शिक्षार्थी केन्द्रित विधियों के अन्तर्गत शिक्षार्थी का केन्द्रीय स्थान होता है। इसमें विद्यार्थीयों के मनोविज्ञान को समझते हुए शिक्षण की व्यवस्था की जाती है और उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाता है। इस विधि का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थीयों की अभिरुचि, अभिवृत्ति और क्षमताओं को ध्यान में रखकर शिक्षा प्रदान करना है। इस विधि के द्वारा छात्रों में स्वतन्त्र चिन्तन धार और मनन को जन्म दिया जाता है। शिक्षार्थी केन्द्रित शिक्षण विधि में व्यक्तिगत शिक्षण को महत्व दिया जाता है। इस विधि में शिक्षक का मुख्य ध्यान शिक्षार्थियों की कल्पनाओं, जिज्ञासाओं एवं कठिनाइयों को सुलझाने के प्रति होता है। इस शिक्षण विधि के समर्थक शिक्षा मनोवैज्ञानिक ‘जॉन डीवी’ है।
शिक्षार्थी केन्द्रित विधियों का वर्गीकरण 9 प्रकार से किया जाता है, जो निम्न प्रकार से है-
1- कार्यक्रम अनुदेश विधि
2- सुपुर्द नियत अधिन्यास कार्य विधि
3- कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि
4- परस्पर संवादी वीडियो विधि
5- मुक्त अधिगम विधि
6- निरीक्षण विधि
7- खेल शिक्षण विधि
8- अन्वेषण विधि
9- प्रयोगशाला विधि
कार्यक्रम अनुदेश विधि
कार्यक्रम अनुदेश विधि शिक्षण की उच्च स्तर पर संचरित पद्धति का एक सामान्य उदाहरण है। यह तार्किक क्रम पर आधारित शिक्षण विधि है, जिसमें छात्र प्रत्येक चरण के पश्चात तुरन्त प्रतिपुष्टी अर्थात फीडबैक प्राप्त करने में सक्षम होता है।
सुपुर्द नियत अधिन्यास कार्य विधि
इस विधि का उपयोग विशेष प्रयोजन की पूर्ति हेतु किया जाता है। इस विधि के अन्तर्गत विद्यार्थीयों की सुविधा के लिए सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को अनेक खण्डों में विभाजित कर दिया जाता है। इस विधि के माध्यम से छात्रों का सर्वेक्षण करना, संख्यात्मक समस्याओं का समाधान करना, अतिरिक्त जानकारी एकत्रित करना, जैसे अनेक कार्यों का सम्पादन किया जाता है।
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण प्रणाली का उद्देश्य कम्प्यूटर के माध्यम से शिक्षा पद्धति को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना है। इस विधि के द्वारा सूचना प्रवाह को गत्यात्मक रूप दिया जाता है और शिक्षण प्रणाली को अधिक वैज्ञानितपूर्वक करने पर बल दिया जाता है।
परस्पर संवादी वीडियो विधि
परस्पर संवादी वीडियो विधि शिक्षण विधि में शिक्षार्थी को किसी विषय से सम्बन्धित जानकारी, क्रमरहित ढंग से आसानी से प्राप्त हो जाती है। यह विधि छात्र को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर कई विषयों, मुद्दों या समस्याओं की जानकारी और उनके संशोधात्मक उपाय सरलता से आपूर्ति करने में सक्षम है। इस विधि में शिक्षार्थी अपने परिणामों की प्रतिपुष्टी अर्थात फीडबैक तत्काल प्राप्त कर सकते है
मुक्त अधिगम विधि
मुक्त अधिगम विधि शिक्षण की एक सरल, लचीली और प्रभावी विधि है। इस विधि के अन्तर्गत विद्यार्थी को सीखने के लिए मानवीय संसाधन, सामग्री, उपकरण व आवास की आवश्यकता न्यूनतम स्तर पर होती है या नहीं होती है। इस शिक्षण विधि में विद्यार्थी पर शिक्षण में प्रवेश के लिए किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं होता है।
निरीक्षण विधि
शिक्षार्थी केन्द्रित निरीक्षण विधि में विषय के सभी पहलुओं के अध्ययन पर बल दिया जाता है। यह विधि शिक्षण की एक रोचकपूर्ण पद्धति है, जो विद्यार्थीयों की पूर्ण सक्रियता को सुनिश्चित करती है। यह विधि कला और विज्ञान संकाय दोनों ही विषयों में लोकप्रिय है, किन्तु विज्ञान में इसका प्रचलन सर्वाधिक लोकप्रिय है।
खेल शिक्षण विधि
शिक्षण में खेलों को सर्वाधिक महत्व ‘फ्रॉबेल’ ने दिया और खेल विधि की दार्शनिक व्याख्या भी दी। इस विधि के जनक ब्रिटेन के गणितज्ञ ‘कोल्ड़वेल कुक’ थे, इन्होंने ही सर्वप्रथम गणित विषय में खेल विधि का उपयोग किया था। यह विधि सभी आयु के विद्यार्थीयों के लिए उपयोगी है।
अन्वेषण विधि
अन्वेषण विधि को अनुमानी विधि भी कहा जाता है। इस विधि में शिक्षार्थी बिना सहायता प्राप्त किए अपनी समस्या का समाधान ढूंढते है। शिक्षण की यह विधि प्रतिभागियों को सक्रिय रखती है और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करती है। इस विधि के जनक ‘एच ई आर्मस्ट्रांग’ को माना जाता है।
प्रयोगशाला विधि
यह विधि खोज के सिद्धान्त पर आधारित है, जिसके द्वारा किसी परिमाण पर पहुँचने के लिए खोज द्वारा तथ्यों का उल्लेख होता है। इस विधि में छात्र प्रयोगशाला में प्रयोग द्वारा स्वयं ही निष्कर्ष निकालकर अवधारणा विकसित करते है। यह विधि आगमन विधि का ही वृहत एवं विकसित प्रयोगात्मक स्वरूप है।
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