाता है, जो कि निम्न प्रकार है-
  1. गणना में सभी अशून्य अंक सार्थक होते है। 
  2. दो अशून्य अंकों के बीच आने वाला शून्य अंक सार्थक होता है। 
  3. संख्या के बायीं ओर के शून्य कभी सार्थक नहीं होते। 
  4. संख्या के दायीं ओर के शून्य सार्थक अंक होते है। 
  5. चरघातांकी निरूपण में दी गई संख्या का अंकिक भाग ही सार्थक अंक होता है।  

विमीय विश्लेषण की सीमायें Limitations of Dimensional Analysis

यद्यपि विमीय विश्लेषण बहुत उपयोगी है लेकिन इसकी भी कुछ सीमायें हैं-
1- यदि किसी भौतिक राशि की विमायें दी हैं, तो वह राशि अद्वितीय नहीं हो सकती क्योंकि कई भौतिक राशियों की विमायें समान होती हैं। उदाहरण के लिए,
2- आंकिक नियतांक [ K ] जैसे ( 1 / 2 ), 1 अथवा 2π आदि की कोई विमायें नहीं होती अतः इन्हें विमीय विश्लेषण विधि द्वारा ज्ञात नहीं किया जा सकता ।
3- विमीय विधि का प्रयोग गुणनफल से प्राप्त होने वाले अन्य फलनों के अतिरिक्त फलनों को व्युत्पन्न करने के लिये नहीं किया जा सकता है । जैसे –
4- यदि यांत्रिकी में कोई भौतिक राशि तीन से अधिक राशियों पर निर्भर करती है तो विमीय विश्लेषण की विधि से सूत्र को व्युत्पन्न नहीं किया जा सकता क्योंकि इस स्थिति में बनने वाले समीकरणों की संख्या (=3) अज्ञात चरों (> 3) की तुलना में कम होती है । फिर भी हम दिये गये समीकरण की सत्यता की जाँच कर सकते हैं । उदाहरण के लिए,
5- यदि कोई भौतिक राशि तीन भौतिक राशियों पर निर्भर करती है, और उनमें से दो की विमायें समान हों तो विमीय विश्लेषण विधि से इसके लिए सूत्र व्युत्पन्न नहीं किया जा सकता।
उदाहरण के लिए,

नये सम्बन्धों की स्थापना करना

नये सम्बन्धों की स्थापना करना

नये सम्बन्धों की स्थापना करना

      यदि किसी भौतिक राशि की अन्य राशियों पर निर्भरता ज्ञात हो और यदि निर्भरता गुणनफल प्रकार की हो, तो विमीय विश्लेषण का उपयोग करके, राशियों के मध्य सम्बन्ध स्थापित किया जा सकता है ।
उदाहरण:

1- सरल लोलक का आवर्तकाल का सूत्र ज्ञात करना-

2- स्टोक का नियम सूत्र स्थापित करना- 

दिये गये भौतिक सम्बंध की विमीय रूप से सत्यता की जाँच करना

दिये गये भौतिक सम्बंध की विमीय रूप से सत्यता की जाँच करना

दिये गये भौतिक सम्बंध की विमीय रूप से सत्यता की जाँच करना

          यह " विमीय ऐक्यता के सिद्धांत ” पर आधारित है । इस सिद्धांत के अनुसार समीकरण के दोनों ओर के प्रत्येक पदों की विमायें अवश्य समान होनी चाहिए ।
यदि दोनों ओर के प्रत्येक पद की विमायें समान हैं तो समीकरण विमीय रूप से शुद्ध होगा अन्यथा नहीं । विमीय रूप से शुद्ध समीकरण आंकिक रूप से शुद्ध हो सकता है और नहीं भी ।
उदाहरण :

1- अभिकेन्द्र बल के सूत्र की जाँच करना- 

2- गति के द्वितीय समीकरण की जाँच करना- 

किसी भौतिक राशि को एक पद्धति से अन्य पद्धति में बदलना

किसी भौतिक राशि को एक पद्धति से अन्य पद्धति में बदलना

किसी भी भौतिक राशि की माप P = nu नियत होती है । इसी आधार पर हम किसी भी भौतिक राशि को एक मात्रक पद्धति से दूसरे मात्रक पद्धति में बदल सकते है।
उद्धहरण -

1- न्यूटन का डाइन में रूपान्तरण-

2- गुरुत्वाकर्षण नियतांक G को CGS से MKS पद्धति में बदलना-

भौतिक नियतांक अथवा गुणांक की विमायें ज्ञात करना


भौतिक नियतांक अथवा गुणांक की विमायें ज्ञात करना


चूंकि किसी भौतिक राशि की विमायें अद्वितीय होती हैं । अतः हमें सर्वप्रथम ऐसा सूत्र अथवा व्यंजक लिखना चाहिए जिसमें वह नियतांक प्रयुक्त होता हो जिसकी विमा ज्ञात करनी है । तत्पश्चात् उस सूत्र में शेष सभी राशियों की विमाओं को प्रतिस्थापित करके, अज्ञात नियतांक की विमा प्राप्त की जा सकती है । जैसे-

1-गुरुत्वाकर्षण नियतांक

2- प्लांक नियतांक

3- श्यानता गुणांक

विमीय विश्लेषण के अनुप्रयोग Applications of Dimensional Analysis

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