Thursday, October 31, 2019

खेल शिक्षण विधि Game Teaching Method

खेल शिक्षण विधि 
शिक्षण में खेलों को सर्वाधिक महत्व ‘फ्रॉबेल’ ने दिया और खेल विधि की दार्शनिक व्याख्या भी दी। इस विधि के जनक ब्रिटेन के गणितज्ञ ‘कोल्ड़वेल कुक’ थे, इन्होंने ही सर्वप्रथम गणित विषय में खेल विधि का उपयोग किया था। यह विधि सभी आयु के विद्यार्थीयों के लिए उपयोगी है।
खेल शिक्षण विधि के गुण
  • खेल शिक्षण विधि द्वारा छात्रों में सृजनात्मक कौशलों के साथ-साथ जीवन कौशलों जैसे- समस्या का समाधान करना, तर्क-पूर्ण ढंग से सोचना, सम्प्रेषण शक्ति, टीम भावना आदि का विकास होता है। 
  • इस विधि में छात्रों में स्फूर्ति के साथ-साथ शारीरिक विकास भी होता है। 
  • यह विधि शारीरिक, संज्ञानात्मक, भावनात्मक, अधिगम रोचकता, सहजता और ऊर्जा देने वाली होती है। 
खेल शिक्षण विधि के दोष
  • इस विधि से बच्चों में खेल की भावना अधिक विकसित होती है, किन्तु उसमें सीखने की दिलचस्पी कम हो जाती है। 
  • इसे पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक स्तर पर अनुपयोगी समझा जाता है। 

निरीक्षण विधि Observation Method


निरीक्षण विधि 
शिक्षार्थी केन्द्रित निरीक्षण विधि में विषय के सभी पहलुओं के अध्ययन पर बल दिया जाता है। यह विधि शिक्षण की एक रोचकपूर्ण पद्धति है, जो विद्यार्थीयों की पूर्ण सक्रियता को सुनिश्चित करती है। यह विधि कला और विज्ञान संकाय दोनों ही विषयों में लोकप्रिय है, किन्तु विज्ञान में इसका प्रचलन सर्वाधिक लोकप्रिय है।
निरीक्षण विधि के गुण
  • शिक्षण की यह विधि विद्यार्थीयों में स्वाध्याय की प्रवृत्ति का संचार करती है। 
  • इसमें विद्यार्थी को अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार अध्ययन करने के अवसरों की प्राप्ति होती है। 
  • इसके माध्यम से शिक्षक और शिक्षार्थियों के मध्य सहभागिता के उच्च स्तर स्थापित होते है। 
निरीक्षण विधि के दोष
  • निरीक्षण विधि को छोटी कक्षाओं के बच्चों के लिए प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है। 
  • इस विधि में सीखने के लिए अधिक समय और संसाधन की आवश्यकता होती है। 
  • शिक्षण की इस विधि के द्वारा मानविकी के कुछ विषयों जैसे- राजनीति विज्ञान या नगरिकशास्त्र से सम्पूर्ण पाठ्यक्रम की शिक्षा देना सम्भव नहीं है। 

निरीक्षण विधि Observation Method

Wednesday, October 30, 2019

मुक्त अधिगम विधि Open Learning Method

मुक्त अधिगम विधि 
मुक्त अधिगम विधि शिक्षण की एक सरल, लचीली और प्रभावी विधि है। इस विधि के अन्तर्गत विद्यार्थी को सीखने के लिए मानवीय संसाधन, सामग्री, उपकरण व आवास की आवश्यकता न्यूनतम स्तर पर होती है या नहीं होती है। इस शिक्षण विधि में विद्यार्थी पर शिक्षण में प्रवेश के लिए किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं होता है।
मुक्त अधिगम विधि के गुण
  • शिक्षण की मुक्त अधिगम विधि विद्यार्थी को अपने शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण विकल्प प्रदान करता है। 
  • यह विद्यार्थी को सीखने के लिए सरल और लचीली व्यवस्था उपलब्ध कराता है। 
मुक्त अधिगम विधि के दोष
  • शिक्षण की मुक्त अधिगम विधि विषयों के बदलते स्वरूप के लिए उपयुक्त नहीं है। 
  • इसमे समय, विशेषज्ञता और संसाधनों की आश्यकता होती है। 
  • यह विधि छात्रों में भावात्मक शिक्षण उद्देश्यों और मनःप्रेरक स्थिति को उत्पन्न कर पाने में सक्षम नहीं है। 

परस्पर संवादी वीडियो विधि Interactive video method



परस्पर संवादी वीडियो विधि 
परस्पर संवादी वीडियो विधि शिक्षण विधि में शिक्षार्थी को किसी विषय से सम्बन्धित जानकारी, क्रमरहित ढंग से आसानी से प्राप्त हो जाती है। यह विधि छात्र को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर कई विषयों, मुद्दों या समस्याओं की जानकारी और उनके संशोधात्मक उपाय सरलता से आपूर्ति करने में सक्षम है। इस विधि में शिक्षार्थी अपने परिणामों की प्रतिपुष्टी अर्थात फीडबैक तत्काल प्राप्त कर सकते है
परस्पर संवादी वीडियो विधि के गुण 
  • शिक्षण की यह विधि शिक्षार्थियों में निर्णय लेने की क्षमता में अभिवृद्धि करता है। 
  • इण्टरएक्टिव वीडियो, शिक्षण विधि का एक सरल और पारदर्शी माध्यम है। 
  • इससे प्राप्त शिक्षण सामग्री को टेक्स्ट, ग्राफिक्स, ग्राफिक्स फिल्म और ऑडियो के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। 
परस्पर संवादी वीडियो विधि के दोष 
  • शिक्षण की इस विधि में समय के साथ-साथ संसाधनों की भी अधिक आवश्यकता होती है। 
  • इण्टरएक्टिव वीडियो की नियन्त्रण प्रणाली शिक्षार्थियों की पहुँच में नहीं होती, अतः यह विद्यार्थी के विकल्प व पसन्द के अनुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं होती। 
  • इस विधि में शिक्षार्थी अपनी प्राथमिकता और जिज्ञासाओं पर नियन्त्रण रखता है, जिससे यह शिक्षार्थियों के सभी प्रकार के सन्देहों को भी शान्त नहीं कर पाती। 

कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि Computer Based Teaching Method

कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि 
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण प्रणाली का उद्देश्य कम्प्यूटर के माध्यम से शिक्षा पद्धति को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना है। इस विधि के द्वारा सूचना प्रवाह को गत्यात्मक रूप दिया जाता है और शिक्षण प्रणाली को अधिक वैज्ञानितपूर्वक करने पर बल दिया जाता है। कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि से ऑडियो-वीडियो टेप की प्रस्तुति परम्परागत पुस्तक की तुलना में ज्यादा प्रभावोत्पादक और शीघ्र पहुँच वाली होती है। कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि में सही जानकारी प्राप्त करने के अधिक विकल्प होते है और शिक्षार्थी की आवश्यकतानुसार प्रतिपुष्टी अर्थात फीडबैक प्राप्त करने की स्थिति भी बनी रहती है।
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि के गुण
  • इस शिक्षण विधि में अन्य विधियों की तुलना में अधिक लचीलापन और नियन्त्रण की बेहतर सम्भावना होती है। 
  • इस विधि को अनुकरण अभ्यास, मॉडलिंग इत्यादि कार्यों के लिए अधिक प्रभावी ढंग से प्रयोग में लाया जा सकता है। 
  • इसमे सूचना प्रवाह की गतिशीलता और पाठ्य-सामग्री की पर्याप्तता की दशा विद्यमान रहती है। 
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि के दोष
  • शिक्षण की यह प्रणाली अवैयक्तिक और महंगी है, जो सभी की पहुँच की सीमा में नहीं है। 
  • इस विधि से शिक्षण प्रणाली के लिए सुव्यवस्थित संरचना का होना अत्यन्त आवश्यक है, अन्यथा प्रणाली विफल हो जाएगी। 

Tuesday, October 29, 2019

सुपुर्द नियत अधिन्यास कार्य विधि Assignment Method

सुपुर्द नियत अधिन्यास कार्य विधि
इस विधि का उपयोग विशेष प्रयोजन की पूर्ति हेतु किया जाता है। इस विधि के अन्तर्गत विद्यार्थीयों की सुविधा के लिए सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को अनेक खण्डों में विभाजित कर दिया जाता है। इस विधि के माध्यम से छात्रों का सर्वेक्षण करना, संख्यात्मक समस्याओं का समाधान करना, अतिरिक्त जानकारी एकत्रित करना, जैसे अनेक कार्यों का सम्पादन किया जाता है।
सुपुर्द नियत अधिन्यास कार्य विधि के गुण
  • इस शिक्षण विधि में शिक्षार्थियों को स्वतन्त्र रूप से कार्य करने का अवसर प्राप्त होता है। 
  • यह विधि विद्यार्थीयों के समस्या समाधान क्षमता और विश्लेषणात्मक क्षमता को बढ़ाने में सक्षम है। 
  • इस विधि से छात्रों में रचनात्मक क्षमता का विकास होता है। 
  • इस विधि से विद्यार्थीयों में स्वाध्याय के प्रति रुचि का विकास होता है और उत्तरदायित्व की भावना प्रबल होती है। 
  • यह विधि छात्रों में प्रयोगात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है। 
सुपुर्द नियत अधिन्यास कार्य विधि के दोष
  • इस शिक्षण विधि में शिक्षार्थियों के मध्य पाठ्य-सामग्री के अनुकृति अर्थात कॉपी की सम्भावना प्रबल होती है और नकल करने की प्रवृत्ति का विकास होता है। 
  • यह विधि छोटी कक्षाओं के लिए उपयुक्त नहीं है। 
  • इस विधि में शिक्षक पर अतिरिक्त कार्यभार की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। 

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित प्रश्न

भारतीय इतिहास एवं संस्कृति  कपास का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है  - मेहरगढ से   कौनसा पशु समूह मोहनजोदड़ो की पशुपति मुद्रा पर अंकित है -...