इस विधि का उपयोग विशेष प्रयोजन की पूर्ति हेतु किया जाता है। इस विधि के अन्तर्गत विद्यार्थीयों की सुविधा के लिए सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को अनेक खण्डों में विभाजित कर दिया जाता है। इस विधि के माध्यम से छात्रों का सर्वेक्षण करना, संख्यात्मक समस्याओं का समाधान करना, अतिरिक्त जानकारी एकत्रित करना, जैसे अनेक कार्यों का सम्पादन किया जाता है।
सुपुर्द नियत अधिन्यास कार्य विधि के गुण
- इस शिक्षण विधि में शिक्षार्थियों को स्वतन्त्र रूप से कार्य करने का अवसर प्राप्त होता है।
- यह विधि विद्यार्थीयों के समस्या समाधान क्षमता और विश्लेषणात्मक क्षमता को बढ़ाने में सक्षम है।
- इस विधि से छात्रों में रचनात्मक क्षमता का विकास होता है।
- इस विधि से विद्यार्थीयों में स्वाध्याय के प्रति रुचि का विकास होता है और उत्तरदायित्व की भावना प्रबल होती है।
- यह विधि छात्रों में प्रयोगात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है।
- इस शिक्षण विधि में शिक्षार्थियों के मध्य पाठ्य-सामग्री के अनुकृति अर्थात कॉपी की सम्भावना प्रबल होती है और नकल करने की प्रवृत्ति का विकास होता है।
- यह विधि छोटी कक्षाओं के लिए उपयुक्त नहीं है।
- इस विधि में शिक्षक पर अतिरिक्त कार्यभार की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
No comments:
Post a Comment