Sunday, October 13, 2019

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि Lecture Demonstration Method

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि
भारतीय शिक्षा के अनुरूप यह सर्वाधिक उपयुक्त, व्यवहारिक एवं उपयोगी विधि है। यह विधि किसी भी वस्तु की रचना व कार्यप्रणाली का वास्तविक रूप में ज्ञान करती है। किसी घटना, परिस्थिति, वस्तु आदि को दृश्यरूप में विद्यार्थी के समक्ष प्रदर्शित कर उसे स्पष्ट करना ही इस विधि का ध्येय होता है।
व्याख्यान-प्रदर्शन विधि के गुण
यह मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित शिक्षण विधि है।
यह समय व धन की दृष्टि से कम खर्चीली है।
इस विधि सफलता यह है कि कोई वस्तु सुनने की अपेक्षा देखने से ज्यादा समय तक याद रहती है।
इस विधि में विद्यार्थी वैज्ञानिक विधि व वैज्ञानिक सत्यता की ओर प्रेरित होता है।
व्याख्यान-प्रदर्शन विधि के दोष
इस विधि में ‘करके सीखने’ के सिद्धान्त की अवहेलना की जाती है।
इसमें विद्यार्थी केवल रुचिकर प्रदर्शन में ही सक्रिय रहता है।
इसमें शिक्षक ही सभी कार्य करते है, अतः यह शिक्षक केन्द्रित विधि है।
इसमें व्यक्तिगत भिन्नता के सिद्धान्त की अवहेलना की जाती है एवं सभी स्तर के विद्यार्थी एक ही गति से विकास करते है।
प्रदर्शन पूर्व तैयारी न होने से या फिर उपकरण खराब होने से शिक्षण कार्य रुक जाता है।
शिक्षक द्वारा कठिन भाषा का प्रयोग किए जान, इस विधि को कमजोर बना देता है।
इस विधि में प्रमुख तथ्यों के स्थान पर आंशिक तथ्यों पर अधिक बल दिया जाता है।

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